गाजियाबाद। उत्तर प्रदेश सरकार जहां दिव्यांगजनों और निराश्रित लोगों को रोजगार सहित विभिन्न सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए योजनाएं चला रही है, वहीं विजयनगर थाना क्षेत्र के सिद्धार्थ विहार स्थित गंगाजल चौकी क्षेत्र में एक दिव्यांग दुकानदार ने पुलिसकर्मियों पर अभद्र व्यवहार, गाली-गलौज, धमकी देने और रुपये ले जाने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
दिव्यांगजन निराश्रित सर्व उत्थान सेवा समिति के पदाधिकारियों एवं कर्मचारियों को दिए गए शिकायती पत्र में कांशीराम आवास योजना, प्रताप विहार निवासी दिनेश कुमार पुत्र स्वर्गीय घीसाराम ने बताया कि 20 सितंबर को वह गंगा-जमुना अपार्टमेंट के पास ब्रह्मपुत्र रोड, सिद्धार्थ विहार स्थित अपनी खोखा नुमा दुकान पर बैठा हुआ था।
शिकायत के अनुसार, करीब सुबह 11:30 बजे एक सफेद रंग की कार उसकी दुकान के सामने आकर रुकी। कार से उतरा एक व्यक्ति कुछ देर दुकान के सामने खड़ा रहा और इसके बाद दुकान के अंदर आ गया। दिनेश कुमार का आरोप है कि उक्त व्यक्ति ने सबसे पहले उसका मोबाइल फोन ले लिया, जिससे वह किसी को फोन न कर सके और कथित बातचीत की रिकॉर्डिंग भी न कर पाए।
दिनेश के मुताबिक, उक्त व्यक्ति ने दुकान से सिगरेट ली, लेकिन उसके पैसे नहीं दिए। उसने स्वयं को डीपी सिंह, चौकी इंचार्ज बताया। शिकायतकर्ता का कहना है कि उक्त व्यक्ति पुलिस की वर्दी में नहीं था। वर्दी के संबंध में पूछने पर उसने स्वयं को सिविल ड्रेस में होना बताया।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि दुकान लगाने की अनुमति के संबंध में पूछताछ के दौरान दिनेश ने अधिकारियों से मिली अनुमति की जानकारी दी और अनुमति पत्र दिखाया। इसके बाद कथित रूप से उसके साथ गाली-गलौज की गई और उस पर गांजा बेचने का आरोप लगाया गया, जिसे दिनेश ने पूरी तरह गलत बताया।
शिकायतकर्ता के अनुसार, इसके बाद उक्त व्यक्ति ने फोन कर दो पुलिसकर्मियों को बुलाया, जिनमें से एक का नाम आरिफ अली बताया गया है। इसके बाद कथित रूप से दुकान की तलाशी ली गई और सामान को इधर-उधर फैला दिया गया। दिनेश का आरोप है कि उसकी जेब और गल्ले की भी तलाशी ली गई तथा उसे मुकदमा दर्ज कर जेल भेजने की धमकी दी गई।
दिनेश कुमार ने आरोप लगाया है कि करीब आधे घंटे तक उसके साथ गाली-गलौज और अभद्र व्यवहार किया गया तथा उसके गल्ले से लगभग 4,000 से 5,000 रुपये निकालकर ले लिए गए। साथ ही कथित रूप से धमकी दी गई कि यदि उसने शिकायत की तो उसके साथ बुरा व्यवहार किया जाएगा।
शिकायतकर्ता का कहना है कि घटना के बाद वह डर के कारण अगले दिन अपनी दुकान भी नहीं खोल सका और किसी को घटना बताने की हिम्मत नहीं जुटा पाया। बाद में हिम्मत करके उसने मामले की जानकारी दिव्यांगजन निराश्रित सर्व उत्थान सेवा समिति के पदाधिकारियों को दी।

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