गुरुवार, 13 अगस्त 2026

परमार्थ निकेतन से पुण्यश्लोक लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की पुण्यतिथि पर भावपूर्ण श्रद्धांजलि

 

                           संवाददाता

न्याय, धर्म, त्याग और लोकसेवा की अमर ज्योति, लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर

तीर्थों के पुनर्जागरण की महान साधिका-स्वामी चिदानन्द सरस्वती

ऋषिकेश, 13 अगस्त। पुण्यश्लोक लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर जी की पुण्यतिथि पर परमार्थ निकेतन से भावभीनी श्रद्धाजंलि अर्पित करते हुये परमार्थ पीठाधीश्वर, पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि वे ऐसी महान विभूति थीं जिनके जीवन में न्याय था, शासन में धर्म था, हृदय में करुणा थी, कर्म में सेवा थी और संकल्प में राष्ट्र एवं लोककल्याण का भाव था।

लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर जी की पुण्यतिथि के अवसर पर परमार्थ निकेतन से उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके अद्वितीय जीवन, राष्ट्र की आध्यात्मिक-सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण तथा जनसेवा के महान कार्यों का स्मरण किया।

अहिल्याबाई होल्कर ने अपने जीवन की व्यक्तिगत पीड़ाओं को दुर्बलता नहीं बनने दिया, बल्कि उन्हें लोकसेवा की शक्ति में परिवर्तित किया। उन्होंने शासन को वैभव और अधिकार का माध्यम नहीं, बल्कि प्रजा की सेवा और धर्म के संरक्षण का पवित्र दायित्व माना। उनके लिए राजधर्म का अर्थ था, प्रजा का सुख, न्याय की स्थापना, जरूरतमंदों की सहायता और सनातन संस्कृति की रक्षा।

पूज्य स्वामी जी ने कहा कि वे तीर्थों के पुनर्जागरण की महान साधिका थी। लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर ही का विराट योगदान भारत की तीर्थ परंपरा और मंदिरों के संरक्षण एवं पुनरुत्थान में दिखाई देता है। उन्होंने भारत के विभिन्न पवित्र तीर्थों में मंदिरों का निर्माण, जीर्णाेद्धार, घाटों का निर्माण तथा यात्रियों की सुविधा के लिए धर्मशालाओं, कुओं और जल-स्रोतों की व्यवस्था कराई।

काशी विश्वनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण से लेकर सोमनाथ मंदिर के पुनरुद्धार तक, उनकी धार्मिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि ने भारत की आध्यात्मिक चेतना को नई ऊर्जा दी। काशी में उन्होंने विश्वनाथ मंदिर के निर्माण के साथ तीर्थयात्रियों के लिए सुविधाओं का विस्तार कराया। उनके द्वारा निर्मित अहिल्याबाई घाट आज भी गंगा तट पर उनकी श्रद्धा और सेवा की स्मृति को जीवंत रखता है।

उन्होंने मंदिरों के शिखर ही नहीं सँवारे, बल्कि तीर्थयात्रा की पूरी व्यवस्था को मानवीय बनाया। यात्रियों के लिए धर्मशालाएँ, कुएँ, बावड़ियाँ और जल-सुविधाएँ बनवाईं। उनके लिए तीर्थ, जनसेवा, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना के केंद्र थे। लोकमाता की दृष्टि केवल मंदिर निर्माण तक सीमित नहीं थी। उन्होंने भारत की प्राचीन जल-संस्कृति और नदी-सभ्यता को भी संरक्षण दिया। गंगा जी सहित विभिन्न पवित्र नदियों के तटों पर घाटों का निर्माण एवं जीर्णाेद्धार कराया।

उनके द्वारा निर्मित घाट आज भी यह संदेश देते हैं कि नदी केवल जल की धारा नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता, संस्कृति और आध्यात्मिक जीवन की जीवनरेखा है। आज जब भारत अपनी नदियों और जल-स्रोतों के संरक्षण के लिए पुनः जागृत हो रहा है, तब लोकमाता अहिल्याबाई का जीवन हमें सदियों पुराना वह संदेश देता है कि जल की रक्षा, तीर्थों की रक्षा और प्रकृति की रक्षा ही वास्तव में हमारे जीवन की रक्षा है।

लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर जी का जीवन नारी शक्ति का अनुपम उदाहरण है। उन्होंने ऐसे समय में शासन की बागडोर संभाली, जब नारियों के लिए सार्वजनिक नेतृत्व की राह अत्यंत कठिन थी। उन्होंने अपनी दूरदृष्टि, प्रशासनिक क्षमता, न्यायप्रियता और करुणामय नेतृत्व से सिद्ध किया कि नेतृत्व का वास्तविक आधार शक्ति नहीं, बल्कि चरित्र और लोकहित है।

घर घर तिरंगा अभियान के तहत पार्षद कुसुम गोयल ने जयपुरिया एनक्लेव सोसायटी एवं प्लॉट एरिया में झंडे का वितरण किए

 




मुकेश गुप्ता

वैशाली । घर-घर तिरंगा अभियान के तहत आज क्षेत्रीय पार्षद कुसुम मनोज गोयल द्वारा जयपुरिया एनक्लेव सोसायटी एवं प्लॉट एरिया में झंडे का वितरण किया गया । इस अवसर पर जयपुरिया एनक्लेव के उपाध्यक्ष समाजसेवी एस आर सिंह प्लॉट एरिया की महासचिव उर्मिला अरोड़ा पूर्व अध्यक्ष जयपुरिया के एल सचदेवा, अजय गुप्ता, पूर्व पार्षद मनोज गोयल,भाजपा नेत्री एवं सेक्टर संयोजक रेनू मल्होत्रा एवं पूजा मेहरा समाजसेवी एस के गोयल ,मंजू शर्मा मुनेश चौहान, किरण दुआ, विपिन जैन ,अनिल गोयल, रीतू जैन,गौरव सिंह सहित  अन्य व्यक्ति उपस्थित रहे

विवेक मित्तल बने गैस मंत्रालय में नॉन ऑफिशियल डायरेक्टर

 

           

                                मुकेश गुप्ता

 गाजियाबाद । गाज़ियाबाद चार्टेड एकाउंटेंट्स एसोसिएशन के पूर्व सचिव व कविनगर रामलीला कमेटी के कोषाध्यक्ष विवेक मित्तल (चार्टर्ड अकाउंटेंट) को भारत सरकार के पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के उपक्रम में नॉन ऑफिशल डायरेक्टर (NoD) नियुक्त किया गया है । इस पद पर गाज़ियाबाद से किसी चार्टेड एकाउंटेंट को यह नियुक्ति मिलने पर जनपद के चार्टेड एकाउंटेंट्स में हर्ष की लहर है। ज्ञातव्य है कि श्री मित्तल बाल्यकाल से ही राष्ट्रीय स्वयं सेवक से जुड़े हुए हैं और संघ से जुड़ी अनेक संस्थाओं के अनेक दायित्व भी उनके पास हैं। उनकी इस नियुक्ति से जुड़ी खास बात यह भी है कि इसे स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के हस्ताक्षर से किया गया है । श्री मित्तल को इस पद पर नियुक्त किए जाने पर कविनगर रामलीला कमेटी ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री को धन्यवाद ज्ञापित किया है।

रोज बेल पब्लिक स्कूल में विधायक सजीव शर्मा ने विद्यार्थियों को किया ध्वजारोहण सामग्री का वितरण

 

मुकेश गुप्ता

गाजियाबाद। रोज बेल पब्लिक स्कूल, विजय नगर में छात्र-छात्राओं के बीच ध्वजारोहण सामग्री वितरण कार्यक्रम का गरिमामय आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि शहर विधायक संजीव शर्मा ने विद्यार्थियों को राष्ट्रीय ध्वज एवं संबंधित पट्टियाँ वितरित कीं और उन्हें देशप्रेम व राष्ट्रीय मूल्यों को अपनाने के लिए प्रेरित किया।

इस अवसर पर अल्पसंख्यक मोर्चा के महानगर अध्यक्ष बलप्रीत सिंह, शहर मंडल अध्यक्ष महीम गुप्ता, अजय चोपड़ा



सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति विशेष रूप से उपस्थित रहे। स्कूल की प्रधानाचार्य धर्मजीत कौर और मैनेजर सरदार जोगिंदर सिंह ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। विद्यालय परिवार ने राष्ट्रीय पर्वों के प्रति बच्चों में उत्साह बढ़ाने के लिए इस पहल की सराहना की।

दिनेश गोयल एमएलसी द्वारा आयोजित चार दिवसीय भंडारे एवं सेवा का हुआ समापन











संवाददाता

बागपत ।  पुरा परशुरामेश्वर महादेव मंदिर के सामने स्थित आर के जी धर्मशाला में 8 से 11 अगस्त तक चले चार दिवसीय भंडारे एवं सेवा का विधिवत समापन हुआ।

विधायक  दिनेश कुमार गोयल जी ने भंडारे को सफल बनाने में सहयोग देने वाले समस्त स्टाफ, हलवाई भाइयों, भोजन परोसने वाले सेवाभावी साथियों, सफाई कर्मचारियों, नगर पंचायत दोघट के कर्मचारीगण, आर के जी स्टाफ एवं परिवारजनों का आभार व्यक्त किया।

उन्होंने बागपत जिलाधिकारी अस्मिता लाल जी, पुलिस अधीक्षक, सूरज कुमार राय जी, जिला प्रशासन, पुरा महादेव मंदिर समिति एवं समस्त स्टाफ, अधिकारीगण तथा समाज के सम्मानित सामाजिक व्यक्तियों का भी सहयोग एवं मार्गदर्शन के लिए धन्यवाद किया।






समापन अवसर पर हलवाई, सफाई कर्मचारी एवं भोजन परोसने वाले सेवाभावी साथियों का पुष्पवर्षा कर सम्मान किया गया। उन्होंने कहा कि सभी के सहयोग एवं समर्पण से कांवड़ियों और शिवभक्तों की सेवा का यह आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

हर हर महादेव! बोल बम!

जिलाधिकारी रवीन्द्र कुमार मांडड़ ने किया ‘उत्थान जल संजीवनी अभियान’ का शुभारंभ

 



मुकेश गुप्ता

जिला गंगा समिति की बैठक से जल संरक्षण की बड़ी मुहिम का आगाज, वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण और तालाब पुनर्जीवन पर रहेगा विशेष फोकस

डीएम ने जनपदवासियों से अभियान से जुड़ने की अपील की, उत्थान समिति के चेयरमैन सत्येन्द्र सिंह बोले—“जल संरक्षण को जन-जन का संकल्प बनाना हमारा लक्ष्य”

गाजियाबाद। तेजी से बढ़ती जल आवश्यकता और भूजल पर बढ़ते दबाव के बीच जल संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ने की दिशा में उत्थान समिति ने ‘उत्थान जल संजीवनी अभियान’ के रूप में एक व्यापक पहल शुरू की है। जिलाधिकारी गाजियाबाद एवं जिला गंगा समिति के अध्यक्ष रवीन्द्र कुमार मांडड़ ने जिला गंगा समिति की बैठक के दौरान इस अभियान का विधिवत शुभारंभ किया और जनपद के नागरिकों से जल संरक्षण की इस मुहिम में सक्रिय रूप से सहभागी बनने का आह्वान किया।

“हर बूंद से जीवन, हर प्रयास से भविष्य” के संदेश के साथ शुरू किए गए इस अभियान का उद्देश्य केवल जल बचाने का संदेश देना नहीं, बल्कि वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण, तालाबों एवं परंपरागत जल स्रोतों के संरक्षण-पुनर्जीवन, जल के विवेकपूर्ण उपयोग तथा समाज में जल संरक्षण की स्थायी संस्कृति विकसित करने के लिए लोगों को व्यावहारिक प्रयासों से जोड़ना है।

जिलाधिकारी ने जल संरक्षण में जनभागीदारी पर दिया जोर

अभियान का शुभारंभ करते हुए जिलाधिकारी रवीन्द्र कुमार मांडड़ ने जल संरक्षण को वर्तमान के साथ-साथ भविष्य से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय बताते हुए नागरिकों से अपने स्तर पर जल बचाने और वर्षा जल को संरक्षित करने के उपाय अपनाने की अपील की।

अभियान के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि भूजल संरक्षण केवल सरकारी विभागों या सामाजिक संस्थाओं की जिम्मेदारी नहीं हो सकता। इसके लिए प्रशासन, स्थानीय निकायों, औद्योगिक प्रतिष्ठानों, आरडब्ल्यूए, शिक्षण संस्थानों, सामाजिक संगठनों और प्रत्येक नागरिक की सहभागिता आवश्यक है।

जिलाधिकारी ने लोगों से ‘उत्थान जल संजीवनी अभियान’ से जुड़ने और जल संरक्षण को अपने दैनिक व्यवहार का हिस्सा बनाने का आह्वान किया। इससे अभियान को प्रशासनिक स्तर के साथ-साथ सामाजिक स्तर पर भी व्यापक गति मिलने की उम्मीद है।

वरिष्ठ अधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति

जिला गंगा समिति की बैठक में अभियान के शुभारंभ के अवसर पर डीएफओ श्रीमती ईशा तिवारी, गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के मुख्य अभियंता आलोक रंजन तथा नगर निगम के उद्यान अधिकारी अनुज सिंह सहित संबंधित विभागों के अधिकारी एवं जिला गंगा समिति से जुड़े प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

विभिन्न विभागों के अधिकारियों की मौजूदगी ने जल संरक्षण की इस पहल में समन्वित प्रयासों के महत्व को भी रेखांकित किया। जल संरक्षण से जुड़े विषयों में वर्षा जल प्रबंधन, भूजल पुनर्भरण, हरित क्षेत्रों का संरक्षण, तालाबों का पुनर्जीवन और शहरी जल प्रबंधन जैसे अनेक पहलू एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।

जल बचाना ही पर्याप्त नहीं, पानी को धरती में वापस पहुंचाना भी जरूरी” — सत्येन्द्र सिंह


उत्थान समिति के चेयरमैन एवं जिला गंगा समिति के सदस्य सत्येन्द्र सिंह ने अभियान के शुभारंभ पर जिलाधिकारी रवीन्द्र कुमार मांडड़ तथा उपस्थित अधिकारियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ‘उत्थान जल संजीवनी अभियान’ को एक दीर्घकालिक जन आंदोलन के रूप में विकसित करना समिति का संकल्प है।


श्री सत्येन्द्र सिंह ने कहा कि “जल प्रकृति द्वारा हमें दी गई ऐसी अमूल्य धरोहर है, जिस पर केवल वर्तमान पीढ़ी का अधिकार नहीं है। हमें इसे आने वाली पीढ़ियों के लिए भी सुरक्षित रखना है। अब केवल ‘पानी बचाओ’ कहने का समय नहीं है, बल्कि हमें जल संरक्षण के व्यावहारिक मॉडल जमीन पर उतारने होंगे। वर्षा की जो बूंद धरती पर गिरती है, उसे यथासंभव वहीं रोककर जमीन के भीतर पहुंचाना होगा। यही भूजल के प्रति हमारी वास्तविक जिम्मेदारी है।”

उन्होंने कहा कि शहरीकरण, बढ़ती आबादी और भूजल पर बढ़ती निर्भरता के कारण जल संरक्षण के परंपरागत तरीकों के साथ आधुनिक और वैज्ञानिक उपायों को भी अपनाने की आवश्यकता है। घरों, संस्थानों, पार्कों, औद्योगिक इकाइयों तथा अन्य परिसरों में उपलब्ध वर्षा जल को सीधे बह जाने देने के बजाय रेन वाटर हार्वेस्टिंग एवं भूजल रिचार्ज संरचनाओं के माध्यम से जमीन में पहुंचाने के प्रयास बढ़ाए जाने चाहिए।

पांच प्रमुख स्तंभों पर आगे बढ़ेगा ‘जल संजीवनी अभियान’

उत्थान समिति ने अभियान को व्यापक स्वरूप देते हुए जल संरक्षण के विभिन्न पहलुओं को एक साथ जोड़ने का प्रयास किया है। अभियान मुख्य रूप से इन पांच क्षेत्रों पर जन-जागरूकता और सहभागिता बढ़ाने का प्रयास करेगा—


1. वर्षा जल संचयन: बारिश की अधिकतम बूंदों को सहेजकर उनका संरक्षण और भूजल पुनर्भरण में उपयोग।

2. भूजल पुनर्भरण: रेन वाटर हार्वेस्टिंग एवं पर्कोलेशन आधारित प्रणालियों के माध्यम से जल को जमीन के भीतर पहुंचाने को प्रोत्साहन।

3. तालाबों का संरक्षण एवं पुनर्जीवन: प्राकृतिक एवं परंपरागत जल स्रोतों को संरक्षित कर उनकी जल धारण एवं भूजल रिचार्ज क्षमता को बेहतर बनाने के प्रयास।

4. जल का सदुपयोग: अनावश्यक जल बहाव को रोकना, उपलब्ध जल का विवेकपूर्ण उपयोग करना तथा जहां संभव हो, पानी के पुनः उपयोग को बढ़ावा देना।

5. जनभागीदारी: नागरिकों, आरडब्ल्यूए, सामाजिक संस्थाओं, विद्यालयों, महाविद्यालयों, औद्योगिक प्रतिष्ठानों एवं अन्य संगठनों को जल संरक्षण की मुहिम से जोड़ना।

पर्कोलेशन आधारित भूजल रिचार्ज को मिलेगा बढ़ावा

 सत्येन्द्र सिंह ने कहा कि अभियान के माध्यम से ऐसे व्यावहारिक एवं कम स्थान में विकसित किए जा सकने वाले जल पुनर्भरण मॉडल को भी बढ़ावा दिया जाएगा, जिनसे वर्षा जल और अन्य उपयुक्त स्वच्छ जल स्रोतों को जमीन में पहुंचाया जा सके।

उन्होंने कहा कि उत्थान समिति स्वयं पर्कोलेशन आधारित रेन वाटर हार्वेस्टिंग एवं ग्राउंड वाटर रिचार्ज सिस्टम पर कार्य कर रही है। इस प्रकार की संरचनाओं का उद्देश्य पानी को सतह पर बहकर नालियों में जाने से रोककर फिल्ट्रेशन एवं पर्कोलेशन के माध्यम से धीरे-धीरे जमीन में पहुंचने का अवसर देना है।

“हमारी सोच स्पष्ट है—जल को केवल स्टोर करना समाधान का एक हिस्सा है। जहां परिस्थितियां अनुकूल हों, वहां वर्षा जल को धरती के भीतर पहुंचाकर प्राकृतिक भूजल भंडार को पुनर्भरित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।” — सत्येन्द्र सिंह

तालाब केवल जलाशय नहीं, प्राकृतिक रिचार्ज सिस्टम भी

उत्थान समिति के चेयरमैन ने तालाबों के संरक्षण और पुनर्जीवन को अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए कहा कि तालाब केवल पानी जमा करने के स्थान नहीं हैं, बल्कि वे स्थानीय जल चक्र, जैव विविधता और भूजल पुनर्भरण से जुड़े महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधन हैं।

उन्होंने कहा कि उत्थान समिति द्वारा गाजियाबाद में CSR गतिविधियों के माध्यम से कई तालाबों के विकास एवं पुनर्जीवन से जुड़े कार्य किए जा चुके हैं। अभियान के माध्यम से तालाबों तथा अन्य प्राकृतिक जल स्रोतों के संरक्षण को लेकर समाज और संस्थानों की भागीदारी को और बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।

घर से उद्योग तक—हर स्तर पर जल संरक्षण की जरूरत

 सत्येन्द्र सिंह ने कहा कि जल संकट का समाधान किसी एक बड़ी परियोजना से नहीं, बल्कि लाखों छोटे-छोटे प्रयासों के सामूहिक प्रभाव से संभव है।

यदि एक परिवार अपने घर में वर्षा जल को संरक्षित करता है, एक आरडब्ल्यूए अपनी सोसायटी में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को प्रभावी बनाती है, कोई विद्यालय विद्यार्थियों को जल संरक्षण से जोड़ता है और कोई औद्योगिक प्रतिष्ठान अपने परिसर में जल पुनर्भरण एवं पुनः उपयोग की व्यवस्था विकसित करता है, तो इन सभी प्रयासों का संयुक्त प्रभाव बहुत व्यापक हो सकता है।

उन्होंने कहा कि “हम चाहते हैं कि जल संरक्षण केवल सरकारी फाइल, पर्यावरण दिवस या किसी विशेष आयोजन का विषय बनकर न रहे। इसे प्रत्येक व्यक्ति के जीवन और प्रत्येक संस्था की कार्य संस्कृति का हिस्सा बनाना होगा। जिस दिन समाज पानी की हर बूंद को एक संसाधन के रूप में देखना शुरू कर देगा, उसी दिन वास्तविक परिवर्तन की शुरुआत होगी।”

युवाओं और विद्यार्थियों को अभियान से जोड़ने की तैयारी

‘उत्थान जल संजीवनी अभियान’ के माध्यम से नई पीढ़ी में जल संरक्षण के प्रति संवेदनशीलता विकसित करने पर भी जोर दिया जाएगा। समिति का मानना है कि बच्चों और युवाओं को वर्षा जल संचयन, भूजल रिचार्ज और जल के विवेकपूर्ण उपयोग के वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक पहलुओं से परिचित कराना दीर्घकालिक परिवर्तन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।

इसके साथ ही सामाजिक संस्थाओं, आरडब्ल्यूए और औद्योगिक संगठनों को भी अभियान से जोड़कर जल संरक्षण के सफल मॉडलों को अधिक से अधिक स्थानों पर अपनाने के लिए प्रेरित करने का प्रयास किया जाएगा।

“हर घर और हर संस्था बने जल संरक्षण की इकाई”

 सत्येन्द्र सिंह ने जनपदवासियों से अपील करते हुए कहा कि

“हम प्रत्येक नागरिक से आग्रह करते हैं कि वह अपने घर, कार्यालय, विद्यालय, फैक्ट्री, सोसायटी या संस्था में यह जरूर देखे कि बारिश का पानी कहां जा रहा है और उसे किस प्रकार बचाया जा सकता है। यदि हमारे पास थोड़ी सी भी जगह उपलब्ध है तो वैज्ञानिक सलाह के अनुरूप रेन वाटर हार्वेस्टिंग या भूजल पुनर्भरण की संभावना तलाशनी चाहिए। हर छोटा प्रयास आने वाले समय में बड़ी जल सुरक्षा का आधार बन सकता है।”

उन्होंने कहा कि ‘उत्थान जल संजीवनी अभियान’ किसी एक संस्था का अभियान नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग को साथ लेकर चलने का प्रयास है। प्रशासन, नागरिक समाज, उद्योग, शिक्षण संस्थान और आम नागरिक जब एक साझा उद्देश्य के साथ आगे बढ़ेंगे, तभी जल संरक्षण के क्षेत्र में स्थायी परिणाम प्राप्त किए जा सकेंगे।

जल संरक्षण से भविष्य संरक्षण तक

उत्थान समिति ने अभियान के माध्यम से संदेश दिया है कि जल संरक्षण को केवल वर्तमान जल उपलब्धता से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। यह आने वाली पीढ़ियों की जल सुरक्षा, पर्यावरणीय संतुलन और सतत विकास से जुड़ा विषय है।

अभियान का मूल संदेश है कि वर्षा की प्रत्येक संभव बूंद को सहेजा जाए, भूजल के दोहन के साथ उसके पुनर्भरण की जिम्मेदारी भी निभाई जाए, तालाबों और प्राकृतिक जल स्रोतों को संरक्षित किया जाए तथा पानी की बर्बादी को सामाजिक स्तर पर हतोत्साहित किया जाए।

उत्थान समिति ने गाजियाबाद सहित समाज के सभी वर्गों से ‘उत्थान जल संजीवनी अभियान’ से जुड़कर जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने का आह्वान किया है।

“हर बूंद से जीवन, हर प्रयास से भविष्य”

“हर बूंद का संरक्षण • भूजल का संवर्धन • भविष्य का निर्माण

बुधवार, 12 अगस्त 2026

हरियाली अमावस्या - प्रकृति में परमात्मा के दर्शन,प्रकृति का पूजन करें, पौधा लगाएँ और आने वाली पीढ़ियों के लिए धरती को हरा-भरा बनाएँ--स्वामी चिदानन्द सरस्वती

 





संवाददाता

जागृत युवा शक्ति ही विश्व की नई दिशा, नई ऊर्जा और नई आशा है

ऋषिकेश, 12 अ्रगस्त। हरियाली अमावस्या भारतीय सनातन संस्कृति में प्रकृति, पर्यावरण और आध्यात्मिक चेतना के अद्भुत समन्वय का पर्व है। यह प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने, धरती के संरक्षण का संकल्प लेने और जीवन के मूल स्रोतों के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझने का पावन अवसर है। हरियाली अमावस्या हमें स्मरण कराती है कि प्रकृति केवल हमारे जीवन का आधार नहीं, बल्कि स्वयं परमात्मा की जीवंत अभिव्यक्ति है। 

आज अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस परमार्थ पीठाधीश्वर, पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि युवा चेतना से विश्व परिवर्तन। युवा केवल उम्र नहीं, ऊर्जा, साहस, संकल्प और परिवर्तन की प्रखर चेतना का है। युवा मन में सपने हों, हृदय में करुणा हो, कर्म में सेवा हो और जीवन में संस्कार हों, तो वही युवा राष्ट्र और विश्व की दिशा बदल सकता है।

जब युवा अपनी शक्ति को सेवा, संस्कार, राष्ट्रनिर्माण, पर्यावरण संरक्षण और मानवता के कल्याण के लिए समर्पित करते हैं, तब केवल भविष्य नहीं बनता बल्कि इतिहास रचा जाता है। आइए, युवाओं की ऊर्जा को सकारात्मक दिशा दें और उन्हें अपने भीतर की शक्ति पहचानने के लिए प्रेरित करें। जागृत युवा शक्ति ही विश्व की नई दिशा, नई ऊर्जा और नई आशा है। 

परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश में हरियाली अमावस्या के पावन अवसर पर प्रकृति संरक्षण, वृक्षारोपण और पर्यावरणीय जागरूकता का संदेश देते हुए सभी से आह्वान किया कि इस पावन पर्व को केवल पूजा और परंपरा के साथ इसे धरती के प्रति अपने कर्तव्यों के निर्वहन का अवसर बनाएँ।

पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि भारतीय संस्कृति ने सदैव प्रकृति को पूजनीय माना है। हमारे लिए वृक्ष, जीवनदाता हैं। नदियाँ केवल जलधाराएँ नहीं, बल्कि जीवनदायिनी शक्ति हैं। पर्वत केवल पत्थरों के समूह नहीं, बल्कि हमारी आध्यात्मिक चेतना के प्रहरी हैं। उन्होंने कहा कि “प्रकृति में परमात्मा के दर्शन” का भाव हमारी सनातन संस्कृति की मूल चेतना है। जब हम वृक्ष लगाते हैं, जल बचाते हैं, नदियों को स्वच्छ रखते हैं और धरती को प्रदूषण से मुक्त करने का प्रयास करते हैं, तब वास्तव में हम ईश्वर की सृष्टि की सेवा करते हैं।

उन्होंने कहा कि आज जब जलवायु परिवर्तन, बढ़ता प्रदूषण, जल संकट, घटते वन क्षेत्र और जैव विविधता का संरक्षण वैश्विक चुनौतियाँ बन चुके हैं, तब हरियाली अमावस्या जैसे पर्वों की प्रासंगिकता और भी बढ़ जाती है। यह पर्व हमें केवल प्रकृति की हरियाली देखने का नहीं, बल्कि अपने भीतर भी पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की हरियाली विकसित करने का संदेश देता है।

पूज्य स्वामी जी ने कहा कि पौधे लगाना एक सुंदर भविष्य की नींव रखने जैसा है। आज अगर हम पौधों का रोपण करते हैं तो वह कल आने वाली पीढ़ियों को छाया देगा, प्राणवायु देगा है, पक्षियों और जीव-जंतुओं को आश्रय देगा और इससे मिट्टी का संरक्षण होगा। 

उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में पीपल, वट, नीम, तुलसी, बेल, आंवला आदि वृक्षों और वनस्पतियों को धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व दिया गया है। हरियाली अमावस्या का पर्व हमें संदेश देती है कि पर्यावरण संरक्षण हमारा व्यक्तिगत धर्म और सामाजिक कर्तव्य है। हम अपने घरों, विद्यालयों, कार्यालयों और आसपास के क्षेत्रों में पौधे लगाकर, जल का संरक्षण करके, सिंगल यूज प्लास्टिक का कम उपयोग करके, कचरे का उचित प्रबंधन करके और नदियों-तालाबों को स्वच्छ रखकर पर्यावरण संरक्षण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

हरियाली अमावस्या के अवसर पर पूज्य स्वामी जी ने सभी से आह्वान करते हुये कहा कि एक पौधा अपनी धरती मां के नाम अवश्य लगाएँ और उसे केवल रोपित ही न करें, बल्कि अपने परिवार के सदस्य की तरह उसका संरक्षण भी करें। पौधा लगाना पहला कदम है; उसे जीवित रखना, सींचना और वृक्ष बनते तक उसकी देखभाल करना वास्तविक पर्यावरण सेवा है।

यह पर्व हमें एक ऐसा संकल्प लेने का अवसर देता है जो केवल आज के लिए नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए है, धरती हरी होगी तो जीवन खुशहाल होगा; नदियाँ स्वच्छ होंगी तो सभ्यता सुरक्षित होगी; जंगल सुरक्षित होंगे तो भविष्य सुरक्षित होगा।

हरियाली अमावस्या पर आइए, प्रकृति को नमन करें, धरती माँ के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करें और धरती को हरा-भरा बनाएँ रखने का संकल्प लें।

यशोदा मेडिसिटी के डाक्टरों.ने 18 वर्षीय युवक का कटा हाथ सफलतापूर्वक जोड़ा

 

मुकेश गुप्ता

कंस्ट्रक्शन साइट हादसे के बाद 7 घंटे की जटिल माइक्रोसर्जरी से कटे हाथ में रक्त संचार बहाल”

 दिल्ली/NCR:। यशोदा मेडिसिटी ने गाजियाबाद में एक कंस्ट्रक्शन साइट पर हुए हादसे के बाद एक 18 साल के नौजवान के पूरी तरह कटे हुए दाहिने हाथ को सफलतापूर्वक रिकंस्ट्रक्ट और रीइंप्लांट किया। 7 घंटे चली इस जटिल सर्जरी में डॉक्टरों ने हड्डियों, रक्त वाहिकाओं, नसों, टेंडन्स और सॉफ्ट टिशूज़ को माइक्रोसर्जरी की मदद से सावधानीपूर्वक जोड़ा। इससे दोबारा लगाए गए हाथ में खून का बहाव ठीक हो गया और मरीज के हाथ के काम करने की क्षमता बढ़ गई।

हापुड़ के रहने वाले और गाजियाबाद में काम करने वाले मरीज़ का दाहिना हाथ कलाई से पूरी तरह कट गया था। जब वह 21 जुलाई को एक कंस्ट्रक्शन साइट पर काम कर रहा था तब उसका हाथ मशीन में फंस गया था। उसे तेज़ दर्द, ज़्यादा ब्लीडिंग और बहुत ज़्यादा खून बहने की वजह से तुरंत यशोदा मेडिसिटी के इमरजेंसी डिपार्टमेंट में ले जाया गया। अच्छी बात यह रही कि कटे हुए हाथ को सुरक्षित रखकर हॉस्पिटल लाया गया। इससे डॉक्टर हाथ को दोबारा जोड़ने के लिए लिंब रिइंप्लांटेशन सर्जरी कर पाए। 

हॉस्पिटल में आने पर मरीज़ की तुरंत डॉक्टरों की एक टीम ने जांच की। टीम का नेतृत्व प्लास्टिक, एस्थेटिक और रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी के प्रिंसिपल कंसल्टेंट डॉ. शोभित शर्मा ने किया। टीम में ऑर्थोपेडिक्स, जॉइंट रिप्लेसमेंट और स्पोर्ट्स मेडिसिन के डायरेक्टर और यूनिट हेड डॉ. ब्रजेश कौशले भी थे। इमरजेंसी असेसमेंट और स्टेबिलाइज़ेशन के बाद डॉक्टरों ने हाथ को फिर से जोड़ने के लिए इमरजेंसी हैंड रिइंप्लांटेशन सर्जरी करने का फैसला किया।

7 घंटे की सर्जरी के दौरान सर्जनों ने इमरजेंसी में हैंड रीइम्प्लांटेशन प्रक्रिया करने का फैसला किया। यह मामला एक सर्जिकल चैलेंज था, क्योंकि टिशू को स्पष्ट कट के बजाय क्रश इंजरी हुई थी। मरीज़ के खून की कमी का समाधान करना एक ज़रूरी शुरुआती प्राथमिकता थी। इसमें एनेस्थीसिया टीम उसकी हालत पर करीब से नज़र रख रही थी और 7 घंटे की सर्जरी के दौरान उसे स्थिर रखने के लिए ब्लड ट्रांसफ्यूजन दे रही थी। समय की कमी के बीच डॉक्टरों की टीम ने सबसे पहले कलाई की टूटी हड्डियों को जोड़कर मजबूत किया, ताकि हाथ को सही सहारा मिल सके। इसके बाद माइक्रोस्कोप की मदद से हाथ की नसों, रक्त वाहिकाओं और टेंडन्स को सावधानी से फिर से जोड़ा गया।

*यशोदा मेडिसिटी के डॉ शोभित शर्मा,  प्रिंसिपल कंसल्टेंट, रिकंस्ट्रक्रिव सर्जरी और प्लास्टिक ने कहा* , “पूरी तरह से कटे हुए हाथ को दोबारा जोड़ना समय के साथ एक दौड़ जैसा होता है। कुचलने वाली चोट (क्रश इंजरी) के कारण टिश्यू बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए थे। डॉक्टरों को माइक्रोस्कोप की मदद से रक्त वाहिकाओं, टेंडन और नसों की सावधानीपूर्वक मरम्मत करनी पड़ी। महत्वपूर्ण समय के भीतर हॉस्पिटल पहुँचने से सफल परिणाम की संभावनाएँ बेहतर हुई। अब हाथ में ख़ून का बहाव हो गया है। हाथ को सामान्य कार्यक्षमता हासिल करने में समय लगेगा, लेकिन हमें उम्मीद है कि अगले कुछ महीनों में मरीज की स्थिति में धीरे-धीरे सुधार होगा।”

इस सफ़ल प्रक्रिया के बाद खून का बहाव रिप्लांटेड हैंड से सही हुआ। सर्जरी के बाद मरीज़ की हालत में काफी सुधार हुआ और स्थिर हालत में उसे हॉस्पिटल से डिस्चार्ज कर दिया गया है। वह इलाज करने वाली टीम के साथ रेगुलर फॉलो-अप और रिहैबिलिटेशन जारी रखेगा। आने वाले महीनों में उंगलियों में सेंसेशन और मूवमेंट धीरे-धीरे वापस आने की उम्मीद है। शुरुआती हीलिंग पीरियड के बाद फिजियोथेरेपी शुरू की जाएगी ताकि ताकत और मोबिलिटी वापस आ सके। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान मरीज़ इलाज करने वाली टीम के साथ रेगुलर फॉलो-अप में रहेगा।

डॉक्टरों ने बताया कि ट्रॉमेटिक लिंब एम्प्यूटेशन के मामलों में चोट और सर्जरी के बीच का समय रीइम्प्लांटेशन की सफलता तय करने में अहम भूमिका निभाता है। उन्होंने कटे हुए हिस्से को ठीक से बचाने और एडवांस्ड माइक्रोसर्जिकल एक्सपर्टाइज़ वाले सेंटर में तुरंत ट्रांसफर करने की अहमियत पर भी ज़ोर दिया।

इस सफल इलाज से पता चलता है कि यशोदा मेडिसिटी गंभीर ट्रॉमा केस को संभालने में कितनी एक्सपर्ट है। हॉस्पिटल की स्पेशलिस्ट टीमों ने मरीज़ को ठीक होने में मदद करने के लिए एडवांस्ड माइक्रोसर्जरी, जल्दी इमरजेंसी केयर और सर्जरी के बाद सही इलाज को अमल में लाया।

कावड़ यात्रा के बाद हर घर तिरंगा में जुटा नगर निगम,5 लाख तिरंगा झंडा वितरित कर रहा है नगर निगम, जोनल प्रभारियों की लगाई ड्यूटी

 


मुकेश गुप्ता

15 अगस्त पर 80 फीट राष्ट्रीय ध्वज के साथ नगर निगम निकलेगा भव्य रैली-नगर आयुक्त

गाजियाबाद । नगर निगम कावड़ महोत्सव को संपन्न करने के उपरांत हर घर तिरंगा अभियान में जुट गया है नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक के निर्देश अनुसार गाजियाबाद नगर निगम की शहर के हर घर में तिरंगा लहराने की तैयारी चल रही है जिसमें पार्षदों का विशेष सहयोग लिया जा रहा है सभी जोन में जोनल प्रभारी की ड्यूटी लगाई गई है जिनके द्वारा पार्षदों तक तिरंगा ध्वज पहुंचा जा रहा है l 

नगर आयुक्त ने बताया कि गाजियाबाद नगर निगम पार्षदों, जनप्रतिनिधियों के सहयोग से हर घर तिरंगा अभियान को रफ्तार दी जा रही है अधिकांश घरों में तिरंगा ध्वज पहुंचा जा चुका है शेष बचे हुए घरों पर भी तिरंगा जोनल प्रभारियों के माध्यम से पहुंचा जा रहा है, लगभग 5 लाख तिरंगा झंडा वितरित किया जा रहा है, हर घर तिरंगा अभियान को सफल बनाने के लिए अपर नगर आयुक्त अवनींद्र कुमार लगातार मॉनीटरिंग कर रहे हैं l 

नगर आयुक्त ने  बताया कि गाजियाबाद नगर निगम द्वारा 15 अगस्त पर 80 फीट का राष्ट्रीय ध्वज लेकर भव्य रैली निकाली जाएगी जिसमें गाजियाबाद नगर निगम से रैली प्रारंभ करते हुए नवयुग मार्केट सहित स्थल तक जाएगी सभी शहर के गण माननीय, पार्षद गण निगम अधिकारी गण उपस्थित होकर भव्य रैली को सफल बनाएंगे जिसकी तैयारी जोरों पर चल रही है l

लोक शिक्षण अभियान ट्रस्ट के संस्थापक/अध्यक्ष समाजवादी चिन्तक राम दुलार यादव ने दीनानाथपुर पुट्ठी के राधाकृष्ण मंदिर मे कावंड यात्रियों का किया स्वागत




 




मुकेश गुप्ता
 गाजियाबाद 11 अगस्त 2026। आस्था और विश्वास की प्रतीक कावंड यात्रियों का स्वागत राधाकृष्ण मंदिर दीनानाथपुर पुट्ठी जनपद गाजियाबाद परिसर में सैकड़ों महिलाओं, पुरुषों द्वारा माला पहना कर किया गया, भगवान शंकर को जलाभिषेक करते हुए हर हर महादेव के जोरदार जयकारे से आकाश गूंज उठा, हजारों लोगों ने मंदिर पहुँच कर भंडारे में प्रसाद ग्रहण किया, भंडारा 12 बजे प्रारंभ होकर रात तक चलता रहा। लोक शिक्षण अभियान ट्रस्ट के संस्थापक/अध्यक्ष समाजवादी चिन्तक राम दुलार यादव शिक्षाविद, समाज सेविका फूलमती यादव, इंजी0 धीरेन्द्र यादव, शिशिर यादव मुख्य रूप से शामिल होकर दर्शनार्थियों का स्वागत किया।

       इस अवसर पर शिक्षाविद राम दुलार यादव ने कहा कि भगवान शिव भोले नाथ सरलता की प्रति मूर्ति है, उन्होंने लोक कल्याण के लिए समुद्र मंथन से निकले बिष को अपने कंठ में धारण कर लिया, वह नीलकंठ कहलाये, इसी कारण आज के दिन भगवान शंकर को गंगा जल चढाने की परंपरा है, भगवान शिव प्रकृति अनुरागी है, इसलिए वह बेल-पत्र, आंक-धतूर, बेर जो आसानी से प्राप्त है, से प्रसन्न हो जाते है, भगवान शंकर सच में असली समाजवादी है, जिनकी पूजा गरीब, अमीर, पीड़ित, प्रताड़ित सभी करते है, भगवान शंकर ने मानवता के कल्याण के लिए अपने सुख-वैभव का त्याग कर लोगो को सन्देश दिया, कि दूसरों की भलाई के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर देना ही सबसे बड़ी सेवा है, शिव कल्याण और सत्य के प्रतीक है, उनकी भेष-भूषा, रहन-सहन, विपरीत परिस्थितियों में भी एकता और कल्याण का मार्ग प्रशस्त करती है, हमें भी समाज में  भगवान शिव के आदर्श सत्य, त्याग और बलिदान से प्रेरणा ले सभी के साथ मिलजुल कर रहना चाहिए, विपरीत परिस्थितियों में भी एकता कायम रखनी चाहिए।

       समारोह में श्रद्धालुओं, कांवड़ियों का जिन्होंने जलाभिषेक किया स्वागत करने वालों में प्रमुख रहे, बाबा मदन गिरी, ब्रजपाल प्रधान, सत्यवीर प्रधान, राजेश नम्बरदार, महेन्द्र यादव, रमेश यादव, वीरपाल सूबेदार, सुभाष प्रधान, बेगराज यादव, सत्तू यादव, सुनील प्रधान, अचपल यादव, मुकेश यादव, पाला नरेन्द्र यादव, रोबिन नम्बरदार, एन0 ए0 यादव, कालू यादव, टिंकल मुखिया, राजू यादव, मानिक चन्द पटेल रहे, हजारों महिलाओं, बच्चों, दर्शनार्थियों ने भंडारा का आनन्द लिया ।


                                                                                      


                                                                             

                                                                               

मंगलवार, 11 अगस्त 2026

श्रावण शिवरात्रि पर परमार्थ निकेतन में गूंजा ‘हर हर महादेव’

 






संवाददाता

शिव-साधना के साथ सेवा का महायज्ञ - बाघखाला चिकित्सा शिविर में उमड़ा शिवभक्तों का सैलाब

शिव की साधना के साथ, शिवत्व को जीना

 पीड़ित मानवता की सेवा ही शिव-आराधना-स्वामी चिदानन्द सरस्वती

ऋषिकेश, 11 अगस्त। पावन श्रावण मास की शिवरात्रि के अवसर पर परमार्थ निकेतन में आज आध्यात्मिकता, भक्ति और सेवा का अद्भुत संगम हुआ। एक ओर आश्रम परिसर रुद्राभिषेक और पूजन ऋषिकुमारों द्वारा किया जा रहा है वहीं दूसरी ओर परमार्थ निकेतन द्वारा बाघखाला में आयोजित चिकित्सा शिविर में शिवभक्तों और श्रद्धालुओं की अपार भीड़ उमड़ी। बड़ी संख्या में शिवभक्त चिकित्सा सुविधाओं का लाभ ले रहे हैं।

श्रावण शिवरात्रि के पावन अवसर पर परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष, परमार्थ पीठाधीश्वर, पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने शिवभक्तों को अनंत मंगलमय शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि शिवरात्रि, चेतना के जागरण, अंतर्मन के शुद्धिकरण और जीवन को लोककल्याण के लिए समर्पित करने का महापर्व है।

उन्होंने कहा, “शिव का अर्थ ही कल्याण है। जब हम किसी के जीवन से पीड़ा कम करते हैं, किसी के चेहरे पर मुस्कान लाते हैं, किसी जरूरतमंद को स्वास्थ्य, सहयोग और सम्मान देते हैं, तब हम वास्तव में शिव की आराधना कर रहे होते हैं। शिव को केवल पूजना नहीं है बल्कि शिवत्व को अपने जीवन में आत्मसात करना है।”

पूज्य स्वामी जी ने कहा कि भगवान शिव का जीवन हमें त्याग, तपस्या, समता, करुणा और लोकमंगल का संदेश देता है। उन्होंने विष को अपने कंठ में धारण कर संसार को अमृतमय जीवन दिया। यही शिवत्व का सार है, स्वयं कष्ट सहकर भी दूसरों के जीवन को सुख, शांति और सुरक्षा प्रदान करना।

श्रावण शिवरात्रि के अवसर पर बाघखाला में आयोजित चिकित्सा शिविर में बड़ी संख्या में शिवभक्तों और श्रद्धालुओं ने स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाया। शिवभक्ति के लिए विभिन्न क्षेत्रों से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह चिकित्सा सेवा विशेष रूप से महत्वपूर्ण रही। सेवा-भाव से कार्यरत चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा श्रद्धालुओं को आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध कराई जा रही है।

पूज्य स्वामी जी ने कहा कि शिवरात्रि हमें अपने भीतर के अंधकार को पहचानने और उसे ज्ञान, करुणा तथा प्रेम के प्रकाश से दूर करने का अवसर देती है। यह वह रात्रि है जो हमें अहंकार से समर्पण, स्वार्थ से परमार्थ और पूजा से सेवा की ओर ले जाती है।

उन्होंने सभी शिवभक्तों से आह्वान किया कि शिवाभिषेक के साथ धराभिषेक करें। इस शिवरात्रि एक दीप अपने भीतर जलाएँ, क्रोध के स्थान पर करुणा का, द्वेष के स्थान पर प्रेम का, अहंकार के स्थान पर समर्पण का और स्वार्थ के स्थान पर सेवा का दीप जलायें। शिव की साधना हो, सेवा का संकल्प हो और जीवन में शिवत्व का प्रकाश हो, इन्हीं मंगलकामनाओं के साथ परमार्थ निकेतन से श्रावण शिवरात्रि की अनंत शुभकामनाएँ।

इंस्टीट्यूट आफ सोशल साइंसेज अलुमनी एसोसिएशन के डॉ.अतुल जैन पुनः निर्विरोध अध्यक्ष निर्वाचित हुए साधारण सभा में सर्वसम्मति से हुआ निर्णय

 







मुकेश गुप्ता

संस्था के उद्देश्यों की पूर्ति हेतु सभी के साथ मिलकर कार्य की गति जारी रहेगी--डा. अतुल जैन 

गाजियाबाद । इंस्टिट्यूट ऑफ़ सोशल साइंसेज आगरा यूनिवर्सिटी एलुमनी एसोसिएशन की जनरल बॉडी मीटिंग कौशांबी स्थित एक होटल में संपन्न हुई। जिसमें डॉ.अतुल कुमार जैन को इंस्टीट्यूट आफ सोशल साइंसेज अलुमनी एसोसिएशन का पुनः निर्विरोध अध्यक्ष निर्वाचित हुए । यह निर्णय साधारण सभा में सर्वसम्मति से हुई बैठक में लिया गया।

डा अतुल जैन ने बताया कि संगठन के उद्देश्यों पूर्व में किए गए कार्य इत्यादि के बारे में सभी को अवगत कराया, सचिव अशोक शर्मा द्वारा सभी के स्वागत के उपरांत बैठक प्रारंभ हुई जिसमें एजेंडा बिंदुओं के अनुसार पिछली बैठक की कार्यवाही को पढ़कर सुनाया गया जिसका अनुमोदन हुआ, संस्था का वित्तीय वार्षिक लेखा-जोखा प्रस्तुत किया गया जिसको भी सभी उपस्थित द्वारा अनुमोदित किया गया, संस्था के कार्यों को और गति देने के उद्देश्य से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग करने हेतु एक वेबसाइट और पोर्टल बनाने पर भी सहमति बनी,संस्थान के वर्तमान और पूर्व छात्रों की ट्रेनिंग प्लेसमेंट, व्यक्तित्व विकास इत्यादि विषयों पर भी विस्तृत चर्चा करके योजना बनाई गई। विभिन्न क्षेत्रों में कार्य करने हेतु समितियां को भी बनाने पर जोर दिया गया, सदस्यता बढ़ाने और वित्तीय स्थिति को और सुदृढ़ करने के विषय में भी विचार विमर्श किया गया। काफी वरिष्ठ पूर्व छात्र विष्णु भारद्वाज ने मेधावी छात्र कल्याण हेतु ₹1 लाख सहयोग राशि की घोषणा की। सत्येंद्र नाथ सिसोदिया एवं विनीत द्विवेदी ने भी वित्तीय सहयोग का आश्वासन दिया। संगठन के पदाधिकारीयों के निर्वाचन हेतु अध्यक्ष डा. अतुल कुमार जैन ने अपनी पूर्ण प्रबंध समिति के साथ साधारण सभा में उपस्थित सभी सदस्यों को आह्वान करते हुए अपना स्थान रिक्त कर दिया । उसके उपरांत नरेंद्र पाल सिंह राणा द्वारा संस्था के अध्यक्ष पद हेतु नाम देने हेतु आमंत्रित किया,सदन में उपस्थित सदस्यों की ओर  से डा.अतुल कुमार जैन का नाम प्रस्तुत किया गया तथा 

विनय त्रिवेदी ने प्रस्ताव रखा कि यह प्रबंध समिति पूर्व में संतोषजनक कार्य कर रही है और आगे और बहुत कुछ करना है इसलिए डॉ.अतुल जैन की अध्यक्षता में इस समिति को ही हमें नवीनीकरण करते हुए निर्वाचित कर देना चाहिए, सभी ने ध्वनि मत से इस प्रस्ताव को पारित किया। वीएस शुक्ला और अंशु मेहरा को भी संगठन को और सशक्त बनाने हेतु कार्यकारिणी सदस्य के रूप में नामित किया गया।

साधारण सभा में संस्था के सदस्य विष्णु भारद्वाज, नरेंद्र पाल सिंह राणा, सुरेंद्र सिंह, अतुल कुमार जैन, सत्येंद्र नाथ सिंह सिसोदिया,अशोक शर्मा, विनय त्रिवेदी, अंशु मेहरा, चमन जग्गी, विभा रस्तोगी,अनुराग गंगवार, प्रभात कुमार अग्रवाल, प्रशांत कुमार भारद्वाज,आरबी वर्मा, अरुण कुमार शर्मा, राजीव एंडले,संजय भटनागर, विंग कमांडर जगमाल सिंह यादव, प्रमेश तिवारी,यतेंद्र जैन इत्यादि के अतिरिक्त अन्य सदस्य उपस्थित रहे।

साधारण सभा के उपरांत सांस्कृतिक और कार्यक्रम प् देकर कार्यक्रम को मनमोहक बना दिया।

अंत में डॉ.अतुल कुमार जैन ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया और सभी को भोजन पर आमंत्रित करते हुए सभा को विसर्जित किया।

गाजियाबाद नगर निगम द्वारा आयोजित प्लास्टिक मुक्त कावड़ शिविर का हुआ समापन, महापौर नगर आयुक्त ने श्रद्धालुओं को वितरित किया प्रसाद

 




मुकेश गुप्ता

कावड़ यात्रा के सफल समापन पर महापौर नगर आयुक्त द्वारा अधिकारियों तथा पार्षदों को किया गया सम्मानित

गाजियाबाद । नगर निगम द्वारा आयोजित कांवड़ शिविर का समापन हुआ महापौर सुनीता दयाल तथा नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक द्वारा शिव भक्तों को प्रसाद वितरित किया गया मौके पर सभी निगम के अधिकारी, पार्षद गण उपस्थित रहे।

नगर आयुक्त द्वारा कार्यक्रम की शुरुआत में शिवपूजन किया गया। भगवान शंकर महादेव को भोग लगाकर सभी भक्तों को प्रसाद वितरित किया गया प्लास्टिक मुक्त कावड़ शिविर के सफल संचालन में सभी निगम अधिकारियों तथा शिव भक्तों का सहयोग रहा गाजियाबाद नगर निगम के अलावा अन्य आयोजित कावड़ शिविर में भी प्लास्टिक का उपयोग नहीं किया गया जो की सराहनीय है शहर वासी प्लास्टिक का बहिष्कार कर रहे हैं जन-जन को गाजियाबाद नगर निगम प्रतिबंधित प्लास्टिक का उपयोग न करने के लिए जागरुक कर रहा है।

महापौर सुनीता दयाल ने सभी शिव भक्तों तथा निगम अधिकारियों को भव्य कावड़ यात्रा के सफल समापन पर शुभकामनाएं दी गई कावड़ मार्ग को व्यवस्थित बनाने में गाजियाबाद नगर निगम की महत्वपूर्ण भूमिका रही है जिसमें सफाई मित्रों के साथ-साथ निगम अधिकारियों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है महापौर द्वारा तथा नगर आयुक्त द्वारा उपस्थित पार्षदों तथा निगम अधिकारियों का उत्साहवर्धन करते हुए उनके कार्यों की प्रशंसा भी की गई।

दूधेश्वर नाथ मठ महादेव मंदिर में श्रावण शिवरात्रि पर बरसात के साथ भक्ति, आस्था व श्रद्धा भी बरसी

 










मंदिर में देश भर से आए लाखों शिवभक्तों व कांवड़ियों ने भगवान दूधेश्वर का जलाभिषेक किया 

 गाजियाबादः सिद्धपीठ श्री दूधेश्वर नाथ मठ महादेव मंदिर में श्रावण शिवरात्रि पर बरसात के साथ भक्ति, आस्था व श्रद्धा भी खूब बरसी। देश के विभिन्न शहरों के शिवभक्तों व कांवड़ियों भगवान दूधेश्वर का जलाभिषेक कर पूरे शहर को भगवान दूधेश्वर के रंग में रंग दिया। वर्षा के बावजूद मंदिर में शिवभक्तों व कांवड़ियों का सैलाब उमड पडा। हर हर महादेव, भगवान दूधेश्वर व बोल बम के जयकारों ने पूरे शहर को गुंजायमान कर दिया। श्रावण शिवरात्रि का जलाभिषेक प्रातः 6 बजे से शुरू होना था, मगर जलाभिषेक का सिलसिला रविवार से ही निरंतर चलता रहा। मंदिर के पीठाधीश्वर श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज संत संसद में भाग लेने के लिए लंदन प्रवास पर हैं। उन्होंने लंदन से ही सभी भक्तों को श्रावण शिवरात्रि की बधाई व शुभकामनाएं दीं और भगवान दूधेश्वर से अपने सभी भक्तों पर सदैव कृपा बनाए रखने की प्रार्थना की। प्राचीन देवी मंदिर द्वारका पुरी दिल्ली गेट के पीठाधीश्वर महंत गिरिशानंद गिरि महाराज ने भगवान दूधेश्वर की पूजा-अर्चना, अभिषेक व धूप आरती व दीप आरती की। भगवान को छप्पन भोग अर्पित किए गए। श्री दूधेश्वर विकास समिति के अध्यक्ष अनुज गर्ग  की ओर से शिवभक्तों व कांवड़ियों की सेवा की गई और उनके लिए भोजन, चिकित्सा आदि की सुविधा उपलब्ध कराई। उन्होंने शभू दयाल इंटर कॉलेज व डिग्री कॉलेज में कांवड़ियों के आवास आदि का प्रबंध भी किया। भगवान का श्रृंगार मंदिर की श्रृंगार समिति के अध्यक्ष विजय मित्तल ने किया। मंदिर के मीडिया प्रभारी एस आर सुथार ने बताया किं शिवभक्तों व कांवडियों की भीड़ व भारी बारिश के बावजूद जलाभिषेक में कोई दिक्कत नहीं आई और भगवान दूधेश्वर का जलाभिषेक निरंतर चलता रहा। 




शिवभक्तों व कांवड़ियों की अलग-अलग कतार लगाई गई। मंदिर के 500 से अधिक स्वयंसेवक भी व्यवस्था में सहयोग के लिए तैनात रहे। मंदिर में आठ प्रहर की पूजा-अर्चना प्रबंधक आचार्य अमित कुमार शर्मा, आचार्य तयोराज उपाध्याय, अनिल पाढी, लक्ष्मीकांत पाढी, रोहित त्रिपाठी नित्यानंद आचार्य आदि ने कराई। पूजा-अर्चना की व्यवस्था में शंकर झा का भी सहयोग रहा।  जलहरी को 6 माह के लिए हटा दिया गया। अब जलहरी की पुनः स्थापना 6 माह बाद महाशिवरात्रि पर की जाएगी। सुरक्षा के विशेष प्रबंध किए गए। मंदिर ही नहीं आसपास के क्षेत्रों में भी जवान तैनात रहे। महिला पुलिसकर्मी भी तैनात रहे। सीसीटीवी से भी आने-जाने वाले लोगों पर नजर रखी गई। अधिकारियों ने भी सुरक्षा व्यवस्था व अन्य व्यवस्थाओं पर नजर रखी। मंदिर के आसपास विभिन्न धार्मिक व सामाजिक संगठनों ने कांवडियों की सेवा के लिए शिविर लगाए और उन्हें भोजन, चिकित्सा आदि की सुविधा उपलब्ध कराई। व्यवस्था में पुलिस प्रशासन,जिला प्रशासन, नगर निगम, मीडियाकर्मियों आदि सभी का सहयोग प्राप्त हुआ जिसमें जिलाधिकारी रविन्द्र मादड, अतिरिक्त पुलिस आयुक्त  राजकरण नय्यर विधायक संजीव शर्मा , एसीपी उपासना पाण्डेय,प्रिया पाल एसीपी कोतवाली थानाध्यक्ष आदि सैकड़ो पुलिस अधिकारियों एवं मंदिर सेवादार कांवड़ियों ने देर रात तक जलाभिषेक किया।