रविवार, 28 दिसंबर 2025

इंडियन काउंसिल ऑफ इंडस्ट्रियल मैनेजमेंट (ICIM) के श्रमेव जयते – न्यू लेबर कोड्स सेमिनार” का सासंद डा० महेश शर्मा ने किया उद्घाटन, सोशल सिक्योरिटी कोड केवल विधायी सुधार नहीं, बल्कि सम्मानजनक जीवनयापन के प्रति भारत का राष्ट्रीय संकल्प है-सतेन्द्र सिंह





                        रिपोर्ट-मुकेश गुप्ता

नोएडा । इंडियन काउंसिल ऑफ इंडस्ट्रियल मैनेजमेंट (ICIM) ने अपने चेयरमैन सत्येन्द्र सिंह और डायरेक्टर  अंशुमान सिंह के नेतृत्व में “श्रमेव जयते – न्यू लेबर कोड्स सेमिनार” का भव्य और ज्ञानवर्धक आयोजन सफलतापूर्वक किया। यह सेमिनारनोएडा के होटल में आयोजित किया गया। सेमिनार में उद्योगों, HR नेतृत्व, कानूनी विशेषज्ञों और अनुपालन पेशेवरों को भारत में लागू हो रहे श्रम सुधारों के प्रभाव और व्यवहारिक क्रियान्वयन की स्पष्ट समझ प्रदान करने के उद्देश्य से तैयार किया गया था। कार्यक्रम ने नीति-निर्माताओं, सरकारी अधिकारियों, उद्योग संगठनों और कॉरपोरेट प्रतिनिधियों के लिए एक साझा मंच प्रदान किया, जहाँ चारों नए लेबर कोड्स पर व्यापक और तकनीकी चर्चा की गई।

कार्यक्रम का उद्घाटन गौतम बुद्ध नगर के सांसद डॉ. महेश शर्मा तथा उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव श्रम डॉ. एम.के. शन्मुग सुन्दरम द्वारा किया गया। दोनों गणमान्य अतिथियों ने श्रम सुधारों की राष्ट्रीय महत्ता, पारदर्शिता और विनियामक सरलता को लेकर सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि नए लेबर कोड्स उद्योगों में अनुपालन प्रक्रियाओं को सरल बनाते हुए रोजगार-सृजन तथा श्रमिकों की सुरक्षा और कल्याण को मजबूत करेंगे। उनके संबोधन ने इस राष्ट्र-स्तरीय विषय पर एक सशक्त नीतिगत पृष्ठभूमि तैयार की।




सेमिनार में NAEC के अध्यक्ष ललित ठुकराल, आईआईए के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राजीव बंसल , अतुल जैन , तथा विभिन्न प्रशासनिक विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। इनमें  राकेश द्विवेदी (DLC नोएडा),  बृजेश सिंह (DDF नोएडा),  अनुराग मिश्रा (DLC गाज़ियाबाद),  आलोक सिंह (DDF गाज़ियाबाद),  रविन्द्र सिंह (DDF मेरठ) तथा  पंकज राणा (DLC, उत्तर प्रदेश सोशल सिक्योरिटी बोर्ड) विशेष रूप से सम्मिलित हुए। इन अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी ने उद्योग और शासन के बीच समन्वय को और सुदृढ़ किया, जिससे संवाद का एक व्यापक और सकारात्मक वातावरण निर्मित हुआ।


सेमिनार में चारों श्रम संहिताओं पर विस्तृत तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिन्हें भारत के प्रमुख कानूनी विशेषज्ञों ने प्रस्तुत किया—

एडवोकेट सुधीर कुमार गुप्ता ने सोशल सिक्योरिटी कोड और ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशन्स (OHS) कोड पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने सामाजिक सुरक्षा संरचना के विस्तार, नए दस्तावेजीकरण मानकों और सुरक्षित कार्यस्थल सुनिश्चित करने हेतु आवश्यक अनुपालन प्रक्रियाओं पर चर्चा की।

एडवोकेट गोविंदराजु एन.एस. ने वेज कोड 2019 के अंतर्गत 50% CTC नियम, वेतन संरचना में आने वाले बदलाव, ग्रेच्युटी, PF और भत्तों पर इसके प्रभाव को स्पष्ट किया। उन्होंने वेतन पुनर्गठन और उसके दीर्घकालिक प्रभावों पर विश्लेषणात्मक व्याख्या की।

एडवोकेट यजत कुमार ने इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड 2020 पर विस्तृत प्रस्तुति दी, जिसमें स्टैंडिंग ऑर्डर्स, विवाद निवारण प्रक्रियाएँ, औद्योगिक हड़तालें, फिक्स्ड-टर्म रोजगार, तथा नए ट्रेड यूनियन संवाद ढाँचे को सम्मिलित किया गया।

अपने औपचारिक संबोधन में ICIM के चेयरमैन सत्येन्द्र सिंह ने कहा कि सोशल सिक्योरिटी कोड केवल विधायी सुधार नहीं, बल्कि सम्मानजनक जीवनयापन के प्रति भारत का राष्ट्रीय संकल्प है। उन्होंने बताया कि एकीकृत श्रम संहिताओं के माध्यम से यह सुनिश्चित किया गया है कि हर श्रमिक—चाहे वह विनिर्माण क्षेत्र में हो या सेवा क्षेत्र में—उसे सुरक्षा, स्थिरता और दीर्घकालिक आर्थिक संरक्षण मिले। उन्होंने आगे कहा कि उद्योगों को इन नए कोड्स को अवसर के रूप में देखते हुए अपने HR सिस्टम, दस्तावेजीकरण और अनुपालन संरचना को समयानुसार अपडेट करना चाहिए।

सेमिनार के दौरान प्रतिभागियों को अनुपालन टाइमलाइन, नियोजक-दायित्व, सांविधिक प्रक्रियाएँ और व्यावहारिक चुनौतियों की गहरी समझ प्रदान की गई। जटिल प्रावधानों को केस-स्टडीज़, चार्ट्स और उदाहरणों के माध्यम से सरल बनाया गया, जिससे उद्योग जगत को तत्काल उपयोगी मार्गदर्शन मिल सका।

कई HR हेड्स और उद्योग प्रतिनिधियों ने सेमिनार के संरचित प्रारूप, उपलब्ध जानकारी तथा विशेषज्ञों से सीधे संवाद करने के अवसर की सराहना की। प्रतिभागियों ने यह भी कहा कि इस सेमिनार ने उन कई शंकाओं को दूर किया, जो नए लेबर कोड्स के कारण होने वाले संगठनात्मक पुनर्गठन और अनुपालन दायित्वों से सम्बंधित थीं।

यह कार्यक्रम लीगलआईपीएल और उत्थान समिति के संयुक्त प्रयास से आयोजित किया गया, जिन्होंने योजना-निर्माण, समन्वय और संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

इस सफल आयोजन के साथ, ICIM ने यह पुनः पुष्टि की कि वह उद्योगों को निरंतर जागरूकता कार्यक्रमों, अनुपालन सहायता, प्रशिक्षण पहल और क्षमता-विकास अभियानों के माध्यम से समर्थन प्रदान करता रहेगा, ताकि नए लेबर सुधारों का सुचारु और प्रभावी क्रियान्वयन हो सके।

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