मुकेश गुप्ता
हमें सभी हिंदुओं को एक माला की तरह पिरोना हैः महामंडलेश्वर नवल किशोर दास महाराज
हिदू धर्म में छूआछूत व भेदभाव के लिए कोई जगह ही नहीं हैः स्वामी चक्रपाणि महाराज
गाजियाबादः सकल हिंदू समाज सिद्धार्थ विहार गाजियाबाद द्वारा रविवार को विराट हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया। सिद्धार्थ विहार चौक, पुलिस चौकी के पास हुए विराट ह्रिदू सम्मेलन के मुख्य अतिथि सिद्धपीठ श्री दूधेश्वर नाथ मठ महादेव मंदिर के पीठाधीश्वर जूना अखाड़ा के अंतरराष्ट्रीय प्रवक्ता एवं दिल्ली संत महामंडल के अध्यक्ष श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज रहे। विशिष्ट अतिथि दिल्ली संत महामंडल के महामंत्री महामंडलेश्वर नवल किशोर दास महाराज, अखिल भारतीय हिंदू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष व अखिल भारतीय संत महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी चक्रपाणि महाराज तथा प्राचीन देवी मंदिर द्वारका पुरी दिल्ली गेट के महंत व जूना अखाड़ा के सचिव गिरिशानंद गिरि महाराज रहे। श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज ने कहा कि सनातन धर्म ही एकमात्र ऐसा धर्म है, जो पूरे विश्व की ही नहीं समस्त जीव-जंतुओं के ठभी कल्याण की बात कहता है। प्रकृति, वृक्ष, जल, वायु, पृथ्वी, आकाश, सूर्य जिनसे भी हमारा असितत्व है, उन सभी की पूजा करता है। सनातन का अर्थ ही है कि जिसका अंत नो हो और सत्य का कभी अंत नहीं होता है। सनातन धर्म सत्य आधारित धर्म है, इसी कारण युग बदलते रहे और तरह-तरह के हमजे होते रहे, मगर सनातन धर्म यानि हिंदू भक्त धु्रव की तरह अटल रहा और हमेशा अटल रहेगा। आज हिंदू धर्म में जो सबसे बडी विकृति यह आई है कि हम जातिवाद, रंगवाद व क्षेत्रवाद में बंट गए हैं, जबकि सनातन धर्म में जात-पात के लिए कोई जगह ही नहीं है। हम सभी जब एक ही भगवान की संतान हैं तो ना कोई छोटा है और ना ही कोई बडा है। हम सभी एक समान है। अतः हमें इस बात का प्रण लेना है कि हमें एक ऐसे हिंदू राष्ट्र का निर्माण करना है, जिसमें समरसता हो और पूरा हिंदू समाज एक परिवार के रूप रहता हो। इस कार्य के लिए संतों को एकजुट होकर आगे आना होगा क्योंकि संत हिंदुओं को एकजुट कर उन्हें एक परिवार का रूप देने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। महामंडलेश्वर नवल किशोर दास महाराज ने कहा कि एक माला में कई तरह के फूल होते हैं। उनका रंग व आकृति भी अलग-अलग होते हैं, मगर एक धागे में जब उन्हें पिरोया जाता है तो सभी एक समान हो जाते हैं। इसी प्रकार हमें सभी हिंदुओं को भी जातवाद, परिवारवाद, क्षेत्रवाद, रंगवाद से मुक्त कर सनातन रूपी माला में पिरोना है। स्वामी चक्रपाणि महाराज ने कहा कि हिदू धर्म में छूआछूत व भेदभाव के लिए कोई जगह ही नहीं है। हिंदू धर्म जाति की नहीं कर्म की बात करता है। हमें जातिवाद के षडयंत्र को असफल करना है और हिंदुओं को एकजुट करना है। महंत गिरिशानंद महाराज ने कहा कि हिंदुओं का एकजुट होना आज की सबसे बडी आवश्यकता है। सकल हिंदू समाज सिद्धार्थ विहार गाजियाबाद के अध्यक्ष यतेंद्र नागर ने सभी संतों का स्वागत अभिनंदन किया। सचिव रवि गुप्ता व कोषाध्यक्ष रवि धमीजा ने विशेष सहयोग दिया।






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