महाराजश्री ने प्रातः 9 बजे से अपरान्ह 4 बजे तक भक्तों को गुरू दीक्षा व आशीर्वाद प्रदान किया
भक्तों की भीड़ को देखते हुए श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज अपरान्ह 4 बजे से फिर व्यास गददी पर बैठकर आशीर्वाद प्रदान करेंगे
गाजियाबादः सिद्धपीठ श्री दूधेश्वर नाथ मठ महादेव मंदिर में गुरू पूर्णिमा पर मंदिर के पीठाधीश्वर जूना अखाड़ा के अंतर्राष्ट्रीय प्रवक्ता, दिल्ली संत महामंडल के राष्ट्रीय अध्यक्ष व जूना अखाड़ा की 13 मढ़ी के अध्यक्ष व हिंदू यूनाइटिड फ्रंट के अध्यक्ष श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज की ऐसी कृपा बरसी कि गुरू पूजन व गुरू दीक्षा के लिए देश भर से आए हजारों भक्त भक्ति, श्रद्धा, आस्था व विश्वास से सराबोर हो गए। सद्गुरु श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज से दीक्षा व आशीर्वाद लेने के लिए विभिन्न राज्यों से युवा से लेकर बड़े तक पहुंचे और प्रातः 9 बजे से लेकर अपरान्ह 4 बजे तक भजन-कीर्तन से मंदिर परिसर ही नहीं आसपास के वातावरण को भी गुरूमय कर दिया। बुधवार को महाराजश्री ने सबसे पहले भगवान दूधेश्वर नाथ महादेव का पूजन-अर्चन व रुद्राभिषेक पूजन किया। उसके पश्चात श्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा के इष्टदेव एवं गुरु महाराज दत्त भगवान तथा मंदिर में विराजमान सभी देवी-देवताओं का पूजन हुआ।
मठ में विराजमान समस्त गुरु समाधियों एवं गुरु मूर्तियों का पूजन-अर्चन पुष्प, अक्षत, धूप-दीप से अर्चन किया गया। गौ माता एवं विप्र देव व विद्यार्थियों का पूजन कर उनका आशीर्वाद लिया गया। दूधेश्वर वंेद विद्या संस्थान के सभी आचार्यो, विद्यार्थियों तथा सभी भक्तों ने हवन में विश्व शांति, राष्ट्र की समृद्धि, सनातन धर्म की उन्नति एवं समस्त मानवता के कल्याण की कामना करते हुए आहुति दी। इसके बाद महाराजश्री का पूजन कर देश भर से आए भक्तों ने गुरू दीक्षा ग्रहण की और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। दीक्षा प्राप्त करने का सिलसिला प्रातः 9 बजे से अपरान्ह 4 बजे तक चला। उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात, उत्तराखंड, केरला कनार्टक, आंध प्रदंेश तमिलनाडु, बिहार पंजाब, उडीसा, पांडुचेरी आदि राज्यों से भक्तों के आने का सिलसिला लगातार जारी है। इसी के चलते महाराजश्री 4 बजे से फिर व्यास गददी पर विराजमान होंगे और देर रात्रि तक भक्तों को गुरू दीक्षा व आशीर्वाद प्रदान कोंगे। श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज ने कहा कि गुरु ही जीवन का आधार हैं। गुरु के बिना ज्ञान, संस्कार और मुक्ति संभव नहीं है। जीवन में गुरु का बहुत अधिक महत्व है क्योंकि वे अज्ञान के अंधकार को मिटाकर ज्ञान का प्रकाश फैलाते हैं, सही मार्ग दिखाते हैं और जीवन को सार्थक बनाते हैं। गुरू दो शब्दों गु व रु से मिलकर बना है। गु का अर्थ अंधकार और रु का अर्थ उसे मिटाने वाला होता है। गुरु बिना गति नहीं है। गुरु के बिना, हम अपने अंतिम लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर सकते हैं। गुरु हमें न केवल शिक्षा देते हैं, बल्कि सही और गलत में अंतर करना भी सिखाते हैं। वे हमारे चरित्र, सोच और व्यवहार को सही दिशा में ले जाते हैं। गुरु का मार्गदर्शन हमें जीवन में आने वाली कठिनाइयों का सामना करने की शक्ति देता है। उनका ज्ञान और अनुभव हमें अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद करता है। हमारे शास्त्रों में भी कहा गया है कि गुरु बिन ज्ञान नहीं होता। यह वाक्य हमें बताता है कि गुरु के बिना ज्ञान प्राप्त करना संभव नहीं है। गुरु हमें अज्ञान के अंधकार से बाहर निकालकर ज्ञान का प्रकाश देते हैं। गुरू के मार्गदर्शन से हम अपने जीवन में बड़ेसे बड़े लक्ष्य प्राप्त कर सकते हैं। इसी कारण भारतीय संस्कृति में गुरु को भगवान से भी ऊँचा स्थान दिया गया है। गुरु पूर्णिमा हमें गुरु के प्रति समर्पण और कृतज्ञता का भाव सिखाती है। श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज का पूजन कर आशीर्वाद प्राप्त करने वाले भक्तों में लवकुश जन्म भूमि बालैनी बागपत के अनंतेश्वर गिरि महाराज, जूना अखाडे के मंत्री व देवी मंदिर दिल्ली गेट के महंत गिरिशानंद गिरि महाराज, महंत शैलेंद्र गिरि महाराज, महंत विजय गिरि महाराज, श्मशानवासिनी साध्वी महंत कैलाश गिरि महाराज, विधायक संजीव शर्मा, बीजेपी के प्रदेश महामंत्री यतेंद्र शर्मा, महानगर अध्यक्ष मयंक गोयल, एसीपी उपासना पांडेय, बी के शर्मा हनुमान, जिला एमएमएजी अस्पताल के सीएमएस, पंकज भारद्वाज, सुरेन्द सिंह चम्पावत केरला, महेंद्र सिंह देवड़ा, दशरथ सिंह केरला, नरेंद्र सिंह केरला, शिक्षाविद राम अवतार जिंदल, महिम गुप्ता, धर्मेंद्र चौधरी, मुम्बई से बहादुर सिंह, अनेक पार्षदों, विभिन्न दलों के नेता, उद्यमी, व्यापारी, समाजसेवी, धार्मिक-सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी, अधिकारी, शहर के गणमान्य नागरिक आदि शामिल रहे। मंदिर परिसर प्रातःकाल ही वैदिक मंत्रों और शंख ध्वनि से गुंजायमान हो उठा। सभी ने विश्व शांति, राष्ट्र की समृद्धि, सनातन धर्म की उन्नति एवं समस्त मानवता के कल्याण की प्रार्थना की। मंदिर को दीपों और पुष्पों से सजाया गया तथा भक्तों में प्रसाद वितरित किया गया।









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