गुरुवार, 5 नवंबर 2026

धीरेंद्र शास्त्री और संगीत राही: निशाने पर यादव-अहीर समाज ही नहीं, भगवान श्रीकृष्ण का सम्मान भी!-लेखक: सिकंदर यादव

 


धीरेंद्र शास्त्री और संगीत राही के बयानों को केवल व्यक्तिगत विचार या सामान्य बयानबाजी समझकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। दोनों के विवादित बयानों के पीछे दिखाई देने वाली जातिवादी सोच पर गंभीर सवाल उठना जरूरी है। एक तरफ भगवान श्रीकृष्ण को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियों का मामला है, तो दूसरी तरफ संगीत राही पर यादव-अहीर समाज को अपमानित और कलंकित करने वाले बयान देने के आरोप हैं।

आखिर इन लोगों को किसने अधिकार दे दिया कि वे करोड़ों लोगों की आस्था, इतिहास और सामाजिक अस्मिता पर हमला करें? क्या किसी जाति को अपमानित करना और उसके आराध्य भगवान श्रीकृष्ण के सम्मान को ठेस पहुँचाना ही इनकी वैचारिक श्रेष्ठता का प्रमाण है? यह कैसी धार्मिकता है, जिसमें नफरत को विचार और जातिगत अहंकार को संस्कृति का नाम दिया जा रहा है?

सबसे बड़ा सवाल राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत, भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से है। क्या राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी ऐसी जातिवादी मानसिकता का समर्थन करते हैं? यदि नहीं करते, तो अब तक इन बयानों की खुलकर निंदा क्यों नहीं की गई? कार्रवाई क्यों नहीं हुई? सार्वजनिक रूप से जवाबदेही तय क्यों नहीं की गई?

राजनीतिक और वैचारिक संगठनों की चुप्पी कभी-कभी उनके वास्तविक चरित्र पर सवाल खड़े करती है। यदि किसी विचारधारा से जुड़े लोगों को समाज का अपमान करने की छूट मिलती रहे और संगठन के जिम्मेदार नेता मौन रहें, तो उस मौन पर सवाल उठना स्वाभाविक है। क्या यह दोहरा चरित्र नहीं है कि एक तरफ हिंदू एकता की बातें की जाती हैं और दूसरी तरफ हिंदू समाज के ही एक बड़े समुदाय की आस्था और सम्मान को निशाना बनाया जाता है?

भारतीय जनता पार्टी में बैठे यादव नेताओं को भी अब अपनी राजनीतिक मजबूरियों से ऊपर उठकर सोचना होगा। याद रखिए, जिस समाज के वोट से सत्ता मिलती है, उसी समाज के सम्मान पर हमला होने पर चुप रहना राजनीतिक अवसरवाद है।

यादव-अहीर समाज को अब ऐसे लोगों की पहचान करनी होगी, जो मंचों से एकता का भाषण देते हैं, लेकिन व्यवहार में जातिगत भेदभाव और नफरत को बढ़ावा देने वाले बयानों पर सवालों से बचते हैं।

सवाल साफ है: क्या भगवान श्रीकृष्ण और यादव-अहीर समाज का अपमान करने वालों के लिए कोई जवाबदेही नहीं है? डॉ. मोहन भागवत, नितिन नबीन और नरेंद्र मोदी को इस मुद्दे पर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

समाज का स्वाभिमान किसी राजनीतिक दल की जागीर नहीं है।

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