रविवार, 22 मार्च 2026

श्री त्रिपुर सुन्दरी बाला चतुभुर्जी देवी मंदिर में चौथे दिन रही भी भक्तों कि भारी भीड़-एस आर सुथार

  




                         .संवाददाता

गाजियाबाद । प्राचीन सिद्ध पीठ देवी मंदिर में हर वर्ष कि भांति इस वर्ष भी चैत्र नवरात्र के रविवार चौथे दिन मां कुष्मांडा प्रातः काल आचार्य द्वारा मन्त्रोउच्चारण के महंत गिरिशानन्द गिरी महाराज व भक्तों द्वारा भोग लगाया गया एवं साथ ही भव्य श्रृंगार मां देवी की धूप आरती दीप आरती की गई। जिसमें सैकड़ों भक्तगण महिलाओं एवं पुरुषों बच्चों ने आरती में भाग लिया एवं माता को चुनरी प्रसाद चढ़ाकर मथा टेकर आशीर्वाद प्राप्त किया। साथ पंडितों द्वारा शक्ति की उपासना शुरू की गई । एव साथ देवी मंदिर के महंत गिरिशानन्द गिरी महाराज के सानिध्य में  विद्वान पंडितों द्वारा शतचंडी पाठ शुरू किया। मां कुष्मांडा की पूजा करने से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। 

महंत विजय गिरी महाराज ने बताया कि आज नवरात्रि की चतुर्थी तिथि चौथा दिन देवी कुष्मांडा को समर्पित है

आज के दिन देवी दुर्गा के नौ अवतारों में से चौथे रूप की पूजा की जाती है और यह चौथा रूप है मां कुष्मांडा का. कुष्मांडा का अर्थ है मां कुष्मांडा मान्यता है कि देवी पार्वती ने ऊर्जा और प्रकाश को संतुलित करने के लिए सूर्य के केंद्र में निवास किया था। हिंदू शास्त्रों के अनुसार, देवी कुष्मांडा ब्रह्मांड की निमार्ता हैं और वह ऊजार्का स्रोत हैं. उनके स्वरूप की बात करें तो देवी कुष्मांडा को अष्टभुजा के नाम से जाना जाता है क्योंकि उनके आठ हाथ हैं मां के सात हाथों में धनुष, बाण, कमंडल, कमल, अमृत पूर्ण कलश, चक्र और गदा व एक हाथ में जपमाला होती है वह अपने भक्तों को सुख शांति समृद्धि देती है इस अवसर पर मीडिया प्रभारी एस आर सुथार ने भी आज परिवार के साथ मंदिर में मां कि पुजा अर्चना कर धन, समृद्धि और स्वास्थ्य का आशीर्वाद प्राप्त किया मंदिर के महंत गिरिशा नन्दगिरिजी महाराज ने उन्हें भी माताजी कि चुनरी ओढ़ाकर आशीर्वाद दिया इस अवसर पर । प्रमुख आचार्यों द्वारा एवं अन्य पंडितों ने नवरात्रि के पावन पर्व में मां कुष्मांडा एवं दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की गई एसआर सुथार बताया कि पर प्राचीन सिद्ध पीठ दूधेश्वर नाथ मंदिर में पीठाधीश्वर महंत नारायणगिरि महाराज के सानिध्य एवं आशीर्वाद से नवरात्रि के  26 मार्च को भव्य पंखा शोभायात्रा नगर भ्रमण नगर के विभिन्न मार्गों से होती हुई निकलेगी एवं 27 मार्च को विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा।

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