वृंदावन। श्री खेतेश्वर ब्रह्मधाम तीर्थ, आसोतरा के गादीपति, अनन्त श्री विभूषित ब्रह्मर्षि, ब्रह्मचारी, ब्रह्म सावित्री सिद्धपीठाधीश्वर बाल ब्रह्मचारी पूज्य संत **श्री श्री 1008 तुलछाराम जी महाराज** के 46वें दिव्य चातुर्मास महा-महोत्सव के लिए वृंदावन आगमन पर समस्त उत्तर भारत राजपुरोहित समाज द्वारा उनका भव्य एवं दिव्य स्वागत किया गया।
पूज्य गुरुदेव के स्वागत में पुष्पवर्षा, माल्यार्पण एवं भव्य शोभायात्रा निकाली गई। इसके पश्चात कृष्ण साधक ट्रस्ट परिसर में महाप्रसादी का आयोजन किया गया। **46वें दिव्य चातुर्मास महा-महोत्सव का संपूर्ण आयोजन उत्तर भारत राजपुरोहित समाज के तत्वावधान में वेदांताचार्य डॉ. श्री ध्यानाराम जी महाराज के सान्निध्य एवं मार्गदर्शन में आयोजित किया जा रहा है।** महा-महोत्सव की तैयारियाँ पिछले दो माह से निरंतर चल रही थीं।
पूज्य गुरुदेव 23 जुलाई को ब्रह्मधाम आसोतरा से प्रस्थान कर जोधपुर, पुष्कर, किशनगढ़, जयपुर एवं भरतपुर सहित विभिन्न स्थानों से होते हुए वृंदावन पहुँचे। यात्रा मार्ग में विभिन्न स्थानों पर राजपुरोहित समाज एवं श्रद्धालुओं द्वारा पुष्पवर्षा कर उनका भव्य स्वागत किया गया।
वृंदावन आगमन के उपरांत पूज्य गुरुदेव जी ने हजारों श्रद्धालुओं के साथ वृंदावन में परिक्रमा और मंदिरों में दर्शन-पूजन किए।
इसी दौरान **श्री दूधेश्वरनाथ महादेव मंदिर** के सिद्धपीठाधीश्वर **श्रीमहंत नारायण गिरि जी महाराज** ने वृंदावन में चातुर्मास कर रहे ब्रह्मसावित्री सिद्धपीठाधीश्वर पूज्य श्री श्री 1008 तुलछाराम जी महाराज से आत्मीय भेंट की। इस अवसर पर दोनों संतों के मध्य धर्म, संस्कृति, सनातन परंपरा, राष्ट्रहित एवं आध्यात्मिक विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई। श्रीमहंत नारायण गिरि जी महाराज ने पूज्य तुलछाराम जी महाराज के तप, त्याग, सेवा एवं सनातन धर्म के संरक्षण में उनके योगदान की सराहना करते हुए उनके उत्तम स्वास्थ्य एवं दीर्घायु की कामना की।
29 जुलाई से प्रारंभ होगा चातुर्मास महा-महोत्सव
पूज्य गुरुदेव 29 जुलाई से चातुर्मास स्थल पर तप, साधना, स्वाध्याय एवं धर्म प्रवचनों का शुभारंभ करेंगे। 46वाँ दिव्य चातुर्मास महा-महोत्सव 29 जुलाई से 26 सितम्बर तक वृंदावन में आयोजित होगा। इस दौरान प्रतिदिन धर्म प्रवचन, तप-साधना, भक्ति, आध्यात्मिक सत्संग, यज्ञ, धार्मिक अनुष्ठान एवं विभिन्न आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
इस अवसर पर उत्तर भारत एवं देश के विभिन्न राज्यों से आए राजपुरोहित समाज के अनेक गणमान्य समाजबंधु उपस्थित रहे। इनमें गिरधारी सिंह (बालोतरा), भंवरसिंह कनाना, इंद्रसिंह सरताज राजगुरु (बासनी), सुरेंद्रसिंह "नमकीनों के बादशाह" (बासनी मनणा), रघुनाथसिंह अराबा, भागीरथसिंह मादड़ी (अमृतसर), मोहनसिंह सरपंच (चांबड़ी), राहुलसिंह घेवड़ा, जगदीशसिंह फूलासर, श्यामसिंह चाडवास, महेंद्रसिंह सरपंच प्रतिनिधि (सरवड़ी), प्रवीणसिंह चांवड़ा, राजेंद्रसिंह कुचामन, विष्णुसिंह, लिखमसिंह, मांगीलाल धीरी, अनोपसिंह किशनासर, प्रेमसिंह नारवा, मोतीसिंह थोब, श्रवणसिंह नारवा, डूंगर सिंह अराबा, हुक्मसिंह घेवड़ा, बजरंगसिंह बासनी, तगसिंह डोली, संदीपसिंह आड़सर, गणपतसिंह बड़ी सवाई, भेरूसिंह सराणा, सोहनसिंह पुरोहितासनी, प्रह्लादसिंह मादड़ी, जबरसिंह भासूदा, संपतसिंह बड़ी सवाई, पवनसिंह ढाबर, बाबूसिंह सरवड़ी एवं जोरावरसिंह कनोड़िया सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं समाजबंधु उपस्थित रहे।
पूज्य गुरुदेव ने उपस्थित सभी श्रद्धालुओं एवं समाजबंधुओं को आशीर्वाद प्रदान करते हुए धर्म, संस्कार, समाज सेवा तथा सनातन संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए समर्पित भाव से कार्य करने का संदेश दिया।
उत्तर भारत राजपुरोहित समाज के **कानसिंह गुरड़ाई** ने बताया कि पूज्य श्री श्री 1008 तुलछाराम जी महाराज का 46वाँ दिव्य चातुर्मास महा-महोत्सव श्रद्धा, साधना एवं आध्यात्मिक चेतना का अनुपम संगम होगा। उन्होंने कहा कि 29 जुलाई से 26 सितम्बर तक चलने वाले इस महोत्सव में देशभर से हजारों श्रद्धालु प्रतिदिन उपस्थित होकर धर्म प्रवचनों, सत्संग एवं आध्यात्मिक कार्यक्रमों का लाभ प्राप्त करेंगे।





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