*💥परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्व ती , जयराम आश्रम के अध्यक्ष, पूज्य ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी और विशिष्ट अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर श्रीमद् भागवत कथा का किया उद्घाटन
*🌺मां गंगा के पावन तट परमार्थ निकेतन में हो रही श्रीमद् भागवत कथा का श्रवण करने हेतु भारत सहित विश्व के अनेक देशों से आये साधक*
*💥अपनी जड़ों, भारतीय संस्कृति व संस्कारों से जुड़ने का दिव्य अवसर*
*💥भागवत स्वरूप के श्रीमुख से भागवत श्रवण करें*
*🌺भाईश्री की 68 वर्ष की आयु और 55 वर्षों से भागवत यात्रा कर रहें है*
*🌹आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री नदेंदला भास्कर राव को अर्पित की भावभीनी श्रद्धाजंलि*
*🌸आंध्र प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री, डॉ. मनोहर भास्कर राव की गरिमामयी उपस्थिति*
ऋषिकेश, 4 मई। परमार्थ निकेतन के दिव्य और आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण प्रांगण में श्रीमद् भागवत कथा का शुभारम्भ अत्यंत भव्य और श्रद्धामयी वातावरण में सम्पन्न हुआ। पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी के पावन सान्निध्य में पूज्य भाई श्री जी के श्रीमुख से ज्ञान गंगा स्वरूप श्रीमद् भागवत कथा के प्रवाह का शुभारम्भ हुआ।
श्रीमद् भागवत कथा का शुभारम्भ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ, पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी, जयराम आश्रम के अध्यक्ष पूज्य ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी, आंध्र प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री डॉ. मनोहर भास्कर राव , यजमान परिवार एवं अन्य विशिष्ट अतिथियों ने सहभागिता कर इस आध्यात्मिक महोत्सव को दिव्यता प्रदान की।
माँ गंगा के पावन तट पर स्थित परमार्थ निकेतन में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा में भारत सहित विश्व के विभिन्न देशों से आए श्रद्धालु एवं साधक भाग ले रहे हैं। यह आयोजन आध्यात्मिक उन्नयन, अपनी जड़ों, भारतीय संस्कृति और सनातन संस्कारों से पुनः जुड़ने का एक अद्भुत अवसर है।
पूज्य भाई श्री जी, जिनकी आयु 68 वर्ष है और जो पिछले 55 वर्षों से निरंतर भागवत कथा का गायन कर रहे हैं और अपने अमृतमय वचनों से श्रोताओं को भक्ति, ज्ञान और जीवन मूल्यों का संदेश दे रहे हैं।
इस अवसर पर आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री नदेंदला भास्कर राव और यजमान परिवार के पूर्वजों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
इस दिव्य अवसर पर पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि भाई श्री भारतीय संस्कृति के साक्षात स्वरूप हैं। हमने मिलकर पूरे विश्व के साथ यात्रा की है और सनातन सूत्रों को विश्वभर में प्रसारित किया है, तथा उसके माध्यम से सम्पूर्ण विश्व को एक करने का प्रयास कर रहे हैं।
पूज्य स्वामी जी ने कहा कि यह भारत का सौभाग्य है कि यहाँ ऐसे संत हैं, ऐसी भगवत सत्ता है, जो विश्व की युवा पीढ़ी को अपनी पावनता से स्पर्श कर रही है। पूज्य ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी जी का मार्गदर्शन विद्यालयों व गुरुकुलों के माध्यम से हजारों विद्यार्थियों को प्राप्त हो रहा है।
श्रीमद्भागवत कथाओं के माध्यम से परिवारों में संस्कारों की गंगा प्रवाहित हो रही है। आने वाली पीढ़ियों के लिए यदि हम कुछ कर सकते हैं, तो उन्हें संस्कारों से युक्त करें। उन्हें नए-नए मॉडल की कारें दें, परंतु उनके जीवन को संस्कारों से भी सुसज्जित करें।
पूज्य स्वामी जी ने कहा कि बाहर के आकाश और दूरियों को कम करने के लिए हमें विज्ञान चाहिए, किंतु भीतर के आकाश से मिलने और आंतरिक दूरी को कम करने के लिए हमें श्रीमद्भागवत कथा, भारतीय संस्कृति और सनातन के संस्कार चाहिए।
जयराम आश्रम के अध्यक्ष, पूज्य ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी जी ने कहा कि हम तीन सखा, पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी, पूज्य भाई श्री और मैं, 1984 से साथ हैं। हमें साथ रहते हुए 42 वर्ष हो गए हैं। छोटी उम्र में भारतीय संस्कृति का जो ध्वज हमने उठाया, उसे आज भी हम पूरे विश्व में लहरा रहे हैं।
हम सबके बीच दो गंगाएँ प्रवाहित हो रही हैं, एक साक्षात गंगा और दूसरी भागवत कथा की ज्ञान गंगा। गंगा के किनारे कथा श्रवण करने का अवसर बार-बार नहीं मिलता, यह केवल आशीर्वाद से ही प्राप्त होता है।
हम तीनों बहुत समय बाद मिल रहे हैं, परमार्थ निकेतन में आज हमारा यह मिलन भी एक दिव्य संयोग है। मेरी आस्था, श्रद्धा, विश्वास और प्रेम इन पूज्य संतों के साथ है। हम सभी मिलकर इस देश में सनातन धर्म के उत्थान और कल्याण के लिए कार्य कर रहे हैं, यही संदेश हमारे गुरुओं ने हमें दिया है।
परमार्थ निकेतन की आरती का दृश्य ऐसा प्रतीत होता है मानो सम्पूर्ण विश्व यहीं उतर आया हो। पूज्य स्वामी जी के माध्यम से गंगा संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण और भारतीय संस्कृति का प्रसार, ये सभी प्रकल्प पूज्य स्वामी जी जैसे संत ही कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि वे सभी लोग भाग्यशाली हैं, जिन्हें परमार्थ निकेतन में पूज्य भाई श्री के श्रीमुख से कथा श्रवण करने का अवसर प्राप्त हो रहा है।
इस पावन अवसर पर आंध्र प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री डॉ. मनोहर भास्कर राव , एवं सप्तदिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का मंगलमय आयोजन मनोरथी पुरणमलजी बालुरामजी अग्रवाल , यजमान परिवार के नरेश अग्रवाल और धुनिया से आया परिवार आनंद के साथ कथा श्रवण कर रहे हैं।


















































