अविभाजित पंजाब के मुल्तान से चली आ रही परंपरा की धूम हरिद्वार से गाजियाबाद तक
श्रावण ज्योत महोत्सव पर गजियाबाद में मुल्तानी समाज द्वारा आयोजित किया गया विशाल भंडारा एवं सहभोज, छोटा हरिद्वार में ज्योत विसर्जन
गाजियाबाद । श्रावण मास में महादेव शिव और मां गंगा को सभी भक्त विशेष रूप से मनाते हैं। 1947 के विभाजन में पंजाब के मुल्तान से आये परिवार आज भी भक्ति और सेवा भाव से जुड़ी कुछ अनूठी परम्पराओं का निर्वहन करते हैं और उनमें से एक है मुल्तान ज्योत महोत्सव। यह उत्सव 116 वर्षों से चला है जब अविभाजित पंजाब के मुल्तान क्षेत्र से भी अनगिनत भक्त श्रावण में हरिद्वार आकर मां गंगा का विशेष पूजन करते आएं हैं और यह भक्ति उत्सव मुल्तान श्रावण ज्योत महोत्सव के नाम से प्रसिद्ध है। 1911 में मुल्तान में रहने वाले सनातन समाज ने भक्त रूपचंद जी के नेतृत्व में राष्ट्र धर्म और सर्व कल्याण की अरदास को मन में लेकर यह जत्था अविभाजित पंजाब के मुल्तान से अखंड ज्योत को लेकर हरिद्वार पहुंचा और भक्ति एवं प्रार्थना की। मान्यता है कि तब से इस परम्परा ने वृहद रूप लिया और यह एक वार्षिक उत्सव बन गया।
1947 के बंटवारे के बाद बहुत से पंजाबी दिल्ली एन सी आर में आकर बसे और मुल्तानी परिवार इस भक्ति परंपरा का निर्वहन करते हुए हरिद्वार में एकत्रित हो ज्योत महोत्सव में सम्मिलित होते रहे और अपने अपने स्थानों पर भी इस भक्ति उत्सव को धूम धाम से मनाते रहे। हरिद्वार के साथ साथ दिल्ली एन सी आर में यमुना तट पर और गाज़ियाबाद मुरादनगर के छोटा हरिद्वार पर भी यही ज्योत महोत्सव होता है। पुराने शहर के बजरिया में मुल्तानी भोजन के लिए मशहूर मदन दी हट्टी वाले स्थान पर आयोजित इस भंडारे में व्यंजन भी कुछ खास रहे। महादेव भोलेनाथ और मां गंगा को भोग लगा कर भंडारे का शुभारंभ हुआ। मुख्य ट्रस्टी विनय कक्कड़ ने कहा यह उत्सव सेवा, भक्ति, सामाजिक सौहार्द और अपनी संस्कृति को आने वाली पीढ़ियों को सौंपने की एक मिसाल है। ट्रस्ट के सेवा प्रकल्प मुल्तान बिरादरी कल्याण सेवा समिति के अध्यक्ष डी के गांधी ने बताया कि सहभोज में मुल्तानी मोठ कचौड़ी, मोठ चावल, पिंडी छोले, मलाईदार खीर, दाल हलुआ व मालपुड़े के स्वाद से सभी आनंदमय थे।
इस अवसर पर अतिथियों में मयंक गोयल, पूर्व सांसद अनिल अग्रवाल, जगदीश साधना, आशु वर्मा, इंद्रजीत सिंह टीटू, बालप्रीत सिंह, गौरव चोपड़ा, प्रदीप चौधरी, बिजेंद्र यादव, के के शर्मा, अमोल खत्री, परमानंद गर्ग समेत कई व्यापारी एवं सामाजिक संगठनों के पदाधिकारियों की मौजूदगी रही जिनमें सुभाष छाबड़ा, अशोक अरोड़ा संजीव लाहौरिया, राजू छाबड़ा, नीरज अरोड़ा, रविन्द्र आर्य, नरेंद्र गोगिया, संजीव कपूर, अनिल अरोड़ा, राकेश बाठला, अशोक आजमानी,राजकुमार नागपाल, अनिल जी आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
आयोजक मंडल से डी के गांधी, एड विनय कक्कड़ (पूर्व पार्षद), तिलक राज अरोड़ा, गुलशन भ्रामरी, सतीश चोपड़ा, (पूर्व पार्षद),अजय गंभीर, भूपेंद्र चोपड़ा, यशपाल अरोड़ा, दिनेश अरोड़ा, नवीन अरोड़ा, विनय कक्कड़, राजेंद्र गजवानी, सुरेंद्र अरोड़ा, प्रेम रावल, वीरभान कपूर, गौरव मल्होत्रा आदि ने मिलकर संगत की सेवा की और जय गंगे मैया के जयघोष के साथ विशाल भंडारा एवं सहभोज हुआ। इसके पश्चात् सायंकाल में छोटा हरिद्वार के मुल्तानी घाट पर मां गंगा की महा आरती एवं महाज्योत विसर्जन के साथ यह उत्सव पूर्ण हुआ।










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