सोमवार, 23 फ़रवरी 2026

विधायक संजीव शर्मा ने आरसीसी नाले के निर्माण कार्य में यूटिलिटी शिफ्टिंग के लिए विधुत विभाग व लोक निर्माण अधिकारियों के साथ की बैठक




                              मुकेश गुप्ता

 गाजियाबाद । राष्ट्रीय राजमार्ग 9 की सर्विस रोड के समानांतर कृष्णा नगर बागू मे भारत पेट्रोल पंप से लेकर रोज वेली स्कूल तक मार्ग एवं आरसीसी नाले के निर्माण कार्य में यूटिलिटी शिफ्टिंग के संबंध में एक महत्वपूर्ण बैठक लोक निर्माण विभाग के गेस्ट हाउस में संपन्न हुई।

बैठक में बिजली विभाग की ओर से चीफ इंजीनियर पवन अग्रवाल, अधिशासी अभियंता ऐश्वर्या सिंह, एसडीओ अनिल चौरसिया एवं प्रमोद सिंह उपस्थित रहे। वहीं लोक निर्माण विभाग की ओर से अधिशासी अभियंता रामराजा, सहायक अभियंता डी.के. शर्मा, अवर अभियंता सुशील कुमार शर्मा सहित क्रॉसिंग मंडल अध्यक्ष धर्मेंद्र चौधरी एवं पार्षद धर्मेंद्र नागर भी मौजूद रहे।

 विधायक  ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि यूटिलिटी शिफ्टिंग की प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की देरी न हो और निर्माण कार्य को गुणवत्ता के साथ शीघ्र पूर्ण किया जाए, ताकि क्षेत्रवासियों को सुगम आवागमन एवं बेहतर जल निकासी व्यवस्था का लाभ मिल सके।

                   

           

दिल्ली में क्षत्रिय समाज के कार्यालय पर एक केन्द्रीय कमेटी बैठक कि सम्पन्न

  



नई दिल्ली । रविवार शाम को शास्त्री नगर दिल्ली-52 में क्षत्रिय समाज के कार्यालय पर एक बैठक केन्द्रीय कमेटी द्वारा आयोजित कि गई जिसमें यूजीसी 2026 अध्यादेश को वापस लेने सम्बंधित ज्ञापन भारत के सभी जिलों में adm एवं जिलाधिकारी द्वारा 6 मार्च को राष्ट्रपति महोदया को भिजवाने हेतु आहुत कि गई जिसकी अध्यक्षता  राष्ट्रीय संयोजक श्री रमेश सिंह राघव जी ने कि एवं समस्त जागरूक नागरिकों से अनुरोध किया गया कि ज्ञापन का प्रारुप भेजा जा रहा है, या तो उसी का प्रिंट निकाल कर या आप अपनी-अपनी संस्था के लैटर पैड पर एक समान भाषा में, एक ही दिन शुक्रवार 6 मार्च को अपने अपने जिले व तहसील स्तर पर अपने अन्य साथियों के साथ व सभी जिलों में सभी साथियों से कहकर पूरे देश में ज्ञापन दिलवाना सुनिश्चित करें। बैठक में राष्ट्रीय महासचिव  हिरेंद्र राठौड़, राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष गंगा सिंह काठाडी,राष्ट्रीय युवा अध्यक्ष  सत्यभान सिकरवार एवं समस्त प्रबुद्ध जनों कि उपस्थिति में सर्व सहमति से यह निर्णय लिया गया एवं समस्त स्वर्ण समाज के साथियों द्वारा 6 मार्च को सभी प्रदेशों में इसी रूप से राष्ट्रपति को सभी तहसीलों एवं जनपदो द्वारा ज्ञापन सौंपना निश्चित किया गया

उपस्थित साथी महेश परिहार, रामानुज भदोरिया, रूप सिंह तोमर, सत्यम बिसेन, कमल भदौरिया, भूपेंद्र तोमर, कुंदन भाटी, राजकुमार जादौन, रवि भदोरिया, बिजेंदर राणा आदि 



हिंदू समाज में कोई भी छोटा या बड़ा नहीं हैः श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज

 









                               मुकेश गुप्ता

हमें सभी हिंदुओं को एक माला की तरह पिरोना हैः महामंडलेश्वर नवल किशोर दास महाराज

हिदू धर्म में छूआछूत व भेदभाव के लिए कोई जगह ही नहीं हैः स्वामी चक्रपाणि महाराज

गाजियाबादः सकल हिंदू समाज सिद्धार्थ विहार गाजियाबाद द्वारा रविवार को विराट हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया। सिद्धार्थ विहार चौक, पुलिस चौकी के पास हुए विराट ह्रिदू सम्मेलन के मुख्य अतिथि सिद्धपीठ श्री दूधेश्वर नाथ मठ महादेव मंदिर के पीठाधीश्वर जूना अखाड़ा के अंतरराष्ट्रीय प्रवक्ता एवं दिल्ली संत महामंडल के अध्यक्ष श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज रहे। विशिष्ट अतिथि  दिल्ली संत महामंडल के महामंत्री महामंडलेश्वर नवल किशोर दास महाराज, अखिल भारतीय हिंदू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष व अखिल भारतीय संत महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी चक्रपाणि महाराज तथा प्राचीन देवी मंदिर द्वारका पुरी दिल्ली गेट के महंत व जूना अखाड़ा के सचिव गिरिशानंद गिरि महाराज रहे। श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज ने कहा कि सनातन धर्म ही एकमात्र ऐसा धर्म है, जो पूरे विश्व की ही नहीं समस्त जीव-जंतुओं के ठभी कल्याण की बात कहता है। प्रकृति, वृक्ष, जल, वायु, पृथ्वी, आकाश, सूर्य जिनसे भी हमारा असितत्व है, उन सभी की पूजा करता है। सनातन का अर्थ ही है कि जिसका अंत नो हो और सत्य का कभी अंत नहीं होता है। सनातन धर्म सत्य आधारित धर्म है, इसी कारण युग बदलते रहे और तरह-तरह के हमजे होते रहे, मगर सनातन धर्म यानि हिंदू भक्त धु्रव की तरह अटल रहा और हमेशा अटल रहेगा। आज हिंदू धर्म में जो सबसे बडी विकृति यह आई है कि हम जातिवाद, रंगवाद व क्षेत्रवाद में बंट गए हैं, जबकि सनातन धर्म में जात-पात के लिए कोई जगह ही नहीं है। हम सभी जब एक ही भगवान की संतान हैं तो ना कोई छोटा है और ना ही कोई बडा है। हम सभी एक समान है। अतः हमें इस बात का प्रण लेना है कि हमें एक ऐसे हिंदू राष्ट्र का निर्माण करना है, जिसमें समरसता हो और पूरा हिंदू समाज एक परिवार के रूप रहता हो। इस कार्य के लिए संतों को एकजुट होकर आगे आना होगा क्योंकि संत हिंदुओं को एकजुट कर उन्हें एक परिवार का रूप देने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। महामंडलेश्वर नवल किशोर दास महाराज ने कहा कि एक माला में कई तरह के फूल होते हैं। उनका रंग व आकृति भी अलग-अलग होते हैं, मगर एक धागे में जब उन्हें पिरोया जाता है तो सभी एक समान हो जाते हैं। इसी प्रकार हमें सभी हिंदुओं को भी जातवाद, परिवारवाद, क्षेत्रवाद, रंगवाद से मुक्त कर सनातन रूपी माला में पिरोना है। स्वामी चक्रपाणि महाराज ने कहा कि हिदू धर्म में छूआछूत व भेदभाव के लिए कोई जगह ही नहीं है। हिंदू धर्म जाति की नहीं कर्म की बात करता है। हमें जातिवाद के षडयंत्र को असफल करना है और हिंदुओं को एकजुट करना है। महंत गिरिशानंद महाराज ने कहा कि हिंदुओं का एकजुट होना आज की सबसे बडी आवश्यकता है। सकल हिंदू समाज सिद्धार्थ विहार गाजियाबाद के अध्यक्ष यतेंद्र नागर ने सभी संतों का स्वागत अभिनंदन किया। सचिव रवि गुप्ता व  कोषाध्यक्ष रवि धमीजा ने विशेष सहयोग दिया।

परमार्थ निकेतन में कथाव्यास निकुंज जी महाराज के पावन श्रीमुख से श्रीमद् भागवत ज्ञान गंगा हो रही प्रवाहित

 




                        सत्ता बन्धु संवाददाता

पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती का पावन सान्निध्य, आशीर्वाद व उद्बोधन

लंदन से आये कथा यजमान रीटा बेन, राकेश भाई जोशी  और सम्पूर्ण जोशी परिवार व ईष्ट मित्र श्रीमद भागवत कथा, परमार्थ गंगा आरती, प्रातःकालीन यज्ञ और परमार्थ निकेतन में होने वाली आध्यात्मिक गतिविधियों को कर रहे आत्मसात

संगीतकार वृंद के मधुर संगीत से पूरा वातावरण हुआ संगीतमय

ऋषिकेश, 23 फरवरी। परमार्थ निकेतन में कथाव्यास निकुंज  महाराज के पावन श्रीमुख से श्रीमद्भागवत महापुराण की अमृतमयी कथा ज्ञान गंगा के रूप में प्रवाहित हो रही है, जिसमें लंदन से आये भक्त, श्रद्धालु आत्मिक शांति, भक्ति और जीवन दर्शन का दिव्य अनुभव प्राप्त कर रहे हैं। यह दिव्य कथा संदेेश दे रही है कि सनातन संस्कृति की जड़ें आज भी समाज के हृदय में गहराई से समाई हुई हैं। चाहे हम भारत में रह रहे हों या विदेश में, सनातन तो सभी के हृदय में समाहित है।

इस पावन अवसर पर परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष, स्वामी शुकदेवानन्द ट्रष्ट के मैनेजिंग ट्रष्टी, पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी का सान्निध्य, आशीर्वाद और प्रेरणादायी उद्बोधन ने सभी श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। अपने संदेश में उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा जीवन का दर्शन है, जीवन जीने की कला है। यह ग्रंथ हमें करुणा, सेवा, समर्पण और ईश्वर प्रेम का मार्ग दिखाता है। उन्होंने सभी का आह्वान करते हुये कहा कि कथा के माध्यम से प्राप्त ज्ञान को व्यवहार में उतारें और समाज व राष्ट्र निर्माण में योगदान दें।

परमार्थ निकेतन गंगा तट पर कथा करवाने हेतु विशेष रूप से लंदन से पधारे कथा यजमान रीटा बेन, राकेश भाई जोशी तथा सम्पूर्ण जोशी परिवार अपने इष्ट मित्रों सहित पधारे हैं। वे कथा श्रवण करने के साथ ही परमार्थ निकेतन की विभिन्न आध्यात्मिक गतिविधियों, गंगा आरती, प्रातःकालीन यज्ञ, ध्यान-साधना और सत्संग को भी आत्मसात कर रहे हैं। विदेशी भूमि से आए इन भक्तों का उत्साह यह संदेश देता है कि सनातन धर्म की महिमा विश्वभर में लोगों को आकर्षित कर रही है।

प्रतिदिन सायंकाल आयोजित होने वाली परमार्थ गंगा आरती में भक्तों की भावपूर्ण उपस्थिति से सम्पूर्ण वातावरण दिव्यता से ओत-प्रोत हो उठता है। माँ गंगा के तट पर दीपों की ज्योति, वेद मंत्रों की गूँज और भजनों की मधुर ध्वनि मन को अद्भुत शांति प्रदान करती है। ऐसा प्रतीत होता है मानो स्वयं प्रकृति भी इस आध्यात्मिक उत्सव में सम्मिलित होकर भक्ति की धारा में बह रही हो।

संगीतकार वृंद के मधुर भजनों और वाद्य यंत्रों की स्वर लहरियों ने कथा स्थल को संगीतमय बना रही है। भजन श्रद्धालुओं के हृदय को छूते हुआ उन्हें भक्ति रस में सराबोर कर रहा है। परमार्थ निकेतन का स्वर्गतुल्य दिव्य वातावरण, संगीत, कथा और साधना का यह संगम उपस्थित जनसमूह के लिए अविस्मरणीय अनुभव है।

कथाव्यास  निकुंज महाराज अपनी सरल, मधुर और प्रभावशाली वाणी में भागवत के प्रसंगों के माध्यम से जीवन के गूढ़ सत्य का दर्शन करा रहे हैं। उन्होंने बताया कि जब हम अपने जीवन में भगवान के नाम, सेवा और सत्संग को स्थान देते हैं, तब भीतर की नकारात्मकता स्वतः समाप्त हो जाती है। भागवत कथा हमें संदेश देती है कि सच्चा सुख बाहरी भोगों में नहीं, बल्कि आत्मा की शुद्धता और ईश्वर के साथ संबंध में निहित है।

श्रीमती रीटा बेन व रमेश भाई जोशी  ने कहा कि हमारा परम सौभाग्य है कि परमार्थ निकेतन के दिव्य प्रांगण में हमें नौ दिनों तक कथा श्रवण करने का परम सौभाग्य प्राप्त हो रहा रहे।

भागवत ज्ञान गंगा समाज को सकारात्मक ऊर्जा, नैतिक मूल्यों और आध्यात्मिक जागरण की ओर प्रेरित करने का एक सशक्त माध्यम है। परमार्थ निकेतन में प्रवाहित हो रही श्रीमद्भागवत कथा श्रद्धालुओं के जीवन में नई आशा, विश्वास और आध्यात्मिक प्रकाश का संचार कर रही है। इस तरह के आयोजन सनातन संस्कृति की दिव्यता का जीवंत उदाहरण है, जो मानवता को प्रेम, सेवा और सद्भाव का संदेश देते हैं। ऐसी पावन कथाएँ समाज को जोड़ने, संस्कारों को सुदृढ़ करने और राष्ट्र को आध्यात्मिक रूप से सशक्त बनाने का माध्यम हैं।

आलमबाग बस टर्मिनल पर महान संत गाडगे की धूमधाम से मनाई गई 150वीं जयंती

 


लखनऊ। आलमबाग बस टर्मिनल पर महान संत गाडगे  की 150वीं जयंती श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई। इस अवसर पर उपस्थित कर्मचारियों एवं अधिकारियों ने संत गाडगे महाराज के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उनके सामाजिक संदेशों को याद किया।

कार्यक्रम में कर्मचारी नेता रूपेश कुमार, स्टेशन इंचार्ज लायका खातून, सत्य प्रकाश सोनकर, शैलेश कुमार, धर्मेंद्र बाबू सहित अन्य कर्मचारियों ने पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें याद किया। रूपेश कुमार ने कहा कि ने कहा कि संत गाडगे महाराज ने समाज में स्वच्छता, शिक्षा और सामाजिक समानता का संदेश देकर लोगों को जागरूक किया।

उपस्थित लोगों ने उनके आदर्शों को अपनाने और समाज सेवा के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। कार्यक्रम का समापन श्रद्धांजलि और सामूहिक संकल्प के साथ हुआ।

रविवार, 22 फ़रवरी 2026

निरंकारी मिशन का सेवा और समर्पण से सशक्त जल संरक्षण का प्रेरक संकल्प, भक्ति केवल शब्दों से नही कर्मों में प्रकट हो-निरंकारी सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज

                            मुकेश गुप्ता

दिल्ली, 22 फरवरी, 2026:-जल प्रकृति का अमूल्य उपहार है, जीवन की आधारशिला और मानव सभ्यता की जीवनरेखा। जब यह जल स्वच्छ और संरक्षित रहता है, तो केवल पर्यावरण ही नहीं, समाज का सामूहिक स्वास्थ्य और संतुलन भी सुदृढ़ होता है। इसी विचार को साकार रूप देते हुए प्राकृतिक जल स्रोतों, नदियों, तालाबों, झीलों और समुद्री तटों की निस्वार्थ भाव से स्वच्छता एवं संरक्षण का व्यापक अभियान आज जन-जन के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रहा है। यह पहल केवल सफाई तक सीमित नहीं, बल्कि जागरूकता, जिम्मेदारी और सामूहिक सहभागिता का सशक्त संदेश है।

‘स्वच्छ जल, स्वच्छ मन’ अभियान के चौथे चरण का भव्य एवं प्रेरणास्पद आयोजन सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज एवं निरंकारी राजपिता रमित जी के मार्गदर्शन में भारतवर्ष के 25 राज्यों, केन्द्रशासित प्रदेश के 930 शहरों के 1600 से अधिक स्थानों पर सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ, जिसमें लगभग 12 लाख स्वयंसेवक सम्मिलित हुए। यह केवल एक पर्यावरणीय प्रयास नहीं, बल्कि अध्यात्म, सेवा और सामाजिक उत्तरदायित्व का अद्भुत समन्वय था, जो जन-जन के अंतर्मन को स्पर्श करते हुए जागरूकता एवं कर्तव्यबोध की भावना को और अधिक सुदृढ़ बनाता है। 

संत निरंकारी मिशन की सामाजिक शाखा संत निरंकारी चैरिटेबल फाउंडेशन के तत्वावधान में, बाबा हरदेव सिंह जी की अनेक शिक्षाओं से प्रेरणा लेते हुए इस ‘प्रोजेक्ट अमृत’ का आयोजन किया गया। यह परियोजना मानवता को प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनाते हुए जल संरक्षण, स्वच्छता और पर्यावरण संतुलन के प्रति सामूहिक संकल्प का संदेश देती है।

दिल्ली के बुराड़ी चौक ग्राउंड न0.8 में आयोजित विशेष सत्संग कार्यक्रम में सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज ने अपने अमृतमय प्रवचनों में फरमाया कि बाबा जी की शिक्षाएँ केवल स्मरण करने के लिए नहीं, बल्कि जीवन में उतारने के लिए हैं। सतगुरु माता जी ने कहा कि सच्ची श्रद्धांजलि शब्दों से नहीं, बल्कि कर्मों से दी जाती है। यदि हम स्वयं को उनके अनुयायी कहते हैं, तो हमें आत्ममंथन करना होगा कि क्या हम वास्तव में प्रेम, सेवा, करुणा और समदृष्टि जैसे मानवीय गुणों को अपने जीवन में धारण कर रहे हैं। बाबा हरदेव सिंह जी महाराज का सम्पूर्ण जीवन मानव कल्याण को समर्पित रहा। उन्होंने सिखाया कि सेवा, सुमिरन और सत्संग जीवन का आधार हैं। भक्ति केवल वाणी तक सीमित न रहे, बल्कि व्यवहार में झलके - यही उनका स्पष्ट संदेश था।

इसी सेवा भावना को आगे बढ़ाते हुए मिशन द्वारा “संत निरंकारी हेल्थ सिटी” जैसी मानवीय सेवा परियोजनाओं को विकसित किया जा रहा है। यह पहल केवल स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार नहीं, बल्कि करुणा और समर्पण का जीवंत उदाहरण है। जिस प्रकार ब्रह्मज्ञान आत्मा को शांति प्रदान करता है, उसी प्रकार यह स्वास्थ्य सेवा समाज के प्रत्येक वर्ग को शारीरिक राहत और सशक्त जीवन प्रदान करने का माध्यम बनेगी।

सत्संग में यह आह्वान किया गया कि प्रत्येक श्रद्धालु तन-मन-धन को निराकार की देन मानते हुए निष्कपट भाव से सेवा में जुड़े। जब सेवा स्वार्थरहित होती है, तभी वह समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाती है। अंत में यही कामना की गई कि बाबा जी की शिक्षाएँ प्रत्येक हृदय में जीवित रहें और हेल्थ सिटी जैसे प्रकल्प मानवता की भलाई के नए आयाम स्थापित करें।

संत निरंकारी चैरिटेबल फाउंडेशन के सचिव ने विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि इस अभियान का शुभारम्भ सेवादल के प्रार्थना गीत से हुआ, जिससे संपूर्ण वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत हो उठा। इस अवसर पर देशभर में प्रसारित दिशा-निर्देशों का पूर्णतः पालन सुनिश्चित करते हुए सुरक्षा, अनुशासन एवं स्वच्छता को सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान की गई, जो आयोजन की सुव्यवस्थित एवं संस्कारित कार्यशैली को दर्शाता है। इसी अवसर पर खुले प्रांगण में सत्संग कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में सहभागिता की।

उल्लेखनीय है कि संत निरंकारी मिशन समय-समय पर समाजोपयोगी एवं पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी विविध परियोजनाओं में सक्रिय योगदान देता रहा है। ‘वननेस वन’ अभियान के माध्यम से वृक्षारोपण और ‘प्रोजेक्ट अमृत’ के माध्यम से जल संरक्षण की दिशा में किए जा रहे ये प्रयास मानवता और प्रकृति के मध्य सामंजस्य स्थापित करने की एक सशक्त एवं प्रेरक पहल हैं। 

निःसंदेह, ‘स्वच्छ जल, स्वच्छ मन’ का यह संदेश केवल एक अभियान नहीं, बल्कि एक जीवन-दर्शन है, जो जल की धाराओं में निर्मलता स्थापित करने के साथ ही मन की गहराइयों में चेतना को आलोकित करता है। यही ऊर्जा आने वाली पीढ़ियों के लिए एक संतुलित, सुरक्षित और शाश्वत भविष्य की आधारशिला बनाती है।

परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने योग धर्म से युग धर्म, अभ्युदय 2026 कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में सहभाग कर कार्यक्रम की अध्यक्षता की

 



                             सत्ता बन्धु संवाददाता

योग धर्म से युग धर्म, अभ्युदय 2026, पतंजलि विश्वविद्यालय, हरिद्वार

पतंजलि विश्वविद्यालय के कुलाधिपति, योगऋषि स्वामी रामदेव जी महाराज तथा कुलपति आचार्य बालकृष्ण जी के कुशल नेतृत्व में आयोजित ‘योग धर्म से युग धर्म अभ्युदय 2026’ कार्यक्रम

इस पावन अवसर पर महामंडलेश्वर स्वामी हरिचेतनानन्द जी महाराज, साध्वी साध्वी भगवती सरस्वती जी, कुलपति केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय  श्रीनिवास जी, संगीत नाटक अकादमी, नई दिल्ली की डॉ. संध्या जी, बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के संस्कृत के आचार्य  बृजभूषण ओझा जी, डा शिवानी जी, कुलपति  दिनेश शास्त्री , प्रशांत राय जी तथा अन्य विशिष्ट अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति*

आचार्य बालकृष्ण जी ने सभी अतिथियों को पुष्पगुच्छ, अंगवस्त्र, व स्मृतिचिन्ह  भेंट कर किया स्वागत अभिनन्दन*

नालंदा व तक्षशिला विश्वविद्यालय का साक्षात स्वरूप पतंजलि विश्वविद्यालय-स्वामी चिदानन्द सरस्वती

ऋषिकेश, 21 फरवरी। पतंजलि विश्वविद्यालय, हरिद्वार में आयोजित ‘योग धर्म से युग धर्म, अभ्युदय 2026’ कार्यक्रम योग, आयुर्वेद, अध्यात्म, संस्कृति और राष्ट्र चेतना का अद्भुत संगम है। यह भारत की प्राचीन ऋषि परंपरा, योग विज्ञान और सनातन मूल्यों के पुनर्जागरण का सशक्त संकल्प है। इस कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि योग केवल शरीर साधना नहीं, बल्कि व्यक्ति, समाज और राष्ट्र निर्माण का आधार है।

परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सहभाग कर कार्यक्रम की अध्यक्षता की। अपने प्रेरक उद्बोधन में उन्होंने कहा कि “योग धर्म ही युग धर्म है। आज मानवता जिन चुनौतियों से जूझ रही है, तनाव, हिंसा, पर्यावरण संकट और नैतिक पतन, उनका समाधान केवल योग, ध्यान और संस्कारों से ही संभव है। योग हमें स्वयं से जोड़ता है, और स्वयं से जुड़कर ही हम समाज व प्रकृति से जुड़ पाते हैं।

कार्यक्रम का आयोजन पतंजलि विश्वविद्यालय के कुलाधिपति, योगऋषि स्वामी रामदेव जी महाराज तथा कुलपति आचार्य बालकृष्ण जी के कुशल नेतृत्व में हुआ। उनके मार्गदर्शन में विश्वविद्यालय योग, आयुर्वेद, संस्कृत और भारतीय ज्ञान परंपरा के माध्यम से राष्ट्र के नव निर्माण की दिशा में निरंतर अग्रसर है। 

योगऋषि स्वामी रामदेव जी ने योग को जन-जन तक पहुँचाने का जो महाअभियान प्रारंभ किया, वह आज वैश्विक स्तर पर भारत की पहचान बन चुका है। वहीं आचार्य बालकृष्ण जी का आयुर्वेद और स्वदेशी के प्रति समर्पण आत्मनिर्भर भारत के स्वप्न को साकार कर रहा है।

इस पावन अवसर पर महामंडलेश्वर स्वामी हरिचेतनानन्द जी महाराज, साध्वी भगवती सरस्वती जी, केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति श्री श्रीनिवासन जी, संगीत नाटक अकादमी, नई दिल्ली की डॉ. संध्या जी, बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के संस्कृत आचार्य श्री बृजभूषण जी सहित अनेक संत, विद्वान एवं विशिष्ट अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। सभी वक्ताओं ने एक स्वर में योग, संस्कृति और शिक्षा के समन्वय को वर्तमान समय की आवश्यकता बताया।

‘योग धर्म से युग धर्म’ की भावना इस तथ्य को प्रतिपादित करती है कि जब योग जीवन का धर्म बनता है, तब वह पूरे युग की दिशा बदल देता है। योग से शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक शांति, आध्यात्मिक संतुलन और सामाजिक सद्भाव का निर्माण होता है। यह हमें संयम, सेवा और समर्पण का संदेश देता है। आज की युवा पीढ़ी के लिए योग केवल व्यायाम नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है, एक ऐसा मार्ग जो उन्हें लक्ष्य, अनुशासन और आत्मविश्वास प्रदान करता है।

कार्यक्रम में भक्ति और ज्ञान का सुंदर समन्वय देखने को मिला। मंत्रोच्चारण, योग प्रदर्शन, सांस्कृतिक कार्यक्रम और प्रेरक संबोधनों ने उपस्थित विद्यार्थियों और सभी के अंतर्मन को स्पर्श किया। वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा और राष्ट्र गौरव की भावना स्पष्ट अनुभव की जा सकती थी। यह आयोजन सनातन संस्कृति की जीवंतता और भारत की आध्यात्मिक शक्ति का प्रमाण बना।

इस अवसर पर योगऋषि स्वामी रामदेव जी ने कहा कि यदि प्रत्येक व्यक्ति योग को अपने जीवन में अपनाए, तो परिवार स्वस्थ होगा, समाज संस्कारित होगा और राष्ट्र सशक्त बनेगा। यही ‘अभ्युदय’ है, व्यक्ति से राष्ट्र तक उन्नति की यात्रा।

महामण्डलेश्वर स्वामी हरिचेतनानन्द जी ने कहा कि ‘योग धर्म से युग धर्म अभ्युदय 2026’ वास्तव में एक युगांतरकारी पहल है, जो आने वाली पीढ़ियों को स्वस्थ, जागरूक और संस्कारित भारत की ओर अग्रसर करने का मार्ग प्रशस्त कर रही है।

राष्ट्रीय लोकदल का दिनों दिन बढ़ता जा रहा है परिवार:-मनोज धामा, दिलीप कुमार वार्ड 23 लोनी का अध्यक्ष बनाया





                             मुकेश गुप्ता

गाजियाबाद  22 फरवरी 2026 । लोनी नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष मनोज धामा  दूारा लोनी विधानसभा अध्यक्ष इंद्रपाल कसाना की संस्तुति पर वार्ड 23 निवासी दिलीप कुमार को वार्ड अध्यक्ष नियुक्त किया है । जिसका मनोनयन पत्र आज सौंपा एवं उनको पार्टी नीतियों से अवगत कराते हुए उनके  उज्जवल भविष्य की कामना की तथा लोनी में राष्ट्रीय लोक दल परिवार को मजबूत करने का संकल्प दिलाया ।

इस अवसर पर कॉलोनी वासियों ने पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष मनोज धामा व राष्ट्रीय लोकदल के विधानसभा अध्यक्ष इंद्रपाल कसाना का ढोल -नगाडों केे साथ फूल-माला पहनाकर जोरदार स्वागत किया ।

इस अवसर पर मनोज धामा ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि राष्ट्रीय लोक परिवार के मुखिया माननीय श्री जयंत चौधरी जी के निर्देशानुसार प्रत्येक जिले में आम- जनमानस को पार्टी के विचारधारा से जोड़ते हुए आगे बढ़ाने का कार्य किया जा रहा है उसी कड़ी में आज वार्ड 23 संगम विहार में वार्ड अध्यक्ष दिलीप चौहान की नियुक्ति हुई है ।

इस अवसर पर राष्ट्रीय लोकदल के विधानसभा अध्यक्ष इंद्रपाल कसाना ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि हम सभी लोग राष्ट्रीय लोक दल के सिपाही हैं तथा प्रत्येक व्यक्ति जो भी राष्ट्रीय लोकदल परिवार में जुड़ रहा है वह भी अपने आप को पार्टी के अनुसाशित कार्यकर्ता के रूप में पार्टी को ज्वाइन करें तथा अपने साथ समाज के सभी वर्गों को साथ जोड़कर चले तथा दबे कुचले पिछड़े एवं शोषित लोगों की आवाज को मुखर करने का काम करें । 

इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने राष्ट्रीय लोकदल का जयघोष करते हुये नारे लगाये । 

इस अवसर पर लोनी विधानसभा अध्यक्ष इंद्रपाल कसाना,पप्पू चौधरी ,रूपेश चौहान ,कुलदीप सोनी ,विनोद चौहान,रामनारायण ,अनुज ,वीरेंद्र सिंह ,राजू ,होरीलाल ,महक सिंह पांचाल,ईश्वर पाल सिंह ,भूदेव पंडित जी,सुनील कुमार ,छोटेलाल ,सुभाष पांचाल ,अंकुर,सूरज सिंह ,टीटू ,पवन ,कमल, नवीन गोयल मंडल अध्यक्ष,कुलदीप पंडित विधानसभा उपाध्यक्ष,अमित वर्मा सहित सैकड़ो की संख्या में राष्ट्रीय लोकदल के  कार्यकर्ता व आम जन उपस्थित रहे ।

गणेश अस्पताल में लगा निशुल्क हड्डी एवं फिजियोथैरेपी शिविर, सैकड़ों मरीजों ने उठाया लाभ

 



                            मुकेश गुप्ता

गाजियाबाद । स्वास्थ्य सेवाओं को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से गणेश अस्पताल द्वारा समय-समय पर निःशुल्क जांच शिविरों का आयोजन किया जाता रहा है। इसी क्रम में रविवार को अस्पताल परिसर में निशुल्क हड्डी एवं फिजियोथैरेपी जांच शिविर का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें सैकड़ों मरीजों ने पहुंचकर स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाया।

शिविर का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। इस अवसर पर अस्पताल की एमडी डॉ. अर्चना शर्मा, डायरेक्टर डॉ. प्रतीक शर्मा, हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. आर.के. श्रीवास्तव, फिजियोथैरेपिस्ट डॉ. अरुणिमा, डॉ. आकांक्षा बंसल, डॉ. बिराज सिंह, डॉ. सुधीर एवं गीता जी सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

शिविर के दौरान बीएमडी (बोन मिनरल डेंसिटी) जांच एवं फिजियोथैरेपी परामर्श निशुल्क प्रदान किया गया। विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा मरीजों की हड्डियों से संबंधित समस्याओं की जांच कर उचित परामर्श दिया गया। बड़ी संख्या में बुजुर्ग, महिलाएं और युवा मरीज शिविर में पहुंचे। इस दौरान विभिन्न जांचों और उपचार सेवाओं पर विशेष छूट भी प्रदान की गई।

अस्पताल की एमडी डॉ. अर्चना शर्मा ने बताया कि गणेश अस्पताल का उद्देश्य जरूरतमंद और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि अस्पताल आगे भी इसी तरह के निःशुल्क शिविरों का आयोजन करता रहेगा, ताकि हर व्यक्ति को गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधा मिल सके।

शिविर के सफल आयोजन पर मरीजों ने अस्पताल प्रबंधन और चिकित्सकों का आभार व्यक्त किया। आयोजन को लेकर क्षेत्रवासियों में उत्साह देखने को मिला और लोगों ने भविष्य में भी ऐसे शिविर आयोजित करने की मांग की।

मेगा/वृहद विधिक/साक्षरता एवं सेवा शिविर आयोजित, जनपद न्यायाधीश ने फीता काटकर एवं दीप प्रचलित कर किया शुभारंभ





                              मुकेश गुप्ता

शासन की योजनाओं को जन-जन तक पहुंच कर उन्हें लाभ दिलाना कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य: विनोद सिंह रावत जनपद न्यायाधीश

वित्तीय एवं सामाजिक रूप से कमजोर लोग अवश्य लें योजनाओं का लाभ: विनोद सिंह रावत

गाजियाबाद। मेगा/वृहद विधिक/साक्षरता एवं सेवा शिविर राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली के दिशा-निर्देश अनुसार तथा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण लखनऊ के दिशा-निर्देशन में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण गाजियाबाद के तत्वावधान में  रविवार को एक मेगा/वृहद विधिक/साक्षरता एवं सेवा शिविर का आयोजन जिला न्यायालय परिसर, गाजियाबाद में  विनोद सिंह रावत, जनपद न्यायाधीश/अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण गाजियाबाद की अध्यक्षता में किया गया। 

 जनपद न्यायाधीश विनोद सिंह रावत द्वारा मां सरस्वती की मूर्ति के सम्मुख दीप प्रज्वलित कर एवं स्टॉल परिसर का फीता काटकर विधिवत शुभारंभ किया गया, इस दौरान

 संजयवीर सिंह, पीठासीन अधिकारी, मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण, श्री अनिल कुमार-IV, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीष-01, श्री नीरज गौतम, विशेष न्यायाधीश, पोक्सो एक्ट, मेगा/वृहद विधिक कार्यक्रम-अध्यक्ष, गौरव शर्मा, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश,  जुनैद मुजफ्फर, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, श्रीमती रीता सिंह, पीठासीन अधिकारी, स्थायी लोक अदालत, ऐश्वर्यप्रताप सिंह, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट एवं सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के साथ अन्य सम्मानित न्यायिक अधिकारीगणों की गरिमामय उपस्थित रही। तदोपरांत माननीय न्यायाधीश महोदय द्वारा स्टालों का निरीक्षण किया गया एवं विभागों द्वारा क्या-क्या जानकारियां जनता को उपलब्ध कराई जा रही है उसके बारे में अवगत हुए। इस दौरान माननीय न्यायाधीश महोदय द्वारा योजनाओं के पात्र लाभार्थियों को ट्राई साइकिल, चैक  आदि वितरित किए गए।  माननीय जिला न्यायाधीश महोदय के मंच आगमन पर उनका पौधा भेंट कर स्वागत किया गया। इसके उपरांत महोदय द्वारा मंच के माध्यम से अपने विचार प्रकट किए गए।


जनपद न्यायाधीश ने अपने संबोधन में कहा कि इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रति आमजन को जागरूक करना तथा पात्र व्यक्तियों तक उनका लाभ सुनिश्चित करना है। सरकार का सतत प्रयास रहता है कि समाज के वित्तीय एवं सामाजिक रूप से कमजोर वर्गों को सशक्त बनाया जाए और उन्हें आवश्यक सहायता प्रदान की जाए। मैं आप सभी से आग्रह करता हूँ कि आज इस आयोजन के माध्यम से जो भी महत्वपूर्ण जानकारी आपको प्राप्त हुई है, उसका स्वयं लाभ उठाएँ तथा उसे अपने आसपास के लोगों तक भी अवश्य पहुँचाएँ। जब जानकारी व्यापक रूप से प्रसारित होगी, तभी योजनाओं का वास्तविक उद्देश्य पूरा होगा और अधिक से अधिक पात्र व्यक्तियों को उनका लाभ मिल सकेगा। अंत में, इस कार्यक्रम में पधारने के लिए आप सभी का हार्दिक धन्यवाद। साथ ही, इस सफल आयोजन के लिए आयोजकों को मेरी ओर से हार्दिक शुभकामनाए।

इस मौके पर मेगा/वृहद विधिक/साक्षरता एवं सेवा शिविर में कृषि विभाग, जिला दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग, जिला समाज कल्याण विभाग, महिला कल्याण विभाग, श्रम विभाग, जिला पंचायतराज विभाग, बेसिक शिक्षा विभाग, श्रम विभाग, उपायुक्त स्वतः रोजगार विभाग, जिला नगरीय विकास अभिकरण(डूडा) विभाग, जिला उद्योग केन्द्र विभाग, पुलिस विभाग व जिला कारागार के वरिष्ठ अधिकारीगण, बैंक सहायता योजनाएं(एलडीएम) विभाग, विद्युत विभाग, कौशल विकास विभाग, पशुपालन विभाग, नेडा विभाग, पोस्टल व अन्य विभागों के द्वारा पूर्णरूप से सक्रियता निभाकर अपने अपने स्टाॅल लगाये गये, जिसमें उन विभागों के लाभार्थियों को लाभ प्रदान कर प्रमाणपत्रों का वितरण किया गया। 

हेल्थ कैंप और रक्तदान सेवक का आयोजन, कॉलेजों द्वारा किया गया प्रतिभाग

उक्त कार्यक्रम में चिकित्सा विभाग द्वारा रक्तदान एवं मैडिकल कैम्प का आयोजन किया गया। ग्लोबल हैप्पीनेस फाउंडेशन के अध्यक्ष  सुनीलदत्त व डायरेक्टर राधिका राजपूत द्वारा भी आमजन हेतु मैडिकल कैम्प का आयोजन किया, जिसमें दवाओं का वितरण एवं अन्य चिकित्सीय जांचे की गई। कुछ न्यायाधीशों द्वारा रक्तदान शिविर में रक्त का दान भी किया गया। उपरोक्त शिविर के आयोजन में डीएलएसए के पैनल अधिवक्ताओं, लीगल एड डिफेन्स कांउसिल एवं पैरा लीगल वाॅलेण्टियर्स द्वारा भी महत्वपूर्ण भागीदारी निभाई गई। लाभार्थियों को वांछित लाभ प्रदान करने में एचआरआईटी लाॅ काॅलेज, आईएमएस लाॅ काॅलेज, नोएडा, राॅयल काॅलेज द्वारा भागीदारी निभाई गई। उपरोक्त सभी लाभार्थियों को वांछित लाभ प्रदान कर मेगा/वृहद विधिक/साक्षरता एवं सेवा शिविर का सफल समापन किया गया।



पत्रकार एसोसिएशन गाजियाबाद का होली मिलन समारोह धूमधाम से संपन्न,सौहादपूर्ण माहौल में सभी ने रंग लगाकर एक-दूसरे को दी होली की शुभकामनाएं

 





मुकेश गुप्ता

गाजियाबाद । हर वर्ष की भांति इस बार भी पत्रकार एसोसिएशन गाजियाबाद का होली मिलन कार्यक्रम रविवार को एसएसडी जैन पब्लिक स्कूल कविनगर में धूमधाम से मनाया गया। सर्वप्रथम कार्यक्रम में आए पत्रकारों का एसोसिएशन के  पदाधिकारियों अध्यक्ष अजय जैन, उपाध्यक्ष संजय श्रीवास्तव योगेश कौशिक, संजीव वर्मा, तोषिक कर्दम, रिंकू नारायण आदि ने तिलक, पटका और होली की टोपी पहनाकर सभी का अभिनंदन किया और होली की शुभकामनाएं दी। तदोपरांत एक खुशनुमा माहौल में कुछ वरिष्ठ पत्रकारों ने होली के महत्व पर प्रकाश डाला। 

कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए पत्रकार एसोसिएशन गाजियाबाद के अध्यक्ष अजय जैन ने सभी को होली की शुभकामनाए दी और कहा की यह कार्यक्रम पिछले 15 सालों से निरंतर चला आ रहा है और हर बार यह कार्यक्रम भव्य रूप लेता जा रहा है। उन्होंने कहा कि होली आपसी प्रेम और बिगड़े संबधो में मिठास घोलने का पर्व है। वहीं देश की जानी मानी कवयित्री दीपाली जैन जिया ने भी कार्यक्रम में अपनी शानदार प्रस्तुति से चार चांद लगा दिए। उन्होंने हंसी ठिठोली करते हुए सभी पत्रकार बंधुओ को खूब गुदगुदाया। इसके अलावा पत्रकार एसोसिएशन के महामंत्री संजीव वर्मा ने भी होली पर मधुर गीत प्रस्तुत कर तालियां बटोरी। इनके बाद वरिष्ठ पत्रकार राकेश पराशर, संजय श्रीवास्तव, डॉक्टर मधु शर्मा, अली मेहंदी, डा राजवीर सिंह, सुदामा पल, मीनाक्षी शर्मा, रेखा अग्रवाल ने भी मौजूद पत्रकारों को होली की शुभकामनाएं दी और होली के गीत, कविता आदि गुनगुनाए। सभी ने आयोजित कार्यक्रम की भूरि भूरि प्रशंसा की और लजीज व स्वादिष्ट व्यंजनों का आनंद लिया। 



इस मौके पर पत्रकार एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय जैन, महामंत्री संजीव वर्मा, कोषाध्यक्ष योगेश कौशिक, तोषिक कर्दम, कुलदीप त्यागी, मीडिया प्रभारी रिंकू नारायण, संजीव श्रीवास्तव, राकेश पाराशर, रेखा अग्रवाल, अशोक कौशिक, अशोक शर्मा, रश्मि ओझा, तोषिक कर्दम, कुलदीप त्यागी, किशन स्वरूप, मनीष गुप्ता, सी पी सिंह, नंदकिशोर उपाध्याय, सुदामा पल, मीनाक्षी शर्मा, सविता शर्मा, सोबरन सिंह, मुकेश गुप्ता, डॉ राजवीर सिंह, श्रीराम, रवि तुषार, सैयद अली मेहंदी, रविंद्र सिंह, तनिषा सिंह, आकाश दीप, कुलदीप आर्य, रेखा अग्रवाल, राकेश राजपूत, मोहित भारद्वाज, अमन वत्स, श्रवण कुमार, दीपक सिंह, जितेंद्र कौशिक, जितेंद्र कुमार,अशोक शर्मा,अमित तिवारी, आशुतोष यादव, अमन राय, नरेश कुमार, डा अशोक कुमार, नरेश राजपूत, शिवम गिरी, सूर्य कुमार, मुकेश कर्दम, एनी गर्ग, हिमांशु आर्य, सुधीर रस्तोगी, प्रीति मिश्रा, शाहबाज खान, शिव कुमार पवार, अफजल खान, वंदना आदि सैकड़ों की संख्या में पत्रकार बंधु मौजूद रहे।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जीडीए की “नंदग्राम भूखण्डीय योजना” के ब्रॉशर का किया विमोचन



                               मुकेश गुप्ता

 गाजियाबाद। मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश शासन द्वारा गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (GDA) की लगभग 14 वर्ष बाद विकसित की गई नई भूखण्डीय योजना  “नंदग्राम भूखण्डीय योजना”  के ब्रॉशर का विधिवत विमोचन किया गया। यह योजना जनपद गाजियाबाद के ग्राम नूरनगर, नंदग्राम (खसरा संख्या 96 एवं 97) में विकसित की जा रही है।

उपाध्यक्ष नंदकिशोर कलाल ने बताया कि लगभग डेढ़ दशक के अंतराल के पश्चात प्राधिकरण द्वारा प्रस्तुत की गई यह भूखण्डीय योजना नागरिकों को नियोजित एवं पारदर्शी प्रणाली के अंतर्गत आवासीय भूखण्ड प्राप्त करने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करती है।

योजना की मुख्य विशेषताएँ

भूखण्डों का आकार 60 वर्ग मीटर से 221 वर्ग मीटर तक  

दर: ₹79,000 प्रति वर्ग मीटर  

RERA पंजीकरण संख्या: UPRERAPRJ932839/02/2026  

e-Lottery के माध्यम से होगा आवंटन

योजना के अंतर्गत भूखण्डों का आवंटन गाजियाबाद विकास प्राधिकरण द्वारा पूर्णतः पारदर्शी e-Lottery प्रणाली के माध्यम से किया जाएगा। आवंटन पत्र प्राधिकरण की आधिकारिक वेबसाइट से डिजिटल रूप में उपलब्ध कराया जाएगा  ।

आवेदन एवं भुगतान व्यवस्था

आवेदन केवल ऑनलाइन माध्यम से स्वीकार किए जाएंगे  ।

पंजीकरण धनराशि भूखण्ड मूल्य का 10% (आरक्षित वर्ग हेतु 5%) होगी  ।

शेष धनराशि 8 त्रैमासिक किस्तों में 10% वार्षिक ब्याज सहित देय होगी  ।

पूर्ण भुगतान एवं रजिस्ट्री के पश्चात 36 माह के भीतर कब्जा प्रदान किया जाएगा  ।

 मुख्यमंत्री  ने कहा कि यह योजना गाजियाबाद में सुनियोजित शहरी विकास को नई गति प्रदान करेगी तथा डिजिटल एवं पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से नागरिकों का विश्वास सुदृढ़ करेगी।

इच्छुक आवेदक गाजियाबाद विकास प्राधिकरण की आधिकारिक वेबसाइट www.gdaghaziabad.in

पर जाकर निर्धारित समयावधि में ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

शुक्रवार, 20 फ़रवरी 2026

जीडीए के जोन 7 मे गुलमोहर वाटिका में बिल्डरों ने नकशे के विपरीत डाली चौथे तल पर छत, की ध्वस्तीकरण की कार्यवाही

 


                           


मुकेश गुप्ता

गाजियाबाद 20.फरवरी 2026 । जीडीए उपाध्यक्ष नंद किशोर कलाल द्वारा दिये गये निर्देशों के क्रम में प्रभारी प्रवर्तन जोन-7 के नेतृत्व में प्रवर्तन जोन-7 क्षेत्रान्तर्गत गुलमोहर वाटिका कालोनी के भूखण्डों पर स्वीकृत मानचित्र के विरूद्ध किये गयेअतिरिक्त चौथे तल तथा सैट बैकों को अतिक्रमित कर किये गये निर्माणकर्ता अश्विनी अग्रवाल, 04 गुलमोहर वाटिका, वाद सं0- GDA/ANI/2025/0004275, सुश्री ममता चावला, 07 गुलमोहर वाटिका वाद सं0- GDA/ANI/2024/0003617,  पवन कुमार पुत्र  महावीर प्रसाद, 17 गुलमोहर वाटिका, वाद सं0- GDA/ANI/2024/0003618,  सत्यवीर सिंह, 18 गुलमोहर वाटिका, वाद सं0- GDA/ANI/2024/0003619  शैन्की मावी, 9 व 10, गुलमोहर वाटिका, वाद सं0-GDA/ANI/2024/0003225, आनन्द पाल चैहान पुत्र मेघ सिंह चैहान, भूखण्ड सं0-20 गुलमोहर वाटिका, वाद सं0- GDA/ANI/2024/0003226, श्रीमती डिम्पल सिंघल पत्नी मूलचन्द सिंघल, मूलचन्द सिंघल पुत्र  किशन कुमार सिंघल, 28 गुलमोहर वाटिका, वाद सं0- GDA/ANI/2024/0003091,  देवेन्द्र गुप्ता एवं श्रीमती सपना, 29 गुलमोहर वाटिका, वाद सं0- GDA/ANI/2024/0003092,  रोहित शर्मा, सी-1 गुलमोहर वाटिका, वाद सं0- GDA/ANI/2024/0003615, श्रीमती अनुराधा, 21 गुलमोहर वाटिका, वाद सं0- GDA/ANI/2024/0003200 श्रीमती पूनम मावी पत्नी  प्रकाशवीर मावी, श्री सुदेश प्रताप सिंह, 23 व 24 गुलमोहर वाटिका, वाद सं0- GDA/ANI/2024/0003227  देवेद्र कुमार, 08 गुलमोहर वाटिका, वाद सं0- GDA/ANI/2024/0003198  महेश्वर भाटी, 11 गुलमोहर वाटिका, वाद सं0- GDA/ANI/2024/0003089,  सतेन्द्र, 05, गुलमोहर वाटिका, वाद सं0- GDA/ANI/2024/0003088 पर ध्वस्तीकरण की कार्यवाही की गयी। गुलमोहर वाटिका स्थित 05 निर्माणों के निर्माणकर्ताओं द्वारा शमन कराने हेतु प्रार्थना पत्र दिये गये, जिनके निर्माण शमन सीमा के अन्तर्ग हैं। उक्त ध्वस्तीकरण की कार्यवाही के समय प्रवर्तन जोन-7 के सहायक अभियन्ता पियूष सिंह, अवर अभियन्ता प्रशान्त मिश्रा व अवर अभियन्ता  अर्जुन यादव, स्थानीय पुलिस बल, प्राधिकरण पुलिस बल तथा प्रवर्तन जोन का समस्त स्टाफ उपस्थित रहा।

उल्लेखनीय हैं कि सत्ता बन्धु समाचार पत्र ने इस मामले की खबर कुछ माह पूर्व छापी थी जिसपर आज कार्यवाही हुई हैं

गणेश अस्पताल में सोशल अवेयरनेस कैंप का हुआ आयोजन,नि:शुल्क स्वास्थ्य परामर्श के साथ दी सीपीआर ट्रेनिंग

 



मुकेश गुप्ता

गाजियाबाद। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) गाजियाबाद के सहयोग से गणेश अस्पताल में एक विशेष सोशल अवेयरनेस कैंप का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य नागरिकों में स्वास्थ्य और सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना था।

ग्कैंप में उपस्थित मरीजों को टीएसएच (थायरॉयड), बीएमडी (बोन मिनरल डेंसिटी), पीएफटी (पल्मोनरी फंक्शन टेस्ट) जैसी जांचों के साथ-साथ नि:शुल्क डॉक्टर परामर्श सेवा प्रदान की गई। कार्यक्रम में सबसे महत्वपूर्ण सत्र सीपीआर ट्रेनिंग का था, जिसमें प्रतिभागियों को आपातकालीन परिस्थितियों में जीवन बचाने के तरीकों के बारे में शिक्षित किया गया।

इस अवसर पर कआईएमएगाजियाबाद की अध्यक्ष डॉ. अल्पना कंसल और उपाध्यक्ष डॉ. अर्चना शर्मा ने कहा कि ऐसे कैंप लोगों में स्वास्थ्य और सुरक्षा के प्रति जागरूकता फैलाने में अहम भूमिका निभाते हैं। उन्होंने बताया कि यह कार्यक्रम मरीजों और नागरिकों को उनके स्वास्थ्य की बेहतर समझ देने का अवसर है। कार्यक्रम में संयुक्त सचिव डॉ. अरुणा अग्रवाल, अध्यक्ष निर्वाचित डॉ. प्रहलाद चावला, डॉ. नीलू खनेजा, उपाध्यक्ष डॉ. अर्चना वर्मा, डॉ. रीनू गोयल, डॉ. आकांक्षा कंसल, डॉ. चुमकाई दे सिन्हा और डॉ. मोनिशा गुप्ता भी उपस्थित रहे और कैंप की सफलता में योगदान दिया।

परमार्थ निकेतन से प्रवाहित संस्कारों की गंगा, अप्रवासी भारतीय परिवारों के लिये युवा पीढ़ी में संस्कारों के रोपण का केन्द्र परमार्थ निकेतन

 




                          सत्ता बन्धु संवाददाता

ऋषिकेश, 20 फरवरी। माँ गंगा के निर्मल तट पर स्थित परमार्थ निकेतन वर्षों से संस्कारों और सनातन संस्कृति की जीवंत धारा बनकर विश्वभर में भारतीयता का प्रकाश फैला रहा है। यहाँ से प्रवाहित होने वाली ‘संस्कारों की गंगा’ असंख्य जीवनों को स्पर्श कर रही है, विशेषकर उन अप्रवासी भारतीय परिवारों को, जो अपनी जड़ों से जुड़े रहने की पवित्र आकांक्षा लेकर भारत आते हैं।

आज वैश्वीकरण के इस युग में, जब भौतिक प्रगति तीव्र है परंतु सांस्कृतिक पहचान धीरे-धीरे धूमिल होती जा रही है, ऐसे समय में परमार्थ निकेतन युवा पीढ़ी के लिए आशा का दीप बनकर खड़ा है। यहाँ आने वाले बच्चों और युवाओं को आध्यात्मिक पर्यटन के अनुभव के साथ वे अपने अस्तित्व, अपनी परंपरा और वैदिक संस्कृति से साक्षात्कार करते हैं।

गंगा जी के पावन तट पर प्रातःकालीन प्रार्थना, गंगा आरती, यज्ञ, दान, वैदिक मंत्रोच्चारण, ध्यान, योग एवं सत्संग के माध्यम से बच्चों के हृदय में सेवा, करुणा, अनुशासन और कृतज्ञता के संस्कार सहज ही अंकुरित होने लगते हैं। जब नन्हे हाथ यज्ञ में आहुति देते हैं, जब वे वेद मंत्रों का उच्चारण करते हैं, जब वे ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ के भाव को आत्मसात करते हैं और उनके भीतर एक नई चेतना जन्म लेती है।

लंदन से आये परिवार परिवारों को भारतीय संस्कृति के विषय में जानकारी देते हुये स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि संस्कार केवल परंपराएँ नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला हैं। शास्त्र केवल ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन के मार्गदर्शक दीप हैं और संस्कृति केवल उत्सव नहीं, बल्कि हमारी पहचान और हमारा स्वाभिमान है।

अप्रवासी भारतीय परिवारों के लिए परमार्थ निकेतन विशेष रूप से प्रेरणास्रोत है। विदेशों में पले-बढ़े बच्चे जब यहाँ आते हैं, तो उन्हें अपनी जड़ों से जुड़ने का अवसर मिलता है। 

स्वामी जी ने कहा कि भारतीयता केवल भाषा या वेशभूषा नहीं, बल्कि विचार, व्यवहार और जीवन मूल्य हैं। ‘सेवा ही साधना है’ और ‘प्रकृति ही परिवार है’। परमार्थ निकेतन में बच्चों को दान और सेवा के कार्यों से जोड़ा जाता है, चाहे स्वच्छता अभियान हो, वृक्षारोपण हो, या जरूरतमंदों की सहायता। इससे उनमें समाज के प्रति उत्तरदायित्व की भावना विकसित होती है। वे केवल अपने लिए नहीं, बल्कि ‘सबके लिए’ जीना सीखते हैं।

आज जब विश्व मानसिक तनाव, असंतुलन और दिशाहीनता से जूझ रहा है, ऐसे समय में सनातन जीवन-दृष्टि का यह केंद्र युवाओं को आंतरिक शांति, आत्मविश्वास और जीवन का उद्देश्य प्रदान कर रहा है। यहाँ का वातावरण उन्हें सिखाता है कि आधुनिकता और परंपरा साथ-साथ चल सकती हैं, विज्ञान और आध्यात्म विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हैं।

स्वामी जी ने कहा कि संस्कार, शास्त्र और संस्कृति से जुड़ना अर्थात् अपनी जड़ों से शक्ति प्राप्त करना। यह जुड़ाव ही व्यक्ति को स्थिरता देता है, परिवार को एकता देता है और राष्ट्र को गौरव प्रदान करता है। जब हमारी युवा पीढ़ी अपने मूल्यों से जुड़ी होती है, तभी वह स्वयं से जुड़ सकती है।

लंदन से आये धनुष लोहिया ने कहा कि पूज्य स्वामी जी के पावन सान्न्ध्यि में परमार्थ निकेतन, माँ गंगा के तट से प्रवाहित यह संस्कारों की धारा आने वाली पीढ़ियों को इसी प्रकार आलोकित करती रहे यही हमारी प्रार्थना और संकल्प है।

महापौर तथा नगर आयुक्त ने सदन तथा कार्यकारिणी कक्ष का किया लोकार्पण, पार्षदों ने सुंदर और सुविधाजनक सदन कक्ष देख महापौर तथा नगर आयुक्त का किया धन्यवाद



मुकेश गुप्ता

गाजियाबाद  । नगर निगम मुख्यालय में सदन कक्ष तथा कार्यकारिणी कक्ष का जीर्णोद्धार कराया गया जिसका लोकार्पण महापौर सुनीता दयाल द्वारा किया गया मौके पर नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक, समस्त निगम के पार्षद व अधिकारी गण भी उपस्थित रहे। सदन कक्ष में 100 पार्षदों की बैठने की अच्छी व्यवस्था, अधिकारियों के बैठने की समुचित व्यवस्था कराई गई । पार्षदों ने निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता निर्माण नरेंद्र कुमार चौधरी को धन्यवाद किया।

नगर आयुक्त द्वारा सभी पार्षदों को शुभकामनाएं दी गई साथ ही बताया गया आग लगने के बाद पूर्ण रूप से सदन कक्ष खराब हो गया था, इलेक्ट्रिक की वायर भी जल गई थी जिनको बदल गया है सदन कक्ष को नया स्वरूप दिया गया है, फर्नीचर से लेकर ए सी भी नए लगाए गए हैं, सदन कक्ष का इलेक्ट्रिक पैनल भी अलग किया गया है, सदन में अग्नि संयंत्र भी लगाए गए हैं, माननीय सदन कक्ष के साथ-साथ माननीय कार्यकारिणी कक्ष भी सुविधाजनक बनाया गया है।

महापौर ने बताया कि 57 लाख से कार्यकारिणी कक्ष तथा 75 लाख से सदन कक्ष का   जीर्णोद्धार किया गया पार्षदों द्वारा बैठने की सुविधा को बेहतर बनाया गया जहां से पूरे शहर के विकास की बात होती है उसे स्थान को सुविधाजनक बनाया गया है पर्याप्त प्रकाश की व्यवस्था की गई है, पार्षदों तथा अधिकारियों के लिए बहुत ही सुविधाजनक कक्ष तैयार किए गए हैं महापौर द्वारा निर्माण विभाग की टीम का भी उत्साहवर्धन किया गया, कार्यक्रम में माननीय पार्षदों के साथ-साथ समस्त निगम अधिकारी भी उपस्थित रहे ।

गुरुवार, 19 फ़रवरी 2026

इंद्रप्रस्थ इंजीनियरिंग कॉलेज का जर्मन संस्था स्टाइनबाइस फाउंडेशन इंडिया से हुआ शैक्षिक करार

 

मुकेश गुप्ता

साहिबाबाद। तकनीकी शिक्षा, नवाचार और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए इंद्रप्रस्थ इंजीनियरिंग कॉलेज, गाजियाबाद तथा एमआईईटी समूह ने स्टाइनबाइस फाउंडेशन इंडिया के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। 

इस साझेदारी के अंतर्गत इंदरप्रस्थ इंजीनियरिंग कॉलेज परिसर में भारत-जर्मन प्रौद्योगिकी हस्तांतरण केंद्र स्थापित किया जाएगा। यह केंद्र दोनों देशों के नवाचार तंत्र को जोड़ने, विद्यार्थियों एवं शिक्षकों के आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करने तथा आधुनिक तकनीकों के हस्तांतरण को गति देने का कार्य करेगा। इसके माध्यम से संयुक्त शोध, उद्यमिता विकास, कौशल उन्नयन तथा राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर की संगोष्ठियों, सम्मेलनों और शैक्षणिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।

संस्थान प्रबंधन के अनुसार जर्मनी की उन्नत तकनीकी विशेषज्ञता और भारत की प्रतिभा एवं रचनात्मक क्षमता के समन्वय से सतत विकास की दिशा में ठोस पहल संभव होगी। यह सहयोग विद्यार्थियों को वैश्विक दृष्टिकोण, आधुनिक कौशल और उद्योगोन्मुख शिक्षा प्रदान करने में सहायक सिद्ध होगा।

समझौता ज्ञापन पर स्टाइनबाइस  फाउंडेशन इंडिया के अध्यक्ष विनीत गोयल तथा इंदरप्रस्थ इंजीनियरिंग कॉलेज के उपाध्यक्ष पुनीत अग्रवाल ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड, सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड, विभिन्न औद्योगिक संगठनों तथा एक्सेल जियोमैटिक्स के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के पश्चात जिला उद्योग केंद्र के अधिकारियों के साथ विचार-विमर्श सत्र आयोजित किया गया, जिसमें उद्योग क्षेत्र की चुनौतियों एवं जर्मन तकनीक के माध्यम से भारत में तकनीकी उन्नयन की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा की गई।

संस्थान प्रबंधन ने विश्वास व्यक्त किया कि यह पहल भारत और जर्मनी के बीच शैक्षिक एवं तकनीकी सहयोग को नई दिशा प्रदान करेगी तथा विद्यार्थियों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए सक्षम बनाएगी।

बुधवार, 18 फ़रवरी 2026

पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री, भारत एवं महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री सुशील कुमार शिंदे दर्शनार्थ पहुंचे परमार्थ निकेतनः भक्ति ही जीवन का सर्वोच्च आनंद है-स्वामी चिदानन्द सरस्वती

 


 



                         सत्ता बन्धु संवाददाता

*✨भक्ति, प्रेम और आनंद की दिव्य परंपरा को नमन*

*💫माँ काली के अनन्य उपासक, अद्वैत अनुभूति के मूर्त स्वरूप स्वामी रामकृष्ण परमहंस जी तथा भगवान श्रीकृष्ण के परम प्रेममय भक्त, हरिनाम संकीर्तन द्वारा सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जागरण के प्रणेता चैतन्य महाप्रभु की जयंती पर नमन* 

*🎊विश्व विख्यात परमार्थ गंगा आरती में किया सहभाग*

ऋषिकेश, 18 फरवरी। माँ काली के अनन्य उपासक, अद्वैत अनुभूति के मूर्त स्वरूप स्वामी रामकृष्ण परमहंस जी की पावन जयंती तथा भगवान श्रीकृष्ण के परम प्रेममय भक्त, हरिनाम संकीर्तन द्वारा सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जागरण के प्रणेता चैतन्य महाप्रभु की जयंती के पावन अवसर पर परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष, स्वामी शुकदेवानन्द ट्रस्ट के मैनेजिंग ट्रस्टी, स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने भावपूर्ण श्रद्धाजंलि अर्पित करते हुये कहा कि भारत की संत परंपरा अद्भुत, जीवंत और प्रकाशमयी है, जिसने मानवता को प्रेम, सेवा, करुणा और भक्ति का सरल मार्ग दिखाया। हमारे पूज्य संतों ने त्याग और तप के साथ आनंदपूर्ण जीवन जीते हुए समाज को आध्यात्मिक दिशा दी। उनकी वाणी और साधना आज भी हमारे हृदय में शांति, विश्वास और ईश्वरानुभूति का दीप प्रज्वलित करती है।

 सुशील कुमार शिंदे , पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री, भारत एवं महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री दर्शनार्थ आये परमार्थ निकेतन। पूज्य स्वामीजी के पावन सान्निध्य में विश्व विख्यात गंगा जी की आरती में किया सहभाग। स्वामीजी ने कहा कि उनका सार्वजनिक जीवन समर्पण, सादगी और जनसेवा का प्रेरक उदाहरण है। उन्होंने प्रशासनिक कुशलता, संवेदनशील नेतृत्व और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति निष्ठा के साथ देश और राज्य की सेवा की।

मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने महाराष्ट्र के विकास, सामाजिक समरसता और आधारभूत संरचनाओं को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, वहीं केंद्रीय गृह मंत्री के पद पर रहते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा, आंतरिक शांति और सुशासन को प्राथमिकता दी। 

 सुशील कुमार शिंदे, ने कहा कि परमार्थ निकेतन वास्तव में शान्ति प्रदान करने वाला ऐसा दिव्य आश्रम है जहां आते ही मन आनंदित हो जाता है। पूज्य स्वामीजी से विभिन्न समसामयिक विषयों पर चर्चा हुई। उनके विचारों की प्रखरता व चिंतन की तेजस्विता अद्भुत है।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि भक्ति ही जीवन का सर्वोच्च आनंद है। यही वह दिव्य शक्ति है जो मन को निर्मल, बुद्धि को प्रखर और आत्मा को चेतन बनाती है। भक्ति में डूबा हृदय भय, तनाव और अहंकार से मुक्त होकर प्रेम, शांति और प्रकाश का स्रोत बन जाता है। यही ईश्वर से मिलन का सबसे श्रेष्ठ मार्ग है। स्वामी रामकृष्ण परमहंस जी का जीवन इस सत्य का जीवंत प्रमाण था। दक्षिणेश्वर के काली मंदिर में उनका हर क्षण माँ के चरणों में अर्पित था। उनकी भक्ति में बालक जैसी सरलता, माँ के प्रति अगाध विश्वास और पूर्ण समर्पण था। वे ईश्वर को देखने, उनसे बात करने और उन्हें जीने का अनुभव करते थे। उनके लिए भक्ति, साक्षात् अनुभूति थी। जब वे माँ काली के ध्यान में लीन होते, तो साधक और साध्य का भेद मिट जाता था। उनकी आँखों से बहते आँसू, उनके होंठों पर मुस्कान और उनकी आत्मविभोर अवस्था बताती थी कि सच्ची भक्ति ही परम आनंद का द्वार है।

दूसरी ओर चैतन्य महाप्रभु ने भक्ति को केवल मंदिरों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे जन-जन के हृदय तक पहुँचाया। उन्होंने हरिनाम संकीर्तन को सामाजिक और आध्यात्मिक क्रांति का माध्यम बनाया। सड़कों पर नाचते-गाते, ‘हरे कृष्ण’ का नाम गूंजाते हुए उन्होंने लोगों को बताया कि ईश्वर दूर नहीं, हमारे ही हृदय में वास करते हैं। उनका कीर्तन भी एक उत्सव था। उनके प्रेम और करुणा ने समाज में भेदभाव, अहंकार और निराशा को मिटाकर एक नई चेतना जगाई।

इन दोनों महान संतों का जीवन हमें संदेश देता है कि भक्ति मार्ग कठिन नहीं, बल्कि आनंदमय है। ईश्वर तक पहुँचने का रास्ता त्याग और कठोरता से अधिक प्रेम और सरलता से प्रशस्त होता है। जब हम नाम जपते हैं, कीर्तन करते हैं, सेवा करते हैं, तो भीतर का तनाव, क्रोध और भय स्वतः समाप्त होने लगता है। भक्ति हमें बाहरी परिस्थितियों से ऊपर उठाकर आंतरिक शांति, संतोष और आनंद प्रदान करती है।

आज के तेज-रफ्तार, तनावपूर्ण और भौतिकवादी युग में यह संदेश और भी अधिक प्रासंगिक हो जाता है। आधुनिक जीवन की दौड़ में मनुष्य सुख खोज रहा है, परंतु शांति उससे दूर होती जा रही है। ऐसे समय में संतों की वाणी हमें स्मरण कराती है कि सच्चा सुख बाहरी वस्तुओं में नहीं, बल्कि भीतर से जुड़ने में है। भक्ति हमें स्वयं से जोड़ती है, समाज से जोड़ती है और राष्ट्र की सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ती है।

हमारी सनातन संस्कृति का मूल ही प्रेम, सेवा और साधना है। जब समाज भक्ति से जुड़ता है, तब करुणा बढ़ती है, परिवार मजबूत होते हैं और राष्ट्र में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। 

स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि अब समय आ गया कि हम अपने घरों में भजन-कीर्तन की परंपरा पुनः जीवित करें। युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ें। भक्ति को अपने व्यवहार और कर्म में उतारें।

आइए, इन दिव्य संतों की प्रेरणा से संकल्प लें कि अपने जीवन को भक्ति के प्रकाश से आलोकित करेंगे और प्रेम, शांति तथा सद्भाव का संदेश समाज में प्रसारित करें। यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।