राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, उपमुख्यमंत्री उत्तरप्रदेश, ब्रजेश पाठक, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के अध्यक्ष रामबहादुर राय सहित अनेक विशिष्ट विभूतियों की गरिमामयी उपस्थिति
*🌺पद्मश्री मनु शर्मा की तीन पुनर्प्रकाशित पुस्तकों ‘तीन प्रश्न’, ‘राणा सांगा’ और ‘के बोले माँ तुम अबले’ का लोकार्पण*
वाराणसी, 28 अक्टूबर 2026। साहित्य, भारतीय संस्कृति, इतिहास और सामाजिक चेतना की समृद्ध परंपरा को समर्पित ‘हमारे मनु’ लोकार्पण समारोह रुद्राक्ष इंटरनेशनल सेंटर, सिगरा, वाराणसी में आयोजित किया गया। यह समारोह प्रख्यात साहित्यकार पद्मश्री मनु शर्मा की रचनात्मक यात्रा, साहित्यिक साधना और वैचारिक योगदान को नमन करने के साथ उनकी कालजयी कृतियों को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का महत्वपूर्ण अवसर है।
समारोह में पद्मश्री मनु शर्मा की तीन पुनर्प्रकाशित पुस्तकों ‘तीन प्रश्न’, ‘राणा सांगा’ और ‘के बोले माँ तुम अबले’ का लोकार्पण किया। इन कृतियों के माध्यम से साहित्य, इतिहास, मानवीय संवेदना और समाज के विविध पक्षों पर विचार-विमर्श किया। आयोजन साहित्यिक विरासत के संरक्षण और समाज में अध्ययन, चिंतन तथा वैचारिक संवाद की संस्कृति को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
कार्यक्रम में परमार्थ पीठाधीश्वर, पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी का पावन सान्निध्य, गरिमामयी उद्बोधन और आशीर्वाद प्राप्त हुआ। राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक जी, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के अध्यक्ष रामबहादुर राय और अन्य विशिष्ट अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
परमार्थ पीठाधीश्वर, पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि पद्मश्री मनु शर्मा जी हिंदी साहित्य की अमूल्य धरोहर हैं। उनका संपूर्ण जीवन साहित्य-साधना, संघर्ष और सृजन के प्रति अटूट समर्पण की प्रेरक गाथा है। उन्होंने अपनी लेखनी से भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक चेतना और मानवीय संवेदनाओं को अद्भुत अभिव्यक्ति दी। श्रीकृष्ण, कर्ण, द्रौपदी और द्रोण जैसे पात्रों के माध्यम से उन्होंने जीवन के द्वंद्व, धर्म की सूक्ष्मता और कर्तव्य की गरिमा को जीवंत किया।
पूज्य स्वामी जी ने कहा कि पुस्तकें हमारी जीवन-यात्रा की मौन सहयात्री हैं। वे केवल ज्ञान नहीं देतीं, हमारी चेतना जगाती हैं, दृष्टि बदलती हैं और व्यक्तित्व को गढ़ती हैं। रामायण मर्यादा, भगवद्गीता कर्तव्यबोध और उपनिषद आत्मबोध का मार्ग दिखाते हैं। पुस्तकें जब विचारों से आचरण तक पहुँचती हैं, तब व्यक्ति, समाज और राष्ट्र का निर्माण करती हैं।
आइए, पुस्तकों को अलमारी की शोभा नहीं, जीवन का हिस्सा बनाएँ। पढ़ें, विचार करें और सीखे हुए को आचरण में उतारें। यही साहित्य के प्रति सम्मान और मनु शर्मा जी की साधना को सार्थक नमन है।
सभी विशिष्ट अतिथियों ने दीप प्रज्वलन एवं पद्मश्री मनु शर्मा जी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की। सभी अतिथियों का पुस्तक-संचय, पुष्पगुच्छ एवं शॉल भेंट कर स्वागत अभिनन्दन किया। प्रभात कुमार ने सभी का स्वागत अभिनन्दन किया।
पं. मनु शर्मा जी के जीवन, साहित्यिक यात्रा और योगदान पर केंद्रित विशेष फिल्म का प्रदर्शन किया। श्री हेमंत शर्मा जी ‘हमारे मनु’ की संकल्पना पर अपने विचार प्रस्तुत करेंगे। श्री पाणिनि आनंद तीनों पुस्तकों, ‘तीन प्रश्न’, ‘राणा सांगा’ और ‘के बोले माँ तुम अबले’ से सभी का परिचय कराया। सुश्री ईशानी शर्मा द्वारा संचालित न्यास के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के सम्मान समारोह में मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। समारोह के अध्यक्ष रामबहादुर राय ने अपना अध्यक्षीय उद्बोधन दिया।
‘हमारे मनु’ समारोह साहित्य और समाज के बीच जीवंत संवाद स्थापित करने का अवसर है। पं. मनु शर्मा की रचनाएँ पाठकों को इतिहास, संस्कृति, मानवीय संवेदना और जीवन के जटिल प्रश्नों से परिचित कराती हैं। उनकी पुस्तकों का पुनर्प्रकाशन साहित्यिक धरोहर को पुनः पाठकों के बीच प्रतिष्ठित करने तथा नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों और वैचारिक परंपराओं से जोड़ने की दिशा में उल्लेखनीय कदम है।
यह आयोजन साहित्यकार के प्रति सम्मान के साथ-साथ उस व्यापक विचारपरंपरा का उत्सव भी है, जो समाज को प्रश्न करने, इतिहास से सीखने और संवेदनशीलता के साथ भविष्य का निर्माण करने की प्रेरणा देती है।
समारोह का समापन राष्ट्रगान एवं पद्मश्री डॉ. सोमा घोष जी की गायन प्रस्तुति के साथ हुआ।




















































