शुक्रवार, 24 जुलाई 2026

विश्व आईवीएफ दिवस (25 जुलाई) विशेष: समय पर जांच और सही उपचार है सफलता की कुंजी: डॉ. अर्चना शर्मा

 

मुकेश गुप्ता

मातृत्व का सपना अब नहीं रहेगा अधूरा, आधुनिक आईवीएफ तकनीक से बढ़ी उम्मीदें

बदलती जीवनशैली और बढ़ती बांझपन की समस्या के बीच आईवीएफ बना लाखों दंपतियों के लिए नई उम्मीद

गाजियाबाद । माता-पिता बनने का सपना हर दंपति की सबसे बड़ी इच्छा होती है, लेकिन बदलती जीवनशैली, बढ़ता तनाव, अनियमित खानपान और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण आज बांझपन  के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। चिकित्सा विज्ञान की आधुनिक तकनीक इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) ने ऐसे लाखों दंपतियों के जीवन में नई उम्मीद जगाई है, जो प्राकृतिक रूप से संतान सुख प्राप्त नहीं कर पा रहे थे। 25 जुलाई को विश्व आईवीएफ दिवस के अवसर पर विशेषज्ञों ने लोगों से समय रहते जांच कराने और भ्रांतियों से दूर रहने की अपील की है।

गाजियाबाद गणेश अस्पताल की चेयरपर्सन डॉ. अर्चना शर्मा ने बताया कि आईवीएफ केवल एक उपचार नहीं, बल्कि उन परिवारों के लिए उम्मीद की किरण है जो वर्षों से संतान प्राप्ति का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पहले लोग समाज के डर या गलत धारणाओं के कारण इलाज कराने से बचते थे, लेकिन अब जागरूकता बढ़ने के साथ आईवीएफ तकनीक को अपनाने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है।

डॉ. शर्मा के अनुसार, यदि कोई दंपति एक वर्ष तक नियमित प्रयास के बावजूद गर्भधारण नहीं कर पाता है, तो उसे बिना देर किए स्त्री एवं पुरुष दोनों की जांच करानी चाहिए। यदि महिला की आयु 35 वर्ष से अधिक है, तो छह महीने तक गर्भधारण न होने पर ही विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए। समय पर जांच और उचित उपचार से सफलता की संभावना काफी बढ़ जाती है।

क्या है आईवीएफ?

आईवीएफ एक ऐसी आधुनिक प्रजनन तकनीक है, जिसमें महिला के अंडाणु और पुरुष के शुक्राणु को प्रयोगशाला में निषेचित कर भ्रूण तैयार किया जाता है। इसके बाद स्वस्थ भ्रूण को महिला के गर्भाशय में प्रत्यारोपित किया जाता है। यह तकनीक उन दंपतियों के लिए विशेष रूप से प्रभावी मानी जाती है, जिनमें प्राकृतिक गर्भधारण संभव नहीं हो पाता।

किन परिस्थितियों में आईवीएफ की जरूरत पड़ सकती है?

फैलोपियन ट्यूब बंद या क्षतिग्रस्त होना।

पुरुषों में शुक्राणुओं की संख्या या गुणवत्ता कम होना।

एंडोमेट्रियोसिस जैसी समस्या।

बढ़ती उम्र के कारण प्रजनन क्षमता में कमी।

बार-बार गर्भपात होना।

लंबे समय तक कारण स्पष्ट न होने पर भी गर्भधारण न होना।

भ्रांतियों से बचें, विशेषज्ञ की सलाह लें

डॉ. अर्चना शर्मा ने बताया कि आईवीएफ को लेकर समाज में अभी भी कई भ्रांतियां हैं, जबकि यह वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित और सुरक्षित उपचार पद्धति है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ जीवनशैली, संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, धूम्रपान और शराब से दूरी तथा तनाव को कम करके भी प्रजनन क्षमता को बेहतर बनाया जा सकता है। उन्होंने दंपतियों से अपील की कि संतान न होने की स्थिति में निराश होने या झाड़-फूंक जैसे अवैज्ञानिक उपायों पर समय गंवाने के बजाय योग्य विशेषज्ञ से परामर्श लें। सही समय पर किया गया उपचार न केवल सफलता की संभावना बढ़ाता है, बल्कि मानसिक और आर्थिक बोझ भी कम करता है।

विश्व आईवीएफ दिवस का उद्देश्य लोगों में बांझपन के प्रति जागरूकता बढ़ाना, इससे जुड़ी सामाजिक भ्रांतियों को दूर करना तथा आधुनिक चिकित्सा के माध्यम से अधिक से अधिक दंपतियों को मातृत्व और पितृत्व का सुख दिलाने के लिए प्रेरित करना है।

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