*🌟पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी का पावन सान्निध्य, उद्बोधन और आशीर्वाद*
*✨डिजिटल सुरक्षा को जनआंदोलन बनाने की दिशा में परमार्थ निकेतन का सशक्त कदम*
*💫साइबर फ्रॉड से बचाव, समाधान और सशक्तिकरण-एक ही मंच पर विशेषज्ञों का मार्गदर्शन*
*💫युवाओं को केवल स्मार्ट नहीं, जागरूक और जिम्मेदार डिजिटल नागरिक बनना होगा*
ऋषिकेश, 11 अप्रैल। आज के इस डिजिटल युग में, जहाँ तकनीक ने हमारे जीवन को सरल, सहज और सुविधाजनक बनाया है, वहीं दूसरी ओर साइबर अपराध के कारण समाज के समक्ष एक गंभीर चुनौती भी है। इंटरनेट, मोबाइल और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के बढ़ते उपयोग के साथ-साथ ठगी, डेटा चोरी, फिशिंग, ऑनलाइन धोखाधड़ी और पहचान की चोरी जैसे अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे समय में जागरूकता ही सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है।
इसी संदर्भ में परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश में “साइबर सुरक्षा एवं निःशुल्क विधिक सहायता दो दिवसीय शिविर” का आयोजन किया गया। यह शिविर तकनीकी जानकारी प्रदान करने के साथ ही एक सुरक्षित, सजग और सशक्त दिशा में आगे बढ़ाने का भी प्रयास है। आईपीएस अधिकारी श्री कुश मिश्रा, अपर पुलिस अधीक्षक (एएसपी), साइबर पुलिस, उत्तराखंड, श्रीमती भाग्यश्री, अन्वेषण अधिकारी एवं साइबर विशेषज्ञ, अधिवक्ता दीप्ति मिश्रा, प्रतिनिधि, 14 सी गृह मंत्रालय, अधिवक्ता आनंद मिश्रा आदि विभूतियों ने सभी को जागरूक किया। इस पावन अवसर पर पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी का पावन सान्निध्य व उद्बोधन प्राप्त हुआ।
इस तरह के शिविर समाज के हर वर्ग, युवा, नारी शक्ति, वरिष्ठ नागरिक सभी को सशक्त बनाने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
आईपीएस अधिकारी कुश मिश्रा ने इस शिविर में साइबर अपराधों के विभिन्न रूपों के बारे में विस्तार से जानकारी दी, जैसे फिशिंग कॉल, फर्जी लिंक, ओटीपी धोखाधड़ी, सोशल मीडिया आदि। साथ ही, यह भी बताया कि इनसे कैसे बचा जाए और यदि कोई व्यक्ति इनका शिकार हो जाए तो उसे क्या कानूनी कदम उठाने चाहिए।
पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि हमारे शास्त्रों में कहा गया है “सावधानी ही सुरक्षा है”। आज डिजिटल युग में हमें अपने “डिजिटल जीवन” की रक्षा के लिए सजग रहना आवश्यक है। साइबर सुरक्षा केवल तकनीक का विषय नहीं, बल्कि यह हमारे विवेक और जागरूकता का भी प्रश्न है।
पूज्य स्वामी जी ने कहा कि जब तक समाज जागरूक नहीं होगा, तब तक सुरक्षा संभव नहीं है। आज का विज्ञान हमें सुविधा देता है, परंतु विवेक हमें सुरक्षा देता है। यदि विज्ञान के साथ चेतना और नैतिकता का समन्वय हो जाए, तो समाज एक नई ऊँचाई प्राप्त कर सकता है। यह शिविर उसी समन्वय का एक प्रयास है, जहाँ विज्ञान, विधि और आध्यात्म का संगम हो रहा है।
पूज्य स्वामी जी ने कहा कि डिजिटल युग को जब हम सब मिलकर “डिवाइन युग” की ओर ले जाएंगे, तो निश्चित रूप से साइबर अपराधों पर अंकुश लगाया जा सकता है। जब तकनीक के साथ नैतिकता, संस्कार और जागरूकता जुड़ती है, तब सुरक्षा स्वाभाविक बन जाती है। हमें केवल स्मार्ट नहीं, बल्कि जागरूक और जिम्मेदार डिजिटल नागरिक बनना होगा। सत्य, सतर्कता और संयम के सिद्धांतों को अपनाकर हम अपने डेटा, परिवार और समाज की रक्षा कर सकते हैं। आइए, विज्ञान को आध्यात्म से जोड़कर एक सुरक्षित, सशक्त और जागरूक समाज का निर्माण करें।
आज का कार्यक्रम मुख्य रूप से दो पहलुओं के साथ आयोजित किया गया। कार्यक्रम के प्रथम सत्र में प्रतिनिधियों द्वारा साइबर से संबंधित विभिन्न प्रकार के साइबर अपराध की जानकारी दी गई, जिसमें मुख्य रूप से डिजिटल अरेस्ट, इन्वेस्टमेंट फ्रॉड जैसे कई प्रकार के अपराधों पर विस्तार से चर्चा की तथा बताया कि ओटीपी जैसी आपकी निजी जानकारी की सुरक्षा अत्यंत आवश्यक है। अधिवक्ता आनंद मिश्रा जी ने इस कार्यक्रम का संचालन किया।
इस अवसर पर योगाचार्य विमल बधावन, रेखा मशरूवाला, आचार्य दीपक शर्मा, अजंना शर्मा, परमार्थ विद्या मन्दिर, परमार्थ नारी शक्ति केन्द्र, परमार्थ गुरुकुल, परमार्थ निकेतन के ऋषिकुमार, विद्यार्थियों व परिवार जनों की सहभागिता रही।
सभी आमंत्रित हैं आइए, जागरूक बनें, सुरक्षित रहें और एक सशक्त समाज का निर्माण करें।





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