ग़ाज़ियाबाद । नेहरूनगर स्थित पं.दीनदयाल ऑटोडोरीयम में अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद का 2 दिवसीय क्षेत्रीय अधिवेशन रविवार को सम्पन्न हुआ।
दो दिनों तक चलने वाले इस आयोजन का उद्घाटन केंद्रीय क़ानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल के द्वारा किया गया।
इस अधिवेशन में राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा अनेक महत्वपूर्ण एवं उपयोगी जानकारियाँ अधिवक्ताओं के साथ साझा की गयी।
डिजिटल युग में न्याय प्रणाली-मिडिया ट्रायल और न्यायिक निष्पक्षता की चुनौतीयॉं विषय पर बोलते हुए टी वी टुडे ग्रुप के डिप्टी एडिटर संजय शर्मा ने कहा कि पत्रकारिता अपने चुनौति वाले दौर से गुजर रही है, जहॉं खबरों को जल्दी पहुँचाने की प्रतिस्पर्धा है वहॉं कई बार अपरिपक्वता भी सामने आती है,न्याय प्रणाली में मीडिया ट्रायल की अपनी प्रभावशीलता भूमिका है और इसको नज़रअंदाज़ करना अब सम्भव नहीं हैं लेकिन संतुलन बहुत आवश्यक है।
नये अपराधिक क़ानून और फ़ोरेंसिक साक्ष्य की अनिवार्यता पर बोलते हुये
राष्ट्रीय फ़ॉरेंसिंक विज्ञान विश्वविद्यालय, गांधी नगर गुजरात
से पधारे प्रोफेसर डॉ नवीन कुमार चौधरी ने बताया कि तकनीकी के बदलाव के कारण अपराध नये नये रूपों में हमारे सामने आ रहे हैं, जहॉं
फ़ॉरेंसिंक साक्ष्यों का महत्व दिन प्रतिदिन और बढ़ता जा रहा है। आज फ़ॉरेंसिंक साक्ष्य अपराध को डिकोड करने की अहम कड़ी बन गये हैं।
अधिवेशन में संघ और समन्वय/संगठन संस्कृति पर अपना विषय रखते हुये राष्ट्रिय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र प्रचारक महेन्द्र जी ने अधिवक्ताओं को जागृत
ज़िम्मेदार नागरिक बताया।संघ ने अपनी सौ वर्ष की यात्रा पूर्ण करके अब पंच परिवर्तन के द्वारा प्रत्येक नागरिक को जागरूक करने का बीड़ा उठाया है और जिसके बल पर देश को विश्वगुरु के सर्वोच्च स्थान पर स्थापित करने का बड़ा लक्ष्य लिया गया है,अधिवक्ता इसमें अपनी महती भूमिका निभायेंगे ऐसा उन्होंने विश्वास जताया।
संवैधानिक संस्थाओं का सुदृढ़ीकरण एवं विधिक नैतिकता जैसे विषय पर बोलते हुये पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति एस एन झा ने कहा कि आज देश में संवैधानिक संस्थाओं पर कई बार प्रश्न चिन्ह लगाने का प्रयास किया जाता है,यह जानते हुये भी कि इन संस्थाओं के बल पर ही देश की सारी व्यवस्थाएँ टिकी हैं। तो ऐसे में हमारा दायित्व और बढ़ जाता है कि हम न्याय को सबके लिये सुलभ और पारदर्शी बनायें।
उत्तराखंड बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्षा डॉ गीता खन्ना ने न्याय प्रक्रिया को तीव्र करने का आह्वान किया।
भारतीय न्याय व्यवस्था का भारतीयकरण विषय पर बोलते हुए अधिवक्ता परिषद की राष्ट्रीय उपाध्यक्षा श्रीमती सीमा सिंह ने कहा कि किसी भी देश की न्याय व्यवस्था मानवीयता के साथ साथ उस देश की सामाजिक रचना और परम्पराओं को ध्यान में रखते हुये ही बनाई जाती है, और तभी वह न्याय कहलाती है अन्यथा न्याय और अन्याय में अधिक अंतर नहीं रह जाता।
अधिवेशन के समापन सत्र को सम्बोधित करते हुये अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सत्यप्रकाश प्रकाश राय ने कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा का संचार करते हुये उन्हें समाज के सजग नेतृत्वकर्ता के रूप में कार्य करने का आह्वान किया।
ज्ञात रहे कि दो दिन चलने वाले इस आयोजन में उत्तर प्रदेश एवं उत्तराखंड के सभी जनपदों तथा तहसीलों तथा सभी उच्च न्यायालय से 1200 से अधिक अधिवक्ता उपस्थित रहे।
अधिवक्ता परिषद के क्षेत्रीय संयोजक विपिन त्यागी ने क्षेत्रीय अधिवेशन को इतना सफल बनाने के लिये सभी व्यवस्था के बंधुओं-बहनों एवं बड़ी संख्या में पधारे आगंतुक अधिवक्ताओं
का आभार व्यक्त किया।
अधिवेशन में सांस्कृतिक कार्यक्रमों एवं मिलन कार्यक्रम में अधिवक्ताओं द्वारा अनेक प्रस्तुतियों का मंचन किया गया जिसका सभी अधिवक्ताओं ने आनंद लिया गया।
इस अवसर पर प्रमुख रूप से उत्तराखंड अधिवक्ता परिषद के महामंत्री अनुज शर्मा, काशी प्रांत के महामंत्री नीरज सिंह,राष्ट्रीय मंत्री चरण सिंह त्यागी,अवध प्रांत की महामंत्री मीनाक्षी परिहार, ब्रज प्रांत के महामंत्री प्रमोद कुमार आदि अनेक गणमान्य आगंतुक उपस्थित रहे।






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