गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026

सोशल मीडिया की लत छीन रही है बच्चों की मासूमियत समय से पहले बड़े हो रहे है बच्चे - सीमा त्यागी

 

मुकेश गुप्ता

अभिभावक बच्चों के साथ रोज बिताएं समय, बच्चो की बातों को समझें और बनाएं भरोसे का रिश्ता - सीमा त्यागी 

हम सभी जानते है कि सोशल मीडिया आज बच्चों के जीवन का हिस्सा बन चुका है, लेकिन इसका अत्यधिक इस्तेमाल उनके मानसिक और शारीरिक विकास के साथ बचपन की सहजता को भी प्रभावित कर रहा है। कम उम्र में बच्चे ऐसी सामग्री और जीवनशैली के संपर्क में आ रहे हैं, जिन्हें समझने और उनके प्रभावों का आकलन करने के लिए वे अभी पूरी तरह परिपक्व नहीं हैं। सोशल मीडिया की बढ़ती लत बच्चों को समय से पहले वयस्क बना रही है। बचपन खेलने, सीखने, सवाल पूछने और जीवन के संस्कार समझने की उम्र होती है, लेकिन सोशल मीडिया पर दिखावटी जीवनशैली और दूसरों से तुलना करने की आदत बच्चों पर अनावश्यक मानसिक दबाव डाल रही है। बच्चों को केवल डांटने, मोबाइल छीनने या प्रतिबंध लगाने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। इसके लिए जरूरी है कि अभिभावक बच्चों के साथ संवाद बढ़ाएं और उन्हें अपनी बात खुलकर कहने का अवसर दें , किसी ना किसी खेल का हिस्सा बनाए और साथ ही उन्हें अपने समय की तरह सभी पारिवारिक रिश्तों को जीना सिखाए  सीमा त्यागी ने अभिभावकों से अपील की कि वे रोज कुछ समय मोबाइल से दूर रहकर बच्चों के साथ समय  बिताएं। बच्चो से  पूछें कि दिनभर क्या हुआ, वे किस बात से खुश या परेशान हैं और इंटरनेट पर क्या देख रहे हैं। बच्चों की बातों को धैर्य से सुनें, ताकि वे अपनी जिज्ञासाओं और परेशानियों को परिवार के साथ साझा कर सकें। अपने बच्चों को डिजिटल दुनिया के खतरों से बचाने के लिए अभिभावकों को स्वयं भी मोबाइल के इस्तेमाल में अनुशासन अपनाना होगा। 

 “बच्चों को मोबाइल और इंटरनेट देने से ज्यादा जरूरी है उन्हें अपना समय, विश्वास और सही मार्गदर्शन देना। हर दिन बच्चों के साथ ‘मन की बात’ कीजिए, क्योंकि संवाद ही बच्चों को गलत प्रभावों से बचाने और उनके करीब आने का सबसे प्रभावी माध्यम है।”

उन्होंने सरकार, शिक्षण संस्थानों, अभिभावकों और डिजिटल प्लेटफॉर्म से मिलकर बच्चों के लिए सुरक्षित डिजिटल वातावरण बनाने की अपील की, ताकि तकनीक उनके विकास का माध्यम बने, उनके बचपन को छीनने का नही।

सौजन्य से इडियन पैरेंट्स एसोसिएशन

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