बुधवार, 27 अगस्त 2025

श्री दूधेश्वर नाथ मठ महादेव मंदिर में चार दिवसीय श्री दूधेश्वर गणपति लड्डू महोत्सव शुरू हुआ

 



                         मुकेश गुप्ता

श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज ने अभिजीत बेला  में गणपति बप्पा को विधि-विधान के साथ विराजमान कराया

महाराजश्री के पावन सानिध्य व अध्यक्षता में  भगवान गणेश को 1100 लड्डू का भोग अर्पित किया गया

महोत्सव के पहले दिन कई शहरों के श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए मंदिर पहुंचे

शहर विधायक संजीव शर्मा व श्री दूधेश्वर मंदिर विकास समिति के अध्यक्ष धर्मपाल गर्ग ने भगवान की पूजा-अर्चना की

गाजियाबादःसिद्धपीठ श्री दूधेश्वर नाथ मठ महादेव मंदिर में बुधवार गणेश चतुर्थी पर विघ्नहर्ता भगवान गणेश विराजे। मंदिर के पीठाधीश्वर, श्रीपंचदशनाम जूना अखाड़ा के अंतर्राष्ट्रीय प्रवक्ता व दिल्ली संत महामंडल के अध्यक्ष श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज ने विधि-विधान के साथ अभिजीत बेला  में गणेश प्रतिमा की स्थापना कराई।  इसी के साथ महाराजश्री के पावन सानिध्य व अध्यक्षता में चार दिवसीय श्री दूधेश्वर गणपति लड्डू महोत्सव शुरू हो गया। पहले दिन कई शहरों से श्रद्धालु भगवान गणेश की पूजा-अर्चना के लिए मंदिर पहुंचे और उन्होंने महाराजश्री से भेंटकर उनका आशीर्वाद भी लिया। बुधवार को स्वस्ति वाचन, संकल्प पूर्वक गणेश गौरी पूजन, षोडश मातृका पूजन, कलश पूजन, नवग्रह पूजन , श्री सर्वतोभद्र मंडल पूजन, श्री गणेश जी का दूर्वा पूजन, मोदक तथा नानाविध द्रव्यों से गणेश सहस्रनाम द्वारा सहस्रार्चन तथा गणेश अथर्वशीर्ष ,संकट नाशन गणेश स्तोत्र एवं गणेश पंचरत्न स्तोत्र का पाठ हुआ। भगवान को 1100 लड्डू भोग प्रसाद अर्पित किया गया। श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज ने कहा कि गणेश चतुर्थी आशा और समृद्धि का 

त्यौहार है। यह पवित्र त्यौहार लोगों के बीच की दूरियों को कम कर आपस में मिल-जुलकर सद्भाव से रहने को बढ़ावा देता है। भगवान गणेश को नई शुरुआत के देवता, विघ्नों के हर्ता और विद्या का संरक्षक माना जाता है। उनकी पूजा-अर्चना करने से सभी विघ्न दूर होते हैं और बुद्धि-विद्या की प्राप्ति होती है, जिससे जीवन में सफलता मिलती है। श्री दूधेश्वर मंदिर में गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करना बहुत ही शुभ होता है क्योंकि भक्तों को भगवान गणेश व भगवान दूधेश्वर दोनों की कृपा एक साथ प्राप्त होती है। विधायक संजीव शर्मा ने सभी को गणेश चतुर्थी की बधाई दी और कहा कि भगवान गणेश शुभता के प्रतीक हैं और उनकी पूजा-अर्चना करने से सभी विघ्न दूर होते हैं और जीवन में शुभ ही शुभ होता है। श्री दूधेश्वर मंदिर विकास समिति के अध्यक्ष धर्मपाल गर्ग ने कहा कि गणेश चतुर्थी का पर्व भक्ति व अध्यात्म के साथ आपसी एकता व भाईचारे को मजबूत करता है। साथ ही लोगों को पर्यावरण का संदेश भी देता है। भगवान गणेश की पूजा-अर्चना आचार्य लक्ष्मीकांत पाढी, अमित गोस्वामी,प्राचार्य तोयराज उपाध्याय, वरिष्ठ आचार्य नित्यानंद,आचार्य रोहित त्रिपाठी,आचार्य अजय दाधीच  व आचार्य किशन ने कराई। श्री दूधेश्वर शृंगार  सेवा समिति के अध्यक्ष विजय मित्तल व उनकी टीम ने भगवान का भव्य शृंगार किया। मंदिर के मीडिया प्रभारी एस आर सुथार ने बताया कि श्रीमहन्त गौरी गिरि दूधेश्वर नाथ महादेव मठ मन्दिर समिति द्वारा आयोजित श्री दूधेश्वर गणपति लड्डू महोत्सव में 29 अगस्त तक प्रतिदिन प्रातः काल 10 बजे से 12 बजे तक भगवान श्री गणेश का  पंचोपचार पूजन सहित  पंचामृत से अभिषेक व गणेश अथर्वशीर्ष से दिव्य भव्य महाभिषेक होगा तथा दिव्य राजोपाचार पूजन होगा। 1008 नामों से भगवान गणपति का दूर्वा से सहस्रार्चन होगा और 1100 लड्डू भोग प्रसाद अर्पित करके आरती के साथ प्रथम प्रहर का पूजन सम्पन्न होगा। 28 अगस्त को रात्रि 8 बजे से श्री राधा वल्लभ संकीर्तन मंडल द्वारा भजन संध्या की जाएगी। 29 अगस्त को रात्रि 8 बजे से बंसल आर्ट ग्रुप मेरठ द्वारा रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाएंगे। भव्य झांकियां आकर्षण का केंद्र होंगी। 30 अगस्त को  भगवान गणपति को रथ में विराजमान कर श्री दूधेश्वर नाथ मठ महादेव मन्दिर से शोभा-यात्रा निकाली जाएगी। ढोल‌, ताशे, बैंड, डीजे ,झांकियों के साथ पूरे शहर में भजन-कीर्तन करते हुए व प्रसाद वितरित करते हुये शोभा-यात्रा श्री दूधेश्वर घाट छोटा हरिद्वार मुरादनगर पहुंचेगी, जहां आरती करके गणपति बप्पा को विदाई दी जाएगी। श्री दूधेश्वर मन्दिर विकास समिति के उपाध्यक्ष अनुज धर्म गर्ग व पवन पुत्र चोपड़ा महोत्सव में विशेष योगदान कर रहे हैं।

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8वीं वाहिनी, रा.आ.मो.बल ने श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गणेश चतुर्थी समारोह




                           मुकेश गुप्ता

गाजियाबाद । 8वीं वाहिनी, रा.आ.मो.बल के कैंप परिसर में  27 अगस्त को गणेश चतुर्थी का पावन पर्व अत्यंत श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। श्री गणेश जी की प्रतिमा की स्थापना गणपति पंडाल  में की गई, जहाँ ढोल-नगाड़ों की गूंज और “गणपति बप्पा मोरया” के जयघोष से सम्पूर्ण वातावरण भक्तिमय हो उठा।

इस समारोह के शोभायात्रा के दौरान उप महानिरीक्षक  प्रवीण कुमार तिवारी 8वीं वाहिनी एवं वाहिनी नावा अध्यक्ष श्रीमती अनुपमा गौतम सहित सभी अधिकारीगण एवं रेस्क्यूर्स और उनके परिवार के सदस्यों ने भाग लिया। यह यात्रा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक थी, बल्कि वाहिनी के सामूहिक उत्साह और एकजुटता का भी सजीव उदाहरण बनी।

श्री तिवारी एवं श्रीमती गौतम द्वारा विधिवत पूजा-अर्चना कर श्री गणेश जी की प्रतिमा को पंडाल में स्थापित किया गया। पूजा के उपरांत सभी उपस्थित भक्तों ने भगवान गणपति से आशीर्वाद प्राप्त किया और उनके चरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित की।

इस अवसर पर श्री तिवारी ने समस्त अधिकारियों, रेस्क्यूर्स एवं उनके परिवारों को गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनाएँ दीं और उनके जीवन में सुख, समृद्धि एवं सफलता की कामना की। उन्होंने कहा की 8वीं वाहिनी के रेस्क्यूर्स, जो विपरीत परिस्थितियों में भी जनसेवा के लिए तत्पर रहते हैं, उनके लिए यह पर्व एक आध्यात्मिक ऊर्जा का स्रोत है यह आयोजन हमें याद दिलाता है कि हर आरंभ श्री गणेश के आशीर्वाद से ही मंगलमय होता है—और यही भावना हमारे सेवा कार्यों में भी प्रतिबिंबित होनी चाहिए।

गणेश चतुर्थी केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि सामूहिक चेतना, सेवा भावना और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है। 8वीं वाहिनी द्वारा इस आयोजन में दिखाया गया समर्पण यह दर्शाता है कि जब कर्तव्य और श्रद्धा एक साथ चलते हैं, तो हर कार्य दिव्यता को प्राप्त करता है।

मंगलवार, 26 अगस्त 2025

वरदान मल्टीस्पेश्यिलिटी हॉस्पिटल का रक्तदान शिविर आयोजित, मेवाड़ के 89 विद्यार्थियों ने किया रक्तदान

 





                          मुकेश गुप्ता

गाजियाबाद। वसुंधरा स्थित मेवाड़ ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के विवेकानंद सभागार में वरदान मल्टीस्पेश्यलिटी हॉस्पिटल एवं रोटरी क्लब ऑफ गाजियाबाद नॉर्थ के जनहित में आयोजित शिविर में कुल 89 विद्यार्थियों एवं शिक्षण स्टाफ ने रक्तदान किया। मेवाड़ ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के महासचिव अशोक कुमार सिंघल, निदेशिका डॉ. अलका अग्रवाल एवं रोटरी क्लब ऑफ गाजियाबाद नॉर्थ के अध्यक्ष पुनीत अग्रवाल ने संयुक्त रूप से फीता काटकर रक्तदान शिविर का उद्घाटन किया। इस मौके पर डॉ. अलका अग्रवाल को एक स्मृति चिह्न देकर सम्मानित भी किया गया। स्वेच्छा से रक्तदान करने वाले विद्यार्थियों का पहले सामान्य स्वास्थ्य परीक्षण हुआ। रक्तदान के बाद विद्यार्थियों एवं शिक्षण स्टाफ को वरदान हॉस्पिटल की ओर से प्रमाण पत्र, उपहार और फल प्रदान किये गये। विद्यार्थियों को रक्तदान करने के फायदे भी बताये गये। बताया गया कि रक्तदान करने से नई रक्त कोशिकाओं का जन्म होता है, कैंसर, मोटापा, शुगर जैसी अन्य जानलेवा बीमारियों का खतरा कम होता है, हिमोग्लोबिन की मात्रा बढ़ जाती है। पूरे शरीर में नई ऊर्जा का संचार होता है। शिविर में मेवाड़ की एनएसएस इकाई के कार्यक्रम अधिकारी अमित कुमार के निर्देशन में स्वयंसेवकों ने भी अपनी सेवाएं प्रदान कीं। उन सभी को प्रमाण पत्र वितरित किये गये। वरदान मल्टीस्पेश्यलिटी हॉस्पिटल के कोर्डिनेटर-इंचार्ज विक्रांत सिंह और उनकी टीम ने रक्तदान प्रक्रिया को पूरा कराया। शिविर में रोटरी क्लब ऑफ गाजियाबाद नॉर्थ के अध्यक्ष पुनीत अग्रवाल के अलावा सचिव रजत जिन्दल, कोषाध्यक्ष शिशिर, अग्रवाल, ब्लड डोनेशन चेयरमैन अर्पित जैन समेत मेवाड़ परिवार का तमाम स्टाफ मौजूद रहा।

पावन पर्व हरतालिका तीज की परमार्थ निकेतन से शुभकामनायें, नारी शक्ति, समाज और संस्कृति की आधारशिला--स्वामी चिदानन्द सरस्वती


गुरु रामदास जी महाराज के ज्योति ज्योत दिवस पर उनकी निष्ठा व राष्ट्रभक्ति को नमन

ऋषिकेश 26 अगस्त ।  परमार्थ निकेतन से पावन पर्व हरतालिका तीज एवं सिख पंथ के चतुर्थ गुरु, गुरु साहिब श्री गुरु रामदास जी महाराज का ज्योति ज्योत दिवस पर अनेकानेक शुभकामनायें। 

हरतालिका तीज के अवसर पर गंगा तट पर विशेष प्रार्थना, संकीर्तन एवं आरती का आयोजन किया गया। हरतालिका तीज केवल एक पर्व या परंपरा नहीं है, बल्कि यह नारी शक्ति की त्यागमयी शक्ति, अटूट संकल्प और समर्पण का अद्वितीय प्रतीक है। 

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि नारी शक्ति समाज और संस्कृति की आधारशिला है। नारी का स्वरूप केवल परिवार तक सीमित नहीं है, बल्कि वह पूरे समाज और संस्कृति की दिशा निर्धारित करता है। सनातन परंपरा में गार्गी और मैत्रेयी जैसी विदुषी नारियों ने ज्ञान, तपस्या और आध्यात्मिक शक्ति से यह सिद्ध किया कि नारी केवल गृहिणी नहीं, बल्कि संस्कृति की वाहक और ज्ञान की धारा है। आज आवश्यकता है कि हम इन आदर्शों को स्मरण करते हुए आधुनिक समाज में नारी को समान अवसर दें। शिक्षा, सम्मान और नेतृत्व के क्षेत्र में नारी का सशक्तिकरण ही सच्चे अर्थों में राष्ट्र और मानवता का सशक्तिकरण है।

नारी का त्याग, तप और करुणा ही परिवार और राष्ट्र की स्थिरता का आधार है। हरतालिका तीज हमें यह प्रेरणा देती है कि हम प्रकृति में आस्था रखें, अपने जीवन में संयम और साधना का समावेश करें तथा पर्यावरण संरक्षण और पारिवारिक सौहार्द को प्राथमिकता दें।”

यह पर्व हमें याद दिलाता है कि हमारी परंपराएँ व अनुष्ठान, जीवन मूल्य और संस्कार हैं। जब नारी सशक्त और संतुलित होती है तो पूरा समाज समृद्ध और उन्नत होता है।

परमार्थ निकेतन परिवार ने सिख परंपरा के चतुर्थ गुरु, श्री गुरु रामदास जी महाराज के ज्योति ज्योत दिवस पर गंगा जी की आरती के माध्यम से विशेष श्रद्धांजलि अर्पित की। गुरु साहिब की वाणी और सेवाभाव को याद करते हुए स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने अपने संदेश में कहा कि गुरु रामदास जी का जीवन त्याग, सेवा और करुणा का प्रतीक है। उन्होंने न केवल अध्यात्म का प्रकाश फैलाया, बल्कि समाज को सच्चाई, समानता और भाईचारे के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी।

स्वामी जी ने कहा, गुरु रामदास जी का दर्शन है कि सच्ची भक्ति केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं होनी चाहिये बल्कि सेवा और समर्पण में ही उसका वास्तविक स्वरूप प्रकट होना चाहिये है। उनकी अमर वाणी आज भी मानव समाज को एकजुट होकर सत्य, न्याय और शांति की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान करती है।

स्वामी जी ने कहा कि हम सभी अपनी संस्कृति और परंपराओं से जुड़े रहें। जब हम त्याग, सेवा और साधना के मार्ग पर चलते हैं तो जीवन में प्रेम, शांति और सद्भावना का विस्तार होता है। यही पर्वों और महापुरुषों के जीवन का वास्तविक संदेश है।


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श्री दूधेश्वर नाथ मठ महादेव मंदिर में 27 अगस्त से शुरू होगा श्री दूधेश्वर गणपति लड्डू महोत्सव

 

                        मुकेश गुप्ता

श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज अभिजीत मुहूर्त में गणपति बप्पा को विराजमान कराएंगे

महाराजश्री के पावन सानिध्य व अध्यक्षता में 29 अगस्त तक पूजा-अर्चना कर भगवान गणेश को 1100 लड्डू का भोग अर्पित होगा

30 अगस्त को श्री दूधेश्वर घाट छोटा हरिद्वार मुरादनगर पर गणेश प्रतिमा का विसर्जन होगा


गाजियाबादः ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि।तन्नो दन्ति: प्रचोदयात्।।

सिद्धपीठ श्री दूधेश्वर नाथ मठ महादेव मंदिर के पीठाधीश्वर, श्रीपंचदशनाम जूना अखाड़ा के अंतर्राष्ट्रीय प्रवक्ता व दिल्ली संत महामंडल के अध्यक्ष श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज के पावन सानिध्य व अध्यक्षता में होने वाला श्री दूधेश्वर गणपति लड्डू महोत्सव देश भर में अपनी पहचान बना चुका है। महोत्सव में पूजा-अर्चना के लिए देश भर से श्रद्धालु मंदिर आते हैं। श्रीमहन्त गौरी गिरि दूधेश्वर नाथ महादेव मठ मन्दिर समिति द्वारा इस बार श्री दूधेश्वर गणपति लड्डू महोत्सव का आयोजन 27 से 29 अगस्त तक होगा और 30 अगस्त को गणपति बप्पा का विसर्जन श्री दूधेश्वर घाट छोटा हरिद्वार मुरादनगर में धूमधाम से किया जाएगा। श्री दूधेश्वर नाथ महादेव मठ मन्दिर में 4 दिवसीय श्री दूधेश्वर गणपति लड्डू महोत्सव का श्रीगणेश 27 अगस्त को अभिजीत मुहूर्त में गणेश प्रतिमा स्थापित करके किया जाएगा। महाराजश्री प्राण-प्रतिष्ठा के बाद भगवान गणेश की पूजा-अर्चना व अभिषेक करेंगे। 27 अगस्त से लेकर 29 अगस्त तक प्रतिदिन प्रातः काल 10 बजे से 12 बजे तक भगवान श्री गणेश का  पंचोपचार पूजन सहित  पंचामृत से अभिषेक व गणेश अथर्वशीर्ष से दिव्य भव्य महाभिषेक होगा तथा दिव्य राजोपाचार पूजन होगा। 1008 नमो से भगवान गणपति का दूर्वा से सहस्रार्चन होगा और 1100 लड्डू भोग प्रसाद अर्पित करके आरती के साथ प्रथम प्रहर का पूजन सम्पन्न होगा। सायंकाल 5 बजे से 7 बजे तक भगवान श्री गणेश का पूजन अर्चन होगा रात्रि 8 बजे से 10 बजे तक प्रख्यात कलाकार सांस्कृतिक कार्यक्रमों, नृत्य नाटिका से भगवान को प्रसन्न करेंगे। भजनों से, भगवान गणपति की महिमा का गुणगान होगा और उसके बाद भक्तों में प्रसाद का वितरण होगा। 30 अगस्त को  भगवान गणपति को रथ में विराजमान कर श्री दूधेश्वर नाथ मठ महादेव मन्दिर से शोभा-यात्रा निकाली जाएगी। ढोल‌ ताशे, बैंड, डीजे ,झांकियों के साथ पूरे शहर में भजन-कीर्तन करते हुए व प्रसाद वितरित करते हुये शोभा-यात्रा श्री दूधेश्वर घाट छोटा हरिद्वार मुरादनगर पहुंचेगी, जहां आरती करके गणपति बप्पा मोरया अगले वर्ष तू जल्दी आ के जयघोष के साथ गणपति बप्पा को विदाई दी जाएगी। सभी कार्यक्रम श्रीमहन्त नारायण गिरि के पावन सानिध्य व अध्यक्षता में होंगे। श्री दूधेश्वर मन्दिर विकास समिति अध्यक्ष धर्मपाल गर्ग व उपाध्यक्ष अनुज धर्म गर्ग का विशेष सहयोग रहेगा।  व्यवस्था श्री दूधेश्वर शृंगार  सेवा समिति के अध्यक्ष विजय मित्तल व समस्त दूधेश्वर परिवार की रहेगी।

प्रताप विहार रामलीला मैदान में हुआ भव्य भूमि पूजन,शहर के गडमान्य लोग रहे उपस्थित

 








                        मुकेश गुप्ता

गाजियाबाद । श्री रामचरितमानस रामलीला कमेटी पंजी द्वारा 20 सितंबर से 4 अक्टूबर तक होने वाली भव्य श्री रामलीला मंचन समारोह को लेकर भूमि पूजन का आयोजन प्रताप विहार रामलीला मैदान में किया गया भूमि पूजन में मुख्य अतिथि रही महापौर श्रीमती सुनीता दयाल विशिष्ट अतिथि पूर्व राज्यसभा सांसद अनिल अग्रवाल 

 पावन सानिध्य पूज्य  मछिंद्र पुरी महाराज एवं हिंदू जागरण मंच से  गोपाल  परविंदर शेखावत  विशेष रूप से उपस्थित रहे शहर एवं लाइन पर क्षेत्र के सभी सामाजिक गणमान्य लोगों ने भूमि पूजन के साथ हवन यज्ञ में आहुति  दी भूमि पूजन के पश्चात श्री जी रामचरितमानस रामलीला कमेटी के आग्रह पर  मान्य महापौर श्रीमती सुनीता दयाल  के द्वारा प्रताप विहार रामलीला मैदान में नव निर्माण हुए सुलभ शौचालय का भी निरीक्षण किया तथा रामलीला मैदान के मुख्य द्वार श्री राम द्वार का नारियल फोड़कर शिलन्यास किया गया इस अवसर पर शहर एवं लाइन पार क्षेत्र के हजारों लोगों ने पूजन के पश्चात प्रसाद ग्रहण किया। कार्यक्रम सत्यवीर बेसोया संयोजक, पं राजेश शर्मा अध्यक्ष, राजीव चौहान महामंत्री धर्मपाल सिंह कोषाध्यक्ष, राकेश चौहान, सुरेश शर्म, सुनील , पार्षद संतोष राणा देवनारायण शर्मा ओमप्रकाश रोड अरुण शर्मा परविंदर गहलोत गजेंद्र ठाकुर विजय भाटी सुंदर भाटी श्रीकांत शर्मा नरेश भटनागर बबलू पाल चंद्रभान पचौरी पीके शर्मा अमित सिंह भरत शर्मा अशोक शर्मा आर के सप्रू कुणाल यादव देवी सिंह नगर बृजभूषण छाबड़ा डीके शर्मा ज्ञानेंद्र चौधरी संजीव राठौड़ हरीश राठौर प्रदीप जादौन चमन सिंह सेन एसके राजन धर्मेंद्र चौधरी नरेश भारद्वाज अजय सिंह रावत राघव संजय कंसल एसके शर्मा देशराज केपी सिंह विपिन शर्मा बीके शर्मा हनुमान राहुल राणा नीरज भानु सिसोदिया सुनील शर्मा राजेश कौशिक शिवमंगल शर्मा केपी सिंह जादौन दिनेश शर्मा राजू चौहान रवि यादव देवेंद्र चौहान कि डंगवाल मंडल जी आदि तमाम लोगों पर स्थित रहे

सोमवार, 25 अगस्त 2025

उज्जीवन बैंक ने नंदग्राम के बड़ा पार्क में किया पोधारोपोण

  





                           मुकेश गुप्ता

गाजियाबाद । उज्जीवन बैंक की राजनगर शाखा द्वारा नंदग्राम  ई-ब्लॉक के बड़ा पार्क और दुर्गा मंदिर पार्क में पेड़ पौधे लगाए गए और श्रद्धालुओं को सुंदरकांड विस्तृत किए गए 

उज्जीवन बैंक के ब्रांच मैनेजर कुलदीप सिंह तथा असिस्टेंट मैनेजर विपिन कुमार तथा अंकित जी उसमें शामिल रहे और बैंक के सभी स्टाफ ने पेड़ पौधों लगाने में और पुस्तक बांटने में योगदान दिया

भगवान श्री वराह जयंती पर परमार्थ निकेतन से देशवासियों को मंगलकामनायें, सत्य, शक्ति और बुद्धि का समन्वय ही सृष्टि के संरक्षण में सक्षम--स्वामी चिदानन्द सरस्वती

 


धर्म, न्याय और सृष्टि-संतुलन का दिव्य प्रतीक वराह अवतार

ऋषिकेश, 25 अगस्त। परमार्थ निकेतन में आज भगवान श्री वराह, श्री हरि विष्णु का तृतीय अवतार की धूमधाम से जयंती मनायी। परमार्थ गुरूकुल के ऋषिकुमारों ने विशेष पूजन-अर्चन व यज्ञ कर भगवान वराह अवतार की आराधना की। 

श्री हरि विष्णु जी ने इस अवतार में पृथ्वी माता को समुद्र मंथन और असुरों के अत्याचार से बचाने के लिए वराह का रूप धारण किया। यह अवतार धर्म और न्याय की रक्षा का प्रतीक है साथ ही सृष्टि-संतुलन और जीवन में संतुलन स्थापित करने का संदेश भी देता है।

शास्त्रों के अनुसार, जब पृथ्वी माता असुरों के अत्याचार और अधर्म के कारण कराह रही थी तब भगवान विष्णु ने वराह रूप धारण कर उन्हें समुद्र से उठाया और सृष्टि को स्थिर किया। संकट और अधर्म के समय सच्चे धर्म और साहस के द्वारा ही परिस्थितियों को सुधारा जा सकता है। वराह अवतार यह संदेश देते हैं कि धर्म, न्याय और नैतिकता की रक्षा प्रत्येक व्यक्ति का धर्म है, चाहे परिस्थितियाँ कितनी भी कठिन क्यों न हों।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने अपने संदेश में कहा कि वराह अवतार में भगवान विष्णु जी का शरीर ऊँचा और भारी, जबकि सिर मानवीय और शरीर वराह के रूप में है। यह प्रतीक है कि सत्य, शक्ति और बुद्धि का समन्वय ही सृष्टि के संरक्षण में सक्षम है। ऊँचा और भारी शरीर शक्ति का प्रतिनिधित्व करता है, जो संकटों और असुरों के अत्याचार का सामना कर सृष्टि को स्थिर कर सके। मानवीय सिर बुद्धि और विवेक का प्रतीक है, जो निर्णय और न्याय का मार्ग दिखाता है। इस अवतार से हमें यह शिक्षा मिलती है कि शक्ति बिना विवेक और विवेक बिना शक्ति असफल है।

जीवन में संकट के समय साहस, न्याय और संतुलन की आवश्यकता होती है। वराह अवतार हमें प्रेरित करता है कि हम न केवल अपने लिए, बल्कि समाज और सृष्टि के लिए भी सही निर्णय लें। जैसे भगवान ने पृथ्वी माता को समुद्र से बचाया, वैसे ही हम भी अपनी जिम्मेदारियों को समझे और सृष्टि व समाज की रक्षा के लिये आगे आये।

वराह अवतार हमें यह याद दिलाता है कि जीवन में चाहे कितनी भी कठिन परिस्थितियाँ हों, धर्म और नैतिकता का मार्ग कभी नहीं छोड़ना चाहिये। हमारे विचार, वचन और कर्म इसी मार्ग के अनुसार होने चाहिए।

हर व्यक्ति का कर्तव्य है कि वह समाज और पर्यावरण के संतुलन के लिए योगदान दे। अपने कर्मों के माध्यम से हम न केवल अपने जीवन को सुधार सकते हैं, बल्कि पूरे समाज को समृद्ध और संतुलित बना सकते हैं। जीवन में कठिनाइयाँ आएँगी, लेकिन सही मार्गदर्शन और श्रेष्ठ कर्मों के द्वारा हम हर चुनौती को पार कर सकते हैं।

भगवान श्री वराह जयंती जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सत्य, न्याय, धर्म और सृष्टि-संतुलन को स्मरण करने वाला अवसर है। यह दिन हमें प्रेरित करता है कि हम अपने जीवन में साहस, नैतिकता और संतुलन का मार्ग अपनाएँ, समाज और प्रकृति के उत्थान में योगदान दें, और सकारात्मक परिवर्तन लाएँ। इस पावन अवसर पर सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ! प्रभु श्री वराह की कृपा से हम सभी के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और संतुलन हमेशा बना रहे।

भाजपा महानगर कार्यालय में पूर्व केंद्रीय मंत्री सिकंदर बख्त जी की 107वीं जयंती पर हुई श्रद्धांजलि सभा


                          मुकेश गुप्ता

गाज़ियाबाद। भारतीय जनता पार्टी के नगर कार्यालय, नेहरू नगर, गाज़ियाबाद में पूर्व केंद्रीय मंत्री स्व. सिकंदर बख्त जी की 107वीं जयंती पर रविवार को एक विनम्र श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष माननीय जमाल सिद्दीकी, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एस. एम. अकरम एवं ज़ाकिर हुसैन, प्रदेश अध्यक्ष अल्पसंख्यक मोर्चा उत्तर प्रदेश माननीय कुंवर बासित अली, भाजपा गाज़ियाबाद महानगर अध्यक्ष एवं राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य माननीय मयंक गोयल तथा राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य डॉ. असलम फहीम सैफी सहित अनेक पदाधिकारी उपस्थित रहे।

राष्ट्रीय अध्यक्ष जमाल सिद्दीकी ने अपने उद्बोधन में कहा कि सिकंदर बख्त जी भारतीय राजनीति के आदर्श व्यक्तित्व थे, जिन्होंने सदैव देशहित और समाज की सेवा को प्राथमिकता दी। उनकी सादगी और ईमानदारी आज भी कार्यकर्ताओं को प्रेरणा देती है। प्रदेश अध्यक्ष कुंवर बासित अली ने कहा कि स्व. बख्त जी ने राष्ट्रवाद और सेवा की परंपरा को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया और उनका जीवन संगठन व देशहित को सर्वोपरि रखने का संदेश देता है। महानगर अध्यक्ष मयंक गोयल ने कहा कि गाज़ियाबाद के कार्यकर्ताओं के लिए यह गौरव की बात है कि हम सब आज उनकी जयंती पर उन्हें याद कर रहे हैं, उनका संघर्ष और समर्पण संगठन के प्रति निष्ठा और कर्तव्यनिष्ठा का मार्ग दिखाता है।

श्रद्धांजलि सभा का संचालन एडवोकेट जावेद खान सैफ (पूर्व अध्यक्ष, पश्चिम उत्तर प्रदेश, भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा) ने किया। इस अवसर पर डॉ. रिजवान मीर (निवर्तमान अध्यक्ष, पश्चिम उत्तर प्रदेश), सरदार बलप्रीत सिंह (महानगर अध्यक्ष, अल्पसंख्यक मोर्चा), सरदार तरनजीत सिंह (प्रदेश उपाध्यक्ष, अल्पसंख्यक मोर्चा) सहित अनेक कार्यकर्ता व पदाधिकारी उपस्थित रहे और सभी ने पुष्पांजलि अर्पित कर स्व. सिकंदर बख्त जी को श्रद्धांजलि दी। यह जानकारी भाजपा महानगर मीडिया प्रभारी प्रदीप चौधरी ने दी।

 सभा में जमाल सिद्दीकी जी राष्ट्रीय अध्यक्ष भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा, एस एम अकरम, जाकिर हुसैन राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, कुंवर बासित अली प्रदेश अध्यक्ष,सरदार तरनजीत सिंह प्रदेश उपाध्यक्ष अल्पसंख्यक मोर्चा, मयंक गोयल महानगर अध्यक्ष,राष्ट्रीय कार्यकारणी सदस्य डॉ असलम फहीम सैफी,एडवोकेट जावेद खान सैफ पूर्व अध्यक्ष पश्चिम उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक मोर्चा,डॉक्टर रिजवान मीर निवर्तमान अध्यक्ष पश्चिमी उत्तर प्रदेश भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा आदि उपस्थित हुए। 


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रविवार, 24 अगस्त 2025

गुरु ग्रंथ साहिब विश्व बंधुत्व, अखंडता एवं एकता का अनुपम प्रतीक है---स्वामी चिदानन्द सरस्वती



श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी, प्रकाश पर्व कर्तव्य और उत्तरदायित्व की पुकार का महोत्सव

ऋषिकेश, 24 अगस्त। परमार्थ निकेतन से श्री गुरू ग्रंथ साहिब जी के प्रकाश पर्व शुभकामनायें देते हुये स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने अपने संदेश में कहा कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की अमर वाणी में मानवता, करुणा और सत्य का संदेश निरंतर गूंजता है। आज का दिन मानवता की एकता, प्रेम और सेवा का उत्सव है। इस पवित्र अवसर उन महान गुरुओं को नमन जिन्होंने श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के रूप में समस्त मानव समाज को एक शाश्वत दिव्य मार्गदर्शन प्रदान किया।

श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी समूची मानवता के लिए शांति और समरसता का अद्भुत घोषणापत्र है। इसमें किसी जाति, धर्म या संप्रदाय का भेदभाव नहीं है। इसमें एक ही स्वर है “इक ओंकार सतनाम”, अर्थात् एक ही परमात्मा है, जो सत्य है, शाश्वत है और सबमें व्याप्त है। यह शिक्षा हमें बताती है कि सृष्टि की विविधता के बीच भी एकत्व ही वास्तविकता है।

गुरु वाणी हमें करुणा, प्रेम, सेवा, विनम्रता और न्याय का मार्ग दिखाती है। यह संदेश जीवन के हर क्षेत्र में लागू होता है। आज जब दुनिया आतंक, युद्ध, जलवायु संकट, असमानता और स्वार्थ की आग से जूझ रही है, तब गुरु वाणी हमें शांति और समाधान का मार्ग दिखाती है। श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी हमें याद दिलाते हैं कि सच्चा धर्म मानवता की सेवा में है।

आज हम पर्यावरण संकट देख रहे हैं, ऐसे में गुरु वाणी हमें प्रकृति को ईश्वर का रूप मानकर उसकी रक्षा करने की प्रेरणा देती है। यदि समाज में विभाजन और असमानता है, तो गुरु वाणी हमें सबको समान दृष्टि से देखने और भाईचारे को बढ़ाने का मार्ग दिखाती है।

आज की पीढ़ी, जो भौतिकता और प्रतिस्पर्धा में तनावग्रस्त है, उनके लिए गुरु वाणी आत्मिक शांति और संतुलन का स्रोत है। यह हमें सिखाती है कि वास्तविक सफलता दूसरों को पीछे छोड़ने में नहीं, बल्कि सबको साथ लेकर चलने में है।

गुरु परंपरा का सबसे बड़ा योगदान है सेवा की संस्कृति। लंगर की परंपरा इसका सबसे सुंदर उदाहरण है। इसमें जाति, पंथ, रंग या भाषा का कोई भेद नहीं, सब एक साथ बैठकर भोजन ग्रहण करते हैं। यह एकता और समानता का जीता-जागता स्वरूप है।

आज के समय में यदि समाज में असमानता और अलगाव है, तो हमें इस भावना को आत्मसात करना होगा। जब हर मनुष्य सेवा और करुणा की राह पर चलेगा, तभी वास्तविक प्रकाश फैलेगा।

श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का प्रकाश पर्व हमें यह संकल्प दिलाता है कि हम अपने भीतर के अज्ञान और अहंकार का अंधकार मिटाएँ और अपने जीवन में सत्य, करुणा, प्रेम और सेवा के प्रकाश को धारण करें।

यह पर्व केवल श्रद्धा का विषय नहीं है, बल्कि कर्तव्य और उत्तरदायित्व की पुकार है। हमें एक ऐसे समाज और राष्ट्र का निर्माण करना है जहाँ कोई भूखा न रहे, कोई शोषित न हो और कोई भी अकेला महसूस न करे।

श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का प्रकाश पर्व हमें बार-बार याद दिलाता है कि सच्चा प्रकाश बाहर की दीपावली या रोशनी में नहीं, बल्कि हमारे भीतर के आत्मज्ञान, करुणा और सेवा में है। श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की पावन वाणी का प्रकाश संसार में हर हृदय को आलोकित करे और मानवता को एकता और सद्भाव की राह पर अग्रसर करता रहे। प्रकाश पर्व की सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ!

शनिवार, 23 अगस्त 2025

राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस पर, भारत के वैज्ञानिकों के सामथ्र्य और गौरव का अद्भुत पर्व--स्वामी चिदानन्द सरस्वती

 


ऋषिकेश, 23 अगस्त। आज का दिन भारत के लिए एक ऐतिहासिक संकल्प की पुनः स्मृति है। 23 अगस्त वर्ष 2023 को भारतीय वैज्ञानिकों ने वह करिश्मा कर दिखाया, जिसने सम्पूर्ण विश्व को भारत के अदम्य साहस, शोध क्षमता और वैज्ञानिक प्रतिभा का लोहा मानने के लिए बाध्य कर दिया। आज के दिन ही चंद्रयान-3 ने चंद्रमा के दक्षिणी धु्रव पर सफल सॉफ्ट लैंडिंग कर भारत का नाम वैश्विक अंतरिक्ष इतिहास के स्वर्णाक्षरों में अंकित कर दिया।

यह सफलता मात्र एक वैज्ञानिक उपलब्धि ही नहीं थी, बल्कि यह नए भारत के आत्मविश्वास, सामथ्र्य और वैश्विक नेतृत्व की उद्घोषणा भी थी। भारत विश्व का पहला राष्ट्र बना जिसने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुप पर सॉफ्ट लैंडिंग की। यह मिशन भारत के वैज्ञानिकों की निष्ठा, तपस्या और राष्ट्रप्रेम का जीता-जागता उदाहरण है।

इस गौरवपूर्ण उपलब्धि के सम्मान में प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी  ने 23 अगस्त को “राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस” के रूप में मनाने का निर्णय लिया। आज दिन हर भारतीय के लिए प्रेरणा का पर्व है जो हमें यह स्मरण कराता है कि सीमित संसाधनों के बावजूद अनंत परिश्रम और असीम संकल्प से असंभव भी संभव बन सकता है।

परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती  ने कहा कि राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस हमारे वैज्ञानिकों के अभिनंदन का अवसर है, यह 75 वर्षों की स्वतंत्रता के उपरांत आत्मनिर्भर भारत के संकल्प का भी प्रतीक है। इसरो के वैज्ञानिकों ने जिस समर्पण के साथ कार्य किया, वह भारतीय संस्कृति के “कर्मयोग” की अद्भुत मिसाल है। दिन-रात की साधना, कठिन परिस्थितियों में धैर्य और निरंतर प्रयास ने चंद्रयान-3 को ऐतिहासिक सफलता दिलाई। भारत के वैज्ञानिकों ने यह दिखाया कि भारत केवल विज्ञान का उपभोक्ता नहीं, बल्कि वैश्विक विज्ञान का निर्माता और मार्गदर्शक भी है।

चंद्रयान-3 की सफलता के साथ भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हुआ, जिन्होंने चंद्रमा की सतह पर सफल सॉफ्ट लैंडिंग की है। परंतु दक्षिणी ध्रुव पर उतरने का गौरव केवल भारत को प्राप्त हुआ। यह उपलब्धि भारत को अंतरिक्ष अनुसंधान में वैश्विक नेतृत्व प्रदान करती है।

आज भारत न केवल अपने अंतरिक्ष कार्यक्रमों के लिए विख्यात है, बल्कि विश्वभर के राष्ट्रों के लिए एक विश्वसनीय साझेदार और प्रेरणास्रोत बन चुका है। यह दिन हर भारतीय को स्मरण कराता है कि हमारे वैज्ञानिक ही नहीं, बल्कि सम्पूर्ण भारत विश्व पटल पर नई ऊँचाइयाँ छू रहा है। युवा पीढ़ी को यह दिवस प्रेरित करता है कि वे विज्ञान, प्रौद्योगिकी और शोध में अपनी प्रतिभा लगाएँ और भारत को विश्वगुरु बनाने में योगदान दें।

भारत की वैज्ञानिक प्रगति केवल आधुनिक प्रयोगशालाओं का परिणाम नहीं है, बल्कि यह हमारे सनातन संस्कारों और ऋषि-परंपरा की विरासत से जुड़ा है। हमारे वेदों और उपनिषदों में भी ब्रह्मांड, ग्रहों और खगोल विज्ञान का गहन विवेचन मिलता है। चंद्रयान-3 की सफलता इसी ज्ञान और आधुनिक विज्ञान का अद्भुत संगम है।

आइए, इस पावन अवसर पर हम सभी उन महान वैज्ञानिकों का अभिनंदन करें, जिन्होंने राष्ट्र को “अंतरिक्ष की ऊँचाइयों तक पहुँचाने” का मार्ग दिखाया। यह दिवस हर भारतीय के लिए गौरव, कृतज्ञता और प्रेरणा का पर्व है।

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रतिनिधि लोनी मे बलात्कार से पीड़िता के परिजनों से मिले



                        मुकेश गुप्ता

गाजियाबाद ।  प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय राय के निर्देश पर आज गाजियाबाद थाना लोनी अंतर्गत विकास कॉलोनी निवासिनी सामूहिक बलात्कार से पीड़ित युक्ति द्वारा स्थानीय प्रशासन से सुनवाई न होने के चलते फांसी लगाकर आत्महत्या करने के संबंध घटना के वास्तविक स्थिति को गंभीरता से लेते हुए जानकारी प्राप्त होने के बाद उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के  अध्यक्ष अजय राय  ने एक प्रतिनिधि मंडल  गाजियाबाद से  भेजा जिन्होंने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर की परिवार ने बताया घटना को अंजाम देने वाले बहुत ही दबंग लोग हैं जिन्हें सत्ता का संरक्षण प्राप्त है वह फिर से किसी बड़ी घटना को अंजाम दे सकते हैं परिवार की मांगे है  कि उनका तत्काल प्रभाव से शास्त्र लाइसेंस दिलाया जाए और जब तक शस्त्र लाइसेंस की प्रक्रिया चलती है पुलिस प्रशासन से पूर्ण रूप से सुरक्षा दिलाई जाए जिससे कि भविष्य में इस परिवार के साथ कोई अनहोनी ना हो पाए जो दोषी पुलिसकर्मी है जिनकी वजह से उसे  बच्ची को  आत्महत्या के लिए मजबूर होना पड़ा उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई हो लड़की जिसने  आत्महत्या कि है उसका मोबाइल बरामद किया जाए तीसरा जो आरोपी है उसे तत्काल प्रभाव गिरफ्तार कर त्वरित कोर्ट में उचित कार्रवाई हो और कम से कम फांसी की सजा मिलनी चाहिए इस प्रतिनिधि मंडल में पूर्व मंत्री दीपक कुमार जी ,पूर्व विधायक सतीश शर्मा, जिला अध्यक्ष कांग्रेस कमेटी सतीश शर्मा, महानगर अध्यक्ष वीर सिंह जाटव, विशाल वशिष्ठ श्रीमती भारती त्यागी ,पंकज तेजानिया ,खलील नंबरदार, विनीत त्यागी सोनल नगर महिला अध्यक्ष, आसिफ सैफी अध्यक्ष जिला युवा कांग्रेस, कपिल यादव कार्यवाहक अध्यक्ष जिला युवा कांग्रेस ,सूर्यकांत सलीम सैफी ,नरेश जाटव, एडवोकेट कमलेश कुमारी, श्रीमती सविता गौतम ,एडवोकेट चंद्रपाल, बिजेंदर जाटव ,सूरज कुमार जीशान अली सुनील शर्मा विवेक त्यागी, मांगीराम त्यागी, मामराज प्रधान, महेंद्र खटीक जय शर्मा, अजय शर्मा नगर अध्यक्ष मेजर बीके ब्लॉक अध्यक्ष सलीम एजेंसी अशोक तोमर अश्वनी त्यागी अल्लू मलिक आदि आदि वरिष्ठ पदाधिकारी का प्रतिनिधि मंडल  लोनी में पीड़ित परिवार से मिले। 

शुक्रवार, 22 अगस्त 2025

विश्व उद्यमिता का नया मंत्र, भारत का लोकल से ग्लोबल सफर --स्वामी चिदानन्द सरस्वती

 


💥विश्व उद्यमी दिवस

✨भारत की उद्यमिता, सेवा और सनातन प्रेरणा

💫योग से स्टार्टअप तक, भारत का वैश्विक उद्यमिता योगदान*श

💐भारत, केवल बाजार नहीं, परिवार और प्रेरणा का स्रोत

🌸सनातन परंपरा से डिजिटल युग तक उद्यमिता में भारत का नेतृत्व

ऋषिकेश, 21 अगस्त। आज जब पूरी दुनिया विश्व उद्यमी दिवस मना रही है, ऐसे में भारत की भूमिका और उसका योगदान विशेष है। भारत, केवल एक देश नहीं, बल्कि एक विचार है। भारत केवल बाजार नहीं, बल्कि परिवार है और एक प्रेरणा का स्रोत है। यहाँ उद्यमिता का अर्थ केवल व्यापारिक गतिविधि या धन अर्जन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि मानवता की सेवा, समाज के उत्थान और विश्वकल्याण की दिशा में एक सतत प्रयास रहा है।

भारत की मिट्टी में उद्यमिता का बीज सनातन काल से ही अंकुरित है। नालंदा और तक्षशिला जैसे विश्वविद्यालय केवल शिक्षा के केन्द्र नहीं थे, बल्कि ज्ञान के वैश्विक उद्यम थे, जहाँ से पूरी दुनिया को विद्या, चिकित्सा और गणित का प्रकाश मिला। प्राचीन भारत का वाणिज्य, मसालों और वस्त्रों से लेकर धातु और शिल्प तक, दुनिया भर में प्रसिद्ध था। यही कारण है कि भारत को “सोने की चिड़िया” कहा गया लेकिन भारत की सबसे बड़ी उद्यमिता आध्यात्मिकता में रही। योग, आयुर्वेद, ध्यान और वेदांत, ये ऐसे अनमोल उपहार हैं जो भारत ने दुनिया को दिए और जिन्होंने करोड़ों लोगों के जीवन को स्वस्थ, संतुलित और समृद्ध बनाया।

भारत का योगदान अद्वितीय है। शून्य का आविष्कार और गणित का विकास आधुनिक विज्ञान और तकनीक के लिए आधारशिला बना। योग ने शरीर, मन और आत्मा के सामंजस्य का मार्ग दिखाया। आयुर्वेद ने जीवन को स्वस्थ और संतुलित बनाने की चिकित्सा दी और “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना ने यह संदेश दिया कि पूरी दुनिया एक परिवार है। यही भारत की उद्यमिता की असली पहचान है, जहाँ लाभ केवल भौतिक नहीं, बल्कि आध्यात्मिक और सामाजिक भी है।

आज का भारत 21वीं सदी में एक नए स्वरूप में उद्यमिता का नेतृत्व कर रहा है। यह भारत डिजिटल क्रांति का अग्रदूत है। यह भारत ग्रीन एनर्जी और सतत विकास की राह दिखा रहा है। यह भारत स्टार्टअप्स का नया वैश्विक केंद्र बन चुका है। “लोकल से ग्लोबल” का मंत्र आज भारत की अर्थव्यवस्था और उद्यमिता की आत्मा बन गया है। युवा शक्ति और नारी शक्ति मिलकर नए भारत का भविष्य गढ़ रहे हैं।

भारत का उद्यम केवल मुनाफे तक सीमित नहीं है, बल्कि जीवन के हर क्षेत्र में नैतिकता, सेवा और समर्पण का उदाहरण है। वर्तमान समय में हमें एक ऐसे उद्यम की आवश्यकता है जो पर्यावरण को संरक्षित रखें गाँव से लेकर शहर तक सभी को जोड़कर चले, और जिसमें हर युवा, हर महिला को अवसर और सम्मान मिले। ऐसा उद्यम जो धर्म और धन, दोनों को संतुलित करके एक नई मानवतावादी अर्थव्यवस्था का निर्माण करे।

विश्व उद्यमी दिवस केवल उद्यमिता का उत्सव नहीं, बल्कि जिम्मेदारी का स्मरण है। यह स्मरण कि उद्यम वह है जो सबके जीवन में प्रकाश और समृद्धि लाए। भारत का संदेश दुनिया से यही है कि सफलता साझा करो, समृद्धि में सबको भागीदार बनाओ और नवाचार में संस्कृति व नैतिकता का समावेश करो।

भारत का अतीत हमें गौरव से भरता है, वर्तमान हमें आत्मविश्वास देता है और भविष्य हमें प्रेरित करता है कि हम अपने उद्यम को मानवता के कल्याण का माध्यम बनाएँ। आज विश्व उद्यमी दिवस पर भारत से उठती यह आवाज सम्पूर्ण विश्व को प्रेरित करे कि उद्यम वही है जो सबको साथ लेकर चले और सबके जीवन को उजाला दे।

#parmarth_nikten_ashram

#swami_chintanand_saraswati

#parmarthniketan

#rishikesh

मेवाड़ शिक्षण-अधिगम को बेहतर बनाने की कार्यशाला आयोजित, प्रशिक्षक स्वाति ने विद्यार्थियों को दिये महत्वपूर्ण टिप्स

 


                       ‌  मुकेश गुप्ता

गाजियाबाद । वसुंधरा स्थित मेवाड़ ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के शिक्षा विभाग की “कार्य और शिल्प शिक्षा के शैक्षणिक मूल्य“ विषय पर आयोजित तीन दिवसीय कार्यशाला में पिडिलाइट इंडस्ट्रीज की प्रशिक्षण विशेषज्ञ स्वाति ने विद्यार्थियों को शिक्षण-अधिगम प्रक्रियाओं को बेहतर बनाने के अनेक महत्वपूर्ण टिप्स दिये। विशेष रूप से डिज़ाइन की गई रचनात्मक और सार्थक शिल्प आधारित गतिविधियों के माध्यम से उनका मार्गदर्शन प्रदान किया। कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों ने तीन प्रमुख कला परी गृह, लिप्पोन कला और पाउच पेंटिंग परियोजनाएँ बनाईं। संवादात्मक और व्यावहारिक सत्रों ने छात्र-शिक्षकों को प्रत्यक्ष रूप से यह अनुभव करने का अवसर दिया कि शिल्प कैसे एक शक्तिशाली शैक्षणिक उपकरण हो सकता है। मेवाड़ ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस की निदेशक डॉ. अलका अग्रवाल के निर्देशन में कार्यशाला आयोजित हुई। विभागाध्यक्ष डॉ. गीता रानी ने कार्यशाला में प्रभावशाली प्रशिक्षण और छात्रों की उत्साहपूर्ण भागीदारी की सराहना की।

#mewar coolg

#chaten anand

निर्यात को बढ़ावा देने के लिए एमएसएमई ग्लोबल समिट में समरकूल को किया गया सम्मानित

 

                         मुकेश गुप्ता

गाजियाबाद । स्टार इंटरनेशनल एमएसएमई फोरम के तहत सूक्ष्म एवं लघु उधोगों के उत्पादों की विदेशी व्यापार में बढौतरी को प्रोत्साहित करने के लिए दिल्ली के होटल ली मेरिडियन में एम एस एम ई ग्लोबल समिट का आयोजन किया गया। जिसमें विश्व के अनेकों देशों के व्यापारिक प्रतिनिधियों सहित देश के अनेकों उधोगपतियों ने भाग लिया। इस कार्यक्रम का आयोजन मुख्य रूप से एम एस एम ई सैक्टर के निर्यात को विदेशों में प्रोत्साहित करने के लिए किया जाता है। इसी योजना के तहत समरकूल ग्रुप की बढ़ती हुई ग्रोथ के तहत निर्यात की संभावनाओं को बढाने के लिए समरकूल ग्रुप की ओर से चेयरमैन संजीव कुमार गुप्ता का प्रतिनिधित्व करते हुए अजय माथुर ने इस कार्यक्रम में भाग लिया। तथा लोकसभा सांसद और सुप्रसिद्ध अभिनेत्री हेमामालिनी और पदमिनी कोल्हापुरी के द्वारा सम्मान प्रतीक चिह्न भेंट करते हुए उन्हें सम्मानित किया गया। इस अवसर पर स्टार इंटरनेशनल एम एस एम ई फोरम की ओर से दीपक वोहरा, संदीप मारवाह सहित अनेकों उधोगपति उपस्थित रहें।

श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज ने दौसा में श्री कृष्ण हॉस्पिटल में फिजियोथरेपी यूनिट का उद्घाटन किया

 





राजस्थान की पांच दिन की धर्म चेतना यात्रा के दौरान पहले दिन सैकडों लोगों ने महाराजश्री की प्रेरणा से नशा मुक्ति का संकल्प लिया

 राजस्थानःसिद्धपीठ श्री दूधेश्वर नाथ मठ महादेव मंदिर के पीठाधीश्वर, श्रीपंचदशनाम जूना अखाड़ा के अंतर्राष्ट्रीय प्रवक्ता व दिल्ली संत महामंडल के अध्यक्ष श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज की राजस्थान की पांच दिवसीय धर्म चेतना यात्रा गुरूवार से शुरू हो गई। यात्रा के पहले दिन महाराजश्री का अनेक स्थानों पर स्वागत-अभिनंदन किया गया। हर स्थान पर बडी संख्या में मौजूद भक्तों ने उनसे आशीर्वाद लिया। श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज ने गुरूवार को दौसा में श्री कृष्ण हॉस्पिटल में फिजियोथरेपी यूनिट का उद्घाटन किया। श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज ने कहा कि आज की भागदौड़ वाली जिदंगी में फिजियोथरेपी का बहुत अधिक महत्व है। कमर, गर्दन आदि दर्द, जोडों के दर्द आदि से छुटकारा दिलाने के अलावा ऑपरेशन के बाद भी फिजियोथरेपी का रोल अहम् हो जाता है। फिजियोथरेपी से मांसपेसियां भी मजबूत होती हैं। कई अन्य प्रकार की शारीरिक समस्याओं से मुक्ति मिलती है और भविष्य की परेशानियां भी दूर होती हैं। अस्पताल के डायरेक्टर व अध्यक्ष डॉ उमेश दत्त, फिजियोथरेपी की संचालिका रितिका जैन, पूर्व विधायक अमृता मेघवाल आदि भी मौजूद रहे। महाराजश्री के व्यसन विराम एक प्रयास अभियान का पहला पड़ाव दौसा में हुआ। दौसा में महावीर उपाध्याय के आवास उन्होंने युवाओं से मुलाकात की। इस अवसर पर मौजूद लोगों ने शॉल ओढ़ाकर एवं माला पहनाकर उनका स्वागत किया और अभियान में पूर्ण सहयोग देने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में जालोर से पूर्व विधायक अमृता मेघवाल, महावीर उपाध्याय, गब्बू सरपंच रमेडा, भीम सिंह घूमना, योगेश तिवारी, सुभाष शर्मा, अजय मीणा, आशीष मीणा, रतिराम मीणा,  मनोज मीणा, गिरिराज शर्मा, राज उपाध्याय, मुकेश शर्मा, किरोड़ी सैनी आदि भी मौजूद रहे। महाराजश्री ने दौसा में अनेक स्थानों पर व्यसन विराम एक प्रयास अभियान चलाया और लोगों को नशे के प्रति जागरूक किया। उन्होंने कहा कि नशा ऐसी खतरनाक बीमारी है, जो नशा करने वाले का ही नहीं अपितु उसके परिजनों का भी जीवन बर्बाद कर देती है। नशा मनुष्य का पतन कर उसे गलत मार्ग पर चलने के लिए मजबूर कर देता है। अतः खुद तो नशे से दूर रहना चाहिए, साथ ही अन्य लोगों को भी नशे के प्रति जागरूक करना चाहिए। महाराजश्री की प्रेरणा से सैकडों लोगों ने नशे से मुक्ति का संकल्प लिया। श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज ने जयपुर में भी व्यसन विराम एक प्रयास अभियान चलाकर सैकडों लोगों को नशा ना करने का संकल्प दिलाया। जयपुर में अनेक दलों के नेता भी उनसे मिले और उनका आशीर्वाद लिया। महाराजश्री ने अनेक संतों के साथ भेंटकर धर्म चर्चा भी की और रात्रि विश्राम जयपुर में ही किया।

#dugdeshwarnathmandir

#mahantnarayangiri

भारतीय अक्षय ऊर्जा दिवस, प्रदूषण मुक्त विश्व की ओर भारत का संकल्प--स्वामी चिदानन्द सरस्वती


आने वाली पीढ़ियों को एक स्वच्छ, स्वस्थ और हरित पृथ्वी दें

प्रकृति के साथ युद्ध नहीं, सहयोग

ऋषिकेश, 20 अगस्त। आज पूरा देश भारतीय अक्षय ऊर्जा दिवस मना रहा है। यह दिन भारत को हरित ऊर्जा के महत्व का स्मरण कराता है, साथ ही पूरे विश्व को यह सशक्त संदेश देता है कि यदि हमें प्रदूषण मुक्त, स्वच्छ और स्वस्थ भविष्य चाहिए तो अक्षय ऊर्जा ही एकमात्र मार्ग है। 

भारत की संस्कृति सदैव प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व की रही है। वैदिक ऋचाओं में सूर्य, वायु, जल और अग्नि की आराधना इसीलिए की गई क्योंकि यही तत्व हमारे जीवन और ऊर्जा के शाश्वत स्रोत हैं। आज वही प्राचीन दृष्टि आधुनिक विज्ञान के साथ मिलकर अक्षय ऊर्जा के रूप में हमारे सामने खड़ी है। सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, जलविद्युत और बायोमास, ये सभी न केवल असीमित हैं, बल्कि पर्यावरण को हानि पहुँचाए बिना ऊर्जा का सतत प्रवाह सुनिश्चित करते हैं।

आज विश्व के सामने सबसे बड़ी चुनौती केवल जलवायु परिवर्तन नहीं, बल्कि वह अंधा उपभोग और स्वार्थ है जिसने वनों को काटा, नदियों को प्रदूषित किया और वायुमंडल को जहर से भर दिया। औद्योगिक क्रांति से लेकर अब तक हमने जितना प्राकृतिक ईंधन जलाया है, उसने वातावरण में इतना कार्बन और विषैली गैसें भर दी हैं कि उसके दुष्परिणाम अब स्पष्ट रूप से सामने आ रहे हैं। हिमनद पिघल रहे हैं, समुद्र का स्तर बढ़ रहा है, अनेकों लोग वायु प्रदूषण के कारण असमय मृत्यु को प्राप्त हो रहे हैं और जल व भूमि का संकट दिन-ब-दिन गहराता जा रहा है। यदि हम आज नहीं जागे तो आने वाली पीढ़ियाँ हमें कभी क्षमा नहीं करेंगी।

ऐसे समय में अक्षय ऊर्जा एक आशा की किरण बनकर सामने आई है। सूर्य हर दिन इतना प्रकाश देता है कि पूरी पृथ्वी की ऊर्जा आवश्यकताओं को कई गुना पूरा किया जा सकता है। हवा का प्रवाह मानवता को स्वच्छ ऊर्जा दे सकता है और प्रदूषण को घटा सकता है। नदियों का प्रवाह केवल जीवन ही नहीं देता, बल्कि सतत ऊर्जा का स्रोत भी है। कृषि और जैविक अपशिष्ट से ऊर्जा उत्पादन ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाते हुए पर्यावरण की रक्षा का भी मार्ग है। यह ऊर्जा केवल तकनीकी समाधान नहीं, बल्कि मानवता के अस्तित्व की रक्षा का मार्ग है।


भारत इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने 2030 तक 500 गीगावॉट अक्षय ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य रखा है। देशभर में सौर पार्क स्थापित किए जा रहे हैं, ग्रामीण क्षेत्रों में सौर पंप किसानों को आत्मनिर्भर बना रहे हैं, छतों पर सोलर पैनल आमजन को ऊर्जा उत्पादक बना रहे हैं और इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रसार से प्रदूषण घटाने की दिशा में निर्णायक कदम उठाए जा रहे हैं। यह प्रयास भारत को आत्मनिर्भर बना रहा हैं, साथ ही पूरी दुनिया के लिए प्रेरणा भी बन रहे हैं।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि आज का दिन भारत के साथ ही पूरे विश्व के लिए है। भारत का संदेश स्पष्ट है “आओ, हम सब मिलकर हमाारी इस धरती को बचाएँ। स्वार्थ, उपभोग और प्रदूषण की संस्कृति छोड़ें। प्रकृति को पूजें, अक्षय ऊर्जा अपनाएँ और भविष्य को उज्ज्वल बनाएँ।” प्रकृति के साथ युद्ध नहीं, सहयोग चाहिए और यह सहयोग तभी संभव है जब विश्व अक्षय ऊर्जा को अपना धर्म, अपना कर्तव्य और अपना जीवन मंत्र बनाए।

इस अवसर पर हमें तीन संकल्प लेने होंगे स्वच्छ ऊर्जा का अधिकतम उपयोग करें, प्रदूषणकारी जीवन शैली को त्यागें और प्रकृति का सम्मान करते हुए वृक्षारोपण, जल संरक्षण और संतुलित उपभोग को अपनाएँ। यही संकल्प हमें प्रदूषण मुक्त विश्व की ओर ले जाएगा।

अब हमारे अस्तित्व का प्रश्न है। सूर्य का प्रकाश, वायु का प्रवाह, जल की धारा और धरती की हरियाली ही आने वाले कल का वास्तविक धन हैं। इस भारतीय अक्षय ऊर्जा दिवस पर आओ हम सब मिलकर यह संकल्प लें कि आने वाली पीढ़ियों को एक स्वच्छ, स्वस्थ और हरित पृथ्वी देंगे। यही हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है और यही मानवता की सबसे बड़ी सेवा है।

लाजपतनगर में बिल्डर ने किया अतिरिक्त तल का निर्माण,प्राधिकरण ने की ध्वस्तीकरण की कार्यवाही



                       मुकेश गुप्ता

गाजियाबाद । जीडीए उपाध्यक्ष  द्वारा दिये गये सख्त निर्देशों के क्रम में आज 21 अगस्त को प्रभारी प्रवर्तन जोन-7 आलोक रंजन के नेतृत्व में भूखण्ड सं0-ई-46/7, लाजपतनगर, साहिबाबाद के निर्माणकर्ता  राजेश जैन द्वारा स्वीकृत मानचित्र से विचलन कर अतिरिक्त तल निर्मित करते हुये दीवारों एवं स्लैब का निर्माण किया गया था। जिसके  विरूद्ध प्राधिकरण द्वारा वाद सं0-GDA/ANI/2024/0003056  दिनांक-15.06.2024, योजित करते हुए कारण बताओ नोटिस, कार्य रोको नोटिस तथा पर्याप्त सुनवाई का अवसर प्रदान करते हुए निर्माणकर्ता को ध्वस्तीकरण आदेश भी तामिल कराये गये थे। परन्तु निर्माणकर्ता द्वारा अवैध निर्माण न हटाये जाने के कारण ध्वस्तीकरण की कार्यवाही की गयी। उक्त कार्यवाही के समय प्रवर्तन जोन-7 में तैनात सहायक अभियन्ता राजीव,अवर अभियन्ता राजेश शर्मा,प्रवर्तन जोन-7 का समस्त स्टाफ, स्थानीय पुलिस बल एवं प्राधिकरण पुलिस बल उपस्थित रहा।

गुरुवार, 21 अगस्त 2025

बदलती लोनी चमकती लोनी" :-रंजीता धामा



                         मुकेश गुप्ता

लोनी 21 अगस्त । लोनी नगर पालिका अध्यक्ष रंजीत धामा ने वार्ड 18 वार्ड 17 वार्ड 9 वार्ड 23 में लगभग 6करोड 40 लाख की लागत से होने वाले विकास कार्यों का नारियल फोड़ कर शुभारंभ किया ।

इस अवसर पर कॉलोनी वासियों ने फूलमाला व पुष्प वर्षा करते हुए ढोल नगाड़े बजाकर रंजीता धामा व मनोज धामा का स्वागत किया  ।

इस अवसर पर जानकारी देते हुए लोनी नगर पालिका अध्यक्ष ने बताया कि आज विकास कुंज ,संगम विहार ,तिलकराम का लेवी, उत्तरांचल विहार,संतोषी विहार आदि कॉलोनी में लगभग 6 करोड़ 40 लख रुपए की लागत से आरसीसी की नली वह इंटरलॉकिंग टाइल्स से बनने वाली गलियों का शुभारंभ आज किया जा रहा है जो जल्दी बन कर तैयार हो जाएगी तथा आने वाले समय में कॉलोनी का स्वरूप बदला हुआ नजर आएगा क्षेत्र के सभी छोटे-बड़े महिला पुरुष बुजुर्गों को आने-जाने में सुविधा होगी तथा आरसीसी की मजबूत नालियों बनने से कॉलोनी में होने वाले जल भराव से मुक्ति मिलेगी ।

रंजीता धामा ने विकास कार्यों के उद्घाटन के अवसर पर ठेकेदारों को बढ़िया क्वालिटी का मटेरियल लगाने के लिए आदेशित किया तथा ठेकेदारों को चेताते हुए कहा कि मैं स्वयं निर्माण कार्य की समय-समय पर जांच भी करूंगी तथा अपने अधीनस्थ कर्मचारियों व अधिकारियों से भी विकास कार्यों मे लगने वाले मटेरियल की गुणवत्ता की जांच करवाऊंगी । 

इस अवसर पर पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष मनोज धामा भी साथ रहे सभी को संबोधित करते हुए पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष ने कहा कि लोनी नगर पालिका क्षेत्र में विकास कार्य सभी कॉलोनी में बिना किसी भेदभाव के कराए जा रहे हैं जिनसे लोनी की आम जनता को बेहद ही फायदा होगा तथा आने वाले समय में लोनी की सूरत पहले से भी अधिक सुंदर हो जाएगी इंटरलॉकिंग टाइल्स वह आरसीसी की नालियों के के विकास कार्य का आज उद्घाटन किया गया है आप सभी लोग निश्चित रहे आने वाले समय मे और भी विकास कार्य लोनी क्षेत्र मे कराये जायेंगे ।

इस अवसर पर पूर्व सभासद सतपाल शर्मा ,मुकेश पाल,पप्पू चौधरी ,अजय शर्मा ,जगभगवान ,अनिल ठाकुर, रमेश चौहान,हरेन्द्र ढाका,मनोज चौधरी,ताराचंद,रामकेश,चांद खान,सतवीर,शकील खान,अनीता,रामकली सहित सैकड़ों की संख्या में कॉलोनी वासी उपस्थित रहे ।

बुधवार, 20 अगस्त 2025

साहित्यकारों से भरा हुआ है ग़ाज़ियाबाद -चेतन आनंद, (कवि-पत्रकार)


गाजियाबाद जिला साहित्यिक रूप से बहुत समृद्ध है। यहां ऐसे-ऐसे नामचीन कवि, शायर, कहानीकार और साहित्यकार हैं, जिन्होंने गाजियाबाद का नाम पूरी दुनिया में रोशन किया है। कुछ तो काल के गाल में समा चुके हैं मगर कुछ ऐसे नगीने हैं जो विश्वभर में अपनी चमक आज भी बरकरार रखे हुए हैं। उनकी लेखनी की गूंज देश की सरहदों को लांघकर दूसरे देशों के लोगों के दिलों में स्थान बना चुकी है। बहुत सारे युवा कवि व शायर भी हैं जो धीरे-धीरे देशभर में अपनी पहचान बनाने के सतत् प्रयास में जुटे हैं।

देश की आज़ादी से पहले की बात करें तो ग़ाज़ियाबाद का दायरा बहुत छोटा था। तब यह मेरठ जिले का हिस्सा हुआ करता था। तब कवि व संस्कृत के प्रकांड पंडित रामनाथ सुमन, कृष्ण मित्र, कन्हैया लाल मत्त, सुदर्शन कुमार चेतन, गोपाल कृष्ण कौल, वेद प्रकाश सुमन, सरस जी, हरप्रसाद शास्त्री, डॉ. मधु भारतीय की कविताएं धूम मचाया करती थीं तो सेरा यात्री की कहानियां देशभर की पत्ऱ-पत्रिकाओं में बड़े चाव से पढ़ी जाती थीं। क्षेमचंद्र सुमन भी उस समय गाजियाबाद रहा करते थे, उनकी लेखनी ने भी बहुत नाम कमाया। कृष्ण मित्र, सुदर्शन कुमार चेतन, सरस जी और सेरा यात्री ने तो अखबार व पत्रिकाएं भी प्रकाशित कर देश की आजादी की क्रांति में अभूतपूर्व सहयोग किया। कुलदीप तलवार के अखबार व पत्रिकाओं में प्रकाशित लेखों ने भी लोगों के दिलों में एक अलग जगह बनाई। पत्रकार तेलूराम काम्बोज ने दैनिक अखबार निकाला और देश की आजादी में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। वह बाद में शहर के महापौर भी बने।

आज़ादी के बाद गाजियाबाद को अपनी कविताओं से और अधिक समृद्ध किया दुनिया भर में प्रसिद्ध कवि डॉ. कुंअर बेचैन ने। उनके 36 काव्य संग्रह, एक महाकाव्य, दर्जन भर डीवीडी व सीडी, आधा दर्जन फिल्मों में गीत आदि चर्चा में रहे। 22 से अधिक विद्यार्थियों ने  उन पर शोधकार्य किया। दुनियाभर में आज भी लोग उनकी कविताओं, गीतों व गजलों को बड़े चाव से सुनते व पढ़ते हैं। डॉ. देवेन्द्र शर्मा इन्द्र नवगीतकार, गजलकार व दोहाकार हुए। सौ से अधिक पुस्तकें उनकी प्रकाशित हुईं। दर्जनभर विद्यार्थी उनपर पीएचडी और एक विद्यार्थी डी.लिट कर चुका है। डॉ. विष्णु सक्सेना, डॉ. धनंजय सिंह, डॉ. श्याम निर्मम, डॉ. रमा सिंह, मृदुला गर्ग, ब्रजेश भट्ट, मैसी निशांत, ब्रज अभिलाषी, इशरत कीरतपुरी, जमील हापुड़ी, ज़की तारिक, चेतन आनंद, नित्यानंद तुषार, सुरेन्द्र शर्मा, अनिल असीम, डॉ. योगेन्द्र दत्त शर्मा, मीरा शलभ, ओम प्रकाश चतुर्वेदी पराग, कमलेश भट्ट कमल, बीके वर्मा शैदी, हेमंत कुमार, आलोक यात्री, शबाब औरंगाबादी, उत्कर्ष गाफिल, मुनीश बिल्सवी, अमिताभ मासूम, आचार्य मुनीश त्यागी, विनय संकोची जैसे नामों ने गाजियाबाद को नई रोशनी प्रदान की है। इनमें से ज्यादातर कवि व शायर आज भी देश-विदेश में अपनी पहचान कायम कर रहे हैं।

हर प्रसाद शास्त्री ने शिक्षा के क्षेत्र में झंडे गाड़ने के साथ हिन्दी साहित्य को बहुत ऊंचाइयां प्रदान कीं। वर्ष 1944 में शहर में गणतंत्र दिवस पर पहला कवि सम्मेलन मॉडल टाउन में करवाया। इसमें अपने ज़माने के नामचीन कवियों ने शिरकत की। मॉडल टाउन से यह कवि सम्मेलन लोगों की बढ़ती भीड़ व मांग पर शहर के बीचोंबीच घंटाघर पर होने लगा। देश का कोई कवि ऐसा नहीं है जो गाजियाबाद कविता सुनाने न आया हो। कवि इस आयोजन में शामिल होने के लिए लालायित रहा करते थे। लाल किले के ऐतिहासिक कवि सम्मेलन के बाद गाजियाबाद लोक परिषद द्वारा घंटाघर गाजियाबाद में आयोजित होने वाला कवि सम्मेलन देश का दूसरा बड़ा कवि सम्मेलन कहलाता था। हर प्रसाद शास्त्री के निधन के बाद इस कवि सम्मेलन को कुछ लोगों ने संभाला। तीन-चार साल तो घंटाघर पर ही यह कवि सम्मेलन हुआ मगर अब यह कवि सम्मेलन लोहिया नगर स्थित हिन्दी भवन में जनवरी महीने में हर साल होता है। इसकी कमान आजकल पार्षद हिमांशु लव और समाजसेवी ललित जायसवाल ने संभाली हुई है। उधर, गणतंत्र दिवस पर गाजियाबाद प्रशासन के सहयोग से अदबी संगम संस्था द्वारा शायर ज़की तारिक एक बड़ा मुशायरा कराया करते थे। इसमें भी देशभर के बड़े से बड़े नामचीन शायर अपना कलाम पेश कर चुके हैं। अब चार-पांच सालों से मुशायरा नहीं हो पा रहा है। शायद आर्थिक तंगी की वजह से जिला प्रशासन ने इससे अपने हाथ पीछे खींच लिये हैं।

पहले शामे शनिचर नाम से शहर में नशिस्त हुआ करती थीं। चौधरी सिनेमा के मालिक हरियंत कुमार चौधरी साहित्य के प्रति बहुत स्नेह व आदर रखते थे, इसलिए उन्होंने सिनेमाहॉल में ही ऊपर पहली मंज़िल पर एक गोष्ठी कक्ष बनवा रखा था। सब इसे चौधरी गोष्ठी कक्ष के नाम से जाना करते थे। पहले साहित्यिक गतिविधियां का मुख्य केन्द्र यही गोष्ठी कक्ष हुआ करता था। शहर की कलमकार मंच, अदबी संगम, शामे शनिचर, गाजियाबाद लोक परिषद आदि संस्थाओं की गोष्ठियां इसी में हुआ करती थीं। बाद में हर प्रसाद शास्त्री जी के अथक प्रयासों से गाजियाबाद विकास प्राधिकरण ने लोहिया नगर में हिन्दी भवन के लिए जगह दे दी। यहां कुछ कमरे बने, स्टेज बनी, शहर के समाज सेवकों की मदद से छत भी डाली गई। साहित्यिक कार्यक्रम इसमें होने लगे। लेकिन शास्त्री जी के आकस्मिक निधन के बाद शहर के समाज सेवक आशाराम पंसारी ने हिन्दी भवन की कमान संभाली। उन्होंने इसका कुछ निर्माण कराया लेकिन वह भी ज्यादा दिन तक इस दुनिया में न रहे। बाद में हिन्दी भवन समिति बनाई गई। शहर के पहले महापौर रहे दिनेश चंद गर्ग के नाम से एक भव्य और आधुनिक सभागार बनाया गया। आजकल इसमें शहर के बड़े कार्यक्रम होते हैं।


खूब चलती थीं काव्य कक्षाएं

शहर में यूं तो अनेक कवियों व शायरों ने अपने-अपने ढंग से नौजवान पीढ़ी को कविता और गजल की बारीकियां सिखाईं लेकिन डॉ. कुंअर बेचैन के यहां होने वाली काव्य कक्षाओं की बात ही कुछ और थी। उनके नेहरू नगर स्थित घर के ड्राइंग रूम में हम जैसे नवोदित कवि प्रत्येक गुरुवार को तय समय पर पहुँचते थे। शर्त थी कि सब अपनी नई कविताएँ लेकर आएंगे। उसी पर चर्चा हुआ करेगी। पहले गुरुवार आने वाले कवियों की संख्या तीन-चार ही थी। लेकिन धीरे-धीरे संख्या चार से छह, छह से दस, दस से बीस, बीस से तीस और फिर 35-36 तक पहुँच गई। होता यह था कि उनके घर का ड्राइंग रूम खचाखच भरने लगा। एक कवि अपनी कविता सुनाता। कुंअर जी कहते ‘बताओ क्या कमी है।’ सब अपनी-अपनी सामर्थ्य अनुसार कमियाँ बताते थे। एक कविता पर काफी देर तक चर्चा होती। अनेक सुझाव आते। अंततः कुंअर जी बताते कि किसका सुझाव सही है या किसका सही नहीं है। वह केवल इतना मात्र करते थे कि जिसकी रचना के बुत के कान सही नहीं बने, उसे सही से बना देते। नाक टेढ़ी रह गई तो उसे सीधा कर दिया करते। उन्होंने कभी अपने रंग में रँगने या पूरी की पूरी कविता अपनी ओर से देकर नवोदित कवियों को बैसाखियाँ थमाने का काम नहीं किया। वह दौर नवोदित कवियों का गोल्डन पीरियड था। उस दौरान सबने कविता की बहुत सारी बारीकियाँ सीखीं।


ये कवि हैं आजकल देश-दुनिया में सक्रिय

डॉ. विष्णु सक्सेना, मासूम गाजियाबादी, गोविन्द गुलशन, डॉ. कुमार विश्वास, डॉ. सरिता शर्मा, डॉ. सीता सागर, अंजु जैन, चेतन आनंद, विनोद पांडेय, तूलिका सेठ, बीएल बत्रा अमित्र, चंद्रभानु मिश्र, पीयूष मालवीय, डॉ. जयप्रकाश मिश्र, बीके वर्मा शैदी, अशोक पंकज, विजेन्द्र परवाज, ज़की तारिक, उत्कर्ष गाफिल, मीरा शलभ, अनूप पांडेय, दीपाली जैन ज़िया, अनिमेष शर्मा आदि।


शहर के कुछ कवियों की कविताएं

दिल पे मुश्किल है बहुत दिल की कहानी लिखना,

जैसे बहते हुए पानी पे हो पानी लिखना,

कोई उलझन ही रही होगी वो जो भूल गया,

मेरे हिस्से में कोई शाम सुहानी लिखना।

- डॉ. कुंअर बेचैन


रेत पर नाम लिखने से क्या फायदा

एक आई लहर कुछ बचेगा नहीं,

तुमने पत्थर-सा दिल हमको कह तो दिया,

पत्थरों पर लिखोगे मिटेगा नहीं।

- डॉ. विष्णु सक्सेना


कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है,

मगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है,

तू मुझसे दूर कैसी है, मैं तुझसे दूर कैसा हूं,

ये मेरा दिल समझता है, या तेरा दिल समझता है।

-डॉ. कुमार विश्वास


किसने कहा है तुझसे तू बाहर तलाश कर,

अपनी कमी को अपने ही अंदर तलाश कर,

तू है नदी तो पर्वतों से आ, उतर भी आ,

नीचे उतरके अपना समुंदर तलाश कर।

- चेतन आनंद


- आइये बैठें जरा कुछ तथ्य की बातें करें,

मंच से हटकर अलग नेपथ्य की बातें करें,

रहनुमाओं ने हमें गुमराह इतना कर दिया,

 अब चलो निज बुद्धि की, सामर्थ्य की बातें करें।

- कृष्ण मित्र


रात-रातभर चलते थे कवि सम्मेलन-मुशायरे

अब वो ज़माने गये, पहले रात आठ बजे कवि सम्मेलन और मुशायरे शुरू हुआ करते थे। लोग रजाइयां और कंबल ओढ़कर सुबह सूरज की पहली किरन फूटने तक कवियों व शायरों को सुना करते थे। रातभर चाय और मूंगफलियों का दौर चला करता था। एक कवि को दो या तीन-तीन बार सुना जाता था। लोगों का हुजूम उमड़ता था कविताएं व गजलें सुनने के लिए। लोग पूरी तैयारी के साथ आते थे तालियां बजाने और हूट करने के लिए भी। लेकिन आजकल दो या तीन घंटे का शो बन गया है कवि सम्मेलन या मुशायरा। पहले एक कवि की कविताओं को बार-बार सुना जाता था। एक-एक पंक्ति पर खूब हो हल्ला होता था। खूब दाद मिला करती थी। आजकल कविताओं पर तालियां बजाने के लिए संचालक बार-बार श्रोताओं से अनुरोध करते दिखाई देते हैं। श्रोताओं की संख्या भी पहले से काफी कम हो गई है।



अट्टहास कवि सम्मेलन हुआ मशहूर

गाजियाबाद शहर के कवि नगर रामलीला मैदान में अप्रैल महीने में अट्टहास कवि सम्मेलन होता है। इसमें आज भी बहुत लोग कविताएं सुनने के लिए उमड़ते हैं। हालांकि कविताओं की दृष्टि से तो श्रेष्ठ रचनाएं नहीं सुनाई पड़तीं, लेकिन हास्य के नाम पर लोगों की आमद खूब होती है। इसी तर्ज पर शालीमार गार्डन में उल्लास कवि सम्मेलन होने लगा है। इसमें साहित्यिक कवि कम और व्यवसायिक कवि ज्यादा आने लगे हैं।

 

ये संस्थाएं हैं सक्रिय

अखिल भारतीय साहित्य परिषद गाजियाबाद, गाजियाबाद लोक परिषद, श्रृंखला, कलमकार मंच, सम्प्रति, गीताभ, अमर भारती साहित्य संस्कृति संस्थान, संस्कार भारती, भारत विकास परिषद, वैश्य समाज, महफिले बारादरी आदि।


सस्ते ऑडिटोरियम का टोटा

शहर की साहित्यिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए शहर में कोई भी ऑडिटोरियम नहीं बना है। साहित्यिक कार्यक्रम कराने के लिए शहर के रईस और कथित समाज सेवकों के आगे संयोजकों को हाथ जोड़ने पड़ते हैं। हिन्दी भवन है मगर कुछ मुट्ठीभर लोगों के हाथों में इसका संचालन है। मोटा किराया देकर कार्यक्रम करवाने पड़ते हैं। हिन्दी साहित्य के नाम पर मोटा किराया दिया जाना मुश्किल होता है। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण ने शहर में कोई भी ऐसा प्रयास नहीं किया है। किसी भी ऑडिटोरियम का संचालन अपने हाथ में नहीं रखा है। जबकि शहर के साहित्यकार काफी अरसे से शहर में सस्ता या मुफ्त ऑडिटोरियम मुहैया कराने की मांग करते आ रहे हैं, लेकिन अन्य शहरों की तरह यहां गाजियाबाद में कोई सहूलियत साहित्यकारों को नहीं मिली है।