गाजियाबाद,। अखिल प्रदेश स्थानीय निकाय कर्मचारी महासंघ ने वेतन विसंगति, अकेंद्रियत सेवा नियमावली और नियमितीकरण सहित दस प्रमुख मांगों को अनसुना करने पर प्रदेश भर में आंदोलन तेज करने का निर्णय लिया है। महासंघ ने 20 जुलाई से 10 अगस्त 2026 तक गाजियाबाद, सहारनपुर, अलीगढ़, मथुरा, बरेली, मेरठ सहित कई प्रमुख नगर पालिकाओं में दौरा—बैठक कार्यक्रम आयोजित करने की भी घोषणा की।
प्रदेश अध्यक्ष शशि कुमार मिश्र ने जारी बयान में कहा कि 2017 से लगातार सौ जाने-पहचाने ज्ञापन, बैठकों और आंदोलनों के बावजूद स्थानीय निकाय कर्मचारियों की समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं निकला। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार समय रहते मांगें नहीं मानती है तो महासंघ आगामी ग्राम पंचायत से लेकर लोकसभा चुनाव तक चुनावी मोर्चे पर भी सरकार को जवाबदेह ठहराएगा।
बैठक में प्रदेश महामंत्री रमाकांत मिश्र व प्रदेश प्रवक्ता मुन्ना हजारिया ने दस सूत्रीय मांगों पर ज़ोर देते हुए कहा कि मांगों में प्रमुख रूप से अकेंद्रियत सेवा नियमावली का निर्माण; 2001 तक सेवायें देने वाले दैनिक-संविदा-सफाई कर्मियों का विनयमीकरण; छठे वेतन आयोग के बाद उत्पन्न वेतन विसंगति का निराकरण; कैशलेस उपचार की व्यवस्था; पुरानी पेंशन की बहाली और मृतक आश्रितों की नियुक्ति शामिल हैं।
महासंघ के प्रदेश उपाध्यक्ष रविन्द्र कुमार ने यह भी कहा कि कर्मचारियों की एकजुटता और संगठन की मजबूती के लिए सभी इकाइयों से आर्थिक सहयोग की अपील की जा रही है। सभा का संचालन प्रदेश संगठन मंत्री कुलदीप शर्मा (गाजियाबाद) ने किया। बैठक में प्रमुख रूप से प्रदेश अध्यक्ष शशि कुमार मिश्र, प्रदेश महामंत्री रमाकांत मिश्र, प्रदेश कार्यवाहक अध्यक्ष राकेश अग्निहोत्री, प्रदेश प्रवक्ता मुन्ना हजारिया के साथ रामकुमार रावत, शैलेंद्र तिवारी, विजय यादव, सपना सिंह, मिशन पाल सिंह, चालक संघ के अध्यक्ष सलीम अब्बासी, संजय शर्मा, जयदेव कौशिक, प्रदीप शर्मा, महक सिंह, राम सिंह पटेल, भगवत शरण, राजेंद्र सिंह, प्रदीप राणा (अध्यक्ष) एवं जावेद (महामंत्री, गाजियाबाद) उपस्थित रहे।
महासंघ ने सरकार व शासन को अंतिम चेतावनी देते हुए कहा कि अगर मांगों पर ठोस और समयबद्ध कार्रवाई नहीं हुई तो कर्मचारियों के व्यापक आंदोलन और मतदान के माध्यम से राजनीतिक जवाबदेही सुनिश्चित की जाएगी।

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