बुधवार, 2 सितंबर 2026

मुख्यमंत्री ने दिया आउटसोर्स सेवाकर्मियों को बड़ा उपहार,सीएम ने आउटसोर्स कर्मियों को वितरित किए बढ़ाए गए पारिश्रमिक के चेक, पांच तारीख तक सीधे अकाउंट में जाएगा पारिश्रमिक






लखनऊ ब्यूरो

*उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम का शुभारंभ किया सीएम योगी ने, यूपीकॉस पोर्टल व वेबसाइट की लॉन्चिंग और लोगो का अनावरण भी* 

*घटना-दुर्घटना, आपदा का शिकार होने पर निर्धारित श्रेणी के अनुसार परिवार को मिलेगा 20 से 40 लाख तक दुर्घटना बीमा कवर* 

*3.5 लाख से अधिक आउटसोर्स कर्मियों को ही नहीं, पारिवारिक सदस्यों समेत 17-20 लाख लोगों को मिलेगा निगम का लाभ: सीएम योगी*

*ईपीएफ व ईएसआई का अंशदान भी जमा होगा, सरकार आउटसोर्स एजेंसी को देगी सर्विस चार्ज, कर्मचारी से नहीं होगी कटौती*

*आउटसोर्स कर्मी को सीधे निकाल नहीं सकेगी कंपनी, पहले सरकार को बताना होगा, जांच के बाद होगा निर्णय*

*‘सैफई-रामपुर सिंडिकेट’ के बाद अब एजेंसियों के माध्यम से होने वाले आउटसोर्स कर्मियों के शोषण पर होगा प्रहार* 

*किसी व्यक्ति की कृपा पर नहीं, बल्कि श्रेणी व शैक्षणिक योग्यता के अनुरूप सुनिश्चित होगा पारिश्रमिक*

*अकेला नहीं है आउटसोर्स कर्मी, उसकी समस्या को सुनने व सुलझाने का तंत्र विकसित किया सरकार ने: मुख्यमंत्री*

*लखनऊ, 2 सितंबर । मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश के आउटसोर्स कर्मियों को बुधवार को बड़ा उपहार दिया। इन कर्मियों से जुड़ी सभी समस्याओं को सुनने व सुलझाने के लिए सीएम ने उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम का शुभारंभ करने के साथ ही यूपीकॉस के पोर्टल व वेबसाइट की लॉन्चिंग और इसके लोगो का अनावरण भी किया। इस अवसर पर उन्होंने आउटसोर्स कर्मियों को बढ़ाए गए पारिश्रमिक के चेक सौंपे तथा 40 लाख रुपये तक का दुर्घटना बीमा कवर भी प्रदान किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि निगम बनने से 3.5 लाख से अधिक आउटसोर्स कर्मियों को ही नहीं, बल्कि उनके पारिवारिक सदस्यों समेत 17-20 लाख व्यक्तियों को इसका लाभ मिलेगा। 

*आउटसोर्स कर्मचारियों की गरिमा स्थापित करने का प्रयास*  

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में यूपी की साढ़े 9 वर्ष में विकास यात्रा का श्रेय नगर निकाय कर्मियों, पंप ऑपरेटरों, सचिवालयों, चिकित्सालयों व शासन व्यवस्था से जुड़े स्थायी, संविदा व आउटसोर्स कर्मियों को दिया। उन्होंने कहा कि यह शासन की जिम्मेदारी है कि हर व्यक्ति को गरिमा के अनुरूप सम्मान प्राप्त हो। उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम के जरिए हमारी सरकार का प्रयास इसी गरिमा व गौरव को स्थापित करना है।

*सरकार ने समझी पीड़ा, दूर की चिंता*

मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले की व्यवस्था तीन खेमों में बंटी थी। एक तरफ कार्मिक, दूसरी तरफ एजेंसी और तीसरी तरफ सरकारी विभाग होता था। कर्मचारी समस्या लेकर अलग-अलग दरवाजों पर जाता था, लेकिन सुनवाई नहीं होती थी। वेतन की चिंता, सामाजिक व सेवा संबंधी सुरक्षा की गारंटी भी नहीं थी। तब इन कर्मियों का प्रश्न होता था कि आखिर मेरी पीड़ा कौन सुनेगा, मेरे परिवार की चिंता कौन करेगा। हमारा मानना है कि सरकार व कर्मचारी का रिश्ता केवल वेतन और कार्य का नहीं हो सकता, वह विश्वास और जिम्मेदारी का होता है। कर्मचारी का जीवन कागजों व कार्यालयों के चक्कर में न बीते। उसे महसूस होना चाहिए कि उसके बेहतर काम का रिकॉर्ड और अधिकारों को सुरक्षित रखा जा रहा है। वह अकेला नहीं, उसकी समस्या को सुनने का भी तंत्र है। समय से वेतन, भविष्य निधि, बीमा अधिकार, मेहनत के अनुरूप मानदेय हर कार्मिक का अधिकार है और सरकार ने यही सुनिश्चित किया है।


*सामाजिक के साथ आर्थिक भेदभाव भी नहीं होना चाहिए*

सीएम ने कहा कि जब कर्मचारियों से मानदेय पूछते थे तो कोई 8 हजार, कोई  11 हजार बताता था। जो 9 हजार बताते थे, उन्हें भी 6 हजार ही मिलता था। हमारा मानना है कि सामाजिक भेदभाव दूर करने के लिए आर्थिक भेदभाव भी दूर किया जाना चाहिए। व्यक्ति को मेहनत का उचित मानदेय मिलना ही श्रम का सम्मान है। उसे सामाजिक सुरक्षा की गारंटी, बल्कि घटना-दुर्घटना पर बीमा कवर भी मिलना चाहिए। हमारी सरकार ने संवेदनशीलता को सुशासन की पहली शर्त मानते हुए आउटसोर्स सेवा निगम का गठन किया। इसके माध्यम से हर कार्मिक को संस्थागत सुरक्षित भविष्य प्राप्त होगा। इस व्यवस्था के लागू होने के बाद अधिकार किसी व्यक्ति की कृपा पर नहीं, बल्कि मेहनत से प्राप्त होगा। व्यवस्था में बिचौलियों की जगह नहीं होगी। पोर्टल पर सारी जानकारी उपलब्ध होगी। अब कर्मचारी अकेला नहीं है, निगम उसके साथ होगा। 


*20 लाख लोगों को मिल सकेगा सुरक्षा कवर* 

मुख्यमंत्री ने कहा कि जब किसी को समय पर अधिकार मिलता है तो उसका लाभ केवल एक व्यक्ति को नहीं मिलता। बच्चे की पढ़ाई, मां की दवाई, बेटी का भविष्य सुनिश्चित होता है। परिवार को भरोसा मिलता है कि मेहनत बेकार न जाएगी। सरकार निगम के माध्यम से 20 लाख लोगों को सुरक्षा कवर प्रदान करना चाहती है। अब सरकारी विभाग, आउटसोर्स एजेंसी व कर्मचारी आधुनिक, पारदर्शी, तकनीक आधारित व्यवस्था से जुड़ जाएंगे। मैनपावर की आवश्यकता का आकलन, रिक्तियों का पूर्वानुमान व मानव संसाधन की योजना बनाई जा सकेगी। 


*श्रेणी व शैक्षणिक योग्यता के अनुरूप होगा पारिश्रमिक* 

सीएम ने कहा कि राज्य सरकार की आरक्षण नीतियों के अनुरूप योग्यता व मेरिट के आधार पर भर्ती प्रक्रिया ऑनलाइन व पारदर्शी होगी। भर्ती, पोस्टिंग, उपस्थिति, मानदेय, ग्रेच्युटी, बीमा व सेवा लाभ की डिजिटल मॉनिटरिंग भी होगी। कर्मचारी अब सेवा विवरण, अकाउंट, उपस्थिति, भुगतान व कटौती आदि एक ही जगह देख सकेगा। यहीं शिकायत दर्ज कराकर समय से निराकरण भी पा सकेगा। श्रेणी व शैक्षणिक योग्यता के अनुरूप प्रत्येक कर्मचारी का पारिश्रमिक भी सुनिश्चित होगा। 

*पांच तारीख तक अकाउंट में जाएगा पारिश्रमिक* 

मुख्यमंत्री ने कहा कि 1 से 5 तारीख तक सीधे बैंक अकाउंट में पारिश्रमिक जाएगा। नियमित रूप से ईपीएफ व ईएसआई का अंशदान भी जमा होगा। सरकार आउटसोर्स एजेंसी को सर्विस चार्ज देगी, वे कर्मचारी के पैसे से कटौती नहीं सकेंगे। कंपनी किसी आउटसोर्स कर्मी को निकाल नहीं सकेगी। वह पहले सरकार को बताएगी, जिसकी जांच होगी। कंपनी की रिपोर्ट गलत हुई तो कर्मचारी का उत्पीड़न नहीं हो पाएगा।

*मातृत्व अवकाश सहित सभी वैधानिक सेवा लाभ भी*

मुख्यमंत्री ने कहा कि हम ईएसआई अंशदान का पैसा ईएसआई अस्पतालों में निशुल्क उपचार के लिए देंगे, यदि वहां किसी उपचार की सुविधा नहीं मिली तो आयुष्मान भारत से इसे जोड़ेंगे। इससे आउटसोर्स कर्मी व परिवार को पांच लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा कवर भी मिलेगा। मातृत्व अवकाश सहित सभी वैधानिक सेवा लाभ भी सुनिश्चित किए जाएंगे। 

20 से 40 लाख तक दुर्घटना बीमा कवर

सीएम ने आउटसोर्स सेवा निगम के साथ एसबीआई के एमओयू का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि मानदेय सीधे बैंक में जाएगा और घटना-दुर्घटना, आपदा का शिकार होने पर निर्धारित श्रेणी के अनुसार 20 से 40 लाख तक का दुर्घटना बीमा कवर परिवार को मिलेगा। अग्निकांड का शिकार होने पर 10 लाख, आकस्मिक दवा के लिए पांच लाख, आपात स्थिति में एयर एंबुलेंस की सुविधा के लिए 10 लाख, बेटे की शिक्षा के लिए 8 लाख, बेटी की शिक्षा के लिए 10 लाख रुपये तक मिलेगा। दो पुत्रियों के विवाह के लिए 8-10 लाख तक तथा किसी कर्मचारी की मृत्यु पर बैंक के माध्यम से निगम परिजनों को तत्काल 50 हजार रुपये उपलब्ध कराएगा। जीरो बैलेंस पर बैंक खाता खुलेगा और इसके माध्यम से परिवार के चार सदस्यों को विशेष सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। अब आउटसोर्स कर्मचारियों को ऑर्गनाइज्ड, स्किल्ड, सिक्योर व डिग्निफाइड वर्कफोर्स में बदलने वाला निगम प्रारंभ हो रहा है। 

*पहले सत्ताधारी लोगों के रिश्तेदारों की थीं कंपनियां*

सीएम ने आरोप लगाया कि 2017 के पहले की सरकारें आउटसोर्स कर्मचारियों को बोझ मानती थीं। उस समय उन्होंने जो कंपनियां रखी थीं, उसमें अधिकतर सत्ताधारी लोगों के रिश्तेदारों की थीं, जो भर्ती, यूनिफॉर्म व अन्य कार्यों के नाम पर शोषण करती थीं। भाजपा सरकार ने कर्मचारियों को बोझ नहीं, बल्कि मानव संसाधन के रूप में संपत्ति माना है। 

*कभी नहीं बदलेगी मानव श्रम की गरिमा*

सीएम ने कहा कि ऑर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, ऑटोमेशन व नई अर्थव्यवस्था के दौर में कार्य की प्रकृति बदल रही है, लेकिन मानव के श्रम की गरिमा कभी नहीं बदलेगी। टेक्नोलॉजी जितना आगे जाएगी, गवर्नेंस को उतना अधिक मानवीय होना पड़ेगा। साढ़े 9 वर्ष में डबल इंजन सरकार ने भय-अराजकता से मुक्ति दिलाई तो पारदर्शिता के साथ नई कार्य संस्कृति को भी बढ़ाया। व्यवस्था के किनारे खड़े व्यक्ति को मुख्यधारा में लाया गया। यूपी की अर्थव्यवस्था में किसान, नौजवान, महिलाएं, कारीगर, रेहड़ी-पटरी वाले, मेहनतकश नागरिक, सूक्ष्म-लघु-मध्यम उद्यम से जुड़े उद्यमी, स्टार्टअप शुरू करने वाले युवा से लेकर सरकारी कर्मचारी और आउटसोर्स कर्मचारी मजबूत भागीदारी निभा रहे हैं। 

*किसानों को उद्यमिता से जोड़ रही सरकार*

सीएम योगी ने कहा कि सरकार ने किसानों को बाजार तक पहुंच दी। उसे तकनीक, सिंचाई, बीमा और सीधे भुगतान से जोड़ा। हमारी सोच है कि किसान सिर्फ खेती न करे, बल्कि कृषि अर्थव्यवस्था का मजबूत उद्यमी भी बने। 2017 से पहले कारीगरों में निराशा थी। पिछली सरकारों की अकर्मण्यता के कारण पीढ़ियों का धंधा चौपट हो चुका था। हमारी सरकार ने एक जनपद-एक उत्पाद योजना लागू की, उसे तकनीक, बाजार दिया। आज कारीगर उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। 

*अब दौड़ रहा है उत्तर प्रदेश*

सीएम ने कहा कि पहले छोटे उद्यमी विभागों में चक्कर लगाते थे। हमने एमएसएमई के लिए पहले उद्योग लगाने और 1000 दिन में एनओसी की व्यवस्था बनाई। आज 96 लाख एमएसएमई यूनिट में 3.15 करोड़ से अधिक लोग काम कर रहे हैं। हमने सिंगल विंडो सिस्टम बनाया। अब उत्तर प्रदेश दौड़ रहा है। हमने केवल सुरक्षा नहीं दी, बल्कि प्रदेश को आर्थिक रूप से संपन्न बनाने की दिशा में भी कदम बढ़ाए हैं।

*महिला समृद्धि के लिए लगातार काम किए सरकार ने*

सीएम ने कई महिला सदस्यों वाले मिल्क प्रोड्यूसर समूहों का जिक्र करते हुए कहा कि वे झांसी, आगरा, लखनऊ, काशी, गोरखपुर, रायबरेली आदि जनपदों में सफलतापूर्वक काम कर रहे हैं। इससे 4 लाख बहनें जुड़कर आत्मनिर्भरता की कहानी कह रही हैं। राज्य में स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर लगभग 1 करोड़ महिलाएं प्रदेश की प्रगति को गति दे रही हैं। 

*छह महीने में एक लाख युवाओं को सरकारी नौकरी मिलेगी*

मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 के पहले भर्ती निकलती थी तो युवा को पेपर लीक समेत कई चुनौतियों से जूझना पड़ता था। हमने यूपी सरकार के सभी आयोग व बोर्ड में आवश्यक बदलाव किए। सुनिश्चित किया कि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने पर जेल और संपत्ति जब्त होगी। अगले छह महीने में एक लाख नए युवाओं को सरकारी नौकरी मिलेगी। यूपी पुलिस में 2.25 लाख भर्ती की गईं। 2017 से पहले यूपी पुलिस में 10 हजार महिला कार्मिक थीं, अब 44 हजार हैं और नई भर्ती के बाद 11-12 हजार और भर्ती हो जाएंगी। यूपी में 50 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव आए। पहले बड़े उद्योग महज 14 हजार थे, अब यह संख्या 35 हजार होने जा रही है। 2017 के पहले 120 स्टार्टअप थे, आज 24 हजार से अधिक हैं।


‘सैफई-रामपुर सिंडिकेट’ के बाद अब एजेंसियों के शोषण पर प्रहार

सीएम ने कहा कि हम युवाओं को स्किल, इनोवेशन व टेक्नोलॉजी से जोड़कर मार्केट-इंडस्ट्री रेडी वर्कफोर्स के रूप में तैयार कर रहे हैं। एआई, रोबोटिक्स, इंटरनेट ऑफ थिंग्स के साथ थ्री-डी प्रिटिंग की ट्रेनिंग दी जा रही है। यूपी के हर मंडल में एक विश्वविद्यालय है। अब यूनिवर्सिटी बनाने के लिए ‘रामपुर सिडिंकेट’ व अन्य लोगों के लिए अलग-अलग प्रावधान जैसा नहीं है। 2017 के पहले ‘सैफई-रामपुर सिंडिकेट’ व्यवस्था का खून चूसता था। एजेंसियों के माध्यम से शोषण होता था। आउटसोर्स निगम के माध्यम से अब तीसरे सिंडिकेट पर भी प्रहार होगा।

इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य व ब्रजेश पाठक समेत कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।

इस्कॉन संतों ने अभिषेक गर्ग को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव में किया आमंत्रित

 



मुकेश गुप्ता

गाजियाबाद । समाजवादी पार्टी के प्रदेश सचिव अभिषेक गर्ग के गाजियाबाद स्थित कार्यालय पर इस्कॉन मंदिर, गाजियाबाद के संतों एवं पुजारीगणों का स्नेहपूर्ण आगमन हुआ। संतों ने आगामी 4 सितंबर 2026 को आयोजित होने वाले श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव में शामिल होने के लिए अभिषेक गर्ग को सादर आमंत्रित किया।

संतों के आत्मीय निमंत्रण पर अभिषेक गर्ग ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए सभी संतों एवं पुजारीगणों का स्वागत और आभार जताया। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण जन्माष्टमी श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक चेतना का पावन पर्व है। भगवान श्रीकृष्ण के जीवन और उनके संदेश से समाज को सत्य, धर्म, कर्म एवं मानवता के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है।

इस अवसर पर अभिषेक गर्ग ने आदि कर्ता दास, धनंजय जगन्नाथ दास, सुरेश्वर दास, धीर योगेश्वर दास एवं अधोक्षज धाम दास का हार्दिक अभिनंदन किया। उन्होंने कहा कि संतों का स्नेह और आशीर्वाद सदैव समाज के लिए प्रेरणादायी है। उन्होंने श्रद्धालुओं से जन्माष्टमी महोत्सव में बढ़-चढ़कर सहभागिता करने का आह्वान किया।

राज कुमार गोयल इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में “मशीन लर्निंग इन एक्शन” पर विशेष कार्यशाला का आयोजन

 


मुकेश गुप्ता

गाजियाबाद । राज कुमार गोयल इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी , गाजियाबाद के कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग द्वारा युक्टि सॉफ्टवेयर्स के साथ हुए एमओयू के अंतर्गत “मशीन लर्निंग इन एक्शन: डेटा → मॉडल → प्रेडिक्शन” विषय पर एक विशेष तकनीकी कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों को मशीन लर्निंग की मूल अवधारणाओं के साथ-साथ इसके व्यावहारिक उपयोग एवं वास्तविक जीवन में इसकी भूमिका से परिचित कराना रहा। 

कार्यशाला का आयोजन 31 अगस्त 2026 को किया गया, जिसमें मुख्य रूप से सीएसई तृतीय वर्ष के विद्यार्थियों ने प्रतिभाग किया। कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों को डेटा तैयार करने, मशीन लर्निंग मॉडल को प्रशिक्षित करने तथा उससे प्रेडिक्शन प्राप्त करने की पूरी प्रक्रिया को सरल एवं व्यावहारिक तरीके से समझाया गया। 

कार्यशाला में युक्टि सॉफ्टवेयर्स, ग्रेटर नोएडा के विशेषज्ञ  मिथिलेश कुमार एवं श्रीमती मनीषा कुमारी ने अतिथि वक्ता के रूप में विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया। दोनों विशेषज्ञों ने अपने तकनीकी एवं शिक्षण अनुभव को विद्यार्थियों के साथ साझा करते हुए मशीन लर्निंग और आधुनिक तकनीकी क्षेत्र की संभावनाओं से अवगत कराया। 

कार्यशाला में वास्तविक जीवन की समस्याओं में मशीन लर्निंग के उपयोग, डेटा की भूमिका तथा डेटा → मॉडल → प्रेडिक्शन कार्यप्रवाह पर विशेष जोर दिया गया। विद्यार्थियों को व्यावहारिक उदाहरणों एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण के माध्यम से तकनीकी अवधारणाओं को समझने का अवसर मिला, जिससे उनमें मशीन लर्निंग के प्रति रुचि और तकनीकी कौशल को बढ़ावा मिला। 

इस संपूर्ण आयोजन का मार्गदर्शन डॉ. अमित सिंघल (विभागाध्यक्ष, सीएसई विभाग) द्वारा किया गया, जबकि कार्यक्रम के फैकल्टी कोऑर्डिनेटर की भूमिका डॉ. विनीत श्रीवास्तव ने निभाई। 

कार्यक्रम के समापन पर संस्थान के वाइस चेयरमैन अक्षत गोयल, एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर डॉ. डी. के. चौहान, डायरेक्टर डॉ. बी. सी. शर्मा, डीन एकेडमिक्स डॉ. आर. के. यादव एवं डॉ. रामेंद्र सिंह ने इस सफल आयोजन के लिए आयोजकों एवं प्रतिभागी विद्यार्थियों को धन्यवाद एवं शुभकामनाएं दीं।

मसूरी गोलीकांड की बरसी पर उत्तराखण्ड राज्य आंदोलन के अमर बलिदानियों को परमार्थ निकेतन से भावपूर्ण श्रद्धांजलि

 



संवाददाता

शहीदों को समर्पित की आज की दिव्य गंगा आरती

ऋषिकेश, 2 सितंबर। मसूरी गोलीकांड की बरसी पर उत्तराखण्ड राज्य आंदोलन के उन अमर बलिदानियों को परमार्थ निकेतन से भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की गई, जिन्होंने पृथक उत्तराखण्ड राज्य के निर्माण के लिए अपने साहस, संघर्ष, संकल्प और सर्वोच्च बलिदान से इतिहास में अमिट छाप छोड़ी। इन वीर आंदोलनकारियों की शहादत उत्तराखण्ड की राज्य निर्माण यात्रा का अत्यंत मार्मिक और गौरवपूर्ण अध्याय है।

पृथक उत्तराखण्ड राज्य की मांग केवल एक राजनीतिक मांग नहीं थी, बल्कि यह पर्वतीय जनजीवन, उसकी विशिष्ट आवश्यकताओं, संस्कृति, परंपराओं, प्राकृतिक संसाधनों और स्वाभिमान की आवाज थी। दशकों तक चले इस आंदोलन में मातृशक्ति, युवाओं, विद्यार्थियों, कर्मचारियों, किसानों और समाज के विभिन्न वर्गों ने एकजुट होकर संघर्ष किया। अनेक आंदोलनकारियों ने अपने जीवन की आहुति दी और असंख्य लोगों ने कठिनाइयों, यातनाओं और संघर्षों को सहते हुए राज्य निर्माण के संकल्प को जीवंत रखा।

मसूरी गोलीकांड की घटना हमें उन कठिन दिनों की स्मृति कराती है, जब उत्तराखण्ड के लोगों ने अपने अधिकार और अपनी पहचान के लिए लोकतांत्रिक संघर्ष किया। इस अवसर पर उन सभी ज्ञात-अज्ञात आंदोलनकारियों और शहीदों को नमन है, जिनके त्याग और संघर्ष के कारण आज उत्तराखण्ड एक पृथक राज्य के रूप में हमारे सामने है।

अमर बलिदानियों का जीवन और उनका संघर्ष वर्तमान पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनकी शहादत हमें यह संदेश देती है कि किसी भी महान परिवर्तन के पीछे त्याग, तपस्या, धैर्य और सामूहिक संकल्प की शक्ति होती है। उत्तराखण्ड राज्य हमें संघर्ष और बलिदान की विरासत में मिला है, इसलिए इस राज्य की प्रगति और समृद्धि केवल विकास के आंकड़ों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसका उद्देश्य यहां के लोगों के जीवन में वास्तविक खुशहाली, सम्मान और अवसर सुनिश्चित करना भी होना चाहिए।

आज आवश्यकता है कि हम शहीदों के सपनों के उत्तराखण्ड की कल्पना को व्यापक अर्थों में समझें। ऐसा उत्तराखण्ड, जहां विकास और पर्यावरण एक-दूसरे के पूरक हों, जहां हमारी पवित्र नदियां निर्मल रहें, हिमालय सुरक्षित रहे, वन और जैव-विविधता संरक्षित रहें तथा गांवों में रोजगार और शिक्षा के पर्याप्त अवसर उपलब्ध हों। ऐसा उत्तराखण्ड, जहां पलायन की विवशता कम हो और युवा अपने ही प्रदेश में अपनी प्रतिभा और क्षमता का उपयोग करते हुए प्रदेश के निर्माण में सहभागी बन सकें।

उत्तराखण्ड की पहचान केवल इसके सुंदर पर्वतीय भू-दृश्यों से नहीं, बल्कि इसकी आध्यात्मिक चेतना, देवभूमि की परंपरा, लोकसंस्कृति, लोकभाषाओं, लोककलाओं और प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व की जीवनशैली से भी है। राज्य आंदोलन के बलिदानियों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि हम इस विरासत को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखें।

आज जब पूरा विश्व पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास की दिशा में आगे बढ़ने का प्रयास कर रहा है, उत्तराखण्ड के पास प्रकृति और संस्कृति के संतुलन का अपना प्राचीन ज्ञान है। हिमालय और गंगा केवल उत्तराखण्ड की प्राकृतिक धरोहर नहीं, बल्कि भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक चेतना के आधार हैं। इसलिए इनके संरक्षण को उत्तराखण्ड के विकास की मूल धारा से जोड़ना समय की आवश्यकता है।

शहीदों के सपनों का उत्तराखण्ड वह होगा जहां आधुनिक शिक्षा के साथ संस्कार हों, विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण हो, पर्यटन के साथ स्थानीय समुदायों की समृद्धि हो, आध्यात्मिकता के साथ सेवा की भावना हो और आधुनिक तकनीक के साथ अपनी जड़ों से जुड़ाव बना रहे।

इस पावन अवसर पर हम सभी का दायित्व है कि उत्तराखण्ड राज्य आंदोलन के इतिहास को केवल स्मरण करने तक सीमित न रखें, बल्कि उसके मूल्यों को अपने जीवन और कार्यों में उतारें। युवाओं को राज्य आंदोलन के इतिहास, आंदोलनकारियों के संघर्ष और शहीदों के योगदान से परिचित कराना भी हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है, ताकि आने वाली पीढ़ियां समझ सकें कि उत्तराखण्ड का निर्माण किन संघर्षों और बलिदानों की नींव पर हुआ है।

आइए, इस बरसी पर हम उत्तराखण्ड के अमर बलिदानियों को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए यह संकल्प लें कि उनके त्याग को व्यर्थ नहीं जाने दें। हम ऐसा उत्तराखण्ड बनाने के लिए मिलकर कार्य करेंगे जो विकास की दृष्टि से सशक्त, पर्यावरण की दृष्टि से सुरक्षित, संस्कृति की दृष्टि से समृद्ध, आध्यात्मिक दृष्टि से जागृत और मानवीय मूल्यों की दृष्टि से आदर्श हो।

उत्तराखण्ड के अमर शहीदों को शत्-शत् नमन। उनका बलिदान हमारी प्रेरणा है, उनका संघर्ष हमारी विरासत है और उनके सपनों का उत्तराखण्ड हमारा संकल्प है।

मंगलवार, 1 सितंबर 2026

12 सितंबर को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत की तैयारियों को लेकर जनपद न्यायाधीश ने जिला स्तरीय अधिकारियों के साथ की समीक्षा बैठक



 


                           गौरव गुप्ता

गौतमबुद्धनगर 1 सितंबर 2026। जनपद न्यायाधीश गौतमबुद्धनगर अतुल श्रीवास्तव की अध्यक्षता में आज न्यायालय सभागार में जिला स्तरीय अधिकारियों की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता करते हुये मा0 जनपद न्यायाधीश ने बताया कि जनपद मुख्यालय स्थित दीवानी न्यायालय तथा समस्त तहसील न्यायालयों में 12 सितम्बर 2026 को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जायेगा।

      राष्ट्रीय लोक अदालत में मोटर दुर्घटना प्रतिकर अधिनियम के वाद, वैवाहिक वाद, भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम के वाद, दीवानी वाद, एमवी एक्ट एवं ई-चालान के वाद, आर्बिट्रेशन के वाद, लघु शमनीय वाद, धारा 138 एनआई एक्ट के वाद, विद्युत अधिनियम के वाद, भू-राजस्व के वाद तथा अन्य सुलह योग्य मामलों का निस्तारण किया जाएगा। इसके अतिरिक्त सेवा संबंधी मामले, पेंशन के मामले, श्रम संबंधी मामले तथा प्री-लिटिगेशन स्तर पर बैंक ऋण से संबंधित मामलों को भी आपसी सुलह-समझौते के माध्यम से निस्तारित किया जाएगा। वहीं विद्युत एवं बीएसएनएल के टेलीफोन बिल से संबंधित मामलों का भी पक्षकारों की सहमति से निस्तारण कराया जा सकेगा।

      बैठक में जनपद न्यायाधीश ने कहा कि आम नागरिकों को सरल, सहज एवं त्वरित न्याय उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राष्ट्रीय लोक अदालत का नियमित आयोजन किया जा रहा है। अतः सभी विभागीय अधिकारी अपने अपने विभागों से संबंधित वादों का पूर्व चिन्हांकन कर समयबद्ध तैयारी सुनिश्चित करें, जिससे 12 सितम्बर को अधिक से अधिक मामलों का निस्तारण संभव हो सके और नागरिकों को अधिकतम लाभ प्राप्त हो।

     जनपद न्यायाधीश ने मुख्य प्रशासनिक अधिकारी गौतमबुद्धनगर अनुराग चंद्र सारस्वत को निर्देशित करते हुए कहा कि उनके अधीन आने वाले सभी विभागों में लंबित वादों की अग्रिम पहचान कर त्वरित निस्तारण की तैयारी तत्काल प्रारंभ की जाए। इसी प्रकार पुलिस विभाग, श्रम विभाग, परिवहन विभाग, विद्युत विभाग,एनपीसीएल, स्वास्थ्य विभाग, बीएसएनएल एवं अन्य सभी संबद्ध विभागों को भी व्यापक स्तर पर तैयारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने यह भी अपेक्षा व्यक्त की कि राष्ट्रीय लोक अदालत के लाभ को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने के लिए व्यापक प्रचार प्रसार अभियान संचालित किया जाए, ताकि अधिकाधिक वादकारी इस अवसर का लाभ उठाकर अपने मामलों का सौहार्दपूर्ण निस्तारण करा सकें।

      जनपद न्यायाधीश ने यह भी बताया कि मामलों के निस्तारण हेतु पक्षकार संबंधित न्यायालय में संपर्क स्थापित कर सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, गौतमबुद्धनगर के ई-मेल dlsa.gbnnoida@gmail.com अथवा मोबाइल नंबर 9716535451 एवं 7678643985 पर संपर्क किया जा सकता है।

      बैठक में अपर जिला जज/विशेष न्यायाधीश (एससी/एसटी एक्ट)/ नोडल अधिकारी राष्ट्रीय लोक अदालत सोमप्रभा मिश्रा, सचिव (पूर्णकालिक) जिला विधिक सेवा प्राधिकरण शिवानी रावत, मुख्य विकास अधिकारी भाल चंद्र त्रिपाठी, प्रभारी जिला विकास अधिकारी/परियोजना निदेशक डीआरडीए नेहा सिंह सहित प्राधिकरण, पुलिस एवं विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारीगण उपस्थित रहे।

      

सरकारी सेवाओं में पारदर्शिता के साथ योग्यता को सर्वोच्च प्राथमिकता सुनिश्चित करना सरकार का लक्ष्यः मुख्यमंत्री,मुख्यमंत्री योगी से मिले प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में नवचयनित 40 अधिकारी

 


सत्ता बन्धु संवाददाता

40 अधिकारियों का हुआ चयन, 21 विभिन्न आईआईटी से शिक्षित, 8 महिला अधिकारी भी शामिल

मुख्यमंत्री के निर्देश पर बदली चयन प्रक्रिया, पहली बार लिखित परीक्षा और साक्षात्कार के आधार पर हुआ चयन*

लखनऊ, 1 सितंबर । उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में समूह ‘ख’ के अधिकारियों की नियमित भर्ती पूरी होने के बाद नवचयनित 40 अधिकारियों ने मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भेंट की। मुख्यमंत्री ने सभी चयनित अधिकारियों को बधाई देते हुए कहा कि लंबे अंतराल के बाद हुई इस भर्ती से बोर्ड की कार्यक्षमता मजबूत होगी और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कार्यों को नई गति मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार का लक्ष्य सरकारी सेवाओं में ऐसी चयन व्यवस्था को मजबूत करना है, जिसमें पारदर्शिता के साथ योग्यता को सर्वोच्च प्राथमिकता मिले। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में लागू की गई नई भर्ती प्रक्रिया इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की जिम्मेदारी सीधे प्रदेश के पर्यावरण और लोगों के स्वस्थ जीवन से जुड़ी है। ऐसे में नवचयनित अधिकारी अपनी तकनीकी दक्षता का इस्तेमाल पूरी जिम्मेदारी, संवेदनशीलता और ईमानदारी के साथ करें। उन्होंने अधिकारियों को प्रशिक्षण को गंभीरता से लेने और विभागीय कार्यप्रणाली के साथ मैदानी स्तर की चुनौतियों को समझने के निर्देश दिए। 

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में समूह ‘ख’ के 26 सहायक पर्यावरण अभियंता और 14 सहायक वैज्ञानिक अधिकारी, कुल 40 अधिकारियों का चयन किया गया है। चयनित अधिकारियों में 21 विभिन्न आईआईटी से शिक्षित हैं, जबकि अन्य अधिकारियों ने देश और प्रदेश के प्रतिष्ठित संस्थानों से शिक्षा प्राप्त की है। चयनित अधिकारियों में 8 महिलाएं भी शामिल हैं।

इस भर्ती की खास बात यह रही कि मुख्यमंत्री के निर्देश और सिद्धांतों के अनुरूप चयन प्रक्रिया में बदलाव किया गया। पहले बोर्ड में समूह ‘ख’ के अधिकारियों की भर्ती मुख्य रूप से केवल साक्षात्कार के आधार पर की जाती थी। पुरानी विनियमावली, 1995 में संशोधन कर चयन प्रक्रिया को लिखित परीक्षा और साक्षात्कार आधारित द्विस्तरीय व्यवस्था में बदला गया। नई व्यवस्था में लिखित परीक्षा को 85 प्रतिशत और साक्षात्कार को 15 प्रतिशत अंक का वेटेज दिया गया। इससे चयन में शैक्षणिक एवं तकनीकी योग्यता को प्रमुख आधार बनाया गया।

संशोधित विनियमावली के बाद 27 फरवरी, 2026 को 26 सहायक पर्यावरण अभियंता और 14 सहायक वैज्ञानिक अधिकारी पदों के लिए विज्ञापन जारी किया गया। 27 अप्रैल को प्रदेश के विभिन्न शहरों में एक साथ लिखित परीक्षा आयोजित हुई, जिसका आयोजन आईआईटी कानपुर के माध्यम से कराया गया। लिखित परीक्षा का परिणाम 8 जून को घोषित किया गया। इसके बाद उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की अध्यक्षता में चार साक्षात्कार पैनल गठित किए गए । पैनल में विभिन्न आईआईटी और विश्वविद्यालयों के विशेषज्ञों को भी शामिल किया गया। 4 जुलाई को साक्षात्कार पूरा हुआ और 8 जुलाई को अंतिम परिणाम घोषित किया गया।

इस बार नवचयनित अधिकारियों को सीधे क्षेत्र में तैनाती देने के बजाय प्रशिक्षण की व्यवस्था की गई है। मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुसार अधिकारियों के लिए एक माह का प्रशिक्षण कार्यक्रम निर्धारित किया गया है। प्रशिक्षण के तहत एक सप्ताह का कार्यक्रम आईआईएम, लखनऊ में आयोजित किया जा रहा है। सरकार का मानना है कि तकनीकी रूप से दक्ष अधिकारियों की नियमित भर्ती और उन्हें प्रशिक्षण देने से प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की निगरानी, पर्यावरणीय मानकों के अनुपालन और मैदानी कार्यों की प्रभावशीलता में सुधार होगा।

इस्कॉन मंदिर में इसबार श्री कृष्ण का श्रंगाररहेगा आर्कषण का केन्द्र, कयूआर कोड से होगें वीआईपी दर्शन- आदिकर्ता दास

 



मुकेश गुप्ता

गाजियाबाद । राजनगर स्थित इस्कॉन मंदिर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव को भव्य बनाने के लिए बड़े स्तर पर तैयारी जोरों पर हैं। इस्कॉन मंदिर को फूल बंगले में तब्दील किया जाएगा, साथ ही 24 घंटे अखंड हरिनाम संकीर्तन होगा तो वहीं रात्रि 12 बजे महाआरती विशेष आकर्षण का केन्द्र रहेगी। 4 सितंबर जन्माष्टमी पर इस बार वीवीआईपी भक्तजनो के लिए डिजिटल पास कयूआर कोड बनाएं जाएंगे। जो भी भक्त पखस बनाना चाहे अपने मोबाइल से बना लेगा।

यह जानकारी मंगलवार को प्रेसवार्ता में इस्कॉन मंदिर के अध्यक्ष आदिकर्ता प्रभु ने दी। उन्होंने बताया कि बताया कि जन्माष्टमी महोत्सव को लेकर मंदिर प्रशासन एवं सभी सेवकों द्वारा विशेष तैयारियां की जा रही हैं। जन्माष्टमी केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि भगवान श्रीकृष्ण के साथ अपने शाश्वत संबंध को पुनः जागृत करने और उनके चरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित करने का पावन अवसर है। अखंड संकीर्तन के साथ ही हरे कृष्ण, हरे राम महामंत्र का नृत्य एवं संकीर्तन भी आयोजित होगा। मंदिर के उपाध्यक्ष धनंजय जगन्नाथ प्रभु ने बताया कि जन्माष्टमी पर सैंकड़ों की संख्या में भक्त दर्शनो के लिए पहुंचते हैं। इसके लिए विशेष व्यवस्था की जा रही है। चार सितम्बर को श्रीकृष्ण के लिए मंदिर को फूल बंगले में तब्दील किया जाएगा जिसमें देशी-विदेशी फूलों से सजावट की जाएगी। भगवान को 108 व्यंजनों का भोग लगाया जाएगा व प्रकाट्य उत्सव के दौरान दिव्य अभिषेक किया जाएगा। उन्होंने बताया कि जन्माष्टमी के पूरे दिन भगवान के दिव्य दर्शन श्रद्धालुओं के लिए खुले रहेंगे। 

नगर निगम कार्यकारिणी उपाध्यक्ष प्रवीण चौधरी ने बताया कि पर्व के अवसर पर निगम की ओर से पेयजल, सफाई व स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था की जा रही है। जन्माष्टमी पर मंदिर बंद होने तक निगम के कर्मचारियों की डयूटी लगाई जाएगी ताकि सफाई को लेकर कोई अव्यवस्था न हो। 

मंदिर प्रबंधक सुरेश्वरदास प्रभु ने बताया कि इस पर्व पर शहर के गणमान्य लोग भी श्रीकृष्ण के दर्शन व आर्शीवाद प्राप्त करेंगे। मंदिर में एक से तीन सितम्बर तक श्रीकृष्ण कथा का आयोजन सुंदर गोपाल प्रभु द्वारा किया जा रहा है। जिसमें भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं, उनके संदेश एवं भक्ति के महत्व को सरल एवं भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया जाएगा। इस अवसर पर जोनल सुपरवाइजर सुंदर गोपाल दास, सौरभजायसवाल मौजूद रहे।

सोमवार, 31 अगस्त 2026

कजरी तीज - परंपरा से शक्ति, प्रकृति से प्रेम और शिव से जीवन का संतुलन-स्वामी चिदानन्द सरस्वती

 


                               संवाददाता

*💥कजरी तीज - प्रकृति, नारी-शक्ति और शिव-पार्वती के दिव्य संगम का पर्व*

*✨तीज, तप, प्रेम, संकल्प और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का पर्व*

ऋषिकेश, 31 अगस्त। भारतीय संस्कृति में जीवन को धर्म, प्रकृति, परिवार और आध्यात्मिक चेतना से जोड़ने वाले जीवंत संस्कार हैं। हरियाली तीज - कजरी तीज, नारी-शक्ति, प्रकृति की हरितिमा, दाम्पत्य की मंगलकामना, तपस्या, श्रद्धा और भगवान शिव एवं माता पार्वती के दिव्य प्रेम का अद्भुत समन्वय है।

श्रावण मास की हरियाली, वर्षा की फुहारें और लोकगीतों की स्वर-लहरियाँ, इन सबके मध्य तीज का पर्व भारतीय जीवन-दर्शन का यह संदेश देता है कि प्रकृति और चेतना, शक्ति और शिव, प्रेम और तप, एक-दूसरे से अलग नहीं हैं।

सनातन परंपरा में माता पार्वती अखंड नारी-शक्ति, तप, श्रद्धा और संकल्प का प्रतीक हैं। तीज का आध्यात्मिक भाव इसी शिव-पार्वती तत्त्व से जुड़ता है, जहाँ शिव चेतना हैं और शक्ति उसकी क्रियाशील अभिव्यक्ति। शिव के बिना शक्ति निष्क्रिय है और शक्ति के बिना शिव भी पूर्ण अभिव्यक्ति में नहीं आते। इसीलिए तीज केवल दाम्पत्य-सुख की कामना का पर्व नहीं, बल्कि शिव और शक्ति के सनातन ऐक्य का उत्सव है।

हरियाली तीज विशेष रूप से सावन की हरितिमा और प्रकृति के नवजीवन का दिव्य प्रतीक है। वर्षा के आगमन के साथ जब धरती हरी चादर ओढ़ती है, वृक्षों पर नई कोंपलें आती हैं और वातावरण जीवन से भर उठता है, तब सनातन     संस्कृति प्रकृति को केवल संसाधन नहीं, बल्कि माता और जीवनदायिनी शक्ति के रूप में नमन करती है। इसलिए हरियाली तीज हमें यह स्मरण कराती है कि जिस प्रकृति की हरियाली हमारे जीवन में आनंद भरती है, उसकी रक्षा करना भी हमारा धर्म है।

परमार्थ पीठाधीश्वर, पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने अपने संदेश में कहा कि तीज का पर्व हमें भारतीय संस्कृति की उस महान दृष्टि से जोड़ता है जहाँ नारी पूजनीय है, प्रकृति वंदनीय है और परिवार साधना का क्षेत्र है। नारी केवल परिवार की आधारशिला नहीं, बल्कि संस्कार, करुणा, सृजन और शक्ति की जीवंत अभिव्यक्ति है। 

पूज्य स्वामी जी ने कहा कि आज तीज के अवसर पर हमें अपनी परंपराओं को केवल बाहरी उत्सव के रूप में नहीं, बल्कि उनके आंतरिक संदेश के साथ जीने का संकल्प ले। 

आज के युवा तीज को केवल परंपरा के रूप में नहीं, बल्कि अपने भीतर की शक्ति को जगाने, रिश्तों में सम्मान बढ़ाने और प्रकृति के संरक्षण का संकल्प लेने के अवसर के रूप में मनाएँ। परंपरा से जुड़ें, प्रकृति से जुड़ें, संस्कारों से जुड़ें और अपने भीतर के शिव-तत्त्व को जगाएँ।

आज आवश्यकता है कि नई पीढ़ी तीज को केवल एक पारंपरिक उत्सव के रूप में न देखे, बल्कि समझे कि हमारी संस्कृति के प्रत्येक पर्व के पीछे जीवन को सुंदर, संतुलित, संयमित और करुणामय बनाने का संदेश छिपा है।

आइए, हरियाली तीज और कजरी तीज के पावन अवसर पर हम शिव में शांति, शक्ति में श्रद्धा, संबंधों में प्रेम और प्रकृति में परमात्मा का दर्शन करने का संकल्प लें।

जिलाधि​कारी रविन्द्र कुमार मॉंदड़ ने जनसुनवाई के दौरान पात्र को कब्जा दिलाने के एसडीएम को दिए निर्देश


                             मुकेश गुप्ता

हर व्यक्ति को न्याय व हर पीड़ित को सहायता दिलाना हमारी मुख्य जिम्मेदारी है: जिलाधि​कारी 

प्रार्थियों के लिए नरम व अपराधिक प्रवृति वालों के लिए गरम मिजाज में रहते हैं जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार मॉंदड़

गाजियाबाद। जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार मॉंदड़ ने कलेक्ट्रेट स्थित अपने कार्यालय कक्ष में जनसुनवाई कर आमजन की समस्याओं एवं शिकायतों को गंभीरता से सुना। जनसुनवाई में जनपद के विभिन्न क्षेत्रों से आए नागरिकों ने भूमि कब्जा, राजस्व विवाद, अवैध अतिक्रमण, सार्वजनिक सुविधाओं, पेंशन, राशन कार्ड, जलापूर्ति सहित अन्य जनसमस्याओं से संबंधित प्रार्थना पत्र जिलाधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किए। जिलाधिकारी ने प्रत्येक शिकायत को गंभीरता एवं संवेदनशीलता के साथ सुनते हुए संबंधित अधिकारियों को निर्धारित समयावधि में शिकायतों का गुणवत्तापूर्ण, प्रभावी एवं त्वरित निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। 

जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशानुरूप प्रत्येक शिकायतकर्ता की शिकायत का गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि जनसुनवाई में प्राप्त शिकायतों का केवल औपचारिक निस्तारण न किया जाए, बल्कि शिकायतकर्ता की समस्या का वास्तविक एवं संतोषजनक समाधान किया जाए तथा निस्तारण के उपरांत शिकायतकर्ता से फीडबैक भी लिया जाए। इस दौरान दिव्यांगजनों द्वारा जिलाधिकारी महोदय से निवेदन किया किया कि डीएम साहब ट्राईसाईकिल, रोजगार, पेशन, अंत्योदय कार्ड व आयुष्मान कार्ड तो आपके निर्देशों के क्रम में बन गए हैं कृपया आवास और दिलवा दीजिए। जिलाधिकारी ने कहा कि जल्द ही किसी योजना के तहत आप लोगों के लिए आवास की व्यवस्था कराई जायेगी।

इस दौरान कुछ प्रार्थियों के दौरान प्लाट/जमीन पर कब्जा, अपने ही मकान पर कार्य ना कराने देना सहित अन्य राजस्व से सम्बंधित अनेक शिकायतें प्राप्त हुई। खोड़ा निवासी श्रीमती सुमन द्वारा ने अपने शिकायती पत्र में कहा कि उन्होने सजवान नगर में एक प्लाट खरीदा था किन्तु उस पर दंबगों ने कब्जा कर लिया हैं जिसकी शिकायती सम्बंधित थाना व कमीश्नर साहब के यहां भी की किन्तु कोई कार्यवाही नहीं हुई। डीएम साहब हमारी सहायता करें, हमें हमारे प्लाट पर कब्जा दिलाए। जिलाधिकारी ने प्रार्थी की पूरी बात सुनी और एसडीएम सदर को निर्देशित करते हुए कहा यदि किसी पात्र या सही व्यक्ति की सम्पत्ति पर कोई कब्जा करने की कोशिश करता हैं तो उनको बाहर निकाले और सही व्यक्ति को कब्जा दिलाएं, न्याय दिलाना हमारा कार्य है। जनपद में कहीं भी किसी भी कमजोर, असहाय, गरीब व्यक्ति के सम्पत्ति पर कब्जा नहीं होना चाहिए, ना ही उनका किसी भी प्रकार का उत्पीड़न हो, इस बात का ​सभी अधिकारीगण विशेष ध्यान रखें। मुख्यमंत्री  के निर्देशों के क्रम में हर व्यक्ति को न्याय व हर पीड़ित को सहायता दिलाना हमारा मुख्य जिम्मेदारी है।

जनसुनवाई में भूपेन्द्र पुरी, मोदीनगर निवासी एक महिला श्रीमती सन्नो पत्नी सुशील ने अवगत कराया कि उनके पति सुशील को कैंसर हो गया, इसके साथ ही नन्दग्राम निवासी संदीप श्रीवास्तव ने बताया कि उनकी पुत्री को कैंसर हो गया है कृपया हमारी सहायता करें। जिलाधिकारी ने सम्बंधित अधिकारी/ बाबू को निर्देशित किया कि सीएम रिलिफ फंड से इनकी सहायता हेतु आवेदन किया जाएं साथ ही इनके आयुष्मान कार्ड भी बनाऐं जाएं जिससे इन्हें ईलाज से सम्बंधित समस्याओं को सामना ना करना पड़े। 

जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार मॉंदड़ की मानवता एवं पीड़ितों को न्याय दिलाने की इसी कार्यशैली का असर हैं कि आज हर कोई अपनी शिकायत को लेकर जिलाधिकारी के पास पहुंच जाते हैं, 10 बजे से 12 बजे तक की जनसुनवाई में भीड़ इतनी हो जाती है कि कई बार 2—3 बजे तक भी जनसुनवाई होती है।

जनसुनवाई के दौरान एडीएम प्रशासन ज्योति मौर्या, एडीएम एल/ए अवनीश सिंह, सिटी मजिस्ट्रेट सतीश चन्द्र त्रिपाठी सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित रहे।

रविवार, 30 अगस्त 2026

जरूरतमंदों की मदद को आगे आया बिराज फाउंडेशन

 





मुकेश गुप्ता

गाजियाबाद। नंदग्राम स्थित आश्रम रोड पर शनि देव मंदिर परिसर में बिराज  फाउंडेशन की ओर से जरूरतमंद लोगों की सहायता के लिए सेवा कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान फाउंडेशन के सदस्यों ने जरूरतमंदों को कपड़े, खाद्य सामग्री एवं आर्थिक सहायता प्रदान की।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जरूरतमंद लोगों को आवश्यक सामग्री वितरित की गई। फाउंडेशन के पदाधिकारियों ने कहा कि समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्ग की मदद करना प्रत्येक व्यक्ति की सामाजिक जिम्मेदारी है। इसी उद्देश्य से फाउंडेशन लगातार सेवा एवं जनकल्याण के कार्य कर रहा है।

इस अवसर पर मौजूद लोगों ने बिराज फाउंडेशन के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि जरूरतमंदों की सहायता के ऐसे कार्य समाज में सेवा, सहयोग और मानवता की भावना को मजबूत करते हैं।

फाउंडेशन की ओर से भविष्य में भी जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए इसी तरह के सेवा कार्यक्रम आयोजित करने की बात कही गई।

इस दौरान संस्थापक बिराज सिंह, संजय केसरवानी ओर आदि मौजूद रहे

विविधता हमारी सुंदरता है, एकता हमारा सत्य” न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन से ‘वन वर्ल्ड, वन ह्यूमैनिटी’ का वैश्विक संदेश

 






*✨यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन’ में डॉ. मोहन भागवत जी ने दिया मानवता की एकता, सद्भाव और समरसता का संदेश*

*🌺परमार्थ पीठाधीश्वर, पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी, डा साध्वी भगवती सरस्वती जी, पूज्य स्वामी परमात्मानन्द और दिव्य विभूतियों का पावन सान्निध्य*

💥*विभिन्न आस्थाओं, संस्कृतियों और समुदायों के प्रतिनिधियों ने ‘वसुधैव कुटुम्बकम् की भावना को साकार करने का लिया संकल्प*

न्यूयॉर्क, 29/30 अगस्त। न्यूयॉर्क के ऐतिहासिक मैडिसन स्क्वायर गार्डन में आयोजित ‘वन वर्ल्ड, वन ह्यूमैनिटी’ एवं ‘यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन’ ने मानवता की एकता, विविधता के सम्मान, धार्मिक सद्भाव, संवाद और वैश्विक शांति का शक्तिशाली संदेश दिया। भारतीय मूल के अमेरिकियों सहित विभिन्न समुदायों के प्रतिनिधियों, आध्यात्मिक एवं धार्मिक नेताओं तथा सामाजिक क्षेत्र से जुड़े गणमान्यजनों की उपस्थिति में आयोजित इस विशेष समारोह में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी, परमार्थ पीठाधीश्वर, पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी, डा साध्वी भगवती सरस्वती ने संबोधित किया। 

इस भव्य आयोजन का मूल उद्देश्य भारतीय सनातन दर्शन के कालजयी उद्घोष “वसुधैव कुटुम्बकम्’ सम्पूर्ण विश्व एक परिवार है” पर केंद्रित रहा। कार्यक्रम ने विभिन्न आस्थाओं, संस्कृतियों और परंपराओं के बीच संवाद, परस्पर सम्मान तथा मानवता की साझा चेतना को मजबूत करने का संदेश दिया।

परमार्थ पीठाधीश्वर, पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने सरसंघचालक राष्ट्रऋषि श्री मोहन भागवत जी, धर्मगुरुओं, बहनों और भाइयों को सम्बोधित करते हुए कहा कि आज हम अनेक आस्थाओं और परंपराओं से जुड़े हैं, लेकिन हमारी आत्मा एक है और हम सभी एक वैश्विक परिवार के अंग हैं। यही सनातन धर्म और भारत की महान सभ्यता की मूल भावना है।


पूज्य स्वामी जी ने कहा कि सनातन धर्म केवल किसी एक समुदाय के कल्याण की नहीं, बल्कि सम्पूर्ण सृष्टि के मंगल की कामना करता है “सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः।” हमारे वेदों का संदेश है “आ नो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतः” अर्थात सभी दिशाओं से श्रेष्ठ और कल्याणकारी विचार हमारे पास आएँ। यही जीवन-दृष्टि सबको अपनाने, सबका सम्मान करने और सबको साथ लेकर चलने की प्रेरणा देती है।


उन्होंने कहा कि हमें प्रेम को कर्म, आध्यात्मिकता को आचरण, शांति को व्यवहार और सेवा को साधना बनाना होगा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवकों की दशकों से चली आ रही सेवा-परंपरा इसी समर्पण का उदाहरण है “मेरे लिए क्या है?” से आगे बढ़कर “मेरे माध्यम से क्या हो सकता है?” का भाव ही भारतीय दर्शन है।


पूज्य स्वामी जी ने कहा कि आज विश्व को इसी चेतना की आवश्यकता है। हमारी विविधताएँ विभाजन नहीं, शक्ति बनें और हमारी आस्थाएँ संघर्ष नहीं, संवाद एवं सद्भाव का माध्यम बनें। आइए, हम केवल साथ उपस्थित होने का नहीं, बल्कि साथ चलने का संकल्प लें। यही सनातन का संदेश है, यही भारत की आत्मा है और यही “वसुधैव कुटुम्बकम्” की वैश्विक भावना है।

अपने संबोधन में डॉ. मोहन भागवत जी ने भारतीय जीवन-दृष्टि की समावेशी चेतना को रेखांकित करते हुए कहा कि हिंदू होने का अर्थ ही यह स्वीकार करना है कि अलग-अलग मार्ग एक ही लक्ष्य की ओर ले जाते हैं और प्रत्येक मनुष्य की अपनी गरिमा है।

उन्होंने मानवता की मूल एकता पर बल देते हुए कहा कि मनुष्य के बीच किसी प्रकार का भेद नहीं है। हमारी पूजा-पद्धतियाँ, परंपराएँ और जीवन जीने के तरीके अलग हो सकते हैं, लेकिन प्रत्येक व्यक्ति में समान मानवीय गरिमा और चेतना विद्यमान है।

डॉ. भागवत जी ने कहा कि दुनिया में अनेक धर्म, पंथ, पूजा-पद्धतियाँ और जीवन-शैलियाँ हैं, लेकिन मानवता की मूल चेतना एक है। विविधता प्रकृति का स्वभाव है और एकता उसके पीछे निहित सत्य है।

भारत की सनातन परंपरा ने सदैव विभिन्न मतों और आस्थाओं के सम्मान तथा सह-अस्तित्व की भावना को महत्व दिया है। यही कारण है कि भारतीय संस्कृति में अनेक मार्गों को स्वीकार करते हुए सभी के कल्याण की कामना की गई है।

उन्होंने कहा कि अपनी पहचान और आस्था के प्रति श्रद्धा रखते हुए दूसरे की पहचान और आस्था का सम्मान करना ही सच्ची मानवता है। विविधता को समाप्त करना एकता नहीं है; बल्कि विविधताओं को स्वीकार करते हुए उनमें निहित एकत्व को अनुभव करना ही वास्तविक एकता है।

डा साध्वी भगवती सरस्वती जी ने इस कार्यक्रम में हिन्दू धर्म का प्रतिनिधित्व करते हुये “असतो मा सद्गमय” के दिव्य मंत्र के साथ ओपनिंग प्रेयर की। उन्होंने प्रार्थना करते हुए कहा कि हे प्रभु! हमें उस अंधकार से प्रकाश की ओर ले चलिए, उस असत्य से सत्य की ओर ले चलिए, जिसमें हम स्वयं पीड़ा सहते हैं और अपनी अज्ञानता के कारण दूसरों के लिए भी पीड़ा का कारण बनते हैं।


उन्होंने कहा कि यह अंधकार केवल असत्य का ही नहीं, बल्कि उस मिथ्या पहचान का भी है, जिसमें हम स्वयं को केवल अपने भौतिक शरीर, उसके आकार, रूप, रंग, जाति, धर्म और बाहरी पहचान तक सीमित मान लेते हैं। इसी गलत पहचान में हम स्वयं भी दुःख भोगते हैं और दूसरों के लिए भी दुःख का कारण बनते हैं।


पूज्य साध्वी जी ने कहा कि “असतो मा सद्गमय” की प्रार्थना हमें इस मिथ्या पहचान के अंधकार से सत्य के प्रकाश की ओर ले जाती है, उस सत्य की ओर, जहाँ हम स्मरण करते हैं कि हम केवल यह शरीर नहीं हैं; हम दिव्य आत्माएँ हैं, जो शाश्वत, अनंत और परमात्मा से जुड़ी हुई।


उन्होंने कहा कि जब हम इस सत्य को पहचानते हैं, तब हमारे भीतर का भेद मिटने लगता है। हम अलग-अलग शरीर हो सकते हैं, हमारी पहचान और आस्थाएँ अलग हो सकती हैं, लेकिन हमारी आत्मा एक है, हम परमात्मा के साथ एक हैं, हम एक-दूसरे से जुड़े हैं और हम सम्पूर्ण सृष्टि के साथ एकाकार हैं। यही अंधकार से प्रकाश की, असत्य से सत्य की और विभाजन से एकत्व की यात्रा है।

कार्यक्रम में भारतीय मूल के अमेरिकियों सहित विभिन्न समुदायों के लोगों की सहभागिता रही। विभिन्न आस्थाओं और परंपराओं से जुड़े प्रतिनिधियों ने एक मंच पर एकत्र होकर एकता, सद्भाव, संवाद और मानवता की साझा भावना को अभिव्यक्त किया।

कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि विश्व में स्थायी शांति केवल मतभेदों को समाप्त करने से नहीं, बल्कि एक-दूसरे को समझने, संवाद करने, सम्मान देने और साथ मिलकर मानवता की सेवा करने से स्थापित होगी।

न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में आयोजित ‘यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन’ कार्यक्रम में 5,000 से ज्यादा भारतीय मूल के अमेरिकी शामिल हुए। इसका आयोजन अमेरिकन हिंदूज फॉर एंगेजमेंट एंड डायलॉग ने किया। कार्यक्रम में 30 देशों के 180 धार्मिक नेताओं का सहभाग रहा।

श्री धार्मिक रामलीला समिति, कविनगर का रामलीला महोत्सव 2026 हेतु भूमि पूजन संपन्न हुआ


















                              मुकेश गुप्ता

गाजियाबाद । श्री धार्मिक रामलीला समिति, कविनगर द्वारा रामलीला महोत्सव 2026 हेतु भूमि पूजन आज  30 अगस्त 2026 को रामलीला मैदान कविनगर मे संपन्न हुआ। 

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सांसद अतुल गर्ग के साथ समिति के का.अध्यक्ष विपुल शर्मा, का.महामंत्री  पवन गुप्ता, कार्यकारिणी सदस्य,मनोनीत सदस्य एवं अन्य गणमान्य लोगो ने वैदिक मंत्रोच्चार एवं विधि-विधान के साथ भूमि पूजन का भव्य आयोजन सम्पन्न कराया।

भूमि पूजन कार्यक्रम में मुख्य रूप बलदेव राज शर्मा पूर्व दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री,गाजियाबाद सदर विधायक संजीव शर्मा ,पूर्व महापौर आशु वर्मा ,भा.ज.पा महानगर अध्यक्ष  मयंक गोयल,महानगर महामंत्री  गौरव चोपड़ा एंव पंकज भारद्वाज, कविनगर पार्षद शिवम शर्मा, एसीपी कविनगर  सिद्धार्थ गौतम, एसीपी नंदग्राम जियाऊदीन हक,एस एच ओ अनुराग शर्मा,चौकी इंचार्ज अनुज कुमार,अशोक मोंगा ,गुरु पवन सिन्हा जी,

पप्पू पहलवान,आनंद प्रकाश गोयल, सुषांत गोयल, विजेंद्र यादव जी,विजय चौधरी,राहुल चौधरी,वी.के शर्मा (हनुमान) राकेश शर्मा,अशोक भारतीय,बालकिशन,रितेश,सुनील गुप्ता।समिति के निवर्तमान महामंत्री भूपेंद्र चोपडा,मुकेश सिंघल,दिवाकर सिंघल,तरुण चौटानी,संजय मित्तल,अजय जैन,गुलशन बजाज,अजय गुप्ता,नवेन्दु सक्सेना,

दिव्यांशु सिंघल,सुंशात चोपडा पत्रकार मनोज गुप्ता,अशोक शर्मा,अशोक ओझा दीपक भाटी,संदीप सिंघल,संजीव वर्मा,विनित गौड़, योगेश कौशिक, मुकेश गुप्ता, सुएन राही,किशन स्वरुप,अनिल सावरिया जी,श्री राज कौशिक जी, 

पूर्व मंत्री बालेशवर त्यागी, सुरेंद्र कुमार मुन्नी,आदि गणमान्य लोगो की गरिमामयी उपस्थिति रही।

निवर्तमान अध्यक्ष जायसवाल पूरे कार्यक्रम मे उपस्थित रहे।

एस एस के फाउंडेशन करेगा भजन क्लबिंग' के जरिए संस्कृति, संस्कार और सेवा का संदेश आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों की सहायता, युवाओं को भारतीय संस्कृति से जोड़ने का प्रयास

 



मुकेश गुप्ता

गाजियाबाद। एस एस के फाउंडेशन  द्वारा आगामी 6 सितंबर 2026, रविवार को गाजियाबाद के विद्या बाल भवन, सीनियर सेकेंडरी स्कूल, सेक्टर-11, वसुंधरा, गाजियाबाद में शाम 4 बजे से रात 8 बजे तक एक भव्य सांस्कृतिक एवं सामाजिक आयोजन 'भजन कल्याण' का आयोजन किया जा रहा है। इस आयोजन का उद्देश्य भक्ति एवं भारतीय संस्कृति के माध्यम से समाज में सेवा, सहयोग और संस्कार की भावना को मजबूत करना है।

यह जानकारी रविवार को एक प्रेसवार्ता मे आयोजन समिति की के पदाधिकारी मुकेश जौहरी, सौरभ गौस्वामी, राकेश सिरोही, नूतन पटवाल,मनोज रावत,रंजना बघेल, रेनू ममगईन,सुप्रीत गुसैन ने दी। उन्होंने बताया कि

भजन क्लबिंग' का प्रमुख उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों की सहायता करना है।

उन्होंने बताया कि

समाज के ऐसे बच्चे जो आर्थिक संसाधनों की कमी के कारण शिक्षा और विकास के बेहतर अवसरों से वंचित रह जाते हैं, उनके सहयोग के लिए इस आयोजन को सेवा के एक माध्यम के रूप में आयोजित किया जा रहा है। आयोजन के माध्यम से समाज के सक्षम लोगों को भी जरूरतमंद बच्चों की मदद के लिए आगे आने का संदेश दिया जाएगा।

उन्होंने बताया कि

इसके साथ ही यह आयोजन युवाओं को अपनी भारतीय संस्कृति, परंपराओं, संस्कारों और गौरवशाली धरोहर से जोड़ने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है।


आयोजकों का मानना है कि आधुनिकता के साथ अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहना आज की आवश्यकता है। भजन, संगीत और आध्यात्मिक वातावरण के माध्यम से युवा पीढ़ी को भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराने का प्रयास किया जाएगा।


बनारस के प्रसिद्ध कलाकार अभिषेक राय एवं टीम देंगे प्रस्तुति

उन्होंने बताया कि

कार्यक्रम में बनारस के प्रसिद्ध कलाकार अभिषेक राय एवं उनकी टीम द्वारा विशेष भजन एवं सांस्कृतिक प्रस्तुति दी जाएगी। भक्ति संगीत और भारतीय संस्कृति से जुड़े इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं एवं संस्कृति प्रेमियों के पहुंचने की संभावना है।


कार्यक्रम में लगभग 1000 से 1200 लोगों के शामिल होने की संभावना है।

गाजियाबाद-एनसीआर में अपनी तरह का यह एक विशेष आयोजन होगा, जिसमें सांस्कृतिक जागरण, युवा पीढ़ी को संस्कारों से जोड़ने और जरूरतमंद बच्चों की सहायता जैसे सामाजिक उद्देश्यों को एक साथ जोड़ा गया है।

कार्यक्रम में अनुसार निम्न गणमान्य अतिथियों के शामिल होने की संभावना है

पीठाधीश्वर श्री महंत नारायण गिरि जी श्री दूधेश्वर नाथ महादेव मंदिर, गाजियाबाद,आध्यात्मिक गुरु एवं परम संत आचार्य डॉ. पवन दिव्य गुरुजी अध्यक्षीय संरक्षक; पर्यावरण, वन एवं जल आवास, फिल्म, पुरस्कार आदि से जुड़े सामाजिक-सांस्कृतिक क्षेत्र के व्यक्तित्व ददन सगम होगी।

 सुनील कुमार शर्मा भारतीय जनता पार्टी, विधायक, साहिबाबाद, उत्तर प्रदेश, संजीव शर्मा- विधायक, गाजियाबाद, शहर,कैप्टन विकास गुप्ता - अध्यक्ष सर्वोदय सेवा -अध्यक्ष मुख्र्भेदय, सेवा फाउंडेशन परिषद एवं पूर्व सांसद एवं मंत्री सेना, उत्तर प्रदेश सचिदानंद पोखरियाल पूर्व दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री, उत्तराखंड सरकार तथा भाजपा क्षेत्रीय उपाध्यक्ष मानसिंह,गौस्वामी, उपस्थित होगें।

आयोजकों ने बताया कि इन विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति कार्यक्रम को और गरिमामय बनाएगी तथा सामाजिक एवं सांस्कृतिक क्षेत्र में काम करने वाले लोगों को एक मंच पर आने का अवसर मिलेगा।

मुकेश जौहरी ने बताया कि यह पहला गाजियाबाद-एनसीआर में संस्कृति और सेवा का अनूठा प्रयास हैं। SKK Foundation का कहना है कि 'भजन क्लबिंग' केवल एक धार्मिक या सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि भारतीय संस्कृति को आगे बढ़ाने, युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ने और समाज के कमजोर वर्ग के बच्चों की सहायता करने का एक सामूहिक अभियान है।

औयोजकों के अनुसार गाजियाबाद-एनसीआर में अपनी तरह का यह पहला ऐसा प्रयास है, जिसमें भक्ति, संस्कृति, युवा जागरण और सामाजिक सेवा को एक साथ जोड़ने की पहल की जा रही है। इस आयोजन के माध्यम से समाज में एकता, सद्भाव, सेवा और सहयोग की भावना को बढ़ावा देने का प्रयास किया जाएगा।

आमजन से सहभागिता की अपील

SKK Foundation ने गाजियाबाद-एनसीआर के सभी नागरिकों, युवाओं, सामाजिक संगठनों, संस्कृति प्रेमियों एवं समाजसेवियों से इस आयोजन में बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील की है।

उन्होंने बताया कि फाउंडेशन की ओर से कहा गया कि भारत की संस्कृति और संस्कार केवल हमारी विरासत नहीं, बल्कि हमारी आने वाली पीढ़ियों की पहचान भी हैं। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को इस विरासत को आगे बढ़ाने में अपनी भूमिका निभानी चाहिए। संस्था ने लोगों से आग्रह किया कि वे कार्यक्रम में उपस्थित होकर न केवल भारतीय संस्कृति एवं भक्ति संगीत का आनंद लें, बल्कि आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों की सहायता के इस सामाजिक प्रयास में भी अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें।

उन्होंने बताया कि SKK Foundation का संदेश है-आइए, भजन की मधुर धुनों में डूबें, अपनी संस्कृति से जुड़ें और सेवा के इस अभियान को मिलकर सफल बनाएं।

शनिवार, 29 अगस्त 2026

परमार्थ निकेतन में हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद की जयंती पर भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी

 



संवाददाता

राष्ट्रीय खेल दिवस पर खिलाड़ियों और देश के युवाओं को स्वस्थ, अनुशासित एवं राष्ट्रनिर्माण के संकल्प का संदेश*

“खेलेंगे तो स्वस्थ रहेंगे, अनुशासित रहेंगे तो आगे बढ़ेंगे और राष्ट्रप्रेम से जुड़ेंगे तो भारत को नई ऊँचाइयों तक ले जाएंगे”*

ऋषिकेश, 29 अगस्त। हॉकी के जादूगर, महान भारतीय खिलाड़ी और ‘पद्म भूषण’ मेजर ध्यानचंद की जयंती के पावन अवसर पर उन्हें परमार्थ निकेतन मे विनम्र श्रद्धांजलि दी गई। उनकी अद्भुत खेल प्रतिभा, अनुशासन, समर्पण और राष्ट्रप्रेम ने भारतीय खेल जगत को विश्व पटल पर गौरवान्वित किया। उनकी स्मृति में मनाया जाने वाला राष्ट्रीय खेल दिवस केवल खेल प्रतिभाओं का सम्मान करने का अवसर नहीं, बल्कि खेलों को जीवन का अभिन्न संस्कार बनाने और राष्ट्र के स्वस्थ, सशक्त एवं अनुशासित भविष्य के निर्माण का संकल्प लेने का दिन है।

मेजर ध्यानचंद जी ने अपने खेल कौशल से यह सिद्ध किया कि जब प्रतिभा के साथ साधना, अनुशासन और राष्ट्र के प्रति समर्पण जुड़ जाता है, तो सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं रहती, बल्कि वह पूरे राष्ट्र के गौरव का कारण बन जाती है। उनके हाथों में हॉकी की स्टिक केवल एक खेल उपकरण नहीं थी, वह भारत के आत्मविश्वास, सामर्थ्य और तिरंगे के गौरव की प्रतीक बन गई थी। उनके खेल ने दुनिया को भारतीय प्रतिभा की शक्ति से परिचित कराया और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक ऐसी प्रेरणा छोड़ी, जो आज भी उतनी ही प्रासंगिक है।

राष्ट्रीय खेल दिवस हमें याद दिलाता है कि खेल केवल मैदान पर जीत-हार का विषय नहीं है। खेल जीवन जीने की कला सिखाता है। खेल हमें अनुशासन, धैर्य, संघर्ष, टीम भावना, नेतृत्व, आत्मविश्वास और विपरीत परिस्थितियों में भी आगे बढ़ते रहने का संस्कार देता है। मैदान में खिलाड़ी जिस प्रकार हार के बाद उठकर फिर प्रयास करता है, उसी प्रकार जीवन में भी असफलताओं को सीख में बदलकर आगे बढ़ना ही वास्तविक विजय है।

आज भारत की युवा शक्ति देश की सबसे बड़ी ऊर्जा है। आवश्यकता है कि हमारे युवा अपनी इस ऊर्जा को सकारात्मक दिशा दें। मोबाइल और डिजिटल दुनिया के बढ़ते प्रभाव के बीच खेल का मैदान हमारे बच्चों और युवाओं को स्वस्थ शरीर, संतुलित मन और मजबूत व्यक्तित्व प्रदान कर सकता है। 

भारत की समृद्ध परंपरा में शरीर और मन की साधना को सदैव विशेष महत्व दिया गया है। योग हमें भीतर से संतुलित करता है और खेल हमें बाहर से सशक्त बनाता है। जब योग की शांति, खेल का उत्साह, अनुशासन की शक्ति और राष्ट्रप्रेम की भावना एक साथ जुड़ती है, तब एक स्वस्थ, समर्थ और संस्कारवान भारत का निर्माण होता है।

आज के दिन हम देश के प्रत्येक खिलाड़ी, प्रशिक्षक, खेल शिक्षक, अभिभावक और उन सभी लोगों को नमन करते हैं, जो भारत की खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने में अपना योगदान दे रहे हैं। छोटे-छोटे गांवों, कस्बों और दूरदराज के क्षेत्रों से निकलकर राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन करने वाले खिलाड़ियों की संघर्षगाथाएं पूरे देश के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं।

आइए, मेजर ध्यानचंद के जीवन से प्रेरणा लेकर खेल को साधना, अनुशासन को जीवन-मंत्र और राष्ट्रसेवा को सर्वाेच्च लक्ष्य बनाएं। अपने शरीर को स्वस्थ, मन को सकारात्मक, विचारों को ऊँचा और कर्मों को राष्ट्रहित में समर्पित करने का संकल्प लें।

सोमवार, 24 अगस्त 2026

परमार्थ निकेतन से श्रावण के चतुर्थ सोमवार पर समत्व का संदेश,भगवान शिव से सीखें संतुलित, समरस और करुणामय जीवन- पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती





                               संवाददाता

ऋषिकेश, 24 अगस्त। श्रावण के पावन चतुर्थ सोमवार के अवसर पर पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने मंगलकामनाएँ देते हुए अपने संदेश में कहा कि भगवान शिव हमें समत्व, संयम, करुणा और लोकमंगल की ओर ले जाता है। आज जब जीवन अत्यंत तीव्र गति से आगे बढ़ रहा है, विचारों में असहमति बढ़ रही है और मन निरंतर बाहरी परिस्थितियों से प्रभावित हो रहा है, तब शिव का समत्वमय स्वरूप समाज और विशेषकर युवा पीढ़ी के लिए अत्यंत प्रासंगिक है।

पूज्य स्वामी जी ने कहा कि समत्व अर्थात् समान व्यवहार ही नहीं है बल्कि यह जीवन की परिस्थितियों के बीच अपने अंतर्मन का संतुलन बनाए रखने की साधना है। भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं “समत्वं योग उच्यते” अर्थात् समत्व ही योग है। सुख-दुःख, लाभ-हानि, जय-पराजय और मान-अपमान जैसी द्वंद्वात्मक परिस्थितियों में मन की संतुलित अवस्था ही योग का सार है।

भगवान शिव का स्वरूप इस समत्व को सहज रूप से अभिव्यक्त करता है। उनके साथ कैलास की शांति भी है और तांडव की ऊर्जा भी, वे योगी भी हैं और गृहस्थ भी, उनके मस्तक पर चंद्रमा की शीतलता है तो कंठ में हलाहल विष को धारण करने की सामर्थ् भी। उनके स्वरूप में विरोधाभास नहीं, बल्कि विविधताओं का अद्भुत समन्वय दिखाई देता है। यही शिवत्व का संदेश है, जीवन में परिस्थितियाँ अनेक हों, लेकिन अंतःकरण का संतुलन न खोएँ।

पूज्य स्वामी जी ने कहा कि आज समाज में अनेक प्रकार के मत, विचार, जीवनशैली और दृष्टिकोण हैं। विविधता सनातन संस्कृति की शक्ति रही है। समत्व हमें सिखाता है कि असहमति हो सकती है, विचार अलग हो सकते हैं, लेकिन हृदय अलग नहीं होने चाहिए।

आज का युवा अनेक अवसरों के साथ अनेक दबावों से भी गुजर रहा है। सोशल मीडिया पर निरंतर तुलना, सफलता का दबाव, त्वरित परिणाम की अपेक्षा और दूसरों के जीवन से अपने जीवन की तुलना, मन में असंतुलन पैदा कर सकती है। शिव का ध्यान युवाओं को यह संदेश देता है कि अपनी यात्रा को दूसरों की यात्रा से न तौलें। किसी की सफलता देखकर ईर्ष्या नहीं, प्रेरणा लें, असफलता आने पर निराशा नहीं, आत्मचिंतन करें।

श्रावण के चतुर्थ सोमवार पर परमार्थ निकेतन की ओर से यही संदेश है कि हम शिव के समत्व को अपने जीवन का आधार बनाएँ। सुख आए तो अहंकार न हो, दुःख आए तो विश्वास न टूटे, सफलता मिले तो सेवा बढ़े और शक्ति मिले तो विनम्रता बढ़े। शिव हमें संदेश देते हैं, बाहरी परिस्थितियाँ बदलती रहें, पर भीतर का दीपक स्थिर रहे।

आइए, इस पावन सोमवार संकल्प लें हम अपने मन में समत्व, हृदय में करुणा, वाणी में मधुरता, कर्मों में सेवा और जीवन में लोकमंगल की भावना को स्थान देंगे। महादेव की कृपा से हमारे भीतर शांति, हमारे परिवारों में प्रेम, हमारे समाज में समरसता और हमारे राष्ट्र में सुख, शांति एवं समृद्धि का विस्तार हो।