बुधवार, 2 सितंबर 2026

मुख्यमंत्री ने दिया आउटसोर्स सेवाकर्मियों को बड़ा उपहार,सीएम ने आउटसोर्स कर्मियों को वितरित किए बढ़ाए गए पारिश्रमिक के चेक, पांच तारीख तक सीधे अकाउंट में जाएगा पारिश्रमिक






लखनऊ ब्यूरो

*उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम का शुभारंभ किया सीएम योगी ने, यूपीकॉस पोर्टल व वेबसाइट की लॉन्चिंग और लोगो का अनावरण भी* 

*घटना-दुर्घटना, आपदा का शिकार होने पर निर्धारित श्रेणी के अनुसार परिवार को मिलेगा 20 से 40 लाख तक दुर्घटना बीमा कवर* 

*3.5 लाख से अधिक आउटसोर्स कर्मियों को ही नहीं, पारिवारिक सदस्यों समेत 17-20 लाख लोगों को मिलेगा निगम का लाभ: सीएम योगी*

*ईपीएफ व ईएसआई का अंशदान भी जमा होगा, सरकार आउटसोर्स एजेंसी को देगी सर्विस चार्ज, कर्मचारी से नहीं होगी कटौती*

*आउटसोर्स कर्मी को सीधे निकाल नहीं सकेगी कंपनी, पहले सरकार को बताना होगा, जांच के बाद होगा निर्णय*

*‘सैफई-रामपुर सिंडिकेट’ के बाद अब एजेंसियों के माध्यम से होने वाले आउटसोर्स कर्मियों के शोषण पर होगा प्रहार* 

*किसी व्यक्ति की कृपा पर नहीं, बल्कि श्रेणी व शैक्षणिक योग्यता के अनुरूप सुनिश्चित होगा पारिश्रमिक*

*अकेला नहीं है आउटसोर्स कर्मी, उसकी समस्या को सुनने व सुलझाने का तंत्र विकसित किया सरकार ने: मुख्यमंत्री*

*लखनऊ, 2 सितंबर । मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश के आउटसोर्स कर्मियों को बुधवार को बड़ा उपहार दिया। इन कर्मियों से जुड़ी सभी समस्याओं को सुनने व सुलझाने के लिए सीएम ने उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम का शुभारंभ करने के साथ ही यूपीकॉस के पोर्टल व वेबसाइट की लॉन्चिंग और इसके लोगो का अनावरण भी किया। इस अवसर पर उन्होंने आउटसोर्स कर्मियों को बढ़ाए गए पारिश्रमिक के चेक सौंपे तथा 40 लाख रुपये तक का दुर्घटना बीमा कवर भी प्रदान किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि निगम बनने से 3.5 लाख से अधिक आउटसोर्स कर्मियों को ही नहीं, बल्कि उनके पारिवारिक सदस्यों समेत 17-20 लाख व्यक्तियों को इसका लाभ मिलेगा। 

*आउटसोर्स कर्मचारियों की गरिमा स्थापित करने का प्रयास*  

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में यूपी की साढ़े 9 वर्ष में विकास यात्रा का श्रेय नगर निकाय कर्मियों, पंप ऑपरेटरों, सचिवालयों, चिकित्सालयों व शासन व्यवस्था से जुड़े स्थायी, संविदा व आउटसोर्स कर्मियों को दिया। उन्होंने कहा कि यह शासन की जिम्मेदारी है कि हर व्यक्ति को गरिमा के अनुरूप सम्मान प्राप्त हो। उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम के जरिए हमारी सरकार का प्रयास इसी गरिमा व गौरव को स्थापित करना है।

*सरकार ने समझी पीड़ा, दूर की चिंता*

मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले की व्यवस्था तीन खेमों में बंटी थी। एक तरफ कार्मिक, दूसरी तरफ एजेंसी और तीसरी तरफ सरकारी विभाग होता था। कर्मचारी समस्या लेकर अलग-अलग दरवाजों पर जाता था, लेकिन सुनवाई नहीं होती थी। वेतन की चिंता, सामाजिक व सेवा संबंधी सुरक्षा की गारंटी भी नहीं थी। तब इन कर्मियों का प्रश्न होता था कि आखिर मेरी पीड़ा कौन सुनेगा, मेरे परिवार की चिंता कौन करेगा। हमारा मानना है कि सरकार व कर्मचारी का रिश्ता केवल वेतन और कार्य का नहीं हो सकता, वह विश्वास और जिम्मेदारी का होता है। कर्मचारी का जीवन कागजों व कार्यालयों के चक्कर में न बीते। उसे महसूस होना चाहिए कि उसके बेहतर काम का रिकॉर्ड और अधिकारों को सुरक्षित रखा जा रहा है। वह अकेला नहीं, उसकी समस्या को सुनने का भी तंत्र है। समय से वेतन, भविष्य निधि, बीमा अधिकार, मेहनत के अनुरूप मानदेय हर कार्मिक का अधिकार है और सरकार ने यही सुनिश्चित किया है।


*सामाजिक के साथ आर्थिक भेदभाव भी नहीं होना चाहिए*

सीएम ने कहा कि जब कर्मचारियों से मानदेय पूछते थे तो कोई 8 हजार, कोई  11 हजार बताता था। जो 9 हजार बताते थे, उन्हें भी 6 हजार ही मिलता था। हमारा मानना है कि सामाजिक भेदभाव दूर करने के लिए आर्थिक भेदभाव भी दूर किया जाना चाहिए। व्यक्ति को मेहनत का उचित मानदेय मिलना ही श्रम का सम्मान है। उसे सामाजिक सुरक्षा की गारंटी, बल्कि घटना-दुर्घटना पर बीमा कवर भी मिलना चाहिए। हमारी सरकार ने संवेदनशीलता को सुशासन की पहली शर्त मानते हुए आउटसोर्स सेवा निगम का गठन किया। इसके माध्यम से हर कार्मिक को संस्थागत सुरक्षित भविष्य प्राप्त होगा। इस व्यवस्था के लागू होने के बाद अधिकार किसी व्यक्ति की कृपा पर नहीं, बल्कि मेहनत से प्राप्त होगा। व्यवस्था में बिचौलियों की जगह नहीं होगी। पोर्टल पर सारी जानकारी उपलब्ध होगी। अब कर्मचारी अकेला नहीं है, निगम उसके साथ होगा। 


*20 लाख लोगों को मिल सकेगा सुरक्षा कवर* 

मुख्यमंत्री ने कहा कि जब किसी को समय पर अधिकार मिलता है तो उसका लाभ केवल एक व्यक्ति को नहीं मिलता। बच्चे की पढ़ाई, मां की दवाई, बेटी का भविष्य सुनिश्चित होता है। परिवार को भरोसा मिलता है कि मेहनत बेकार न जाएगी। सरकार निगम के माध्यम से 20 लाख लोगों को सुरक्षा कवर प्रदान करना चाहती है। अब सरकारी विभाग, आउटसोर्स एजेंसी व कर्मचारी आधुनिक, पारदर्शी, तकनीक आधारित व्यवस्था से जुड़ जाएंगे। मैनपावर की आवश्यकता का आकलन, रिक्तियों का पूर्वानुमान व मानव संसाधन की योजना बनाई जा सकेगी। 


*श्रेणी व शैक्षणिक योग्यता के अनुरूप होगा पारिश्रमिक* 

सीएम ने कहा कि राज्य सरकार की आरक्षण नीतियों के अनुरूप योग्यता व मेरिट के आधार पर भर्ती प्रक्रिया ऑनलाइन व पारदर्शी होगी। भर्ती, पोस्टिंग, उपस्थिति, मानदेय, ग्रेच्युटी, बीमा व सेवा लाभ की डिजिटल मॉनिटरिंग भी होगी। कर्मचारी अब सेवा विवरण, अकाउंट, उपस्थिति, भुगतान व कटौती आदि एक ही जगह देख सकेगा। यहीं शिकायत दर्ज कराकर समय से निराकरण भी पा सकेगा। श्रेणी व शैक्षणिक योग्यता के अनुरूप प्रत्येक कर्मचारी का पारिश्रमिक भी सुनिश्चित होगा। 

*पांच तारीख तक अकाउंट में जाएगा पारिश्रमिक* 

मुख्यमंत्री ने कहा कि 1 से 5 तारीख तक सीधे बैंक अकाउंट में पारिश्रमिक जाएगा। नियमित रूप से ईपीएफ व ईएसआई का अंशदान भी जमा होगा। सरकार आउटसोर्स एजेंसी को सर्विस चार्ज देगी, वे कर्मचारी के पैसे से कटौती नहीं सकेंगे। कंपनी किसी आउटसोर्स कर्मी को निकाल नहीं सकेगी। वह पहले सरकार को बताएगी, जिसकी जांच होगी। कंपनी की रिपोर्ट गलत हुई तो कर्मचारी का उत्पीड़न नहीं हो पाएगा।

*मातृत्व अवकाश सहित सभी वैधानिक सेवा लाभ भी*

मुख्यमंत्री ने कहा कि हम ईएसआई अंशदान का पैसा ईएसआई अस्पतालों में निशुल्क उपचार के लिए देंगे, यदि वहां किसी उपचार की सुविधा नहीं मिली तो आयुष्मान भारत से इसे जोड़ेंगे। इससे आउटसोर्स कर्मी व परिवार को पांच लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा कवर भी मिलेगा। मातृत्व अवकाश सहित सभी वैधानिक सेवा लाभ भी सुनिश्चित किए जाएंगे। 

20 से 40 लाख तक दुर्घटना बीमा कवर

सीएम ने आउटसोर्स सेवा निगम के साथ एसबीआई के एमओयू का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि मानदेय सीधे बैंक में जाएगा और घटना-दुर्घटना, आपदा का शिकार होने पर निर्धारित श्रेणी के अनुसार 20 से 40 लाख तक का दुर्घटना बीमा कवर परिवार को मिलेगा। अग्निकांड का शिकार होने पर 10 लाख, आकस्मिक दवा के लिए पांच लाख, आपात स्थिति में एयर एंबुलेंस की सुविधा के लिए 10 लाख, बेटे की शिक्षा के लिए 8 लाख, बेटी की शिक्षा के लिए 10 लाख रुपये तक मिलेगा। दो पुत्रियों के विवाह के लिए 8-10 लाख तक तथा किसी कर्मचारी की मृत्यु पर बैंक के माध्यम से निगम परिजनों को तत्काल 50 हजार रुपये उपलब्ध कराएगा। जीरो बैलेंस पर बैंक खाता खुलेगा और इसके माध्यम से परिवार के चार सदस्यों को विशेष सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। अब आउटसोर्स कर्मचारियों को ऑर्गनाइज्ड, स्किल्ड, सिक्योर व डिग्निफाइड वर्कफोर्स में बदलने वाला निगम प्रारंभ हो रहा है। 

*पहले सत्ताधारी लोगों के रिश्तेदारों की थीं कंपनियां*

सीएम ने आरोप लगाया कि 2017 के पहले की सरकारें आउटसोर्स कर्मचारियों को बोझ मानती थीं। उस समय उन्होंने जो कंपनियां रखी थीं, उसमें अधिकतर सत्ताधारी लोगों के रिश्तेदारों की थीं, जो भर्ती, यूनिफॉर्म व अन्य कार्यों के नाम पर शोषण करती थीं। भाजपा सरकार ने कर्मचारियों को बोझ नहीं, बल्कि मानव संसाधन के रूप में संपत्ति माना है। 

*कभी नहीं बदलेगी मानव श्रम की गरिमा*

सीएम ने कहा कि ऑर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, ऑटोमेशन व नई अर्थव्यवस्था के दौर में कार्य की प्रकृति बदल रही है, लेकिन मानव के श्रम की गरिमा कभी नहीं बदलेगी। टेक्नोलॉजी जितना आगे जाएगी, गवर्नेंस को उतना अधिक मानवीय होना पड़ेगा। साढ़े 9 वर्ष में डबल इंजन सरकार ने भय-अराजकता से मुक्ति दिलाई तो पारदर्शिता के साथ नई कार्य संस्कृति को भी बढ़ाया। व्यवस्था के किनारे खड़े व्यक्ति को मुख्यधारा में लाया गया। यूपी की अर्थव्यवस्था में किसान, नौजवान, महिलाएं, कारीगर, रेहड़ी-पटरी वाले, मेहनतकश नागरिक, सूक्ष्म-लघु-मध्यम उद्यम से जुड़े उद्यमी, स्टार्टअप शुरू करने वाले युवा से लेकर सरकारी कर्मचारी और आउटसोर्स कर्मचारी मजबूत भागीदारी निभा रहे हैं। 

*किसानों को उद्यमिता से जोड़ रही सरकार*

सीएम योगी ने कहा कि सरकार ने किसानों को बाजार तक पहुंच दी। उसे तकनीक, सिंचाई, बीमा और सीधे भुगतान से जोड़ा। हमारी सोच है कि किसान सिर्फ खेती न करे, बल्कि कृषि अर्थव्यवस्था का मजबूत उद्यमी भी बने। 2017 से पहले कारीगरों में निराशा थी। पिछली सरकारों की अकर्मण्यता के कारण पीढ़ियों का धंधा चौपट हो चुका था। हमारी सरकार ने एक जनपद-एक उत्पाद योजना लागू की, उसे तकनीक, बाजार दिया। आज कारीगर उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। 

*अब दौड़ रहा है उत्तर प्रदेश*

सीएम ने कहा कि पहले छोटे उद्यमी विभागों में चक्कर लगाते थे। हमने एमएसएमई के लिए पहले उद्योग लगाने और 1000 दिन में एनओसी की व्यवस्था बनाई। आज 96 लाख एमएसएमई यूनिट में 3.15 करोड़ से अधिक लोग काम कर रहे हैं। हमने सिंगल विंडो सिस्टम बनाया। अब उत्तर प्रदेश दौड़ रहा है। हमने केवल सुरक्षा नहीं दी, बल्कि प्रदेश को आर्थिक रूप से संपन्न बनाने की दिशा में भी कदम बढ़ाए हैं।

*महिला समृद्धि के लिए लगातार काम किए सरकार ने*

सीएम ने कई महिला सदस्यों वाले मिल्क प्रोड्यूसर समूहों का जिक्र करते हुए कहा कि वे झांसी, आगरा, लखनऊ, काशी, गोरखपुर, रायबरेली आदि जनपदों में सफलतापूर्वक काम कर रहे हैं। इससे 4 लाख बहनें जुड़कर आत्मनिर्भरता की कहानी कह रही हैं। राज्य में स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर लगभग 1 करोड़ महिलाएं प्रदेश की प्रगति को गति दे रही हैं। 

*छह महीने में एक लाख युवाओं को सरकारी नौकरी मिलेगी*

मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 के पहले भर्ती निकलती थी तो युवा को पेपर लीक समेत कई चुनौतियों से जूझना पड़ता था। हमने यूपी सरकार के सभी आयोग व बोर्ड में आवश्यक बदलाव किए। सुनिश्चित किया कि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने पर जेल और संपत्ति जब्त होगी। अगले छह महीने में एक लाख नए युवाओं को सरकारी नौकरी मिलेगी। यूपी पुलिस में 2.25 लाख भर्ती की गईं। 2017 से पहले यूपी पुलिस में 10 हजार महिला कार्मिक थीं, अब 44 हजार हैं और नई भर्ती के बाद 11-12 हजार और भर्ती हो जाएंगी। यूपी में 50 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव आए। पहले बड़े उद्योग महज 14 हजार थे, अब यह संख्या 35 हजार होने जा रही है। 2017 के पहले 120 स्टार्टअप थे, आज 24 हजार से अधिक हैं।


‘सैफई-रामपुर सिंडिकेट’ के बाद अब एजेंसियों के शोषण पर प्रहार

सीएम ने कहा कि हम युवाओं को स्किल, इनोवेशन व टेक्नोलॉजी से जोड़कर मार्केट-इंडस्ट्री रेडी वर्कफोर्स के रूप में तैयार कर रहे हैं। एआई, रोबोटिक्स, इंटरनेट ऑफ थिंग्स के साथ थ्री-डी प्रिटिंग की ट्रेनिंग दी जा रही है। यूपी के हर मंडल में एक विश्वविद्यालय है। अब यूनिवर्सिटी बनाने के लिए ‘रामपुर सिडिंकेट’ व अन्य लोगों के लिए अलग-अलग प्रावधान जैसा नहीं है। 2017 के पहले ‘सैफई-रामपुर सिंडिकेट’ व्यवस्था का खून चूसता था। एजेंसियों के माध्यम से शोषण होता था। आउटसोर्स निगम के माध्यम से अब तीसरे सिंडिकेट पर भी प्रहार होगा।

इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य व ब्रजेश पाठक समेत कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।

इस्कॉन संतों ने अभिषेक गर्ग को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव में किया आमंत्रित

 



मुकेश गुप्ता

गाजियाबाद । समाजवादी पार्टी के प्रदेश सचिव अभिषेक गर्ग के गाजियाबाद स्थित कार्यालय पर इस्कॉन मंदिर, गाजियाबाद के संतों एवं पुजारीगणों का स्नेहपूर्ण आगमन हुआ। संतों ने आगामी 4 सितंबर 2026 को आयोजित होने वाले श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव में शामिल होने के लिए अभिषेक गर्ग को सादर आमंत्रित किया।

संतों के आत्मीय निमंत्रण पर अभिषेक गर्ग ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए सभी संतों एवं पुजारीगणों का स्वागत और आभार जताया। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण जन्माष्टमी श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक चेतना का पावन पर्व है। भगवान श्रीकृष्ण के जीवन और उनके संदेश से समाज को सत्य, धर्म, कर्म एवं मानवता के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है।

इस अवसर पर अभिषेक गर्ग ने आदि कर्ता दास, धनंजय जगन्नाथ दास, सुरेश्वर दास, धीर योगेश्वर दास एवं अधोक्षज धाम दास का हार्दिक अभिनंदन किया। उन्होंने कहा कि संतों का स्नेह और आशीर्वाद सदैव समाज के लिए प्रेरणादायी है। उन्होंने श्रद्धालुओं से जन्माष्टमी महोत्सव में बढ़-चढ़कर सहभागिता करने का आह्वान किया।

राज कुमार गोयल इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में “मशीन लर्निंग इन एक्शन” पर विशेष कार्यशाला का आयोजन

 


मुकेश गुप्ता

गाजियाबाद । राज कुमार गोयल इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी , गाजियाबाद के कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग द्वारा युक्टि सॉफ्टवेयर्स के साथ हुए एमओयू के अंतर्गत “मशीन लर्निंग इन एक्शन: डेटा → मॉडल → प्रेडिक्शन” विषय पर एक विशेष तकनीकी कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों को मशीन लर्निंग की मूल अवधारणाओं के साथ-साथ इसके व्यावहारिक उपयोग एवं वास्तविक जीवन में इसकी भूमिका से परिचित कराना रहा। 

कार्यशाला का आयोजन 31 अगस्त 2026 को किया गया, जिसमें मुख्य रूप से सीएसई तृतीय वर्ष के विद्यार्थियों ने प्रतिभाग किया। कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों को डेटा तैयार करने, मशीन लर्निंग मॉडल को प्रशिक्षित करने तथा उससे प्रेडिक्शन प्राप्त करने की पूरी प्रक्रिया को सरल एवं व्यावहारिक तरीके से समझाया गया। 

कार्यशाला में युक्टि सॉफ्टवेयर्स, ग्रेटर नोएडा के विशेषज्ञ  मिथिलेश कुमार एवं श्रीमती मनीषा कुमारी ने अतिथि वक्ता के रूप में विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया। दोनों विशेषज्ञों ने अपने तकनीकी एवं शिक्षण अनुभव को विद्यार्थियों के साथ साझा करते हुए मशीन लर्निंग और आधुनिक तकनीकी क्षेत्र की संभावनाओं से अवगत कराया। 

कार्यशाला में वास्तविक जीवन की समस्याओं में मशीन लर्निंग के उपयोग, डेटा की भूमिका तथा डेटा → मॉडल → प्रेडिक्शन कार्यप्रवाह पर विशेष जोर दिया गया। विद्यार्थियों को व्यावहारिक उदाहरणों एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण के माध्यम से तकनीकी अवधारणाओं को समझने का अवसर मिला, जिससे उनमें मशीन लर्निंग के प्रति रुचि और तकनीकी कौशल को बढ़ावा मिला। 

इस संपूर्ण आयोजन का मार्गदर्शन डॉ. अमित सिंघल (विभागाध्यक्ष, सीएसई विभाग) द्वारा किया गया, जबकि कार्यक्रम के फैकल्टी कोऑर्डिनेटर की भूमिका डॉ. विनीत श्रीवास्तव ने निभाई। 

कार्यक्रम के समापन पर संस्थान के वाइस चेयरमैन अक्षत गोयल, एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर डॉ. डी. के. चौहान, डायरेक्टर डॉ. बी. सी. शर्मा, डीन एकेडमिक्स डॉ. आर. के. यादव एवं डॉ. रामेंद्र सिंह ने इस सफल आयोजन के लिए आयोजकों एवं प्रतिभागी विद्यार्थियों को धन्यवाद एवं शुभकामनाएं दीं।

मसूरी गोलीकांड की बरसी पर उत्तराखण्ड राज्य आंदोलन के अमर बलिदानियों को परमार्थ निकेतन से भावपूर्ण श्रद्धांजलि

 



संवाददाता

शहीदों को समर्पित की आज की दिव्य गंगा आरती

ऋषिकेश, 2 सितंबर। मसूरी गोलीकांड की बरसी पर उत्तराखण्ड राज्य आंदोलन के उन अमर बलिदानियों को परमार्थ निकेतन से भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की गई, जिन्होंने पृथक उत्तराखण्ड राज्य के निर्माण के लिए अपने साहस, संघर्ष, संकल्प और सर्वोच्च बलिदान से इतिहास में अमिट छाप छोड़ी। इन वीर आंदोलनकारियों की शहादत उत्तराखण्ड की राज्य निर्माण यात्रा का अत्यंत मार्मिक और गौरवपूर्ण अध्याय है।

पृथक उत्तराखण्ड राज्य की मांग केवल एक राजनीतिक मांग नहीं थी, बल्कि यह पर्वतीय जनजीवन, उसकी विशिष्ट आवश्यकताओं, संस्कृति, परंपराओं, प्राकृतिक संसाधनों और स्वाभिमान की आवाज थी। दशकों तक चले इस आंदोलन में मातृशक्ति, युवाओं, विद्यार्थियों, कर्मचारियों, किसानों और समाज के विभिन्न वर्गों ने एकजुट होकर संघर्ष किया। अनेक आंदोलनकारियों ने अपने जीवन की आहुति दी और असंख्य लोगों ने कठिनाइयों, यातनाओं और संघर्षों को सहते हुए राज्य निर्माण के संकल्प को जीवंत रखा।

मसूरी गोलीकांड की घटना हमें उन कठिन दिनों की स्मृति कराती है, जब उत्तराखण्ड के लोगों ने अपने अधिकार और अपनी पहचान के लिए लोकतांत्रिक संघर्ष किया। इस अवसर पर उन सभी ज्ञात-अज्ञात आंदोलनकारियों और शहीदों को नमन है, जिनके त्याग और संघर्ष के कारण आज उत्तराखण्ड एक पृथक राज्य के रूप में हमारे सामने है।

अमर बलिदानियों का जीवन और उनका संघर्ष वर्तमान पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनकी शहादत हमें यह संदेश देती है कि किसी भी महान परिवर्तन के पीछे त्याग, तपस्या, धैर्य और सामूहिक संकल्प की शक्ति होती है। उत्तराखण्ड राज्य हमें संघर्ष और बलिदान की विरासत में मिला है, इसलिए इस राज्य की प्रगति और समृद्धि केवल विकास के आंकड़ों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसका उद्देश्य यहां के लोगों के जीवन में वास्तविक खुशहाली, सम्मान और अवसर सुनिश्चित करना भी होना चाहिए।

आज आवश्यकता है कि हम शहीदों के सपनों के उत्तराखण्ड की कल्पना को व्यापक अर्थों में समझें। ऐसा उत्तराखण्ड, जहां विकास और पर्यावरण एक-दूसरे के पूरक हों, जहां हमारी पवित्र नदियां निर्मल रहें, हिमालय सुरक्षित रहे, वन और जैव-विविधता संरक्षित रहें तथा गांवों में रोजगार और शिक्षा के पर्याप्त अवसर उपलब्ध हों। ऐसा उत्तराखण्ड, जहां पलायन की विवशता कम हो और युवा अपने ही प्रदेश में अपनी प्रतिभा और क्षमता का उपयोग करते हुए प्रदेश के निर्माण में सहभागी बन सकें।

उत्तराखण्ड की पहचान केवल इसके सुंदर पर्वतीय भू-दृश्यों से नहीं, बल्कि इसकी आध्यात्मिक चेतना, देवभूमि की परंपरा, लोकसंस्कृति, लोकभाषाओं, लोककलाओं और प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व की जीवनशैली से भी है। राज्य आंदोलन के बलिदानियों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि हम इस विरासत को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखें।

आज जब पूरा विश्व पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास की दिशा में आगे बढ़ने का प्रयास कर रहा है, उत्तराखण्ड के पास प्रकृति और संस्कृति के संतुलन का अपना प्राचीन ज्ञान है। हिमालय और गंगा केवल उत्तराखण्ड की प्राकृतिक धरोहर नहीं, बल्कि भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक चेतना के आधार हैं। इसलिए इनके संरक्षण को उत्तराखण्ड के विकास की मूल धारा से जोड़ना समय की आवश्यकता है।

शहीदों के सपनों का उत्तराखण्ड वह होगा जहां आधुनिक शिक्षा के साथ संस्कार हों, विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण हो, पर्यटन के साथ स्थानीय समुदायों की समृद्धि हो, आध्यात्मिकता के साथ सेवा की भावना हो और आधुनिक तकनीक के साथ अपनी जड़ों से जुड़ाव बना रहे।

इस पावन अवसर पर हम सभी का दायित्व है कि उत्तराखण्ड राज्य आंदोलन के इतिहास को केवल स्मरण करने तक सीमित न रखें, बल्कि उसके मूल्यों को अपने जीवन और कार्यों में उतारें। युवाओं को राज्य आंदोलन के इतिहास, आंदोलनकारियों के संघर्ष और शहीदों के योगदान से परिचित कराना भी हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है, ताकि आने वाली पीढ़ियां समझ सकें कि उत्तराखण्ड का निर्माण किन संघर्षों और बलिदानों की नींव पर हुआ है।

आइए, इस बरसी पर हम उत्तराखण्ड के अमर बलिदानियों को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए यह संकल्प लें कि उनके त्याग को व्यर्थ नहीं जाने दें। हम ऐसा उत्तराखण्ड बनाने के लिए मिलकर कार्य करेंगे जो विकास की दृष्टि से सशक्त, पर्यावरण की दृष्टि से सुरक्षित, संस्कृति की दृष्टि से समृद्ध, आध्यात्मिक दृष्टि से जागृत और मानवीय मूल्यों की दृष्टि से आदर्श हो।

उत्तराखण्ड के अमर शहीदों को शत्-शत् नमन। उनका बलिदान हमारी प्रेरणा है, उनका संघर्ष हमारी विरासत है और उनके सपनों का उत्तराखण्ड हमारा संकल्प है।

मंगलवार, 1 सितंबर 2026

12 सितंबर को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत की तैयारियों को लेकर जनपद न्यायाधीश ने जिला स्तरीय अधिकारियों के साथ की समीक्षा बैठक



 


                           गौरव गुप्ता

गौतमबुद्धनगर 1 सितंबर 2026। जनपद न्यायाधीश गौतमबुद्धनगर अतुल श्रीवास्तव की अध्यक्षता में आज न्यायालय सभागार में जिला स्तरीय अधिकारियों की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता करते हुये मा0 जनपद न्यायाधीश ने बताया कि जनपद मुख्यालय स्थित दीवानी न्यायालय तथा समस्त तहसील न्यायालयों में 12 सितम्बर 2026 को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जायेगा।

      राष्ट्रीय लोक अदालत में मोटर दुर्घटना प्रतिकर अधिनियम के वाद, वैवाहिक वाद, भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम के वाद, दीवानी वाद, एमवी एक्ट एवं ई-चालान के वाद, आर्बिट्रेशन के वाद, लघु शमनीय वाद, धारा 138 एनआई एक्ट के वाद, विद्युत अधिनियम के वाद, भू-राजस्व के वाद तथा अन्य सुलह योग्य मामलों का निस्तारण किया जाएगा। इसके अतिरिक्त सेवा संबंधी मामले, पेंशन के मामले, श्रम संबंधी मामले तथा प्री-लिटिगेशन स्तर पर बैंक ऋण से संबंधित मामलों को भी आपसी सुलह-समझौते के माध्यम से निस्तारित किया जाएगा। वहीं विद्युत एवं बीएसएनएल के टेलीफोन बिल से संबंधित मामलों का भी पक्षकारों की सहमति से निस्तारण कराया जा सकेगा।

      बैठक में जनपद न्यायाधीश ने कहा कि आम नागरिकों को सरल, सहज एवं त्वरित न्याय उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राष्ट्रीय लोक अदालत का नियमित आयोजन किया जा रहा है। अतः सभी विभागीय अधिकारी अपने अपने विभागों से संबंधित वादों का पूर्व चिन्हांकन कर समयबद्ध तैयारी सुनिश्चित करें, जिससे 12 सितम्बर को अधिक से अधिक मामलों का निस्तारण संभव हो सके और नागरिकों को अधिकतम लाभ प्राप्त हो।

     जनपद न्यायाधीश ने मुख्य प्रशासनिक अधिकारी गौतमबुद्धनगर अनुराग चंद्र सारस्वत को निर्देशित करते हुए कहा कि उनके अधीन आने वाले सभी विभागों में लंबित वादों की अग्रिम पहचान कर त्वरित निस्तारण की तैयारी तत्काल प्रारंभ की जाए। इसी प्रकार पुलिस विभाग, श्रम विभाग, परिवहन विभाग, विद्युत विभाग,एनपीसीएल, स्वास्थ्य विभाग, बीएसएनएल एवं अन्य सभी संबद्ध विभागों को भी व्यापक स्तर पर तैयारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने यह भी अपेक्षा व्यक्त की कि राष्ट्रीय लोक अदालत के लाभ को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने के लिए व्यापक प्रचार प्रसार अभियान संचालित किया जाए, ताकि अधिकाधिक वादकारी इस अवसर का लाभ उठाकर अपने मामलों का सौहार्दपूर्ण निस्तारण करा सकें।

      जनपद न्यायाधीश ने यह भी बताया कि मामलों के निस्तारण हेतु पक्षकार संबंधित न्यायालय में संपर्क स्थापित कर सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, गौतमबुद्धनगर के ई-मेल dlsa.gbnnoida@gmail.com अथवा मोबाइल नंबर 9716535451 एवं 7678643985 पर संपर्क किया जा सकता है।

      बैठक में अपर जिला जज/विशेष न्यायाधीश (एससी/एसटी एक्ट)/ नोडल अधिकारी राष्ट्रीय लोक अदालत सोमप्रभा मिश्रा, सचिव (पूर्णकालिक) जिला विधिक सेवा प्राधिकरण शिवानी रावत, मुख्य विकास अधिकारी भाल चंद्र त्रिपाठी, प्रभारी जिला विकास अधिकारी/परियोजना निदेशक डीआरडीए नेहा सिंह सहित प्राधिकरण, पुलिस एवं विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारीगण उपस्थित रहे।

      

सरकारी सेवाओं में पारदर्शिता के साथ योग्यता को सर्वोच्च प्राथमिकता सुनिश्चित करना सरकार का लक्ष्यः मुख्यमंत्री,मुख्यमंत्री योगी से मिले प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में नवचयनित 40 अधिकारी

 


सत्ता बन्धु संवाददाता

40 अधिकारियों का हुआ चयन, 21 विभिन्न आईआईटी से शिक्षित, 8 महिला अधिकारी भी शामिल

मुख्यमंत्री के निर्देश पर बदली चयन प्रक्रिया, पहली बार लिखित परीक्षा और साक्षात्कार के आधार पर हुआ चयन*

लखनऊ, 1 सितंबर । उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में समूह ‘ख’ के अधिकारियों की नियमित भर्ती पूरी होने के बाद नवचयनित 40 अधिकारियों ने मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भेंट की। मुख्यमंत्री ने सभी चयनित अधिकारियों को बधाई देते हुए कहा कि लंबे अंतराल के बाद हुई इस भर्ती से बोर्ड की कार्यक्षमता मजबूत होगी और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कार्यों को नई गति मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार का लक्ष्य सरकारी सेवाओं में ऐसी चयन व्यवस्था को मजबूत करना है, जिसमें पारदर्शिता के साथ योग्यता को सर्वोच्च प्राथमिकता मिले। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में लागू की गई नई भर्ती प्रक्रिया इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की जिम्मेदारी सीधे प्रदेश के पर्यावरण और लोगों के स्वस्थ जीवन से जुड़ी है। ऐसे में नवचयनित अधिकारी अपनी तकनीकी दक्षता का इस्तेमाल पूरी जिम्मेदारी, संवेदनशीलता और ईमानदारी के साथ करें। उन्होंने अधिकारियों को प्रशिक्षण को गंभीरता से लेने और विभागीय कार्यप्रणाली के साथ मैदानी स्तर की चुनौतियों को समझने के निर्देश दिए। 

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में समूह ‘ख’ के 26 सहायक पर्यावरण अभियंता और 14 सहायक वैज्ञानिक अधिकारी, कुल 40 अधिकारियों का चयन किया गया है। चयनित अधिकारियों में 21 विभिन्न आईआईटी से शिक्षित हैं, जबकि अन्य अधिकारियों ने देश और प्रदेश के प्रतिष्ठित संस्थानों से शिक्षा प्राप्त की है। चयनित अधिकारियों में 8 महिलाएं भी शामिल हैं।

इस भर्ती की खास बात यह रही कि मुख्यमंत्री के निर्देश और सिद्धांतों के अनुरूप चयन प्रक्रिया में बदलाव किया गया। पहले बोर्ड में समूह ‘ख’ के अधिकारियों की भर्ती मुख्य रूप से केवल साक्षात्कार के आधार पर की जाती थी। पुरानी विनियमावली, 1995 में संशोधन कर चयन प्रक्रिया को लिखित परीक्षा और साक्षात्कार आधारित द्विस्तरीय व्यवस्था में बदला गया। नई व्यवस्था में लिखित परीक्षा को 85 प्रतिशत और साक्षात्कार को 15 प्रतिशत अंक का वेटेज दिया गया। इससे चयन में शैक्षणिक एवं तकनीकी योग्यता को प्रमुख आधार बनाया गया।

संशोधित विनियमावली के बाद 27 फरवरी, 2026 को 26 सहायक पर्यावरण अभियंता और 14 सहायक वैज्ञानिक अधिकारी पदों के लिए विज्ञापन जारी किया गया। 27 अप्रैल को प्रदेश के विभिन्न शहरों में एक साथ लिखित परीक्षा आयोजित हुई, जिसका आयोजन आईआईटी कानपुर के माध्यम से कराया गया। लिखित परीक्षा का परिणाम 8 जून को घोषित किया गया। इसके बाद उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की अध्यक्षता में चार साक्षात्कार पैनल गठित किए गए । पैनल में विभिन्न आईआईटी और विश्वविद्यालयों के विशेषज्ञों को भी शामिल किया गया। 4 जुलाई को साक्षात्कार पूरा हुआ और 8 जुलाई को अंतिम परिणाम घोषित किया गया।

इस बार नवचयनित अधिकारियों को सीधे क्षेत्र में तैनाती देने के बजाय प्रशिक्षण की व्यवस्था की गई है। मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुसार अधिकारियों के लिए एक माह का प्रशिक्षण कार्यक्रम निर्धारित किया गया है। प्रशिक्षण के तहत एक सप्ताह का कार्यक्रम आईआईएम, लखनऊ में आयोजित किया जा रहा है। सरकार का मानना है कि तकनीकी रूप से दक्ष अधिकारियों की नियमित भर्ती और उन्हें प्रशिक्षण देने से प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की निगरानी, पर्यावरणीय मानकों के अनुपालन और मैदानी कार्यों की प्रभावशीलता में सुधार होगा।

इस्कॉन मंदिर में इसबार श्री कृष्ण का श्रंगाररहेगा आर्कषण का केन्द्र, कयूआर कोड से होगें वीआईपी दर्शन- आदिकर्ता दास

 



मुकेश गुप्ता

गाजियाबाद । राजनगर स्थित इस्कॉन मंदिर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव को भव्य बनाने के लिए बड़े स्तर पर तैयारी जोरों पर हैं। इस्कॉन मंदिर को फूल बंगले में तब्दील किया जाएगा, साथ ही 24 घंटे अखंड हरिनाम संकीर्तन होगा तो वहीं रात्रि 12 बजे महाआरती विशेष आकर्षण का केन्द्र रहेगी। 4 सितंबर जन्माष्टमी पर इस बार वीवीआईपी भक्तजनो के लिए डिजिटल पास कयूआर कोड बनाएं जाएंगे। जो भी भक्त पखस बनाना चाहे अपने मोबाइल से बना लेगा।

यह जानकारी मंगलवार को प्रेसवार्ता में इस्कॉन मंदिर के अध्यक्ष आदिकर्ता प्रभु ने दी। उन्होंने बताया कि बताया कि जन्माष्टमी महोत्सव को लेकर मंदिर प्रशासन एवं सभी सेवकों द्वारा विशेष तैयारियां की जा रही हैं। जन्माष्टमी केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि भगवान श्रीकृष्ण के साथ अपने शाश्वत संबंध को पुनः जागृत करने और उनके चरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित करने का पावन अवसर है। अखंड संकीर्तन के साथ ही हरे कृष्ण, हरे राम महामंत्र का नृत्य एवं संकीर्तन भी आयोजित होगा। मंदिर के उपाध्यक्ष धनंजय जगन्नाथ प्रभु ने बताया कि जन्माष्टमी पर सैंकड़ों की संख्या में भक्त दर्शनो के लिए पहुंचते हैं। इसके लिए विशेष व्यवस्था की जा रही है। चार सितम्बर को श्रीकृष्ण के लिए मंदिर को फूल बंगले में तब्दील किया जाएगा जिसमें देशी-विदेशी फूलों से सजावट की जाएगी। भगवान को 108 व्यंजनों का भोग लगाया जाएगा व प्रकाट्य उत्सव के दौरान दिव्य अभिषेक किया जाएगा। उन्होंने बताया कि जन्माष्टमी के पूरे दिन भगवान के दिव्य दर्शन श्रद्धालुओं के लिए खुले रहेंगे। 

नगर निगम कार्यकारिणी उपाध्यक्ष प्रवीण चौधरी ने बताया कि पर्व के अवसर पर निगम की ओर से पेयजल, सफाई व स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था की जा रही है। जन्माष्टमी पर मंदिर बंद होने तक निगम के कर्मचारियों की डयूटी लगाई जाएगी ताकि सफाई को लेकर कोई अव्यवस्था न हो। 

मंदिर प्रबंधक सुरेश्वरदास प्रभु ने बताया कि इस पर्व पर शहर के गणमान्य लोग भी श्रीकृष्ण के दर्शन व आर्शीवाद प्राप्त करेंगे। मंदिर में एक से तीन सितम्बर तक श्रीकृष्ण कथा का आयोजन सुंदर गोपाल प्रभु द्वारा किया जा रहा है। जिसमें भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं, उनके संदेश एवं भक्ति के महत्व को सरल एवं भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया जाएगा। इस अवसर पर जोनल सुपरवाइजर सुंदर गोपाल दास, सौरभजायसवाल मौजूद रहे।