हिंदी भवन में चार घंटे बही कविताओं की रसधारा
आठ में से चार कवि पहली बार आए हिंदी भवन के मंच पर
गाज़ियाबाद । हिंदी भवन समिति की ओर से आयोजित हिंदी दिवस समारोह एवं कवि सम्मेलन में जहां 35 मेधावी विद्यार्थियों व शिक्षकों को सम्मानित किया गया, वहीं जाने माने कवियों ने लगातार चार घंटे गीत, गजल, कविताओं की रसधारा बहाई।
मुख्य अतिथि डीसीपी धवल जायसवाल और मुख्य वक्ता डॉ हरीश अरोड़ा आदि ने दीप प्रज्ज्वलित कर समारोह की शुरुआत कराई। डीसीपी धवल जायसवाल ने कहा कि हिंदी के प्रचार प्रसार के लिए इस तरह के आयोजन महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। पीजी डी ए वी कॉलेज (दिल्ली विश्वविद्यालय) के प्रोफेसर डॉ हरीश अरोड़ा ने मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए हिंदी की स्थिति पर सारगर्भित विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि तमाम विपरीत परिस्थितियों के बाद भी हिंदी का भविष्य उज्ज्वल है।
हिंदी भवन समिति के अध्यक्ष ललित जायसवाल ने कहा कि हिंदी दिवस और हिंदी पखवाड़े के अवसर पर प्रत्येक वर्ष कवि सम्मेलन के साथ साथ हिंदी के मेधावी विद्यार्थियों और शिक्षकों को सम्मानित किया जाता है। भविष्य में भी इस तरह के आयोजन हिंदी भवन में होते रहेंगे।
समारोह में जनपद गाज़ियाबाद के विभिन्न विद्यालयों के हिंदी के 35 मेधावी विद्यार्थियों और शिक्षकों को सम्मानित किया गया। हिंदी भवन समिति के महासचिव सुभाष गर्ग और अन्य पदाधिकारियों ने रचनाकारों का स्वागत किया।
इस अवसर पर आयोजित कवि सम्मेलन में देश के जाने माने कवियों की रचनाओं का श्रोताओं ने चार घंटे तक आनंद लिया।सिकंदरा राऊ (हाथरस) से आए सुप्रसिद्ध गीतकार डॉ विष्णु सक्सेना के गीतों पर श्रोता खूब झूमे..
जो हाथ थाम लो वो फिर न छूटने पाये,
प्यार की दौलतें कोई न लूटने पाये,
जब भी छूलो बुलंिदयां तो ध्यान ये रखना
ज़मीं से पाँव का रिश्ता न टूटने पाये।
दिल्ली से आए प्रसिद्ध कवि डॉ प्रवीन शुक्ल ने शानदार संचालन के साथ उम्दा काव्य पाठ भी किया...
कविता हर हारे मन को भी जीत दिया करती है
मन के टूटे तारों को संगीत दिया करती है
घोर निराशा में आशा का दीपक बन जाती है
विपदा में जीवन जीने का रस्ता दिखलाती है।
कवि राज कौशिक ने दिलों में नफरत के स्थान पर प्यार रखने का ये संदेश देकर खूब तालियां बटोरीं...
कुछ इक दिन में ही ये दुनिया गुलो गुलज़ार हो जाए
जो नफरत की जगह दिल में हमारे प्यार हो जाए
मैं इस हद तक मोहब्बत का हूं पैरोकार अब यारो
कोई समझे मुझे दुश्मन तो मेरी हार हो जाए
ग्वालियर से पधारे शायर अतुल अजनबी को उनकी पंक्तियों पर खूब दाद मिली...
कश्तियाँ डूब रही हैं यहाँ एक एक करके
और हम ख़ुश हैं कि पतवार सँभाले हुए हैं।
पानीपत से पधारे हास्य कवि मनु बदायूँनी ने लोगों को खूब हंसाया..
दोनों बच्चे पीटकर और दाल आटा एक कर
मैं सहम जाता हूँ उनकी लाल आँखें देखकर
सूट तू लाया है जो मुझको पसंद आया नहीं
बात समझाती हैं पत्नी ये भी बर्तन फेंक कर
कवयित्री अंजु जैन को भी खूब सुना गया..
है यंकी हमको कि हम और निखर जाएँगे
हौंसला देख के तूफ़ान ठहर जाएँगे
है नहीं ख़ौफ़ हवाओं की शरारत का हमें
हम नहीं ताश का इक घर जो बिखर जाएँगे
मथुरा से आए ओज के कवि
मनवीर मधुर को भी खूब प्रशंसा मिली...
सहज शालीन लौकिक बुद्ध, भी दुनिया ने देखा है ।
किया है शत्रु-पथ अवरुद्ध, भी दुनिया ने देखा है ॥
क्षमा कर युद्धबंदी लाख, वापस कर दिये हमने,
हमारा शौर्य साहस युद्ध, भी दुनिया ने देखा है ॥

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