शनिवार, 31 जनवरी 2026

भक्ति, शक्ति और शरणागति का दिव्य अनुष्ठान—कविनगर के रामलीला मैदान में गूँजी रावण-मर्दन और लंका विजय की शाश्वत विजयगाथा


 

मुकेश गुप्ता

गाजियाबाद । मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम की पावन लीलाओं के माध्यम से जन-मानस में धर्म, संस्कार और सदाचार का बीजारोपण कर रहे ‘मंगलमय परिवार’ द्वारा आयोजित अष्ट दिवसीय श्रीराम कथा के सप्तम सोपान पर आज श्रद्धा का अभूतपूर्व ज्वार उमड़ पड़ा। कविनगर स्थित रामलीला मैदान में पूज्य संत श्री विजय कौशल जी महाराज की ओजस्वी और रससिक्त वाणी से जब ‘सीता खोज’ से लेकर ‘लंका विजय’ तक के प्रसंगों का प्रवाह आरंभ हुआ, तो उपस्थित जनसमूह भाव-विभोर होकर मानो त्रेतायुग की दिव्यता का साक्षी बन गया। महाराजश्री ने अपनी विशिष्ट व्याख्या-शैली से प्राचीन प्रसंगों को समकालीन जीवन-मूल्यों से जोड़ते हुए अध्यात्म की नव्य चेतना का संचार किया।


*हनुमान का चरित्र: संकल्प और सिद्धि का शिखर*

कथा के प्रथम चरण में महाराजश्री ने हनुमान जी के समुद्र-लंघन की दार्शनिक विवेचना करते हुए कहा कि वे केवल पराक्रम के प्रतीक नहीं, अपितु सेवा, सुमिरन और सामर्थ्य के सजीव आदर्श हैं। अशोक वाटिका में शोक-संतप्त माता जानकी को प्रभु की मुद्रिका सौंपने का प्रसंग जीव और ब्रह्म के मध्य अटूट विश्वास का सेतु है। उन्होंने रेखांकित किया कि हनुमान जी की विनयशीलता उनके बल से भी अधिक विराट है—जिसने लंका के स्वर्णिम अहंकार को भस्म कर दिया।

*धर्म-युद्ध और अधर्म का उन्मूलन: लंका विजय*

आगे सेतु-निर्माण, विभीषण की शरणागति और रावण-वध के प्रसंगों का सशक्त वर्णन करते हुए महाराजश्री ने स्पष्ट किया कि यह विजय केवल युद्ध का परिणाम नहीं, बल्कि काम, क्रोध और लोभ जैसी आसुरी प्रवृत्तियों पर सात्विकता की निर्णायक जीत है। विभीषण के माध्यम से यह संदेश उभरा कि जब व्यक्ति कुल, स्वार्थ और भय से ऊपर उठकर धर्म का आलिंगन करता है, तब स्वयं ईश्वर उसका पथ प्रशस्त करते हैं। लंका विजय के क्षणों में समूचा पंडाल ‘राजाराजेश्वर राम’ के जयघोष से गुंजायमान हो उठा।

महाराजश्री का आध्यात्मिक पाथेय

महाराजश्री ने कहा कि रामकथा केवल श्रवण का विषय नहीं, आचरण की जीवन-संहिता है। हनुमान जैसी भक्ति, लक्ष्मण जैसा अनुशासन और राम जैसा मर्यादित आचरण अपनाकर ही भीतर के रावण—अहंकार—का वध संभव है। शुद्ध संकल्प और सात्विक वृत्तियाँ हों, तो कोई नकारात्मक शक्ति पराजित नहीं कर सकती।”

पूर्णाहुति एवं राज्याभिषेक

आयोजकों ने अवगत कराया कि कल इस ज्ञान-यज्ञ का अंतिम एवं सर्वाधिक प्रतीक्षित दिवस है, जिसमें प्रभु श्रीराम के भव्य राज्याभिषेक का अलौकिक प्रसंग प्रस्तुत किया जाएगा। व्यापक सहभागिता को देखते हुए कथा अपने निर्धारित समय से एक घंटा पूर्व, अपराह्न 3:00 बजे से आरंभ होगी। आज की कथा का विश्राम महाआरती और सामूहिक संकल्प के साथ हुआ, जिसमें नगर के गणमान्य नागरिकों सहित सहस्रों राम-भक्तों ने सहभागिता की।

नारी सशक्तिकरण का सशक्त उदाहरण बनेगा केंद्रीय बजट : मयंक गोयल





                          मुकेश गुप्ता

गाजियाबाद। भारतीय जनता पार्टी महानगर अध्यक्ष मयंक गोयल ने जानकारी देते हुए बताया कि कल 1 फरवरी को प्रातः 11 बजे भारत की माननीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा संसद में प्रस्तुत किया जाने वाला केंद्रीय बजट नारी सशक्तिकरण का एक सशक्त उदाहरण होगा।

मयंक गोयल ने कहा कि लगातार दूसरी बार देश की महिला वित्त मंत्री द्वारा केंद्रीय बजट प्रस्तुत किया जाना न केवल भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं को मजबूती देता है, बल्कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महिलाओं को निर्णायक भूमिकाओं में आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है।

उन्होंने बताया कि इस अवसर पर भाजपा महानगर कार्यालय, नेहरू नगर, गाजियाबाद में पार्टी के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता सामूहिक रूप से बजट का लाइव प्रसारण सुनेंगे। यह कार्यक्रम संगठनात्मक सहभागिता और जनहित से जुड़े विषयों को समझने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

मयंक गोयल ने आगे कहा कि.यह बजट विकसित भारत की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। इसमें गरीब, किसान, मध्यम वर्ग, युवा, महिला एवं उद्यमियों के लिए ठोस और दूरदर्शी प्रावधान होने की पूरी उम्मीद है। भाजपा का प्रत्येक कार्यकर्ता बजट के माध्यम से देश की प्रगति को और गति देने के संकल्प के साथ जुड़ा हुआ है।”

उन्होंने सभी कार्यकर्ताओं से समय पर कार्यालय पहुंचकर कार्यक्रम में सहभागिता करने का आह्वान किया।



यशोदा मेडिसिटी की नई पहल एक ऐसा मैच जो जान बचाता है,स्टेम सेल डोनेशन को लेकर जागरूकता बढ़ाने की दिशा में कदम

                         मुकेश गुप्ता

एक आसान बकल स्वाब टेस्ट की जीवन बचाने वाली क्षमता और भारत में स्टेम सेल डोनर रजिस्ट्री बढ़ाने की जरूरत पर केंद्रित पहल

गाजियाबाद, 31 जनवरी 2026। दिल्ली-एनसीआर के प्रमुख अस्पतालों में से एक, यशोदा मेडिसिटी ने AMatchThatSavesLives नामक जन-जागरूकता अभियान का आयोजन किया। इस अभियान का उद्देश्य लोगों को स्टेम सेल डोनेशन के महत्व और जीवन बचाने में बकल स्वाब टेस्ट की भूमिका के बारे में जागरूक करना था। DATRI स्टेम सेल डोनेशन रजिस्ट्री और जेनोवा बायोफार्मास्युटिकल्स लिमिटेड के साथ मिलकर आयोजित इस अभियान में आसपास की आवासीय सोसायटियों से बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया। यह सहभागिता न केवल स्टेम सेल डोनेशन को लेकर बढ़ती जन-जागरूकता को दर्शाती है, बल्कि भारत में स्टेम सेल डोनर रजिस्ट्री के विस्तार की आवश्यकता को भी रेखांकित करती है।


इस कार्यक्रम में  अभिनव गोपाल, आईएएस, मुख्य विकास अधिकारी, गाज़ियाबाद, मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

आज के चिकित्सकीय परिदृश्य में इस तरह की पहल की आवश्यकता और भी स्पष्ट हो जाती है। ल्यूकेमिया, लिम्फोमा, थैलेसीमिया और अन्य गंभीर रक्त विकारों से जूझ रहे कई मरीजों के लिए बोन मैरो ट्रांसप्लांट ही एकमात्र उपचारात्मक विकल्प होता है। हालांकि, 70 प्रतिशत से अधिक मरीजों को अपने परिवार के भीतर उपयुक्त डोनर नहीं मिल पाता। इसके अलावा, असंबंधित डोनर से मेल मिलने की संभावना भी अत्यंत कम, लगभग 10,000 में एक, होती है, क्योंकि इसके लिए ह्यूमन ल्यूकोसाइट एंटीजन (HLA) का अत्यधिक सटीक मेल आवश्यक होता है। ऐसे में मरीजों और संभावित डोनर्स के बीच की दूरी अब भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

इन्हीं आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए, इस अभियान के माध्यम से लोगों को यह जानकारी दी गई कि जीवन बचाने की दिशा में पहला कदम एक साधारण बकल स्वाब टेस्ट हो सकता है। यह प्रक्रिया पूरी तरह सुरक्षित, त्वरित और बिना किसी दर्द के होती है। अभियान के दौरान स्टेम सेल डोनेशन को लेकर फैली आम गलतफहमियों को दूर करने और लोगों को सही जानकारी के साथ आगे आने के लिए प्रेरित करने पर विशेष ध्यान दिया गया।

इस पहल का मुख्य उद्देश्य जागरूकता को सार्थक भागीदारी में बदलना रहा। इसके तहत यशोदा मेडिसिटी, इंदिरापुरम और यशोदा सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, कौशांबी में विशेष जागरूकता एवं पंजीकरण बूथ लगाए गए। यहां लोगों ने स्टेम सेल डोनर के रूप में पंजीकरण कराया, बकल स्वाब सैंपल दिए और विशेषज्ञ चिकित्सकों से बातचीत कर यह समझा कि एक छोटा-सा, सोच-समझकर लिया गया निर्णय भविष्य में किसी मरीज के लिए जीवनरक्षक साबित हो सकता है।

इन प्रयासों को और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से अभियान के दौरान स्वास्थ्य वार्ताओं और पैनल चर्चाओं का आयोजन किया गया। इनमें थैलेसीमिक्स इंडिया एवं थैलेसीमिया इंटरनेशनल फेडरेशन की सचिव सुश्री शोभा तुली, DATRI की नॉर्थ इंडिया हेड सुश्री बिंदिया साहनी सहित स्वास्थ्य एवं सार्वजनिक जागरूकता क्षेत्र के अन्य प्रमुख विशेषज्ञों ने सहभागिता की। वक्ताओं ने भारत में स्टेम सेल डोनर इकोसिस्टम को सुदृढ़ करने, समय पर उपयुक्त डोनर मिलने से मरीजों के उपचार परिणामों में होने वाले सकारात्मक बदलाव, तथा दीर्घकालिक जन-जागरूकता की अहम भूमिका पर अपने महत्वपूर्ण विचार साझा किए।

अभियान के मानवीय पक्ष को सामने लाने के लिए #BMTKiKahaniSurvivorKiZubani के तहत मरीजों और सर्वाइवर्स की वास्तविक कहानियां भी साझा की गईं, जिन्होंने यह स्पष्ट किया कि स्टेम सेल डोनेशन किस तरह जीवन बदल देने वाला प्रभाव डाल सकता है।


डॉ. पी. एन. अरोड़ा, चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर, यशोदा ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स ने कहा कि“स्टेम सेल डोनेशन के प्रति जागरूकता फैलाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। यह अभियान चिकित्सा उत्कृष्टता के साथ-साथ जनस्वास्थ्य के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है।”

डॉ. उपासना अरोड़ा,  मैनेजिंग डायरेक्टर, यशोदा ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स ने कहा, कि “‘A Match That Saves Lives’ के माध्यम से हमारा प्रयास स्टेम सेल डोनेशन की जीवनरक्षक क्षमता के प्रति जागरूकता बढ़ाने और डोनर रजिस्ट्रेशन को सरल व सुलभ बनाने का रहा है। यशोदा मेडिसिटी में हमारी उन्नत बोन मैरो ट्रांसप्लांट सुविधाएं मरीजों को उपचार के हर चरण में सहयोग प्रदान करती हैं, वहीं यह अभियान जरूरतमंद मरीजों तक समय पर उम्मीद पहुंचाने वाले एक मजबूत डोनर नेटवर्क के निर्माण में भी सहायक सिद्ध हुआ है।”

डॉ. निवेदिता ढींगरा, डायरेक्टर एवं हेड,हेमेटोलॉजी, हेमेटो-ऑन्कोलॉजी एवं बोन मैरो ट्रांसप्लांट,ने कहा कि  “हर नया पंजीकृत डोनर मरीजों को एक उपयुक्त मैच के और करीब ले जाता है, जो उपचार की सफलता के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। ‘A Match That Saves Lives’ जैसे अभियान स्टेम सेल डोनेशन को लोगों के लिए सरल बनाते हैं, प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट जानकारी देते हैं और जागरूकता को ऐसे ठोस कदमों में बदलते हैं, जो वास्तव में जीवन बचा सकते हैं।”

‘A Match That Saves Lives’ अभियान जनस्वास्थ्य के प्रति यशोदा मेडिसिटी की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है और यह स्पष्ट करता है कि मरीज-केंद्रित देखभाल अस्पताल की चारदीवारी से आगे बढ़कर समाज तक भी प्रभावी रूप से पहुंच सकती है।

अपर मुख्य सचिव,अमृत अभिजात ने बायोडायवर्सिटी पार्क के कार्य सहित ITMS तथा तैयार हुए विजयनगर कार्यालय का लिया जायजा

 



                          मुकेश गुप्ता

इंटीग्रेटेड कंट्रोल एंड कमांड सेंटर में एक ही कार्यालय में 311, IGRS,कंट्रोल रूम,VTMS, तथा ITMS शहर की सुविधाओं को बना रहा है सरल--अमृत अभिजात

बायोडायवर्सिटी पार्क एनसीआर का भव्य, आकर्षक और सुविधाजनक पर्यटन स्थल के रूप में हो तैयार अपर मुख्य सचिव ने नगर आयुक्त व टीम को दिए निर्देश

आर्मी ग्राउंड विजय नगर में 6 महीने पहले लगाए गए पौधों को वृक्ष बनते देख, अपर मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश द्वारा प्रसन्नता जाहिर करते हुए नगर आयुक्त और टीम का किया गया उत्साहवर्धन


गाजियाबाद । नगर निगम मुख्यालय में बनी आई ट्रिपल सी बिल्डिंग अपर मुख्य सचिव,  अमृत अभिजात, पर्यटन संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य विभाग द्वारा निरीक्षण किया गया मौके पर महापौर सुनीता दयाल, जिलाधिकारी रविंद्र कुमार माँदंड, गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष नंदकिशोर कलाल, नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक,मुख्य विकास अधिकारी अभिनव गोपाल, एडिशनल सीपी आलोक प्रियदर्शी भी उपस्थित रहे, उपस्थित अधिकारियों द्वारा इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम के माध्यम से चल रहे ट्रायल के कार्य को देखा गया, अपर मुख्य सचिव तथा महापौर द्वारा ट्रायल के क्रम में हापुर चुंगी रेड लाइट पर बिना हेलमेट के चल रहे स्कूटी सवार का चालान काटा गयाl नगर आयुक्त द्वारा ITMS प्रोजेक्ट के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए कैमरा इंटीग्रेटेड के बारे में बताया गया, ट्रैफिक व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के साथ-साथ निगम के कार्यों पर भी मॉनिटरिंग रखी जा रही है बताया गयाl 


अपर मुख्य सचिव, श्री अमृत अभिजात, पर्यटन संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य विभाग उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा बताया गया कि गाजियाबाद नगर निगम द्वारा इंटीग्रेटेड कंट्रोल एंड कमांड सेंटर के अंतर्गत 311 एप्लीकेशन, IGRS, कंट्रोल रूम तथा व्हीकल ट्रैकिंग मॉनिटरिंग सिस्टम का सफलतापूर्वक क्रियान्वयन किया जा रहा है, इसके अलावा इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम के माध्यम से सुविधा ट्रैफिक व्यवस्था में रहेगी तथा शहर वासियों को जाम से भी मुक्ति मिलेगी यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों पर भी मॉनिटरिंग सरल होगी ट्रायल के रूप में विभागों के चल रहे कार्यों के क्रम में चालान काटने की शुरुआत की गई है, एक ही बिल्डिंग में जन समस्याओं के समाधान के लिए चल रहे कार्य प्रसंसनीय हैं नगर निगम टीम का उत्साहवर्धन किया गया।


नगर आयुक्त तथा निगम अधिकारियों द्वारा निगम के चल रहे प्रोजेक्ट बायोडायवर्सिटी पार्क का भी स्थलीय निरीक्षण कराया गया, बायोडायवर्सिटी पार्क एनसीआर का सबसे भव्य और आकर्षक होने के साथ-साथ सुविधाजनक भी बनाया जाए अपर मुख्य सचिव द्वारा निर्देश दिए गए, बायोडायवर्सिटी एक्सपर्ट के माध्यम से उक्त पार्क की प्लानिंग को कराया जाए निर्देशित किया गया, समय सीमा के अंतर्गत ही कार्य पूर्ण हो निर्देश दिए गए पर्यटकों के लिए गाजियाबाद का बायोडायवर्सिटी पार्क बहुत ही अद्भुत और सुविधाजनक हो प्लानिंग करने के लिए कहा गया।


विजयनगर जोन अंतर्गत बने जोनल कार्यालय का भी जायजा लिया गया बिल्डिंग का निर्माण पूरा हो चुका है उद्घाटन से पूर्व इलेक्ट्रिक तथा इंटरनेट की वर्किंग का पर्यवेक्षण करने के लिए निर्देश दिए गए, अग्नि समन संयंत्र के अधिष्ठापन के लिए भी कहा गया।


अपर मुख्य सचिव द्वारा विजयनगर अंतर्गत आर्मी लैंड पर 6 महीने पूर्व पौधारोपण किया था जिसमें 18000 स्क्वायर मीटर लैंड पर 55000 पौधे लगाए गए थे जो अब 6 फीट से ऊंचे हो गए हैं, पौधों को वृक्ष बनते देखा अपर मुख्य सचिव द्वारा नगर निगम उद्यान विभाग की प्रशंसा की तथा मौके पर उपस्थित नगर आयुक्त द्वारा बताया गया कि कूड़े को हटाकर मियांवकी पद्धति से पौधारोपण किया गया है, लगभग 50 से अधिक प्रजातियों के फलदार और फूलों के पौधे लगाए गए थे जो कि अब बड़े हो रहे हैं ।

सिंदूर,पीपल,नीम,जामुन,कदम ,पिलखन,अशोक,अर्जुन, कॉनोकार्पस,चक्रेसिया ,आम गुलमोहर,बेल पत्थर,बॉटल ब्रश अमरूद के पौधे लगाए गए थे जो कि अब वृक्ष बन रहे हैंl इसी प्रकार शहर में आने को स्थान पर प्लांटेशन किया गया था जो कि अब वृक्ष का रूप ले रहे हैं वर्तमान में ऑक्सीजन का हब बन रहा है आगे भी रिक्त भूमि पर पौधारोपण करने की योजना बनी हुई है, अपर नगर आयुक्त अवनींद्र कुमार, अपर नगर आयुक्त जंग बहादुर यादव, मुख्य अभियंता निर्माण नरेंद्र कुमार चौधरी, नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉक्टर मिथिलेश, महाप्रबंधक जल कामाख्या प्रसाद आनंद, प्रभारी संपत्ति पल्लवी सिंह, प्रकाश प्रभारी आश कुमार भी मौके पर उपस्थित रहे।

परमवीर चक्र से अलंकृत अमर शहीद मेजर सोमनाथ शर्मा जयंती पर परमार्थ निकेतन मे भावभीनी श्रद्धाजंलि अर्पित की


                           मुकेश गुप्ता

ऋषिकेश, 31 जनवरी। माँ भारती के वीर सपूत, अदम्य साहस, अद्वितीय शौर्य और सर्वाेच्च राष्ट्रभक्ति के प्रतीक, परमवीर चक्र से अलंकृत अमर शहीद मेजर सोमनाथ शर्मा जी की जयंती पर परमार्थ निकेतन से भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उनका जीवन केवल एक सैनिक की कहानी नहीं, बल्कि कर्तव्य, त्याग, समर्पण और राष्ट्रप्रेम का वह दिव्य आदर्श है, जिसने भारतीय सैन्य इतिहास में स्वर्णिम अध्याय अंकित किया।

मेजर सोमनाथ शर्मा सन 1947-48 के भारत-पाक युद्ध के दौरान कश्मीर की धरती पर जब शत्रु सेना ने आक्रमण किया, तब मेजर सोमनाथ शर्मा जी ने अद्वितीय वीरता का परिचय दिया। श्रीनगर एयरफील्ड की सुरक्षा का दायित्व उनके कंधों पर था। विषम परिस्थितियों, सीमित संसाधनों और भारी शत्रु बल के बावजूद उन्होंने पीछे हटना स्वीकार नहीं किया। घायल होने के बाद भी वे अपने साथियों का उत्साह बढ़ाते रहे और अंतिम सांस तक मोर्चे पर डटे रहे। उनका वह अमर वाक्य “मैं एक इंच भी पीछे नहीं हटूँगा” आज भी हर सैनिक के हृदय में अग्निशिखा की तरह प्रज्वलित है।

उनकी वीरता और नेतृत्व क्षमता तथा भारतीय सेना अद्वितिय साहस से विजय प्राप्त की। उनका बलिदान केवल एक युद्ध की जीत नहीं, बल्कि भारत की अखंडता और संप्रभुता की रक्षा का निर्णायक क्षण था।

स्वामी जी ने कहा कि स्वतंत्रता हमें यूँ ही नहीं मिली है। यह आज़ादी असंख्य वीरों के रक्त, तप, त्याग और बलिदान से सिंचित हुई है। भारत की मिट्टी का कण-कण शहीदों की शौर्यगाथा सुनाता है, हर तिरंगा हमें उन अमर बलिदानों की याद दिलाता है जिन्होंने हँसते-हँसते अपने प्राण मातृभूमि पर न्योछावर कर दिए। यदि हम आज निर्भय होकर सांस ले पा रहे हैं, अपने सपनों को जी पा रहे हैं, तो उसके पीछे किसी सैनिक की जागती हुई रातें, किसी माँ की भीगी हुई आँखें और किसी परिवार का अधूरा जीवन छिपा है।

उन्होंने दृढ़ स्वर में कहा कि भारतीय सेना वेतन के लिये नहीं वतन के लिये जीती है। जब सीमा पर गोलियाँ चलती हैं, तब सैनिक लाभ-हानि नहीं सोचते केवल तिरंगे की आन-बान-शान की रक्षा करता है। हिमालय की बर्फ हो या रेगिस्तान की तपती रेत, हमारे जवान हर परिस्थिति में अडिग खड़े रहते हैं।

आज की परमार्थ गंगा आरती सेना के वीर जवानों को समर्पित की।

शुक्रवार, 30 जनवरी 2026

कविनगर रामलीला मैदान में आयोजित भव्य श्रीरामकथा का षष्ठम दिवस , हमें अपने पुराने कर्मो का फल अवश्य भोगना पड़ता है, राजा दशरथ भी इससे नहीं बच सके-- विजय कौशल

 





                         मुकेश गुप्ता

भरत का चरित्र नि:स्वार्थ प्रेम, कर्तव्य परायणता और आदर्श भातृ प्रेम का प्रतीक: विजय कौशल जी महाराज जी महाराज

- कथा व्यास ने छठे दिन की रामकथा में दशरथ मृत्यु व चित्रकूट में राम-भरत मिलाप का सुंदर वर्णन किया 

गाजियाबाद। कविनगर स्थित रामलीला मैदान में मंगलमय परिवार द्वारा आयोजित भव्य श्रीरामकथा के षष्ठम दिवस शुक्रवार को जब कथा व्यास पूज्य संत विजय कौशल जी महाराज की दशरत मृत्यु व भरत मिलाप का संजीव वर्णन किया तो वहां मौजूद श्रद्धालुओं को आंखें रामभक्ति में भावुकता के कारण नम हो गयीं। 

कथा व्यास विजय कौशल महाराज ने अपन श्रीमुख से रामकथा के छठे दिन अयोध्या के राजा दशरथ के राम के वन जाने के पश्चात उनके वियोग में मृत्यु के वरण करने और चित्रकूट जाकर भरत को अपने अग्रज भ्राता राम के साथ हुए मिलाप के भावपूर्ण प्रसंग का बहुत ही सुंदर वर्णन किया। दशरथ का विलाप और भरत-राम मिलन के दृश्य ने कथास्थल को भावुक कर दिया। महाराज ने भरत के प्रेम और त्याग की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि भरत का चरित्र नि:स्वार्थ प्रेम, कर्तव्य परायणता और आदर्श भातृ प्रेम का प्रतीक है। आज के समय में ऐसे भाव वाले भाई का मिलना असंभव है। 

विजय कौशल जी महाराज ने हमें अपने पुराने कर्मो का फल अवश्य ही भोगना पड़ता है। राजा दशरथ भी इससे नहीं बच सके थे। रामकथा में राजा दशरथ की मृत्यु राम के वनवास के दुख में हुई, जो श्रवण कुमार के माता-पिता के श्राप का परिणाम था। भरत एक आदर्श भाई थे। उन्होंने अपनी माता कैकेयी की उन्हें राजा बनाने की योजना को अस्वीकार करके वे अपने बड़े भाई राम को वापस लाने के लिए चित्रकूट गये। लेकिन श्रीराम द्वारा उनकी वापस अयोध्या लौटने की विनती अस्वीकर कर दिया, क्यों राम ने अपने पिता का वचन निभाना था। जब राम ने अयोध्या लौटने में असमर्थता जतायी तो भरत उनकी पादुकाएं लेकर आये और उन्हें सिंहासन पर रखकर 14 वर्षो तक स्वयं भी तपस्वी का जीवन बिताया। 


विजय कौशल जी महाराज ने कहा कि राजा दशरथ से जाने-अनजाने में श्रवण कुमार का वध हो गया था और श्रवण के अंधे माता-पिता ने स्वयं तो प्राण त्याग ही दिये थे। उन्होंने राजा दशरथ को भी पुत्र वियोग में प्राण त्यागने का श्राप दिया था। 

उन्होंन कहा कि राम अपने वचनों के पक्के थे। पिता दशरथ की आज्ञा से ही राम वन गये और इसके पीछे राजा दशरथ का कैकेयी के दिये गये वचनों को पूरा करना था। श्राप के चलते ही पुत्र मोह में राजा दशरथ ने छठवें दिन रघुकुल शिरोमणि राम का नाम लेते हुए प्राण त्याग थे। 

कथा का वृतांत सुनाते हुए पूज्य संत ने आगे बताया कि राजा दशरथ कैकयी के कर रह जाते हैं और श्री राम को वनवास के बाद भरत ने 14 साल तक नदी ग्राम से राजपाठ संभाला था। महाराज श्री ने कहा कि हमें अपने कर्तव्य के पथ से कभी पीछे नहीं हठना चाहिए। यह हम भरत के चरित्र से सीख लेते हैं। 

पूज्य श्री विजय कौशल जी महाराज के पावन श्रीमुख से प्रवाहित रामकथा के षष्ठम दिवस में भरत के निस्वार्थ प्रेम, कर्तव्यपरायणता और आदर्श भातृ प्रेम को बहुत ही सुंदर ढंग से वर्णन किया। शनिवार को कथा का सातवां व अंतिम दिन है। मंगलयम परिवार ने सभी भक्तों से अंंतिम दिन कथा सुनने आने का आग्रह किया है, ताकि वे इस भव्य रामकथा का लाभ उठा सकें। कथा के विधायक नंद किशोर गुर्जर, उधोगपति संजीव गुप्ता ,भाजपा नेता भानू शिशोदिया आदि को महाराज जी द्वारा सम्मानित किया गया।


सुभास पार्टी ने कार्यालय पर राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी की 79वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धा सुमन अर्पित किए

 

                         मुकेश गुप्ता

 गाजियाबाद । 30 जनवरी 2026 दिन शुक्रवार को सुभाषवादी भारतीय समाजवादी पार्टी (सुभास पार्टी) ने जगदीश नगर स्थित कार्यालय पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी को 79 वीं पुण्यतिथि पर याद किया और श्रद्धा सुमन अर्पित किए। 

 ज्ञात रहे कि 30 जनवरी 1948 को आजादी में अपना कोई योगदान ना देने वाले संगठन के नेताओं ने नाथूराम गोडसे के द्वारा राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की हत्या करवा दी थी। राष्ट्रपिता को श्रद्धांजलि देते हुए सुभाषवादी भारतीय समाजवादी पार्टी के संयोजक व संस्थापक सतेन्द्र यादव ने महात्मा गांधी जी के चित्र पर पुष्प अर्पित करते हुए कहा महात्मा गांधी जी के प्रयोग और विचारों द्वारा ही हम शक्तिशाली भारत बना सकते हैं वर्तमान परिस्थितियों में उनके विचार और ज्यादा प्रासंगिक हो जाते हैं जिस प्रकार वे ग्राम स्वराज की बात करते थे कोरोना जैसी विश्वव्यापी महामारी ने उन्हें सिद्ध कर दिया कि देश दुनिया का उद्धार गांधीजी के ग्राम स्वराज द्वारा ही संभव है। राष्ट्रपिता गांधी जी को अपनी श्रद्धांजलि देते हुए प्रदेश प्रवक्ता विनोद सिंह अकेला ने कहा कुछ वे लोग जिनका आजादी की लड़ाई में कोई योगदान नहीं था, आज सत्ता में बैठे हैं राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और नेताजी सुभाष चंद्र बोस अन्य क्रांतिकारियों के बीच विभेद पैदा करने में लगे हैं जबकि महात्मा गांधी को राष्ट्रपिता की पदवी नेताजी सुभाष चंद्र बोस जी ने ही दी थी और शहीद राम प्रसाद बिस्मिल जी ने भी फांसी चढ़ते हुए यही कहा था कि देश के युवाओं को महात्मा गांधी के साथ मिलकर कार्य करना चाहिए। श्रद्धांजलि देते हुए पूर्व सांसद प्रत्याशी धीरेंद्र सिंह भदौरिया ने कहा गाँधी जी का देश की आजादी में अमूल्य योगदान है, जिसका देश कभी मूल्य चुका नहीं सकता। श्रद्धांजलि देते हुए अनिल सिन्हा(प्रभारी उत्तरप्रदेश, बिहार) ने कहा कि गाँधी जी ने देश की आजादी में विदेशी सामानों का बहिष्कार किया और देश की जनता से कहा कि सभी स्वदेशी सामान का उपयोग करें जनता ने उनका साथ दिया और अंग्रेजों को बहुत बड़ी धन की हानि हुई। अगर आज भी गांधी जी कि इस नीति पर चला जाए तो देश का भविष्य बहुत उज्जवल होगा। 

  श्रद्धांजलि देने वालों में मुख्य रूप से अनिल सिन्हा (प्रभारी बिहार प्रदेश),विनोद कुमार अकेला, तेजेन्द्र कुमार वर्मा, अनुपम अग्रवाल,  सत्येंद्र यादव,  धीरेन्द्र सिंह भदौरिया, राजेन्द्र यादव, नसरुद्दीन मलिक,  जगदीश राय,  दीपक वर्मा,  विकास कुमार, दीपक पाल,  रिंकू कुमार,  विवेक राणा,  आबिद, इर्शाद,  हरीश शर्मा,  रोहित कुमार आदि उपस्थित रहे।

मंडल स्तरीय विजेता श्री ठाकुर द्वारा बालिका विद्यालय की छात्रा “उर्वशी महेदिया “ ने किया जिला गाज़ियाबाद का नाम रोशन

 

                          मुकेश गुप्ता

गाजियाबाद । उत्तर प्रदेश एवं जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वाधान संस्कृति उत्सव-2026 प्रतियोगिता का आयोजन किया गया । इसमें संगीत की विभिन्न विधाओं का , विभिन्न स्तरों पर आयोजन किया गया। बहुत हर्ष का विषय है कि श्री ठाकुर द्वारा बालिका विद्यालय की छात्रा उर्वशी महेदिया  ने शास्त्रीय (कत्थक) नृत्य में मंडल स्तर पर विजेता बन विद्यालय का एवं जिला ग़ाज़ियाबाद का नाम रोशन किया ।

“उत्तर प्रदेश पर्व-हमारी संस्कृति हमारी पह्चान “ के अंतर्गत इसका पहला चरण- तहसील स्तरीय प्रतियोगिता , ग़ाज़ियाबाद ,कविनगर रामलीला ग्राउंड जानकी सभागार में तथा दूसरा चरण- जनपद स्तरीय प्रतियोगिता, लोहिया नगर स्थित हिन्दी भवन में आयोजित किया गया । दोनों ही स्तरों में विद्यालय की छात्रा उर्वशी महेदिया विजयी रही और फिर अगले चरण -मंडल स्तरीय प्रतियोगिता के लिए भातखंडे संस्कृति विश्विद्यालय, लखनऊ में प्रतिभाग किया । वहाँ अपनी शानदार कत्थक नृत्य प्रस्तुति कर ,सभी प्रतिभागियों को पछाड़ते हुए उर्वशी महेदिया ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। इतना ही नहीं इसके पश्चात सभी विजेताओं को “राष्ट्रीय प्रेरणा स्थल”, हरदोई रोड बसंत कुंज लखनऊ पर प्रस्तुति प्रस्तुत करने का और सम्मानित होने का अवसर प्राप्त हुआ । विद्यालय की संगीत विभागाध्यक्ष रचना वार्ष्णेय के निर्देशन में उर्वशी महेदिया निरंतर नयी उपलब्धियाँ प्राप्त कर रही है।

मंडल स्तर पर विजेता रहीं उर्वशी का विद्यालय में ज़ोरदार स्वागत किया गया और प्रधानाचार्या पूनम शर्मा ,प्रबंधक ज्ञान प्रकाश गोयल जी एवं प्रबंध समिति के अन्य सदस्यों ने  छात्रा को बहुत-बहुत शुभकामनाएं दीं और उज्जवल भविष्य के लिए कामना की। यहाँ आपको अवगत करा दें कि उर्वशी पिछले अनेक वर्षों से गंधर्व संगीत महाविद्यालय ग़ाज़ियाबाद ,में कत्थक नृत्य की शिक्षा ले रही हैं। उर्वशी पहले भी अनेक पुरस्कार जीत चुकी हैं , यहाँ तक की TV पर डान्स शो में प्रतिभाग कर चुकी हैं ।

गुरुवार, 29 जनवरी 2026

जी डी ए तथा नगर निगम के बीच शहर की 7 प्रमुख योजनाओं का हुआ हस्तांतरण, 66 करोड़ 32 लाख में बनी सहमति, नगर आयुक्त तथा जीडीएवीसी ने अधिकारियों के साथ बैठक कर हैंडोवर प्रक्रिया को किया पूर्ण

 



                        मुकेश गुप्ता

गाजियाबाद । नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक तथा गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष नंदकिशोर कलाल द्वारा शहर की 6 प्रमुख क्षेत्र की योजनाओं को हस्तांतरण करने की प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया गया है, जिसके क्रम में स्वर्णजयंतीपुरम, कर्पूरीपुरम बी ब्लॉक गोविंदपुरम योजना का सी पी ब्लॉक, प्रताप विहार सेक्टर 12 अंतर्गत भवराव देवरस योजना, के ए ब्लॉक व बी एच ब्लॉक, राजनगर एक्सटेंशन योजना की 45 मीटर चौड़ी मुख्य सड़क, गोविंदपुरम योजना में क्रियाशील एसटीपी, प्राधिकरण का नगर निगम कार्यालय भवन हस्तांतरण किए जाने हेतु दोनों विभागों के समस्त अधिकारियों की उपस्थिति में बैठक हुई जिसमें हस्तांतरण की कार्यवाही को पूर्ण किया गया तथा हस्तांतरण कार्यवृत पर दोनों अधिकारियों द्वारा हस्ताक्षर किए गए ।


नगर आयुक्त ने बताया गया कि गाजियाबाद विकास प्राधिकरण कि विकसित योजनाओं का हैंडोवर लिया गया है जिसमें स्वर्ण जयंतीपुरम, कर्पूरीपुरम,गोविंदपुरम, राज नगर एक्सटेंशन योजना की 45 मीटर चौड़ी मुख्य सड़क तथा प्रताप विहार की योजनाओं का हैंडोवर हुआ है, 66 करोड़ 32 लाख में सहमति बनी है जिसके क्रम में पहली किस्त 1 फरवरी 2026 को 33 करोड़ 16 लाख का भुगतान गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के द्वारा किया जाना है तथा दूसरी किस्त 33 करोड़ 16 लाख का भुगतान 25 मार्च 2026 तक किया जाना है जिसके लिए समस्त कार्यवाही पूर्ण कर ली गई है दिनांक 1 अप्रैल 2026 से योजनाओं की समस्त अवस्थापना सुविधा सड़के, नाली नाले,वाटर लाइन ट्यूबवेल, ओवरहेड टैंक, सीवर लाइन, सेंट्रल वर्ज, फुटपाथ, पार्क एवं ग्रीन बेल्ट का हैंडोवर मान्य होगा ।

गाजियाबाद विकास प्राधिकरण उपाध्यक्ष नंदकिशोर कलाल द्वारा नगर निगम को शुभकामनाएं दी गई, उपाध्यक्ष जी डी ए द्वारा बताया गया कि स्वर्ण जयंतीपुरम की सड़क, सीवर व जलापूर्ति, ड्रेन का निर्माण कार्य, मार्ग की प्रकाश व्यवस्था,उद्यानिकरण हेतु सहमति के क्रम में धनराशि निगम को दी जाएगी कर्पूरीपुरम, बी ब्लॉक, गोविंदपुरम का सी पी ब्लॉक, प्रताप विहार सेक्टर 12 भाउराव देवरस योजना में पेयजल, स्ट्रीट लाइट, पार्क में अन्य कार्य हेतु नगर निगम को 66 करोड़ 32 लाख दो किस्तों में दिए जाएंगे 87 करोड़ 7 लाख के सापेक्ष 66 करोड़ 32 लाख पर सहमति बनी है बताया गया ।

गाजियाबाद विकास प्राधिकरण की 6 प्रमुख योजनाओं का हैंडोवर नगर निगम को हुआ है मौके पर नगर निगम से अपर नगर आयुक्त अवनींद्र कुमार मुख्य अभियंता निर्माण नरेंद्र कुमार चौधरी, प्रभारी उद्यान डॉक्टर अनुज, प्रभारी प्रकाश आश कुमार, नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉक्टर मिथिलेश उपस्थित रहे गाजियाबाद विकास प्राधिकरण से मुख्य अभियंता आलोक रंजन व अन्य विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

एल.आर.पब्लिक स्कूल भीमनगर में आयोजित साइंस एग्जीबिशन का अजीत सिंह बैसला ने किया उद्घाटन

 


                          मुकेश गुप्ता

गाजियाबाद । एल.आर.पब्लिक स्कूल भीमनगर गाजियाबाद में साइंस एग्जीबिशन में मुख्य अतिथि के रूप में सरदार पटेल गलोबल स्कूल के चैयरमैन अजीत सिंह बैसला पहुंचे जहां विधालय के प्रबंधक राम किशन प्रधान, राजाराम प्रधान, मनोज प्रधान व विधालय के प्रधानाचार्य अजय प्रधान ने उनका  बुके देकर स्वागत किया और रीबन काटकर विधिवत साइंस एग्जीबिशन की शुरुआत की।  इस मौके पर  उन्होंने कहा कि बच्चों ने बहुत ही सुंदर प्रोजेक्ट बनायें  और उनकी तैयारी भी बहुत अच्छी थी, बहुत से बच्चे बहुत ही प्रतिभाशाली थे और उन्होंने तैयारी भी लाजवाब थी। उन्होंने  इस सफल आयोजन के लिए विधालय के प्रबंधक, प्रधानाचार्य समस्त स्टाफ को बहुत बहुत बधाई व साधुवाद किया सभी बच्चों को उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। 

अपनी संतानों की रक्षा के लिए महाकाली की बेटियां महाकाली बनकर रणक्षेत्र में कूदी, हर माँ का कर्तव्य है की अपने बच्चों पर संकट आए तो वो महाकाली का रूप धर कर अपने बच्चों की रक्षा करे_डॉ उदिता त्यागी

                       मुकेश गुप्ता

भाजपा से जुड़ी हुई महिलाओं का आज यूजीसी एक्ट के विरुद्ध रौद्र रूप

*देश और धर्म के लिए सर्वस्व बलिदान करने वालों के बच्चों को अपराधी नहीं घोषित होने देंगे_श्रीमती शशि चौहान(सभासद नगर पंचायत डासना)

*डॉ उदिता त्यागी जी ने आशंका जताई कि इक्विटी कमेटी हमारी बेटियों की रेप और शोषण कमेटी बन जाएगी।

*5 फरवरी को एक हजार महाकाली उच्च शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के आवास पर अग्निसमाधि लेगी।

गाजियाबाद । आज जगदम्बा महाकाली डासना वाली की बेटियां महाकाली बनकर अपनी संतानों की रक्षा के लिए यूजीसी एक्ट 2026 के विरोध में रणक्षेत्र में उतर गई।इन सबने जगदम्बा महाकाली और महादेव के नाम पर इस काले कानून के विरुद्ध हर संघर्ष करने की शपथ ली।

विश्व के प्राचीनतम महाकाली मंदिर शिवशक्ति धाम डासना गाजियाबाद से आज मां महाकाली की बेटियों ने यूजीसी एक्ट के विरोध में शिवशक्ति धाम डासना से गाजियाबाद जिला मुख्यालय तक पैदल मार्च किया और जिलाधिकारी के माध्यम से उच्च शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को ज्ञापन भेजा।

ज्ञापन के अनुसार यूजीसी एक्ट 2026 को सरकार व्यापक हिन्दू नरसंहार का मार्ग प्रशस्त करने के लिए लाई है।यह अन्यायपूर्ण एक्ट अगर सात दिन के अंदर वापस नहीं हुआ तो डॉ उदिता त्यागी जी व श्रीमती शशि चौहान(सभासद नगर पंचायत डासना) एक हज़ार महाकालियों के साथ शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के घर के सामने सामूहिक अग्निसमाधि ले लेगी।

इस पैदल मार्च की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि ये भाजपा से जुड़ी हुई महिलाओं के द्वारा किया गया है।

शिवशक्ति धाम डासना के पीठाधीश्वर व श्रीपंचदशनाम जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरी जी महाराज ने पुष्प अर्पित करके इन बहनों को शिवशक्ति धाम डासना से विदा किया और उनके साथ अपने सभी यति संन्यासियों और शिष्यों को बहनों और बेटियों की सुरक्षा के लिए साथ भेजा।

अपने इस आंदोलन के बारे में बताते हुए डॉ उदिता त्यागी जी ने कहा हर माँ का कर्तव्य है की अपने बच्चों पर संकट आए तो वो महाकाली का रूप धर कर अपने बच्चों की रक्षा करे।मै स्वयं एक मां हूँ और अपने बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कुछ भी करुंगी।ये एक्ट जिहादियों की एक सुनियोजित रणनीति है जिस से हिंदू एकता खत्म हो और हिंदू एक एक करके मारे जायें।जिस तरह नाज़ी लोग यहूदियों की एथिनिक क्लीजिंग से पहले क़ानून लाते थे ये यूजीसी एक्ट सवर्ण बच्चों के जातीय नरसंहार की सुनियोजित साज़िश है।“इक्वेटी कमेटी” जिसमें सिर्फ़ एससी/एसटी/ओबीसी/जिहादी होंगें हमारी बेटियों की संगठित ग्रूमिंग गैंग और हमारे लड़को की सुनियोजित मॉब लिंचिंग की कमेटी साबित होगी।

श्रीमती शशि चौहान जो नगर पंचायत डासना की वरिष्ठ सभासद हैं और जिनका पूरा जीवन भाजपा की सेवा करते हुए निकल गया,आज उनका कहना है कि हमने इस देश और धर्म के लिए सदैव बलिदान दिए हैं परंतु अब हम अपने बच्चों को किसी की नेतागिरी के लिए अपराधी नहीं घोषित होने देंगे।यह काला कानून न्याय की सभी अवधारणाओं के विरुद्ध है।यह समता के अधिकार को कुचलने के लिए बनाया गया है।अब सरकार को इसे वापस लेने के लिए मजबूर करेंगे।

इस पैदल मार्च में गीता त्यागी,अंजना त्यागी,गुंजन गुप्ता,पलक गुप्ता,गीता त्यागी मंडला,मोना शर्मा,गुडी शर्मा,रीना,गीता,काजल तथा अन्य बहने उपस्थित थी।

कविनगर रामलीला मैदान में आयोजित भव्य श्रीरामकथा का पंचम दिवस, जीवन में धर्म की रक्षा के लिए त्याग ही सबसे बड़ा आभूषण: विजय कौशल जी महाराज

 

                             मुकेश गुप्ता

श्री राम का वन गमन धर्म, वचन और मर्यादा को राजसुख से ऊपर प्रतिष्ठित करता है

-श्री राम की एक तपस्वी के रुप से शुरु हुई यात्रा जीवन में मोह का त्याग और संयम का वरण है

-माता कौशल्या की करुण पुकार, भरत का विलाप और प्रजा की व्याकुलता के प्रसंगों से श्रोताओं के नेत्र सजल हुए

गाजियाबाद। कविनगर स्थित रामलीला मैदान में मंगलमय परिवार द्वारा आयोजित भव्य श्रीरामकथा के पांचवें दिन गुरुवार को मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के वनगमन का अत्यंत करुण, भावोत्तेजक एवं आत्मा को स्पर्श करने वाला प्रसंग प्रस्तुत किया गया। कथा स्थल पर उपस्थित श्रद्धालु जनसमूह इस प्रसंग को सुनकर भाव-विभोर हो उठा और सम्पूर्ण वातावरण त्याग, भक्ति तथा करुणा से सराबोर हो गया।

पूज्य विजय कौशल जी महाराज के पावन श्रीमुख से प्रवाहित रामकथा के पंचम दिवस में प्रभु श्रीराम के राज्याभिषेक की तैयारी से लेकर वनगमन, निषादराज गुह से भेंट और केवट की निष्काम भक्ति तक की घटनाओं का अत्यंत सजीव, रसपूर्ण और भावनात्मक वर्णन किया गया।

महाराजश्री ने कोप भवन प्रसंग का वर्णन करते हुए बताया कि कैसे एक ओर अयोध्या में राजतिलक की मंगल तैयारी चल रही थी, वहीं दूसरी ओर माता कैकेयी के वचनों से सम्पूर्ण वातावरण क्षण भर में शोक में परिवर्तित हो गया। महाराजश्री ने कहा कि यह प्रसंग केवल राजनैतिक परिवर्तन नहीं, बल्कि उस क्षण का प्रतीक है जहाँ धर्म, वचन और मर्यादा राजसुख से ऊपर प्रतिष्ठित हो जाते हैं।

विजय कौशल जी महाराज ने कथा सुनाते हुए उनके वन गमन का प्रसंग बहुत ही सुंदर ढंग से वर्णित किया। महाराजश्री ने कहा कि प्रभु श्रीराम का वनगमन संसार को यह सिखाता है कि जीवन में धर्म की रक्षा के लिए त्याग ही सबसे बड़ा आभूषण है। उन्होंने आगे कहा कि जैसे ही प्रभु श्रीराम के वनगमन का निर्णय सामने आया, अयोध्या शोक में डूब गई। माता कौशल्या की करुण पुकार, भरत का विलाप और प्रजा की व्याकुलता आदि के प्रसंगो को सुनकर श्रोताओं के नेत्र सजल हो गये। 

उन्होंने कहा कि अयोध्या की सीमा पार कर तमसा नदी के तट पर प्रभु द्वारा बिताई गई पहली रात्रि का वर्णन विशेष रूप से मार्मिक रहा। कथा व्यास ने बताया कि यह वही क्षण है जहाँ राजकुमार राम से तपस्वी राम की यात्रा आरंभ होती है—जहाँ मोह का त्याग और संयम का वरण होता है।

कथा व्यास विजय कौशल जी महाराज ने निषादराज गुह से भेंट का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि श्रृंगवेरपुर पहुँचने पर प्रभु श्रीराम की बालसखा निषादराज गुह से भेंट का प्रसंग सामाजिक समरसता और सच्ची मित्रता का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया। महाराजश्री ने कहा कि निषादराज का पलक-पावड़े बिछाकर स्वागत यह सिद्ध करता है कि प्रभु के लिए जाति, वर्ग और स्थिति का कोई भेद नहीं—वहाँ केवल प्रेम और भाव की ही पहचान है।

गुरुवार की कथा का भावनात्मक शिखर रहा केवट प्रसंग। पूज्य संत विजय कौशल जी ने अत्यंत कोमल शब्दों में बताया कि जब प्रभु श्रीराम ने गंगा पार करने हेतु नाव मांगी, तब केवट ने प्रभु के चरणों की रज को पारस बताते हुए पहले चरण धोने की अनुमति मांगी। यह प्रसंग केवल एक कर्मकांड नहीं, बल्कि उस क्षण का प्रतीक है जहाँ भक्त अपने प्रेम से भगवान को बाँध लेता है। केवट द्वारा उतराई लेने से इनकार कर प्रभु से भवसागर से पार उतारने का वचन माँगना, निष्काम भक्ति की सर्वोच्च अवस्था को दशार्ता है—जहाँ सांसारिक लाभ नहीं, केवल मुक्ति की कामना होती है।

कथा के समापन पर प्रभु श्रीराम के ऋषि भरद्वाज के आश्रम आगमन का वर्णन किया गया। उन्होंने वनवासी जीवन की मर्यादा, संयम और सन्यास धर्म के आदर्शों को स्थापित किया। महाराजश्री ने कहा कि यह प्रसंग मानव जीवन को संयम, संतोष और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।

आज की श्रीरामकथा ने उपस्थित श्रद्धालुओं के हृदय में यह भाव गहराई से स्थापित कर दिया कि त्याग में ही सच्चा सुख है, भक्ति में ही मुक्ति है और मयार्दा ही जीवन का सर्वोच्च धर्म है। कथा में मंगलमय परिवार के सदस्यों सहित हजारों रामभक्तों ने कथा श्रवण कर भगवान राम के नाम का धार्मिक लाभ लिया। 

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भारतीय समाचारपत्र दिवस की पत्रकारिता जगत को स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने दी शुभकामनायें, सकारात्मक पत्रकारिता समाज में विश्वास का निर्माण करती है--स्वामी चिदानन्द सरस्वती




                        सत्ता बन्धु संवाददाता

ऋषिकेश, 29 जनवरी। परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने आज भारतीय समाचार पत्र दिवस के अवसर पर सम्पूर्ण पत्रकारिता जगत को शुभकामनायें देते हुये कहा कि भारत में पत्रकारिता की ऐतिहासिक यात्रा है। 

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि समाचारपत्रों की राष्ट्रनिर्माण में अद्भुत भूमिका रही है। यह दिन पत्रकारिता के निर्भीक चेतना का उत्सव है जिसने भारत में सत्य, साहस और स्वतंत्र अभिव्यक्ति की नींव रखी।

भारतीय समाचारपत्र दिवस हमें उस युग में ले जाता है, जब शब्दों की ताक़त से साम्राज्यों की नींव हिल जाया करती थी। 29 जनवरी 1780 को प्रकाशित हुआ भारत का पहला समाचारपत्र “हिक्की का बंगाल गजट” भारत ही नहीं एशिया का भी पहला मुद्रित समाचारपत्र था। समाचार पत्र प्रश्न पूछने का साहस रखने वाले पहली स्वतंत्र आवाज़ होते हैं।

स्वामी जी ने कहा कि भारतीय पत्रकारिता की जड़ें भय में नहीं, बल्कि धर्म, दायित्व और जनहित में निहित हैं। समाचारपत्र केवल सूचना देने का माध्यम नहीं रहे, बल्कि उन्होंने समाज को दिशा दी, जनमानस को जागृत किया और स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान राष्ट्र को एक सूत्र में पिरोया। महात्मा गांधी जी से लेकर लोकमान्य तिलक जी तक, भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में समाचारपत्रों ने क्रांति का कार्य किया।

स्वामी जी ने कहा कि आज के समय में, जब सूचनाओं की बाढ़ है और सोशल मीडिया के माध्यम से क्षणभर में खबरें फैल जाती हैं, तब समाचारपत्रों की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। पत्रकारिता का उद्देश्य सनसनी फैलाना नहीं, बल्कि सत्य को प्रमाण, संतुलन और संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत करना है। नकारात्मक नैरेटिव से समाज को भ्रमित करना आसान है, किंतु सकारात्मक, समाधान-केंद्रित पत्रकारिता ही राष्ट्र को सशक्त बनाती है।

भारतीय समाचारपत्र दिवस इस बात की भी याद दिलाता है कि मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है। इसकी शक्ति जितनी प्रभावशाली है, उतनी ही इसकी जिम्मेदारी भी। समाचारपत्रों का कर्तव्य है कि वे भय, विभाजन और निराशा का माध्यम न बनें, बल्कि आशा, एकता और जागरूकता के वाहक बनें। सकारात्मक पत्रकारिता समाज में विश्वास का निर्माण करती है और नागरिकों को समाधान की दिशा में सोचने के लिए प्रेरित करती है।

आज आवश्यकता है कि पत्रकारिता केवल समस्याओं को उजागर करने तक सीमित न रहे, बल्कि उनके समाधान, प्रेरक उदाहरणों और सकारात्मक बदलावों को भी प्रमुखता से सामने लाए। जब अख़बार अच्छे कार्यों, सामाजिक पहल, नवाचार और मानवीय संवेदनाओं को स्थान देते हैं, तब वे समाज को बेहतर बनने की प्रेरणा देते हैं।

भारतीय समाचारपत्र दिवस केवल पत्रकारों का उत्सव नहीं, बल्कि हर उस नागरिक का उत्सव है जो सच पढ़ना, समझना और सही निर्णय लेना चाहता है। यह दिवस हमें यह सोचने का अवसर देता है कि हम कैसी पत्रकारिता चाहते हैं, डर फैलाने वाली या दिशा देने वाली, नकारात्मकता गढ़ने वाली या राष्ट्र को जोड़ने वाली।

भारतीय समाचारपत्र अपनी गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाते हुए सत्यनिष्ठा, निष्पक्षता और सकारात्मक सोच के साथ समाज की सेवा करते रहे, शब्द जब जिम्मेदारी के साथ लिखे जाते हैं, तो वे इतिहास बनाते हैं।

बुधवार, 28 जनवरी 2026

देशभक्ति के तरानों के बीच हर्षोल्लास के साथ मनाया गया गुलमोहर एनक्लेव सोसायटी में 77 वां गणतंत्र दिवस

 



                     मुकेश गुप्ता           

आरडब्लूए कार्यकारिणी सदस्य रश्मि चौधरी ने फहराया तिंरगा 

गाज़ियाबाद। राकेश मार्ग स्थित गुलमोहर एन्क्लेव सोसाइटी में 77 वां गणतंत्र दिवस बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस मौके पर आरडब्लूए कार्यकरिणी सदस्य रश्मि चौधरी ने सभी सदस्यों के साथ तिंरगा फहराकर सभी निवासियों को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं दीं।

      सोमवार को 77 वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर गुलमोहर एन्क्लेव सोसाइटी के सेंट्रल पार्क में भव्य समारोह आयोजित किया गया। प्रातः 9 बजे कार्यकारिणी सदस्य रश्मि चौधरी ने  आरडब्ल्यूए पदाधिकारियों व समस्त सोसायटी निवासियों के साथ मिलकर देश की शान तिरंगा झंडा फहराया। इसके बाद सेंट्रल पार्क में मौजूद सभी निवासियों ने राष्ट्रगान गाकर तिरंगे को सलामी दी। इस अवसर पर बच्चों व महिलाओं ने देशभक्ति के गानों पर सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर सबको मंत्रमुग्ध कर दिया। इस अवसर पर आरडब्लूए अध्यक्ष बिजेंद्र गिरी ने कहा कि हमें गर्व होना चाहिए कि हम एक ऐसे आजाद देश व नागरिक हैं जिसका अपना एक संविधान है जो सभी के हितों की सुरक्षा करता है। 26 जनवरी 1950 को हमारे देश में संविधान लागू हुआ जिसने देश के सभी नागरिकों को लोकतांत्रिक व्यवस्था प्रदान की। कार्यकारिणी सदस्य एवं पूर्व अध्यक्ष रश्मि चौधरी ने बताया कि संविधान ने सभी जाति और धर्म के लोगों को स्वतंत्रता से जीने का अधिकार दिया है। मतदान का अधिकार भी संविधान द्वारा प्रदत्त है जिसका उपयोग हमें राष्ट्रहित में अवश्य करना चाहिए। इस अवसर पर देश के वीर शहीदों को भी सलामी देते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की गई। उन्होंने कहा कि  ये आजादी हमें घर बैठे ही नहीं मिल गई। हमारे लाखों वीरों ने अपने प्राणों की आहुति माँ भारती की अस्मिता की रक्षा के लिए दे दी। आज उन्हीं शहीदों के कारण हम स्वतंत्र और विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र का हिस्सा हैं। इस अवसर पर एडवोकेट राज किशोर शर्मा ने कहा कि विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र का हिस्सा होना गर्व की बात है। और यह लोकतांत्रिक व्यवस्था हमें संविधान लागू होने पर ही प्राप्त हुई है। इस अवसर पर छोटे छोटे बच्चों के हाथ में तिरंगा लेकर कार्यक्रम में मौजूद रहे। कार्यक्रम के अंत में बच्चों को चॉकलेट व कार्यक्रम में भाग लेने वाले सभी निवासियों को मिष्ठान वितिरत की गई। इस मौके पर अध्यक्ष बिजेंद्र गिरी,रश्मि चौधरी , एडवोकेट राज किशोर शर्मा,सचिव ए के दोहरे ,कोषाध्यक्ष किन्शुक बंसल,अनुजा बंसल, प्रभा शर्मा, सीमा गुप्ता,अनुज बंसल,गौरव बंसल, अश्विनी वाधवा,सतीश सिंघल, अंकित सहदेव,  सहित सोसायटी के काफी निवासी मौजूद रहे।

भारत से साध्वी भगवती सरस्वती के नेतृत्व में परमार्थ निकेतन मेन अमेरिका के सीएटल शहर में गौरव और सम्मान के साथ मनाया गया भारत का 77वाँ गणतंत्र दिवस







                        सत्ता बन्धु संवाददाता

ऋषिकेश, 28 जनवरी। भारत और वैश्विक भारतीय समुदाय के लिए यह अवसर अत्यंत गौरवपूर्ण और ऐतिहासिक रहा, जब अमेरिका के सीएटल शहर में भारत का 77वाँ गणतंत्र दिवस पूरे सम्मान, उल्लास और गरिमा के साथ मनाया गया। इस विशेष अवसर पर भारत से परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश की अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त आध्यात्मिक लीडर, डॉ साध्वी भगवती सरस्वती जी की गरिमामयी उपस्थिति ने समारोह को विशेष ऊँचाई प्रदान की। उनका सशक्त संदेश अनेक वैश्विक मंचों से भारत की आध्यात्मिक चेतना, लोकतांत्रिक मूल्यों और “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना को पर सशक्त प्रतिनिधित्व प्रदान करता है।

वहां अत्यधिक सर्दी का मौसम होने के बाद भी अद्भुत उत्साह से मनाया गणतंत्र दिवस, कांसुलर एप्लीकेशन सेंटर की छत से फहराया तिंरगा, छत इतनी ऊँची है कि दूर से ही, पैसिफिक ओसन से भी तिरंगे के दर्शन होते हैं।

सीएटल शहर में भारतीय तिरंगा फहराया जो भारत की स्वतंत्रता, संप्रभुता और लोकतांत्रिक शक्ति का प्रतीक है, साथ ही भारत और अमेरिका के बीच मैत्रीपूर्ण संबंधों को और अधिक सशक्त और सुदृढ़ करने का संदेश दे रहा है। यह आयोजन भारत की समृद्ध लोकतांत्रिक परंपराओं और वैश्विक स्तर पर भारतीय मूल्यों की स्वीकार्यता को रेखांकित करता है।

समारोह का औपचारिक शुभारंभ सीएटल शहर स्थित फेडरल रिज़र्व भवन पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने के साथ हुआ। इस अवसर पर सीएटल शहर की माननीय मेयर, सुश्री केटी विल्सन, आध्यात्मिक लीडर, साध्वी भगवती सरस्वती जी, भारतीय काउंसल जनरल श्री प्रकाश गुप्ता जी और अन्य विभूतियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। 

साध्वी भगवती सरस्वती जी ने कहा कि भारत केवल एक भू-भाग नहीं, यह एक जीवंत चेतना है। यह वह भूमि है जहाँ लोकतंत्र केवल शासन व्यवस्था नहीं, बल्कि धर्म है, कर्तव्य, करुणा और सत्य का धर्म है। भारतीय संविधान केवल काग़ज़ का दस्तावेज़ नहीं, यह उन ऋषियों की दृष्टि का आधुनिक स्वरूप है जिन्होंने ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ का उद्घोष किया। जो भारतीय ज्ञान, योग, ध्यान, आयुर्वेद और सारी शिक्षायें सब के लिये है। उन्होंने कहा कि अब तो ऐसे लगता है कि मैं भारत में नहीं बल्कि भारत भी मुझ में रहता है। यह सब भारत की संस्कृति का ही प्रभाव है।

आज जब भारत का तिरंगा विश्व की धरती पर लहराता है, तो वह केवल तीन रंग नहीं, बल्कि त्याग, शांति और साहस का उद्घोष करता है। यह संदेश देता है कि भारत शक्ति है, लेकिन करुणा के साथ; प्रगति है, लेकिन प्रकृति के साथ; और नेतृत्व है, लेकिन नैतिकता के साथ।

जहाँ भी भारतीय जाते हैं, वह केवल रोज़गार नहीं ले जाते, वह संस्कार ले जाता है, संस्कृति ले जाता है, और मानवता का दीप जलातें हैं। पूज्य स्वामी जी कहते हैं कि भारतीयों ने रामायण का गुटका अपने पास रखकर विदेश यात्रा की, भारतीय विदेशों में बसे, परन्तु अपने उस रामयण के गुटके, हनुमान चालीसा, अपने मूल, मूल्य व संस्कृति से सदैव जुड़ें रहे। आज का भारत विश्व को संदेश दे रहा है संस्कार एवं विरासत के बिना विकास अधूरा है।

माननीय मेयर, सुश्री केटी विल्सन ने अपने संदेश में भारत और सीएटल के बीच दीर्घकालिक संबंधों, आपसी सद्भावना और सहयोग को रेखांकित करते हुए भारत-अमेरिका मैत्री को और अधिक सुदृढ़ करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।

इसी अवसर पर इंडिया कांसुलर एप्लीकेशन सेंटर के नए कार्यालय का भी उद्घाटन किया गया, इस अवसर पर साध्वी भगवती सरस्वती जी का पावन सान्निध्य प्राप्त हुआ। यह सेंटर अब सीएटल स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास के साथ सह-स्थित है। यह पहल क्षेत्र में निरंतर बढ़ते भारतीय समुदाय को बेहतर, सुलभ और सशक्त कांसुलर सेवाएँ उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

भारतीय काउंसल जनरल श्री प्रकाश गुप्ता जी के मार्गदर्शन में ये समारोह आयोजित किया गया। श्री प्रकाश गुप्ता जी भारतीय विदेश सेवा, के वरिष्ठ अधिकारी हैं और सीएटल शहर स्थित भारत के महावाणिज्य दूत के रूप में कार्यरत रहे हैं। वे भारत, अमेरिका के बीच राजनयिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और जन-संपर्क संबंधों को    सुदृढ़ करने में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।


वे भारतीय प्रवासी समुदाय की समस्याओं के समाधान, भारत की नीतियों व मूल्यों के प्रसार और भारत, अमेरिका मैत्री को नई ऊँचाइयों तक ले जाने के लिए भी सदैव प्रतिबद्ध रहते हैं।

गणतंत्र दिवस के सम्मान में एक असाधारण और ऐतिहासिक पहल के अंतर्गत वॉशिंगटन स्टेट सीनेट ने एक विशेष सत्र का आयोजन किया और सर्वसम्मति से प्रस्ताव संख्या 8674 को पारित किया। इस प्रस्ताव में भारत की लोकतांत्रिक विरासत, संवैधानिक मूल्यों और विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में भारत की भूमिका को औपचारिक रूप से सम्मानित किया गया।

इस प्रस्ताव को भारतीय-अमेरिकी स्टेट सीनेटर मंका ढींगरा ने प्रस्तुत किया, भारतीय मूल की स्टेट सीनेटर वंदना स्लैटर ने सदन के पटल से इसका सशक्त समर्थन किया। प्रस्ताव में वॉशिंगटन स्टेट में भारतीय-अमेरिकी समुदाय के उल्लेखनीय योगदान, सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक प्रभाव तथा सीएटल शहर स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास की भूमिका को विशेष रूप से स्वीकार किया गया, जो भारत और राज्य के बीच बहुआयामी संबंधों को मजबूती प्रदान कर रहा है।

विशेष सत्र के दौरान कई अन्य स्टेट सीनेटरों ने भी अपने विचार व्यक्त किए और भारत-अमेरिका मैत्री को साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, स्वतंत्रता, विविधता और समावेशन पर आधारित बताया। वक्ताओं ने भारत को विश्व का सबसे बड़ा और जीवंत लोकतंत्र बताते हुए उसकी वैश्विक भूमिका की सराहना की।

इस पूरे आयोजन में 300 से अधिक भारतीय-अमेरिकी समुदाय के सदस्य उत्साहपूर्वक सम्मिलित हुए। उनकी सक्रिय सहभागिता ने यह सिद्ध किया कि भारतीय संस्कृति, परंपराएँ और लोकतांत्रिक मूल्य विश्व के हर कोने में जीवंत हैं। समारोह लोकतंत्र, विविधता, आपसी सम्मान और साझी मानवता के मूल्यों का एक सशक्त उत्सव बनकर उभरा।

भारत से पधारी साध्वी भगवती सरस्वती जी की उपस्थिति ने इस आयोजन को आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और नैतिक चेतना से युक्त वैश्विक संवाद में परिवर्तित कर दिया। उन्होंने अपने संदेश के माध्यम से यह स्पष्ट किया कि भारत की आत्मा उसके संविधान, लोकतंत्र और आध्यात्मिक मूल्यों में निहित है, जो आज संपूर्ण विश्व को मार्गदर्शन प्रदान कर रहे हैं।

यह आयोजन भारत के 77 गणतंत्र के उत्सव के साथ भारत की विचारधारा,     संस्कृति और लोकतांत्रिक चेतना का वैश्विक मंच पर सम्मानपूर्ण प्रस्तुतीकरण भी था।

मंगलयम परिवार की ओर से आयोजित श्रीराम कथा का चतुर्थ दिवस, राम-सीता विवाह सामाजिक अनुष्ठान ही नहीं बल्कि धर्म, मर्यादा, त्याग और परस्पर सम्मान का सर्वोच्च आदर्श: संत विजय कौशल जी महाराज

 




                            मुकेश गुप्ता

सीता राम विवाहोत्सव के भावपूर्ण, भव्य और सुमधुर वर्णन से भावविभोर हुए श्रद्धालु

-जीवन के हर चरण में कर्तव्य, संयम, सहनशीलता और समर्पण का संकल्प निहित 

-पिताश्री दशरथ की आज्ञा से राम का वन गमन त्याग और कर्तव्य की सीख 

-पूज्य महाराज ने मिथिला का मंगल, अवध की मर्यादा और वन गमन का त्याग से लेकर सीता राम विवाहोत्सव की कथा सुनाई

गाजियाबाद। कविनगर स्थित रामलीला मैदान में गत 25 जनवरी से चल रही श्री रामकथा के चतुर्थ दिवस पंडाल में आये समस्त श्रद्धालु मिथिला के मंगलोत्सव और अवध की मर्यादा में डूब गये। कथा वाचक विजय कौशल जी महाराज ने बुधवार को रामकथा कके पावन प्रसंगों में श्रीरामलला सरकार एवं माता श्री जानकी के शुभ विवाह एवं भंवरों (फेरों) का अत्यंत भावपूर्ण, भव्य और दिव्य वर्णन प्रस्तुत किया, जिस सुनकर वहां मौजूद हजारों श्रद्धालु बहुत की भावविभोर हो गये।

पूज्य कथा-व्यास विजय कौशल महाराज ने अपने श्रीमुख से जैसे ही राम जानकी विवाह का मंगल प्रसंग सुनना शुरु किया, पूरा कथा-पंडाल साक्षात मिथिला बन गया। महाराज जी ने जनकपुर की अलौकिक शोभा, जनक दरबार की गरिमा, सखियों के उल्लास, मंगल गीतों और विवाह की दिव्यता का ऐसा सजीव चित्रण किया कि पंडाल में मौजूद हर श्रोता स्वयं को उस पावन क्षण का सहभागी अनुभव करने लगा।

रामकथा में महाराज  द्वारा विवाहोत्सव की शानदार प्रस्तुति से ऐसे लगा कि मिथिला का कण-कण खिल उठा हो और जनकपुर वासियों को जमाई के रुप में राजा राम मिलने से वे धन्य हो गये हों। इस भाव के साथ सखियों की कल्पना, ढोल मंजीरों की थाप और भजनों की मधुर धारा ने पंडाल को और भी आनंदित कर दिया। आज श्रद्धालु सज-धज कर प्रभु के विवाहोत्सव में शामिल होने पहुंचे थे। राम विवाह के प्रसंग के दौरान उन्होंने द्वारा लगाये गये भगवान राम व माता जानकी के जयघोष से संपूर्ण वातावरण गुंजायमान हो ।

महाराज जी ने विवाह का आध्यात्मिक संदेश बताया

पूज्य संत विजय कौशल महाराज ने कथा श्रवण कराने के दौर रामभक्तों को सीख भी दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि राम सीता विवाह केवल सामाजिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि धर्म, मर्यादा, त्याग और परस्पर सम्मान का सर्वोच्च आदर्श है। उन्होंने बताया कि माता सीता और प्रभु श्रीराम का यह मिलन समस्त मानवता को यह सिखाता है कि जीवन में प्रेम तभी पूर्ण होता है, जब वह धर्म से जुड़ा हो।

विवाह के दौरान होने वाले भंवरों के बारे में विजय कौशल जी महाराज ने प्रत्येक फेरे के आध्यात्मिक अर्थ को सरल शब्दों में समझाया। उन्होंने कहा कि जीवन के हर चरण में कर्तव्य, संयम, सहनशीलता और समर्पण का संकल्प निहित है। इस प्रसंग ने श्रोताओं की आँखों को नम कर दिया और हृदय को भक्ति-रस से भर दिया

पिताश्री दशरथ की आज्ञा से राम का वन गमन त्याग और कर्तव्य की सीख 

विवाहोत्सव के उल्लास के पश्चात जब राम वन गमन का प्रसंग आया, तो वातावरण भावनात्मक रूप से अत्यंत गंभीर और प्रेरक हो गया। महाराज जी ने बताया कि कैसे वैवाहिक सुख, राज्याभिषेक और राजसी वैभव को त्याग कर प्रभु श्रीराम ने पिता की आज्ञा और धर्म पालन को सर्वोपरि माना। यह प्रसंग श्रोताओं को यह संदेश देता है कि सच्चा धर्म वही है, जहाँ व्यक्तिगत सुख से पहले कर्तव्य आता है।

आज चतुर्थ दिवस में श्रद्धालुओं की उपस्थिति अत्यंत उत्साहजनक रही। भक्ति, अनुशासन और भावनात्मक जुड़ाव के साथ रामभक्तों ने कथा का रसपान किया। सुसज्जित पंडाल, दिव्य सजावट, भजनों की मधुर प्रस्तुति और श्रद्धालुओं की आस्था—इन सभी ने मिलकर इस दिवस को अविस्मरणीय बना दिया।

श्रीरामकथा का यह चतुर्थ दिवस श्रद्धा, प्रेम, त्याग और मर्यादा का जीवंत संदेश देकर भक्तों के हृदय में सदा के लिए अंकित हो गया।


मंगलवार, 27 जनवरी 2026

श्रद्धा, शौर्य, माधुर्य और मंगल-विवाह का दिव्य संगम: श्री राम कथा के तृतीय दिवस पर भाव-विभोर हुआ गाजियाबाद

                              मुकेश गुप्ता

 गाजियाबाद । कविनगर रामलीला मैदान में मंगलमय परिवार, गाजियाबाद द्वारा आयोजित भव्य श्री राम कथा के तृतीय दिवस पर आज श्रद्धा, भक्ति, करुणा, शौर्य और मंगलमय वैवाहिक प्रसंगों का अद्भुत संगम देखने को मिला। पूज्य संत श्री विजय कौशल जी महाराज ने आज की कथा में प्रभु श्रीराम के बाल्यकाल की सुकुमारता, धर्म-रक्षा हेतु किए गए उनके वीरतापूर्ण कर्म, मिथिला की दिव्य सुषमा तथा राम-सीता विवाह की मंगल भूमिका का अत्यंत भावपूर्ण, रसपूर्ण और हृदयस्पर्शी वर्णन किया।

कथा के तृतीय सोपान पर महाराज श्री ने श्रद्धालुओं को यह अनुभूति कराई कि प्रभु श्रीराम का जीवन केवल आदर्शों का संग्रह नहीं, बल्कि हर युग के मानव के लिए मार्गदर्शक प्रकाश है। उन्होंने कहा कि बालक श्रीराम की प्रत्येक लीला लोकमंगल, करुणा और धर्म की रक्षा के संकल्प से जुड़ी हुई है।

बाल्यावस्था का माधुर्य—

महाराज श्री ने प्रभु श्रीराम के बाल-स्वरूप का ऐसा मनोहारी चित्रण किया कि समूचा पंडाल भाव-विभोर हो उठा। माता कौशल्या के आंगन में खेलते, हंसते और लीलाएं करते बालक राम की सुकुमारता, सरलता और करुणामय मुस्कान का वर्णन सुनकर श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। उन्होंने बताया कि बालक राम की निष्कलुष मुस्कान में भी भविष्य के मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की झलक दिखाई देती है।


धर्म-रक्षण और ताड़का-वध की शौर्यगाथा

विश्वामित्र मुनि के साथ वन-गमन के प्रसंग में महाराज श्री ने अत्यंत प्रभावशाली शैली में बताया कि किस प्रकार बालक श्रीराम ने अधर्म के प्रतीक ताड़का का वध कर धर्म की रक्षा का संकल्प निभाया। उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम का यह पराक्रम यह संदेश देता है कि अन्याय, अत्याचार और अधर्म के विरुद्ध खड़ा होना ही सच्चा धर्म है। ताड़का-वध का प्रसंग सुनाते समय पंडाल “जय श्रीराम” के जयघोष से गूंज उठा।

मिथिला का ऐश्वर्य और पुष्प-वाटिका—

महाराज श्री ने मिथिला नगरी की दिव्य सुषमा, जनकपुर के वैभव और पुष्प-वाटिका के मनोरम दृश्य का अत्यंत सुंदर और काव्यात्मक वर्णन किया। उन्होंने बताया कि पुष्प-वाटिका में ही प्रभु श्रीराम और माता सीता का प्रथम साक्षात्कार हुआ, जिसने आगे चलकर सीता-राम विवाह की मंगल भूमिका रची। इस प्रसंग ने श्रोताओं के हृदय में प्रेम, सौंदर्य और आध्यात्मिक आनंद का संचार कर दिया।

राम विवाह की मंगल भूमिका—

पूज्य महाराज श्री ने आज की कथा में राम विवाह प्रसंग की भी अत्यंत भावपूर्ण झांकी प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि शिव धनुष भंग के पश्चात जब राजा जनक ने माता सीता का पाणिग्रहण प्रभु श्रीराम के साथ संपन्न करने की घोषणा की, तब सम्पूर्ण मिथिला आनंद, उल्लास और मंगलगान से गूंज उठी। महाराज श्री ने कहा कि राम-सीता विवाह केवल दो आत्माओं का मिलन नहीं, बल्कि धर्म, मर्यादा, प्रेम और त्याग के आदर्शों का पवित्र संगम है। इस प्रसंग को सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे और पंडाल में मंगल ध्वनियों और “सीता-राम” के जयघोष से वातावरण भक्तिमय हो गया।

आयोजन की विलक्षणता—

यह आयोजन केवल कथा-श्रवण तक सीमित नहीं है, बल्कि श्रद्धालुओं को “लघु अयोध्या” का साक्षात अनुभव करा रहा है। अयोध्या के श्रीराम मंदिर की तर्ज पर निर्मित भव्य परिसर, रामलला के दिव्य दर्शन, श्रीराम मंदिर निर्माण से जुड़े 500 वर्षों के संघर्ष और कारसेवकों के बलिदान की गौरवमयी प्रदर्शनी, तथा पुंगनूर गौ-माता का पावन सान्निध्य इस पूरे क्षेत्र को सिद्ध क्षेत्र का स्वरूप प्रदान कर रहे हैं। श्रद्धालु यहां दर्शन के साथ-साथ आध्यात्मिक ऊर्जा और ऐतिहासिक चेतना दोनों का अनुभव कर रहे हैं।

भक्तों की अपार सहभागिता—

देश-विदेश से आए हजारों श्रद्धालुओं ने आज पूज्य महाराज श्री के श्रीमुख से अमृतमयी रामकथा का रसपान किया। संपूर्ण वातावरण भक्ति-रस, शांति और दिव्यता से ओतप्रोत रहा। कथा स्थल पर “जय श्रीराम” और “हरि बोल” के जयघोष से आकाश गूंज उठा।

मंगलमय परिवार का संदेश—

मंगलमय परिवार  ने सभी श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वे आगामी दिनों की रामकथा में सपरिवार उपस्थित होकर इस दिव्य आयोजन का पुण्य लाभ प्राप्त करें और अपने जीवन को प्रभु श्रीराम के आदर्शों से आलोकित करें।

सोमवार, 26 जनवरी 2026

परमार्थ निकेतन में धूमधाम से मनाया 77 वां गणतंत्र दिवस






                     सत्ता बन्धु संवाददाता

पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी व ऋषिकुमारों ने दैवी सम्पद् मण्डल महाविद्यालय, परमार्थ निकेतन में ध्वजा रोहण कर तिरंगे झंडे को दी सलामी

स्वतंत्रता संग्राम के बलिदानियों व शहीदों को अर्पित की भावभीनी श्रद्धाजंलि

परमार्थ विद्या मन्दिर व परमार्थ गुरूकुल में आयोजित किये रंगारंग कार्यक्रम

स्वामी जी ने निरंतरता, गतिशीलता, कर्तव्यनिष्ठा का  दिया संदेश

ऋषिकेश, 26 जनवरी। भारत की पवित्र भूमि से आकाश की ऊँचाइयों तक विकास, आत्मगौरव और संकल्प की गूँज को साकार करता हुआ 77वाँ गणतंत्र दिवस परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश में अत्यंत श्रद्धा, उत्साह और राष्ट्रभक्ति के भाव के साथ मनाया गया। 

प्रातःकाल परमार्थ निकेतन के दैवी सम्पद् मण्डल महाविद्यालय प्रांगण में पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी के पावन सान्निध्य में ध्वजारोहण सम्पन्न हुआ। पूज्य स्वामी जी के साथ ऋषिकुमारों ने तिरंगे ध्वज को नमन कर राष्ट्रध्वज को सलामी दी। जैसे ही राष्ट्रध्वज शान से फहराया, सम्पूर्ण वातावरण “भारत माता की जय” और “वन्दे मातरम् के उद्घोष से गूंज उठा। यह दृश्य रोमांच, गर्व और गरिमा से परिपूर्ण था, जिसमें भारत सहित विश्व के अनेक देशों की विभूतियों ने सहभाग किया।

इस पावन अवसर पर पूज्य स्वामी जी एवं उपस्थित साधकों, विद्यार्थियों और श्रद्धालुओं ने स्वतंत्रता संग्राम के वीर बलिदानियों और अमर शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उनके त्याग, तपस्या और सर्वाेच्च बलिदान को स्मरण करते हुये आज की विश्व शान्ति यज्ञ उन्हें समर्पित किया।

स्वामी जी ने कहा कि 77वां गणतंत्र दिवस भारत के शौर्य की अद्भुत गाथा है। यह भारत की आत्मा, अस्मिता और अखंड शौर्य का उत्सव है। यह वह दिन है जब त्याग, तपस्या और बलिदान से गढ़ी गई हमारी राष्ट्रकथा संविधान के रूप में जीवित हुई। हिमालय की अडिग ऊँचाइयों से लेकर सागर की अथाह गहराइयों तक, गंगा की पवित्रता से लेकर थार की तपते मरुभूमि तक, भारत शौर्य, साधना और समर्पण की अखंड गाथा है। भारत वीरता, करुणा और कर्तव्य का संगम है। हमारे सैनिकों का पराक्रम, किसानों का पुरुषार्थ, श्रमिकों का पसीना और युवाओं का स्वप्न, यही भारत की शक्ति है। 

विविधता में एकता, लोकतंत्र में अनुशासन और परंपरा में प्रगति, यही भारत की पहचान है। यह गणतंत्र दिवस हमें संकल्प देता है कि हम राष्ट्रधर्म निभाएँ, संविधान का मान रखें और भारत को विश्वगुरु बनाने की यात्रा में समर्पित रहें।


पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि गणतंत्र दिवस हमें केवल अधिकारों की नहीं, बल्कि कर्तव्यों की भी याद दिलाता है। उन्होंने निरंतरता, गतिशीलता और कर्तव्यनिष्ठा को राष्ट्र निर्माण के तीन मजबूत स्तंभ बताते हुए कहा कि जब हर नागरिक अपने कर्तव्यों का पालन करेगा, तभी भारत सही अर्थों में विकसित राष्ट्र बनेगा।

पूज्य स्वामी जी ने कहा, “हमारा संविधान केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं, बल्कि भारत की आत्मा है। इसमें समावेशिता, करुणा, समानता और एकता का संदेश निहित है। आज आवश्यकता है कि हम संविधान के मूल्यों को अपने आचरण में उतारें और राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझें।” उन्होंने आगे कहा कि भारत आज केवल सीमाओं के भीतर ही नहीं, बल्कि वैश्विक मंच पर भी अपनी आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और नैतिक शक्ति के माध्यम से नई पहचान बना रहा है। 

पूज्य स्वामी जी ने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि युवा शक्ति ही राष्ट्र की सबसे बड़ी ऊर्जा है। यदि युवा अपने जीवन में अनुशासन, सेवा और राष्ट्रप्रेम को अपनाएँ, तो भारत को विश्वगुरु बनने से कोई नहीं रोक सकता। उन्होंने कहा कि सेवा, साधना और समर्पण, ये तीन सूत्र भारत को आंतरिक रूप से सशक्त और बाह्य रूप से समर्थ बनाएँगे।

गणतंत्र दिवस के अवसर पर परमार्थ विद्या मंदिर एवं परमार्थ गुरुकुल के विद्यार्थियों द्वारा रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। देशभक्ति गीतों, प्रेरणादायक नृत्यों और भावपूर्ण प्रस्तुतियों ने भारत की सांस्कृतिक विविधता, एकता और सनातन मूल्यों को जीवंत कर दिया। विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों में भारत के गौरवशाली अतीत, सशक्त वर्तमान और उज्ज्वल भविष्य की स्पष्ट झलक दिखाई दी।

77वाँ गणतंत्र दिवस राष्ट्र के प्रति समर्पण, सेवा और संकल्प का जीवंत उदाहरण है। जो भारत की माटी की सुगंध, आकाश की ऊँचाइयों को छूते सपनों के साथ, हर हृदय में देशप्रेम की लौ प्रज्वलित से ओतप्रोत कर रहा है।

रविवार, 25 जनवरी 2026

जब-जब तिरंगा लहराता है तो हमें अपनी आजादी पर गर्व होता है-रश्मि चौधरी

 

गाजियाबाद।  राकेश मार्ग स्थित गुलमोहर एन्क्लेव सोसायटी की आरडब्लूए कार्यकारिणी सदस्य रश्मि चौधरी ने सभी देशवासियों  को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस पूरे देश मे धूमधाम से मनाया जाता है। यह देश का सबसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय त्योहार है। यह उस दिन की याद दिलाता है जब 1950 में हमारे देश का संविधान लागू हुआ था। गणतंत्र दिवस हमे यह बताता है कि भारत एक संप्रभु और लोकतांत्रिक गणराज्य है। यह दिन स्वतंत्रता सेनानियों और क्रांतिकारियों के लहू से आजादी की लड़ाई और बहादुरी की भी याद दिलाता है।

मतदाता सूची में छूटे हुए अर्ह हुए लोगों के 26 जनवरी (सोमवार) को जोड़ा जाएगा नाम-शौरभ भट्ट

 

                         मुकेश गुप्ता

गाजियाबाद। सौरभ भट्ट उप जिला निर्वाचन अधिकारी ने प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से अवगत कराया कि  सभी सम्मानित नागरिकों को अवगत कराया जाता है कि एस.आई.आर.-2026 के तहत मतदाता सूची का आलेख्य प्रकाशन  06.01.2026 को किया गया है। आलेख्य प्रकाशित मतदाता सूची में छूटे हुए अर्ह हुए मतदाताओं के फार्म-6 प्राप्त करने हेतु  26.01.2026 (सोमवार) को विशेष अभियान आयोजित किया गया है, जिसमें सभी बी.एल.ओ. अपने बूथ पर बैठकर अर्ह एवं छूटे हुए मतदाताओं से फार्म-6 तथा मतदाता सूची की प्रविष्टि में संशोधन / स्थानान्तरण हेतु फार्म-8 प्राप्त करेंगे। 

उन्होंने बताया कि फार्म-6 केसाथ घोषणा पत्र अनिवार्य रूप से भरा जायेगा। फार्म-6 में आवेदक का नाम व सही पता शुद्ध वर्तनी में, नवीनतम स्पष्ट फोटो एवं वर्तमान मोबाइल नम्बर अंकित किया जाना आवश्यक है। 

आयु के प्रमाण हेतु निम्न में से कोई एक अभिलेख दिया जा सकता हैः-

1. सक्षम स्तर द्वारा जारी जन्म प्रमाण पत्र।

2. आधार कार्ड

3. पैन कार्ड

4. ड्राइविंग लाइसेंस

5. हाई स्कूल / इण्टरमीडिएट का प्रमाण पत्र जिसमें जन्म तिथि का उल्लेख हो।

6. भारतीय पासपोर्ट

7. जन्म तारीख के सबूत के लिए कोई अन्य दस्तावेज (यदि उपरोक्त अभिलेख उपलब्ध न हो)

निवास के प्रमाण हेतु निम्न में से कोई एक अभिलेख दिया जा सकता है:-

1. उस पते पर पानी / बिजली/गैस कनेक्शन बिल (कम से कम एक वर्ष का)

2. आधार कार्ड

3. राष्ट्रीय / अनुसूचित बैंक / डाक घर की वर्तमान पास बुक

4. भारतीय पासपोर्ट

5. राजस्व विभाग का भूमि स्वामित्व अभिलेख, जिसमें किसान बही भी हो।

6. रजिस्ट्रीकृत किराया पट्टा विलेख (किरायेदार की दशा में)

7. रजिस्ट्रीकृत विक्रय विलेख (स्वंय के घर की दशा में)

अतः समस्त छूटे हुए मतदाता एवं अर्ह नागरिकों से अपील की जाती है कि दिनांक 25.01.2026 (रविवार) एवं 26.01.2026 (सोमवार) को आयोजित विशेष अभियान में अपने बूथ पर जाकर बी.एल.ओ. से सम्पर्क करें तथा उपरोक्तानुसार दस्तावेजों के साथ फार्म-6 एवं घोषणा पत्र भरकर बी.एल.ओ. उपलब्ध करा दें। अपना नाम मतदाता सूची में सुनिश्चित करें और लोकतंत्र की प्रक्रिया में भागीदारी सुनिश्चित करें।

धूमधाम व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया राष्ट्रीय मतदाता दिवस-मतदान करने में अहम भूमिका निभाने से पूर्व मतदाता बनना अनिवार्य: मुख्य विकास अधिकारी




                           मुकेश गुप्ता

गाजियाबाद । भारत निर्वाचन आयोग के दिशा—निर्देशों के क्रम में 16वां राष्ट्रीय मतदाता दिवस धूमधाम एवं हर्षोंल्लास के साथ हिन्दी भवन में सम्पन्न हुआ। अतिथियों द्वारा द्वीप प्रज्जवलित कर एवं गणेश वन्दना के साथ कार्यक्रम का उद्घाटन एवं शुभारम्भ हुआ। तदोपरांत अतिथियों को पौधा भेंट कर स्वागत किया गया। कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने वाले दिव्यांग मतदाताओं का स्वागत एवं अभिनन्दन बैंड बाजे बजाते हुए किया गया। इस दौरान स्टेज पर स्क्रीन के माध्यम से वीडियो चलाकर मुख्य निर्वाचन आयुक्त  ज्ञानेश कुमार द्वारा एसआईएस और निर्वाचन कार्य के बारे में जानकारी देते हुए नये मतदाताओं को मतदाता सूची में जुड़ने का आवाह्न किया गया। नन्हें कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक, धार्मिक एवं मतदाता जागरूकता से सम्बंधित गीत, नुक्कट नाटक सहित अन्य प्रस्तुतियां दी गयी। 

मुख्य विकास अधिकारी ने कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि हम सभी को मतदान जरूर करना चाहिए इसके लिए सर्वप्रथम जरूरी है कि हम मतदाता बने और उसके लिए हमें मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराना है। अत: मेरा सभी 18+ के लोगों से अनुरोध है कि वे मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराने हेतु फार्म—6 जरूरी भरें। आप आॅनलाईन या आॅफलाईन भी आवेदन कर सकतें है।

मुख्य विकास अधिकारी/स्वीप नोडल अभिनव गोपाल, अपर नगरायुक्त  राज बहादुर, उप जिला निर्वाचन अधिकारी/एडीएम एफ/आर  सौरभ भट्ट, सिटी मजिस्ट्रेट डॉ.सन्तोष कुमार उपाध्याय, एसडीएम  अरूण दीक्षित सहित अन्य अधिकारियों द्वारा दिव्यांग मतदाताओं, वृद्ध मतदाताओं को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया। इसके साथ ही एसआईआर में सहयोग प्रदान करने वाले उ​द्यमियों, निर्वाचन कर्मियों सहित अन्य को प्रतीक चिन्ह व प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में सहयोग करने वाले सभी कलाकारों, प्रबंधकों, संचालक सहित अन्य को भी सम्मानित किया गया।

गुरु ही वह सेतु हैं, जिनके माध्यम से साधक ईश्वर तक पहुंचता है: पूज्य विजय कौशल जी महाराज

 






                              मुकेश गुप्ता

कविनगर रामलीला मैदान में श्री राम कथा का प्रथम दिवस: भक्ति, समर्पण और आत्मचिंतन का दिव्य संगम

राम कथा में पूज्य संत का संदेश

-सच्चा भक्त वही है जो परिस्थितियों से विचलित हुए बिना हर स्थिति में प्रभु की इच्छा को स्वीकार करता है 

-आधुनिक जीवनशैली, मोबाइल फोन और भौतिक आकर्षणों ने बच्चों को संस्कृति और मूल्यों से दूर किया

-चापलूसों की झूठी प्रशंसा सुनकर हम आत्ममुग्ध होकर अपने वास्तविक कर्तव्यों को बिसरा देते हैं

गाजियाबाद। रविवार शाम कविनगर रामलीला मैदान में मंगलयम परिवार को ओर से आयोजित भव्य श्री राम कथा के प्रथम दिवस पर पूज्य विजय कौशल जी महाराज के दिव्य श्रीमुख से कथा का शुभारंभ अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण में हुआ। प्रथम दिन की कथा ने न केवल प्रभु श्री राम के आदर्शों की झलक प्रस्तुत की, बल्कि जीवन के गूढ़ सत्यों, मानवीय मूल्यों और आत्मिक उन्नयन का गहन संदेश भी दिया।

कार्यक्रम का आरंभ श्री गणेश वंदना, मंगलाचरण और गुरु महिमा के भावपूर्ण वर्णन के साथ हुआ। भजनों की मधुर स्वर-लहरियों के बीच महाराज जी ने गुरु के चरणों में समर्पण का भाव जागृत करते हुए कहा कि गुरु ही वह सेतु हैं, जिनके माध्यम से साधक ईश्वर तक पहुंचता है। उन्होंने भाव प्रकट किया कि सभी तीर्थ गुरु के चरणों में समाए हैं और गुरु कृपा के बिना जीवन की नैया पार नहीं लग सकती।

विजय कौशल जी महाराज ने रामकथा के वाचन करते हुए भक्तों को जीवन के परम लक्ष्य के रूप में ईश्वर-प्रेम का भाव और समर्पण को बताया। उन्होने कहा कि जब मनुष्य अपना सर्वस्व प्रभु के चरणों में अर्पित कर देता है, तब उसके जीवन के सभी कष्ट स्वयं समाप्त हो जाते हैं। सच्चा भक्त वही है, जो परिस्थितियों से विचलित हुए बिना हर स्थिति में प्रभु की इच्छा को स्वीकार करता है और उसी में अपनी खुशी खोजता है।

राम नाम की महिमा का का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि राम का नाम ही जीवन का एकमात्र सहारा है, जो मनुष्य की सभी उलझनों को सुलझाने की शक्ति रखता है। संसार में कोई भी समस्या ऐसी नहीं है, जिसका समाधान राम नाम में न हो। उन्होंने भगवान राम के प्रति भक्ति को सांसारिक मोह से कहीं ऊपर बताते हुए संंदेश दिया कि आज का मनुष्य धन, पद और प्रतिष्ठा के पीछे भागते हुए अपने ईश्वर को भूलता जा रहा है।

राम जी और कामदेव जी के प्रसंग का वर्णन

राम कथा में पूज्य विजय कौशल जी महाराज ने भगवान राम और कामदेव जी के प्रसंग का अत्यंत रोचक और शिक्षाप्रद वर्णन किया।

उन्होंने बताया कि अच्छे और महान लोग कभी अभिमान नहीं करते। अहंकार ही वह दोष है, जो मनुष्य को उसके पतन की ओर ले जाता है। वर्तमान सामाजिक प्रवृत्तियों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज कई लोग बड़े पदों पर पहुंचकर चापलूसों की झूठी प्रशंसा सुनकर आत्ममुग्ध हो जाते हैं और अपने वास्तविक कर्तव्यों को भूल जाते हैं। उन्होंने सीख देते हुए कहा कि मनुष्य को सदैव विनम्र रहना चाहिए, क्योंकि विनम्रता ही सच्ची महानता है।

विजय कौशल महाराज ने कहा आज संस्कार, शिक्षा और पारिवारिक मूल्यों को जीवन में अपनाने की आवश्यकता हैं । उन्होंने कहा कि कथा आज के बच्चों में संस्कारों की कमी पर गहरी चिंता जताई।उन्होंने कहा कि आधुनिक जीवनशैली, मोबाइल फोन और भौतिक आकर्षणों ने बच्चों को संस्कृति और मूल्यों से दूर कर दिया है।

महाराज ने माता-पिता से आह्वान किया कि वे बच्चों को केवल भौतिक शिक्षा तक सीमित न रखें, बल्कि उन्हें धर्म, संस्कृति और मयार्दा से भी जोड़ें।

उन्होंने कहा कि रामकथा जैसे पावन आयोजनों के माध्यम से ही परिवार और समाज में नैतिक मूल्यों को पुन: स्थापित किया जा सकता है।

रामकथा और भागवत कथा का आध्यात्मिक महत्व पर विजय कौशल जी महाराज ने कहा कि रामकथा और भागवत कथा सुनना कोई साधारण कार्य नहीं, बल्कि यह जन्म-जन्मांतर के पुण्य से प्राप्त होने वाला पवित्र अवसर है। रामकथा आत्मा का शुद्धिकरण करती है, मन को स्थिर करती है और जीवन को सही दिशा प्रदान करती है। जो व्यक्ति नियमित रूप से रामकथा सुनता है, उसके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन निश्चित रूप से आता है। नरसी भगवान की कथा प्रसंग के माध्यम से उन्होंने बताया कि सच्ची भक्ति में भगवान स्वयं अपने भक्त की रक्षा के लिए आगे आते हैं और भक्त का मान बढ़ाते हैं।

राम कथा के प्रथम दिवस में पूरा पंडाल जय श्री राम के उद्घोष और भावपूर्ण भजनों से गुंजायमान रहा।हजारों की संख्या में उपस्थित श्रद्धालु मंत्रमुग्ध होकर महाराज जी की वाणी से रामकथा का रसपान किया। इस दौरान श्रद्धालु भाव-विभोर होकर प्रभु के चरणों में नतमस्तक होते देखे गए।

बता दें 25 जनवरी से कविनगर रामलीला मैदान में शुरु हुई यह राम कथा में एक फरवरी तक प्रतिदिन सांय 4:00 बजे से 7:00 बजे तक पूज्य विजय कौशल जी महाराज के श्रीमुख से प्रभु श्री राम के जीवन आदर्शों का अमृतपान कराया जाएगा। 


रायन इंटरनेशनल स्कूल, वसंत कुंज में धूमधाम से मनाई 50वी वर्षगांठ व गणतंत्र दिवस

 


                      सत्ता बन्धु संवाददाता

नई दिल्ली। रायन इंटरनेशनल स्कूल, वसंत कुंज में 24 जनवरी 2026 शनिवार को गणतंत्र दिवस समारोह के साथ रायन समूह के स्वर्णिम 50 वर्ष पूर्ण होने पर भव्य और गरिमामय कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह विशेष अवसर विद्यालय परिवार के लिए गर्व, उपलब्धि और कृतज्ञता का प्रतीक बना।

विद्यालय ने इस अवसर पर रायन समूह के चेयरमैन डॉ. ऑगस्टीन एफ. पिंटो एवं निदेशक डॉ. ग्रेस पिंटो के दूरदर्शी नेतृत्व और शिक्षा के क्षेत्र में उनके अमूल्य योगदान के प्रति आभार व्यक्त किया। उनके मार्गदर्शन में रायन समूह ने शिक्षा को एक सशक्त आंदोलन का रूप दिया है।

समारोह की शुरुआत राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) के कैडेटों द्वारा गार्ड ऑफ ऑनर (सम्मान सलामी) और बैंड प्रदर्शन से हुई, जिसने पूरे वातावरण को देशभक्ति से भर दिया। इसके बाद अतिथियों द्वारा वृक्षारोपण किया गया, जो पर्यावरण संरक्षण और जिम्मेदार नागरिकता का संदेश था।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डॉ. जोसेफ इमैनुएल और विशेष अतिथि लेफ्टिनेंट कर्नल रेशम सिंह का स्वागत किया गया। विद्यालय की प्राचार्या द्वारा प्रस्तुत पावरपॉइंट प्रस्तुति (दृश्य प्रस्तुतीकरण) में रायन समूह की 50 वर्षों की प्रेरणादायक यात्रा, शैक्षिक उपलब्धियाँ और राष्ट्र निर्माण में योगदान को प्रभावशाली ढंग से दर्शाया गया।

स्वर्ण जयंती समारोह में विद्यालय के पूर्व छात्र भी शामिल हुए। उन्होंने अपने अनुभव साझा कर कार्यक्रम को भावनात्मक ऊँचाई दी। छात्रों द्वारा प्रस्तुत देशभक्ति गीत, सांस्कृतिक कार्यक्रम, संगीतमय प्रस्तुति ‘अनवरत शिक्षण चक्र’ तथा नृत्य प्रस्तुति ‘स्वतंत्रता की लय पर, वीरता को नमन’ ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस दौरान राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित भी किया गया।

समारोह का समापन राष्ट्रीय प्रतिज्ञा, राष्ट्रगीत, विद्यालय गीत और राष्ट्रगान के साथ हुआ, जिससे पूरा परिसर गर्व और राष्ट्रप्रेम की भावना से ओत-प्रोत हो उठा।