रविवार, 5 अप्रैल 2026

तृतीय ग्लोबल कॉन्फ्रेंस ऑफ मेडिटेशन लीडर्स के विशेष सत्र में भारत के उपराष्ट्रपति, भारत, सीपी राधाकृष्णन की मुख्य अतिथि के रूप में हुए उपस्थिति,स्वामी चिदानन्द सरस्वती का पावन सान्निध्य, आशीर्वाद एवं उद्बोधन





मुकेश गुप्ता

ऋषिकेश/ नई दिल्ली, 5 अप्रैल। नई दिल्ली के भारत मंडपम स्थित ऑडिटोरियम-1 में आयोजित दो दिवसीय तृतीय ग्लोबल कॉन्फ्रेंस ऑफ मेडिटेशन लीडर्स के विशेष सत्र में भारत के  उपराष्ट्रपति  सीपी राधाकृष्णन  की मुख्य अतिथि के रूप में गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रगीत एवं राष्ट्रगान के साथ हुआ। 

इस पावन अवसर पर विश्व विख्यात आध्यात्मिक गुरू, अध्यक्ष परमार्थ निकेतन, पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी का पावन सान्निध्य, आशीर्वाद व उद्बोधन प्राप्त हुआ। 

पूर्व निदेशक, सीबीआई, सीआरपीएफ, पद्मश्री डी. आर. कार्तिकेयन  ने स्वागत उद्बोधन देते हुए ध्यान को वैश्विक शांति का आधार बताया। इस अवसर पर आध्यात्मिक गुरू श्री श्री रविशंकर जी, सद्गुरु जग्गी वासुदेव जी एवं पिरामिड आध्यात्मिक सोसायटी आंदोलन के संस्थापक, ब्रह्मर्षि पत्रीजी के प्रेरणादायी वीडियो संदेशों के माध्यम से उनका आशीर्वाद प्राप्त हुआ। 

 उपराष्ट्रपति, भारत, राधाकृष्णन जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि युद्ध केवल देशों के बीच ही नहीं, बल्कि हमारे घरों और हमारे भीतर भी चल रहा है। अधिकांश संघर्ष हमारे अपने जीवन और परिवारों में उत्पन्न होते हैं। ऐसे में आत्मचिंतन (इंट्रोस्पेक्शन) और मेडिटेशन हमें आंतरिक शांति एवं आत्मज्ञान (एनलाइटनमेंट) प्रदान करता हैं। उन्होंने कहा कि हम अपने परिवार के प्रति जिम्मेदारियाँ निभाते हुए उनसे जुड़े रहते हैं, किन्तु यह जुड़ाव ऐसा होना चाहिए जिसमें संतुलित विरक्ति (डिटैचमेंट) भी हो, जिससे वास्तविक शांति प्राप्त हो सके।

उन्होंने आगे कहा कि मेडिटेशन हमारे मन की क्षमता (कैपेसिटी) और स्पष्टता (क्लैरिटी) को विकसित करता है। आज का मनुष्य वर्तमान में जीने के बजाय निरंतर दौड़ रहा है। जहाँ पैसा हमें एक कम्फर्टेबल लाइफ स्टाइल देता है, वहीं स्पिरिचुअलिटी हमें अटैचमेंट में रहते हुए भी उससे ऊपर उठना सिखाती है। नियमित मेडिटेशन से जीवन में क्लैरिटी आती है, इंटरनल पीस प्राप्त होती है और पॉजिटिव एप्रोच विकसित होती है। मेडिटेशन एक लैम्प की भांति है, जो हमारे भीतर सत्य, प्रकाश और पीस का संचार करता है। हमारा शरीर एक टेम्पल है और मेडिटेशन ईश्वर तक पहुँचने का एक मार्ग है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान “अमृत काल” में मेडिटेशन का महत्व और अधिक बढ़ गया है। माइंड केवल हमारे द्वारा ही कंट्रोल किया जा सकता है और मेडिटेशन इस कंट्रोल की प्रभावी साधन है। यदि हमें एक बेटर वल्र्ड का निर्माण करना है, तो उसके लिए बेटर माइंड की आवश्यकता है, जो मेडिटेशन के माध्यम से ही संभव है।

पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि आज विश्व को केवल “सीईओ” नहीं, बल्कि “बुद्ध सीईओ” पीस सीईओ की आवश्यकता है, ऐसे लीडर्स जो लेडर (सीढ़ी) भी बन सके और भीतर से जागृत भी हों। उन्होंने “योगः कर्मसु कौशलम्” का उल्लेख करते हुए कहा कि यह कौशल मेडिटेशन से ही प्राप्त होता है। मेडिटेशन हमें टाइम मैनेजमेंट, टंग मैनेजमेंट और थॉट मैनेजमेंट सिखाता है।

उन्होंने कहा कि मेडिटेशन केवल जीवन जीने की कला (हाउ टू लिव) ही नहीं, बल्कि नेतृत्व करने की कला (हाउ टू लीड) भी सिखाता है। यह हमें तीन टी-हैप्पी लिविंग, हेल्दी लिविंग और हार्मनी लिविंग की दिशा में अग्रसर करता है। मेडिटेशन हमें भीतर से रिपेयर कर भविष्य के लिए प्रिपेयर करता है तथा हमारे परिवेश और धरती को भी पॉजिटिव एनर्जी से चार्ज करता है।

संस्थापक, मुख्य ध्यान मार्गदर्शक, बुद्ध-सीईओ क्वांटम फाउंडेशन, डॉ. चंद्र पुलामारासेट्टी ने कहा कि मेडिटेशन हमारे विचारों को पॉजिटिव दिशा प्रदान करता है। उन्होंने सभी से इस अवेयरनेस को साझा करने का आह्वान किया।

सह-संस्थापक, क्वांटम लाइफ यूनिवर्सिटी, डॉ. लक्ष्मी कोंडावेती जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि इस प्लानेट पर रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति को पीस और हैप्पीनेस की आवश्यकता है, और दुनिया की सभी समस्याओं का समाधान मेडिटेशन में निहित है। उन्होंने सभी से अपनी जड़ों से जुड़कर इस प्लानेट को अधिक पीसफुल बनाने में सहयोग करने का आग्रह किया।

अध्यक्ष, पिरामिड स्पिरिचुअल ट्रस्ट, हैदराबाद, श्री विजयभास्कर रेड्डी ने कहा कि मेडिटेशन कोई फिलॉसफी मात्र नहीं, बल्कि जीवन का साइंस है। उन्होंने सभी को इसे एक्सपीरियंस करने के लिए आमंत्रित किया।

पूर्व निदेशक, सीबीआई, सीआरपीएफ, पद्मश्री श्री डी. आर. कार्तिकेयन जी ने सभी विशिष्ट अतिथियों का अभिनन्दन करते हुये अपने स्वागत भाषण में कहा कि ग्लोबल हार्मनी और ग्लोबल पीस के लिए मेडिटेशन नितांत आवश्यक है इसलिये मेडिटेशन को एवरीवेयर, एवरीवन और एवरी डे अपनाना होगा।

सभी विभूतियों ने मेडिटेशन को वैश्विक आवश्यकता और मानवता के उत्थान का आधार बताते हुये प्रतिदिन करने हेतु प्रेरित किया। 

इस अवसर पर ध्यान विषयक चार पुस्तकों मास्टरिंग द माइंड, मास्टरिंग एनर्जी एंड इमोशन्स, मास्टरिंग क्रिएशन, अंडरस्टैंडिंग द सेल्फ का विमोचन किया गया तथा संस्थापक एवं अध्यक्ष, क्वांटम लाइफ यूनिवर्सिटी, डॉ. न्यूटन कोंडावेती जी द्वारा ध्यान सत्र का संचालन किया गया।

विशेष पूर्ण सत्र के उपरांत सम्मेलन के अन्य सत्रों में विविध विषयों पर गहन चर्चा एवं विचार-विमर्श हुआ। मुख्य वक्तव्यों नेें “विश्व शांति के लिए ध्यान और अहिंसा की भूमिका” तथा “हृदय स्वास्थ्य एवं समग्र कल्याण में ध्यान का महत्व” जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे।

लीडर शेयरिंग सत्र में विभिन्न क्षेत्रों के लीडर्स ने अपने अनुभव साझा किए कि किस प्रकार उन्होंने ध्यान को अपने संगठनों एवं समुदायों में अपनाकर सकारात्मक परिवर्तन लाया। वहीं पैनल चर्चाओं में यह विमर्श हुआ कि ध्यान किस प्रकार स्पष्टता, भावनात्मक संतुलन एवं नेतृत्व क्षमता को विकसित करने में सहायक है।

केस स्टडी सत्रों में युवाओं के विकास एवं ग्रामीण परिवर्तन में ध्यान आधारित पहल के प्रभावशाली उदाहरण प्रस्तुत किए गए, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि ध्यान समाज के हर वर्ग में परिवर्तन लाने की क्षमता रखता है।

सम्मेलन के आयोजकों ने सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए भविष्य में भी ऐसे आयोजनों के माध्यम से विश्व में शांति, सद्भाव और जागरूकता का संदेश प्रसारित करने का संकल्प व्यक्त किया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।

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