गुरुवार, 11 जून 2026

पुलिस उत्पीड़न के खिलाफ पत्रकारों का अनिश्चितकालीन धरना तीसरे दिन भी जारी, कांग्रेस का मिला खुला समर्थन



                          संवाददाता

हम पत्रकार हैं, पत्तलकार नहीं — अपूर्वा चौधरी

गाजियाबाद। गाजियाबाद पुलिस पर उत्पीड़न, फर्जी मुकदमा दर्ज करने और निष्पक्ष पत्रकारिता की आवाज दबाने के गंभीर आरोपों को लेकर जिला मुख्यालय के बाहर शुरू हुआ पत्रकारों का अनिश्चितकालीन धरना तीसरे दिन भी पूरी ताकत के साथ जारी रहा। धूप और भीषण गर्मी की परवाह न करते हुए दर्जनों पत्रकार दिन-रात धरना स्थल पर डटे हुए हैं। आंदोलन का नेतृत्व कर रहीं वरिष्ठ पत्रकार अपूर्वा चौधरी ने साफ कर दिया है कि जब तक न्याय नहीं मिलता, यह संघर्ष थमने वाला नहीं है।

धरने के तीसरे दिन कांग्रेस के जिलाध्यक्ष सतीश शर्मा अपने कार्यकर्ताओं के साथ धरना स्थल पर पहुंचे और पत्रकारों की मांगों को अपना पूर्ण समर्थन दिया। पत्रकारों को संबोधित करते हुए सतीश शर्मा ने कहा: लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को इस तरह दबाने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हमारी पूरी पार्टी इस लड़ाई में आपके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है। जब तक आप लोगों को न्याय नहीं मिल जाता, कांग्रेस चुप नहीं बैठेगी।

धरने को संबोधित करते हुए वरिष्ठ पत्रकार अपूर्वा चौधरी ने पुलिस प्रशासन और भ्रष्ट अधिकारियों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने बेहद आक्रामक अंदाज में कहा:- आज हमें ईमानदारी का ईनाम फर्जी और झूठे मुकदमों के रूप में मिल रहा है। लेकिन मैं साफ कर देना चाहती हूं कि मैं पत्रकार हूं, पत्तलकार नहीं जो भ्रष्ट अधिकारियों के सामने झुक जाऊं। हमें हमारा हक चाहिए, किसी से भीख नहीं।

उन्होंने अधिकारियों के सुस्त रवैये पर तंज कसते हुए आगे कहा, प्रशासन भले ही नींद का बहाना करे, लेकिन पत्रकार झुकेंगे नहीं। कुछ लोग सोच रहे होंगे कि हम किसी की सिफारिश कराएंगे, तो वे बेफिक्र रहें। हमारी डायरेक्टरी में सबके नंबर हैं, पर हमें उनकी जरूरत नहीं है क्योंकि हम अपना संवैधानिक अधिकार अच्छी तरह जानते हैं। यह लड़ाई किसी की व्यक्तिगत लड़ाई नहीं, बल्कि उन सभी ईमानदार पत्रकारों की है जिनकी आवाज को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।

क्या है पूरा मामला?

धरनारत पत्रकारों के अनुसार, यह पूरा विवाद 20 मई की एक घटना से जुड़ा है। आरोप है कि सिद्धार्थ विहार स्थित जल निगम चौकी पर तैनात एक पुलिसकर्मी ने पत्रकार ललित चौधरी के साथ अभद्रता और मारपीट की थी। पत्रकारों का कहना है कि वास्तविक दोषी पुलिसकर्मी पर कार्रवाई करने के बजाय, गाजियाबाद पुलिस ने उल्टा पत्रकारों के खिलाफ ही फर्जी मुकदमा दर्ज कर दिया।

अपूर्वा चौधरी ने आरोप लगाया कि पुलिस कमिश्नर के निर्देश पर वे और उनके साथी 10 से अधिक बार संबंधित अधिकारियों से मिलकर साक्ष्य सौंप चुके हैं, लेकिन हर बार उन्हें केवल खोखला आश्वासन ही हाथ लगा। इसी हठधर्मिता के खिलाफ पत्रकारों को अंततः धरने पर बैठने के लिए मजबूर होना पड़ा।

प्रशासनिक उदासीनता के बावजूद पत्रकारों का हौसला डिगा नहीं है। धरने में मुख्य रूप से पंकज शर्मा, पवन चौधरी, विकास कुमार, ब्रजभूषण, सद्दाम हुसैन, सतीश कुमार, सुमन मिश्रा महेश त्यागी, उमेश त्यागी, सविता चौधरी, संजय शर्मा, रणसिंह, मनोज प्रजापति, फारूख सिद्दीकी, योगेश कुमार, संजय भाटी सहित दर्जनों पत्रकार साथी पूरी-पूरी रात धरना स्थल पर डटे हुए हैं।

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