मंगलवार, 6 दिसंबर 2022

भारतीय ज्ञान शोध संस्थान का दीक्षांत समारोह 2022 आयोजित

 गाजियाबाद। भारतीय ज्ञान शोध संस्थान का दीक्षांत समारोह 2022 आयोजित किया गया। इस समारोह में गत तीन वर्ष के त्रिस्तरीय प्रणव, प्रभाकर एवं प्रवीण कोर्स के लगभग 300 विद्यार्थियों को सर्टिफिकेट दिए गए।
समारोह में संस्थान के संस्थापक परमपूज्य प्रो. पवन सिन्हा ‘गुरुजी’ ने संबोधित करते हुए कहा कि तीन वर्ष में ज्योतिष सीखना संभव नहीं है इसका निरंतर अभ्यास करते रहिये, नोट्स पढ़ते रहिये। ज्ञान का आदि तो तो होता है पर अंत नहीं होता। ज्ञान का नवीनीकरण होता है यदि उसका नवीनीकरण नहीं होता तो ज्ञान मृत हो जाता है। आप इसकी वैज्ञानिकता का प्रसार कीजिये, वैज्ञानिकता से ही ज्योतिष और ज्योतिषी का सम्मान बढ़ता है, हमें और शोध करना चाहिए। ज्योतिषी भारतीय संस्कृति का रक्षक भी है।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि थे कर्नल (सेवा निवृत्त) टी.पी. त्यागी, जो स्वयं ज्योतिष के अच्छे जानकार एवं वास्तुविद हैं  उन्होंने इस अवसर पर अपने उद्बोधन में कहा कि ज्योतिष या अन्य भारतीय परंपरा कोई दकियानूसी बातों का पुलिंदा नहीं है यह विज्ञान पर आधारित भारतीय ज्ञान है। आप किसी भी ज्ञान को ऐसे न स्वीकारें, जो सच्चाई और तर्क पर खरा उतरे, उसी ज्ञान को आत्मसात करें। दुनिया में कोई चीज ऐसी नहीं है जो देश, काल, पात्र के अनुसार न बदलती हो,  ऐसे ही ज्योतिष के कुछ प्राचीन सिद्धांतों को आज के परिवेश के अनुसार बदलना बदलना चाहिए। 

तत्पश्चात संस्थान की डायरेक्टर डॉ. कविता अस्थाना ने सन्देश देते हुए कहा कि यह दीक्षांत है परन्तु यह रिश्ते का अंत नहीं है, यह रिश्ते का प्रारंभ है। आप सभी देश, धर्म, संस्कृति व समाज कल्याण के लिए हमारे साथ कदम बढ़ाइए। साथ ही उन्होंने विद्यार्थियों को ज्योतिष ज्ञान के माध्यम से सनातन संस्कृति का वाहक बनने की शुभकामनाएं दीं।

साथ ही आचार्यगण श्रीमती बरखा सिंघल, श्रीमती अलका शर्मा, श्रीमती ज्योति व्यास, श्रीमती स्नेहा अनेजा तथा पुरोहित श्री हरि शर्मा जी ने ज्योतिष के विद्यार्थियों को संबोधित किया। विद्यार्थियों के परंपरागत वेश को देखते बनता था तथा उनकी ख़ुशी भी देखने योग्य थी। विद्यार्थियों ने संस्थान में संचालित कोर्स के बारे में कहा कि यह बहुत वैज्ञानिक है, सरल है और जीवन में काम आने वाला है । उन्होंने कहा की इस इंस्टिट्यूट से सीखने के बाद हमारा आत्मबल, हमारा उत्साह दुगुना हो गया है और इस इंस्टिट्यूट के सिद्धांतों अनुसार जब हम जातकों से बात करते हैं तो उनका विश्वास हम में, हमारे ज्योतिष में बढ़ता है और हमें प्रतिष्ठा मिलती है। इस संस्थान के कोर्स कि जो विशेषता है वह है इसके आचार्यों द्वारा जिसमें पवन सिन्हा गुरूजी भी शामिल हैं, पढ़ाया जाने वाला पाठ्यक्रम व शिक्षण पद्धति।

प्रवीण 2018-19 में स्वर्ण पदक - जीतेन्द्र कौशिक, रजत पदक – अनुराधा वधावन, आरुशिका सिंह, दिशा गौर, गीतिका नौहार, हर्षा बैज़ल, शशांक अग्रवाल, शिखा सिंह एवं कांस्य पदक – आकांक्षा खन्ना, देवेंद्र खन्ना, ऋचा शर्मा, शुभिंदु सिंह, स्नेहा अनेजा, मनोरमा सिंह, शालिनी शील ने, वर्ष 2019-20 के प्रणव में स्वर्ण – मोनिका, रजत - अलका, कांस्य - अमित कुमार ने, प्रभाकर में स्वर्ण - शेखर लाम्बा, रजत – विजय गौड़, कांस्य – नमिता माल्यवर एवं प्रवीण में स्वर्ण -आरती वर्मा, रजत – हेमा त्यागी, कांस्य – रुमा अग्रवाल ने प्राप्त किया।

साथ ही वर्ष 2020-21 प्रणव में स्वर्ण - आशीष भल्ला, रजत – स्नेही सुहास खान्दरकर, कांस्य – विदुषा भोई एवं प्रभाकर में स्वर्ण – अलका, रजत - स्मिता शर्मा, कांस्य – नैना रस्तोगी, प्रसाद हिरदे, सुमिता देबनाथ तथा वर्ष 2021-22 प्रणव में स्वर्ण -शालिनी शुक्ला, भारती अनेजा, रजत – संजीना नरूला, भावना वाधवा, कांस्य – कल्पना निगम, अभिनव गुप्ता, प्रभाकर में स्वर्ण – रश्मि शर्मा, रजत – गीतू अरोड़ा, इंदु मारवाह, वंदना मिश्रा, कांस्य – चंद्रान्शु खुल्लर, स्नेहा अनेजा ने प्राप्त किया।


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