शुक्रवार, 13 फ़रवरी 2026

सिद्धपीठ श्री दूधेश्वर नाथ मठ महादेव मंदिर में तीन दिवसीय फाल्गुन महाशिवरात्रि महोत्सव का शुभारंभ, श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज के पावन सानिध्य में शुरू हुआ महोत्सव, 15 फरवरी को उमड़ेगा देश-विदेश के भक्तों का सैलाब

 




  मुकेश गुप्ता

गाजियाबाद: सिद्धपीठ श्री दूधेश्वर नाथ मठ महादेव मंदिर में तीन दिवसीय फाल्गुन महाशिवरात्रि महोत्सव का शुभारंभ शुक्रवार को मंदिर के पीठाधीश्वर, जूना अखाड़ा के अंतरराष्ट्रीय प्रवक्ता एवं दिल्ली संत महामंडल के अध्यक्ष श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज के पावन सानिध्य एवं अध्यक्षता में हुआ।

महोत्सव के अवसर पर मंदिर परिसर को भव्य एवं आकर्षक फूल-बंगले के रूप में सजाया गया है। महाशिवरात्रि पर्व पर भगवान शिव के जलाभिषेक हेतु देश-विदेश से लाखों श्रद्धालुओं के आगमन की संभावना को देखते हुए मंदिर प्रशासन द्वारा विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं।

महाशिवरात्रि का आध्यात्मिक महत्व

श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज ने बताया कि महाशिवरात्रि का हिंदू धर्म में अत्यंत विशेष महत्व है। इसी दिन भगवान शिव लिंग रूप में प्रकट हुए थे तथा इसी तिथि को शिव-शक्ति का पावन मिलन, अर्थात भगवान शिव एवं माता पार्वती का विवाह संपन्न हुआ था। इसी कारण यह पर्व ‘शिवरात्रि’ नहीं बल्कि ‘महाशिवरात्रि’ कहलाता है।

भगवान शिव की भव्य बारात एवं विवाह आयोजन

शनिवार, 14 फरवरी की रात्रि को मंदिर परिसर में भगवान शिव एवं माता पार्वती का विवाह समारोह आयोजित किया जाएगा। विवाह से पूर्व भगवान शिव की भव्य बारात जस्सीपुरा मोड़ से निकलेगी, जिसमें भूत-प्रेत, शिवगणों के साथ-साथ देवी-देवताओं की अनुपम झांकियां देखने को मिलेंगी। विवाह उपरांत रात्रि 11 बजे से भजन संध्या का आयोजन होगा।

भगवान दूधेश्वर का अलौकिक श्रृंगार

मंदिर के मीडिया प्रभारी पिंटू सुथार ने बताया कि शनिवार 14 फरवरी को भगवान दूधेश्वर का भव्य श्रृंगार श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज के पावन सानिध्य में किया जाएगा।

श्री दूधेश्वर श्रृंगार सेवा समिति के अध्यक्ष विजय मित्तल एवं उनकी टीम द्वारा सायं 5:30 बजे भगवान का महाकाल स्वरूप में 56 भोग तथा लगभग 501 किलो फलों एवं फूलों से अद्भुत श्रृंगार किया जाएगा। इस सेवा में मुकेश, प्रतीक, राजेश, यश, नकुल, दक्ष, कुशंक सहित अनेक श्रद्धालुओं का विशेष सहयोग रहेगा।

14 फरवरी की रात्रि 12 बजे से जलाभिषेक प्रारंभ 

महाशिवरात्रि का पावन जलाभिषेक 14 फरवरी की रात्रि 12 बजे से प्रारंभ होगा। सर्वप्रथम मंदिर के पीठाधीश्वर श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज एवं श्री दूधेश्वर मंदिर विकास समिति के अध्यक्ष अनुज गर्ग द्वारा जलाभिषेक व पूजन किया जाएगा, इसके पश्चात मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे।

महाशिवरात्रि पर्व पर विशेष प्रशासनिक व्यवस्थाएं रविवार 15 फरवरी को महाशिवरात्रि पर्व पर भारी संख्या में श्रद्धालुओं के आगमन को देखते हुए जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन, नगर निगम एवं विद्युत विभाग सहित विभिन्न विभागों के सहयोग से व्यापक व्यवस्थाएं की गई हैं। अधिकारियों द्वारा मंदिर का निरीक्षण कर श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज से भेंट कर उनके सुझावों के अनुसार सभी तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं।

धर्मार्थ सेवा समिति द्वारा प्रसाद व्यवस्था

धर्मार्थ सेवा समिति पिछले 40 वर्षों से महाराजश्री की प्रेरणा से भक्तों की सेवा कर रही है। समिति द्वारा इस वर्ष भी नरेंद्र गुप्ता ‘आरती वाले’ के नेतृत्व में महाशिवरात्रि पर्व पर श्रद्धालुओं के लिए विशेष प्रसाद की व्यवस्था की गई है। रात्रि तक भक्तों को कुट्टू के आटे की पकौड़ी, मखाने की खीर एवं दही का प्रसाद वितरित किया जाएगा।

आठों प्रहर की विधिवत पूजा महाशिवरात्रि पर्व पर मंदिर में आठों प्रहर की विधिवत पूजा का आयोजन किया जाएगा। यह पूजा दूधेश्वर वेद विद्यालय के विद्वान आचार्यों द्वारा संपन्न कराई जाएगी।

पूजन में वेद विद्यालय के प्राचार्य तोयराज उपाध्याय के साथ वरिष्ठ अध्यापक नित्यानंद आचार्य, आचार्य रोहित त्रिपाठी, आचार्य किशन शर्मा, आचार्य अजय दाधीच तथा आचार्य दीपक द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार एवं शास्त्रोक्त विधि-विधान से भगवान दूधेश्वर की आराधना की जाएगी।

पूजन का समय इस प्रकार रहेगा—

प्रथम प्रहर: प्रातः 5 से 7 बजे

द्वितीय प्रहर: 8 से 10 बजे

तृतीय प्रहर: 11 से 1 बजे

चतुर्थ प्रहर: 2 से 4 बजे

पंचम प्रहर: 4:30 से 6 बजे

सांयकालीन आरती: 6:30 से 7 बजे

षष्ठ प्रहर: 7 से 9 बजे

सप्तम प्रहर: 9:30 से 11:30 बजे

अष्टम प्रहर: रात्रि 12 से 3 बजे तक

भक्तों को मिलेगा महाराजश्री का आशीर्वाद

महाशिवरात्रि पर्व पर आम श्रद्धालुओं से लेकर विशिष्ट अतिथि तक भगवान दूधेश्वर का जलाभिषेक एवं पूजन करेंगे तथा मंदिर के पीठाधीश्वर श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज से भेंट कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करेंगे।

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