मुकेश गुप्ता
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए समाजवादी चिन्तक राम दुलार यादव शिक्षाविद ने कहा कि मुंशी प्रेमचंद की लेखनी ग्रामीण जीवन जीने वाले किसान, मजदूर, शोषित, पीड़ित, प्रताड़ित लोगों की कहानी है, जो सामंतवादी व्यवस्था तथा सूदखोरों के हर तरह के शोषण के शिकार रहे है, उन्होंने अपनी लेखनी के मध्यम से अन्यायपूर्ण व्यवस्था का विरोध किया, तथा समाज को उद्वेलित किया, वह यथार्थवाद के प्रवर्तक लेखक थे, उन्होंने केवल हिंदी साहित्य को ही नहीं बल्कि उर्दू साहित्य को भी सम्मान दिया, वे विपन्नता का जीवन जीते हुए भी कभी स्वाभिमान और सम्मान से समझौता नहीं किया, अपने विचार पर निर्भीकता पूर्वक डटे रहे, उन्होंने महिलाओं की पीड़ा को भी सरल और प्रभावी ढंग से प्रस्तुत कर जन-जन में लोक प्रियता हासिल किया, उन्होंने न केवल सामाजिक व धार्मिक पाखंड और कुरीतियों पर प्रहार किया, बल्कि राजनीतिक रूप से भी देश को ब्रिटिश गुलामी से मुक्त कराने के लिए महात्मा गाँधी के आह्वान पर असहयोग आन्दोलन में भाग ले सरकारी नौकरी से त्याग पत्र दे दिया, वह युग प्रवर्तक प्रगतिशील लेखक है, वह हिंदी साहित्य में “प्रेम चन्द युग” से पहले और उनके बाद के रूप में हमेशा याद किये जायेंगे।
श्री यादव ने कहा कि आजादी के 79 वर्ष बाद भी भारत की अधिकांश आबादी अन्याय, अत्याचार, अहंकार, शोषण, नफ़रत तथा आर्थिक विपन्नता की शिकार है, आज विश्व प्रसन्नता रिपोर्ट में भारत 147 देशों में 116 वें स्थान पर नेपाल और पाकिस्तान से पीछे है, प्रति व्यक्ति आय में विश्व के 182 देशों में 149 वें नंबर पर, भ्रष्टाचार में 91 नंबर पर तथा प्रेस स्वतंत्रता में हम 180 देशों में 157 वें नंबर पर जो घोर चिंताजनक है, और बहुत ही गंभीर स्थिति में है, लोकतंत्र की जड़ें हिल रही है, संविधान और संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता संदेह के घेरे में है, नैतिक आचरण, सत्य, ईमानदारी का देश, समाज में अभाव है, भय का वातावरण बनाया जा रहा है, देश में 100 करोड़ के करीब लोग अभाव का जीवन जी रहे है, उनकी आवाज का कोई महत्त्व नहीं रह गया, आज भी इसलिए मुंशी प्रेमचंद प्रासंगिक है, हमें समाज, देश में संविधान का आदर करते हुए सद्भाव, भाईचारा, प्रेम और बंधुत्व का वातावरण बनाना चाहिए, तभी देश, समाज, व्यक्ति का विकास संभव है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता डा0 देवकर्ण चौहान ने, आयोजन इंजी0 धीरेन्द्र यादव ने, संचालन श्रमिक नेता अनिल मिश्र ने किया, कार्यक्रम को जगन्नाथ प्रसाद, चन्द्रबली मौर्य, सम्राट सिंह यादव ने भी संबोधित किया तथा कहा कि मुंशी प्रेमचंद ने बाल विवाह, बेमेल विवाह तथा सामाजिक कुरीतियों और रुढ़िवाद का विरोध तथा विधवा विवाह का समर्थन किया, वह महाजनी शोषण के विरोधी रहे | हुकुम सिंह, राजेन्द्र सिंह देश-प्रेम के गीत सुनाये पंडित विनोद त्रिपाठी ने ज्ञानपीठ सन्देश “लोकतंत्र बचाना है, संविधान बचाना है” प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम में शामिल हो मुंशी प्रेमचंद के चित्र पर पुष्प अर्पित किया प्रमुख रहे राम दुलार यादव, डा0 देवकर्ण चौहान, ओम प्रकाश अरोड़ा, विजय मिश्र, एस0 एन0 जायसवाल, रामकरन जायसवाल, राजेंदर सिंह, मुनीव यादव, ब्रह्म प्रकाश, हुकुम सिंह, के0 के0 सिंह, अनिल मिश्र, सम्राट सिंह, चन्द्रबली मौर्य, अमृतलाल चौरसिया, जगन्नाथ प्रसाद, विक्रम सिंह, हरिकृष्ण, नागेन्द्र प्रसाद मौर्य, अमर बहादुर, पंडित विनोद त्रिपाठी आदि रहे।
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