सोमवार, 2 फ़रवरी 2026

लोक शिक्षण अभियान ट्रस्ट ने समाज वादी विचारक रामदुलार यादव के नेतृत्व में मनाई संत शिरोमणि रविदास की जंयती




                             मुकेश गुप्ता

  गाजियाबाद  1 फरवरी 2026 को मानवतावादी, समतामूलक समाज बनाने के प्रबल समर्थक, पाखंड-जातिवाद, धर्मान्धता के घोर विरोधी संत शिरोमणि रविदास जी का प्रकटोत्सव लोक शिक्षण अभियान ट्रस्ट द्वारा ज्ञानपीठ केन्द्र 1, स्वरुप पार्क जी0 टी0 रोड साहिबाबाद के प्रांगण में समाजवादी विचारक, शिक्षाविद राम दुलार यादव के नेतृत्व में आयोजित किया गया, विद्वानगणों व ज्ञानपीठ केन्द्र के साथियों ने महान समाज सुधारक संत रविदास जी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें स्मरण किया, तथा उनके बताए ज्ञान मार्ग के रास्ते पर चलने का संकल्प लिया, कार्यक्रम की अध्यक्षता ब्रह्म प्रकाश ने की, मुख्य अतिथि एस0 एन0 जायसवाल, संचालन श्रमिक नेता अनिल मिश्र ने, आयोजन इंजी0 धीरेन्द्र यादव ने किया, चन्द्रबली मौर्य, राम प्यारे यादव, वीर सिंह सैन, कैलाश यादव ने भी समारोह को संबोधित किया, राजेन्द्र सिंह, हुकुम सिंह ने भजन, देश-प्रेम के गीत सुना सभी को आत्मविभोर कर दिया, ताहिर अली ने ज्ञानपीठ सन्देश “लोक को शिक्षित करने का अभियान चलाना है’’ प्रस्तुत किया ।

        कार्यक्रम को संबोधित करते हुए समाजवादी चिन्तक शिक्षाविद राम दुलार यादव ने कहा कि संत रविदास  ने निर्भीकता पूर्वक उस समय समाज को सन्देश दिया जब देश वैचारिक संकट में था, चारों तरफ विषमता, जाति-पांत, पाखंड, धर्मान्धता, अहंकार, सामंतवादी ताकतों का बोलबाला था, तब उन्होंने कट्टरपंथी ताकतों को ललकारा और कहा कि भोली-भाली जनता को भ्रम फैलाकर ठगने का काम मत करो, लोगों में समता, समानता, बंधुत्व की भावना पैदाकर समतामूलक समाज बनाने का कार्य करो, धर्मान्धता पर चोट करते हुए उन्होंने कहा कि

                                  ‘’माथे तिलक, हाथ में माला, जग ठगने का स्वांग रचाया ।

                                    मारग छाडि, कुमारग डहके, साँची प्रेम बिन राम न पाया” ।

   उन्होंने न केवल पाखंडी हिन्दुओं को ही नहीं बल्कि अहंकारी, जुल्मी मुसलमानों को भी ललकारा और कहा कि 

                                        “देता रहे हजार बरस, मुल्ला चाहे अजान ।

                                      रविदास खुदा न मिल सकें, जौ लौ मन शैतान “ ।

   उनका सारा जीवन संत, महात्माओं की सेवा में लगा रहा, उन्होंने जन-जन को सद्कर्म करने का सन्देश दिया, तथा नेक कमाई से वह गरीबों, साधु-संतों का सत्कार करते रहे, तथा ऊंच-नीच, जाति-पांत के विरुद्ध लड़ाई लड़ते रहे, उन्होंने सत्संग में पाखंडियों को झकझोरते हुए कहा कि 

                                                     “जाति न पूछो साधु की, पूंछ लीजिये ज्ञान ।

                                                     मोल करो तलवार का , पड़ी रहे जो म्यान” ।

                                                “एकै माटी के सब भाड़ें, सबका एकौ सिरजन हारा” 

                      ऊंची जाति का अहंकार क्यों करता है, रुढ़िवादियों को समझाया ।

          श्री यादव ने कहा कि आज 21वीं शदी में भी हम असमानता, सवर्ण, अवर्ण, अहंकार, ईर्ष्या, द्वेष, नफ़रत, असहिष्णुता फैला लोगों में डर का वातावरण बना रहे है, यह देश, समाज के लिए शुभ संकेत नहीं है, आज रविदास जी के नाम को केवल राजनीतिक लाभ लेने के लिए प्रयोग किया जा रहा है, जिससे उनके करोड़ों समर्थकों का समर्थन हासिल हो, लेकिन उंनके विचार को आत्मसात न कर समाज में विषमता, नफ़रत पैदा किया जा रहा है, सद्भाव, भाईचारा, प्रेम और सहयोग का वातावरण देश. समाज में बनाने पर बल देना चाहिए, तभी हम संत शिरोमणि रविदास जी के विचार के प्रति न्याय कर पाएंगे ।

   सैकड़ों साथियों ने महान संत के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें स्मरण किया। कार्यक्रम में प्रमुख रुप से राम दुलार यादव, राम प्यारे यादव, कैलाश यादव, अनिल मिश्र, चन्द्रबली मौर्य, वीरेन्द्र यादव एडवोकेट, मुनीव यादव, सम्भूनाथ जायसवाल, तौसीर हुसैन, वीर सिंह सैन, बालकरन यादव, ताहिर अली, विजय भाटी एडवोकेट, ब्रह्म प्रकाश, विनोद यादव, हरीस ठाकुर, ओम प्रकाश अरोड़ा, बैजनाथ रजक, रामेश्ववर यादव, हरेन्द्र यादव, अमृत लाल चौरसिया, झारखंडे गुप्ता, फूलचंद पटेल, अवधेश यादव, संजय कुमार, संतोष कुमार आदि उपस्थित रहे।


                                                                                                                                   


                                                                                                                              

                                                                                                                               

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें