कार्यक्रम को समाजवादी चिन्तक, शिक्षाविद राम दुलार यादव ने संबोधित करते हुए कहा कि “कारगिल युद्ध में विपरीत परिस्थितियों में देश की सेना ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए धोखे से पाकिस्तान द्वारा कब्ज़ा की गयी चौकियों पर निर्भीकता पूर्वक राष्ट्रीय ध्वज फहरा दिया” हमारे देश की सेना जाति, धर्म से ऊपर उठकर अपने कर्तव्य का सदा निर्वहन कर रही है, हमारी सेना धर्मनिरपेक्षता की मिसाल है, सभी भाई एक साथ मिलकर जूनून और जज्वे के साथ दुश्मन पर आक्रमण करते है, उन वीर सपूतों को सलाम जिनकी मेहनत और लगन से देश की सीमा की रक्षा करते हुए देश वासियों की सेवा कर रहे, कारगिल युद्ध 84 दिन चला, यह अफसोस के साथ कहना पड रहा है कि 527 से अधिक सैनिक अपने कर्तव्य का परिचय देते हुए शहीद हो गये तथा सैकड़ों घायल हुए, विक्रम बत्रा जी, मनोज पाण्डेय जी युद्ध में रणकौशल दिखाते हुए शहीद हो गये, उन्हें सेना के सर्वोच्च सम्मान “परमवीर चक्र” से मरणोपरान्त सम्मानित किया गया, तथा ग्रेनेडियर योगेन्द्र सिंह यादव को यह सम्मान परमवीर चक्र मिला, वह जीवित है, इस अवसर पर ज्ञानपीठ केन्द्र की ओर से सभी शहीदों को श्रद्धांजलि देते हुए हम गौरव अनुभव करते हुए गौरवान्वित हो रहे है।
लेकिन आज देश, समाज में नफ़रत, असहिष्णुता का वातावरण बनाया जा रहा है, आर्थिक, सामाजिक, राजनैतिक, शैक्षणिक विषमता की खांई गहरी होती जा रही है, धार्मिक पाखंड, जातिवाद का जहर समाज में घोला जा रहा है, हमें देश की सेना के जवानों से प्रेरणा लेकर देश में भाईचारा, प्रेम और सहयोग की भावना को पुष्पित पल्वित करनी चाहिए।
कार्यक्रम में शामिल सभी साथियों को रिटायर्ड कर्नल अर्जुन सिंह यादव की लिखित पुस्तक “जरा याद करो कुर्बानी” और “सैनिकी” वितरित की गयी, सभी ने उनकी मुक्तकंठ से प्रसंशा की।
कार्यक्रम में शामिल रहे एस0 एस0 यादव, कृष्णानंद, चन्द्रबली मौर्य, विश्वनाथ यादव, अवधेश मिश्र एडवोकेट, डा0 देवकर्ण चौहान, जय नारायण शर्मा, वीर सिंह सैन, राम प्यारे यादव, हाजी मोहम्मद सलाम, ब्रह्म प्रकाश, मुनीव यादव, विजय मिश्र, विजय भाटी एडवोकेट, दयाल शर्मा सैकड़ों लोगो ने शहीदों को नमन कर विजय दिवस समारोह को ऐतिहासिक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।




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