गुरु वह नहीं होता जो आपके लिए मशाल थामे रहता है, बल्कि वह होता है जो आपको प्रकाश की ओर मार्गदर्शन करता है । गुरु हाथ थामता है, मन खोलता है और हृदय को स्पर्श करता है!!
दिल्ली/गाजियाबाद। गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर सकल गददियो के स्वामी श्री श्री1008 प० रामगोपाल जी महाराज भूगोर अलवर वाले बाबा के परमभक्त शिष्य श्री हरप्रसाद शर्मा (झावल) जी के सान्निध्य में दिव्य एवं भव्य व्यास पूजन एवं गुरु वंदन कार्यक्रम का भव्य आयोजन 28 जुलाई 2026 जुलाई को दिल्ली के सी 1 (गणेश नगर पाडवनगर काम्प्लेक्स) हनुमान मंदिर पटपड़गंज में धूमधाम से आयोजन किया जाएगा। तथा 29 जुलाई गुरुपूर्णमा कार्यक्रम हरिद्वार में किया जाएगा।दिल्ली कार्यक्रम में वैदिक मंत्रोच्चार, पूजन-अर्चना तथा विश्व शांति, राष्ट्र की उन्नति एवं समस्त मानव समाज के कल्याण की मंगलकामना के साथ विशेष प्रार्थना की गई।इस अवसर पर श्री हरप्रसाद शर्मा '(झावल) बाबा जी ने उपस्थित श्रद्धालुओं एवं समाजजनों को संबोधित करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान भगवान से भी श्रेष्ठ माना गया है।
गुरु ही अज्ञान रूपी अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश प्रदान करते हैं तथा मनुष्य को सत्य, धर्म, संस्कार और कर्तव्य का मार्ग दिखाते हैं। गुरु पूर्णिमा केवल एक पर्व नहीं, बल्कि अपने जीवन को सही दिशा देने वाले गुरु के प्रति श्रद्धा, समर्पण और कृतज्ञता व्यक्त करने का महान अवसर है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में सच्चे और आदर्श गुरुओं का अभाव महसूस किया जा रहा है। आज अनेक स्थानों पर मठ, आश्रम और स्वयंभू गुरुओं की संख्या निरंतर बढ़ रही है, इसलिए प्रत्येक व्यक्ति का यह दायित्व है कि वह किसी भी गुरु को स्वीकार करने से पहले उसके आचरण, चरित्र, ज्ञान, सेवा-भाव, जीवन मूल्यों एवं समाज के प्रति उसके योगदान की भली-भांति जांच-परख अवश्य करे। केवल वेशभूषा या बाहरी आडंबर देखकर किसी को गुरु स्वीकार करना उचित नहीं है।
उन्होंने कहा कि सच्चा गुरु वही है जो अपने शिष्यों में मानवता, राष्ट्रभक्ति, सनातन संस्कृति, सेवा, सदाचार और नैतिक मूल्यों का विकास करे। ऐसा गुरु न केवल व्यक्ति के जीवन का कल्याण करता है, बल्कि परिवार, समाज और राष्ट्र को भी सशक्त एवं संस्कारित बनाता है। गुरु का चयन विवेक, श्रद्धा और सत्य की कसौटी पर होना चाहिए, तभी जीवन सार्थक एवं सफल बन सकता है।कार्यक्रम में व्यास पूजन के उपरांत उपस्थित हजारों श्रद्धालुओं ने गुरु परंपरा के संरक्षण एवं भारतीय संस्कृति के संवर्धन का संकल्प लिया। साथ ही विश्व में शांति, सद्भाव, समृद्धि एवं मानव कल्याण के लिए सामूहिक प्रार्थना की गई। उपस्थित सभी लोगों ने गुरु पूर्णिमा के इस आयोजन को आध्यात्मिक चेतना, सांस्कृतिक जागरण एवं सामाजिक एकता का प्रेरणादायी आयोजन बताते हुए इसकी सराहना की। कार्यक्रम के समापन पर सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया तथा गुरु परंपरा के आदर्शों का अनुसरण करते हुए समाज में सद्भाव, संस्कार और सेवा की भावना को आगे बढ़ाने का आह्वान किया गया। सभी भक्तजनो प्रसाद ग्रहण किया।



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