मंगलवार, 10 फ़रवरी 2026

आईपीए ने डीएम से आरटीई के दाखिलों के लिए सक्षम अभिभावकों के आय प्रमाण पत्र पर रोक लगाने की मांग

 


                       मुकेश गुप्ता

आरटीई पोर्टल की धीमी गति से अभिभावक परेशान, आईपीए ने की प्रथम चरण की तिथि बढ़ाने की मांग

गाजियाबाद । इंडियन पेरेंट्स एसोसिएशन (आईपीए) ने आरटीई (शिक्षा का अधिकार) के अंतर्गत होने वाले दाखिलों में एक गंभीर मुद्दा उठाते हुए जिला प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। एसोसिएशन ने आरोप लगाया है कि आर्थिक रूप से सक्षम अभिभावक एक लाख रुपये से कम आय के प्रमाण पत्र बनवाकर आरटीई का अनुचित लाभ ले रहे हैं, जिससे वास्तविक जरूरतमंद और गरीब बच्चों का अधिकार प्रभावित हो रहा है। आईपीए की राष्ट्रीय अध्यक्ष सीमा त्यागी ने कहा कि हर वर्ष बिना समुचित जांच के आय प्रमाण पत्र जारी होने के कारण पात्र बच्चों को शिक्षा के मौलिक अधिकार से वंचित होना पड़ता है। उन्होंने प्रदेश के मुख्यमंत्री, जिला अधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी से ऐसे अभिभावकों के साथ-साथ लापरवाही बरतने वाले संबंधित कर्मचारियों एवं अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई करने की अपील की है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि आरटीई योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है, इसलिए किसी भी प्रकार की अनियमितता या फर्जीवाड़ा बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए। पारदर्शिता और कड़ी जांच सुनिश्चित कर ही इस योजना का वास्तविक लाभ जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचाया जा सकता है।

वहीं, आईपीए के उपाध्यक्ष विनय कक्कड़ ने बताया कि आरटीई दाखिलों का प्रथम चरण 2 फरवरी से शुरू हो चुका है, लेकिन पोर्टल के सुचारू रूप से कार्य न करने के कारण अभिभावकों को ऑनलाइन फॉर्म भरने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस संबंध में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ओ.पी. यादव से वार्ता कर समस्या से अवगत कराया गया है तथा प्रथम चरण की समय-सीमा बढ़ाने की मांग की गई है। बीएसए  ओपी यादव ने आश्वस्त किया है कि इस मुद्दे को उच्च अधिकारियों के साथ होने वाली ऑनलाइन बैठक में प्रमुखता से उठाया जाएगा, ताकि अभिभावकों को राहत मिल सके। आईपीए ने प्रशासन से मांग की है कि आय प्रमाण पत्रों की सख्त जांच, दोषियों पर कार्रवाई और आरटीई पोर्टल की तकनीकी खामियों को शीघ्र दूर कर दाखिला प्रक्रिया को सरल एवं पारदर्शी बनाया जाए, जिससे कोई भी पात्र बच्चा शिक्षा के अधिकार से वंचित न रहे।



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