गाजियाबाद । मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम की पावन लीलाओं के माध्यम से जन-मानस में धर्म, संस्कार और सदाचार का बीजारोपण कर रहे ‘मंगलमय परिवार’ द्वारा आयोजित अष्ट दिवसीय श्रीराम कथा के सप्तम सोपान पर आज श्रद्धा का अभूतपूर्व ज्वार उमड़ पड़ा। कविनगर स्थित रामलीला मैदान में पूज्य संत श्री विजय कौशल जी महाराज की ओजस्वी और रससिक्त वाणी से जब ‘सीता खोज’ से लेकर ‘लंका विजय’ तक के प्रसंगों का प्रवाह आरंभ हुआ, तो उपस्थित जनसमूह भाव-विभोर होकर मानो त्रेतायुग की दिव्यता का साक्षी बन गया। महाराजश्री ने अपनी विशिष्ट व्याख्या-शैली से प्राचीन प्रसंगों को समकालीन जीवन-मूल्यों से जोड़ते हुए अध्यात्म की नव्य चेतना का संचार किया।
*हनुमान का चरित्र: संकल्प और सिद्धि का शिखर*
कथा के प्रथम चरण में महाराजश्री ने हनुमान जी के समुद्र-लंघन की दार्शनिक विवेचना करते हुए कहा कि वे केवल पराक्रम के प्रतीक नहीं, अपितु सेवा, सुमिरन और सामर्थ्य के सजीव आदर्श हैं। अशोक वाटिका में शोक-संतप्त माता जानकी को प्रभु की मुद्रिका सौंपने का प्रसंग जीव और ब्रह्म के मध्य अटूट विश्वास का सेतु है। उन्होंने रेखांकित किया कि हनुमान जी की विनयशीलता उनके बल से भी अधिक विराट है—जिसने लंका के स्वर्णिम अहंकार को भस्म कर दिया।
*धर्म-युद्ध और अधर्म का उन्मूलन: लंका विजय*
आगे सेतु-निर्माण, विभीषण की शरणागति और रावण-वध के प्रसंगों का सशक्त वर्णन करते हुए महाराजश्री ने स्पष्ट किया कि यह विजय केवल युद्ध का परिणाम नहीं, बल्कि काम, क्रोध और लोभ जैसी आसुरी प्रवृत्तियों पर सात्विकता की निर्णायक जीत है। विभीषण के माध्यम से यह संदेश उभरा कि जब व्यक्ति कुल, स्वार्थ और भय से ऊपर उठकर धर्म का आलिंगन करता है, तब स्वयं ईश्वर उसका पथ प्रशस्त करते हैं। लंका विजय के क्षणों में समूचा पंडाल ‘राजाराजेश्वर राम’ के जयघोष से गुंजायमान हो उठा।
महाराजश्री का आध्यात्मिक पाथेय
महाराजश्री ने कहा कि रामकथा केवल श्रवण का विषय नहीं, आचरण की जीवन-संहिता है। हनुमान जैसी भक्ति, लक्ष्मण जैसा अनुशासन और राम जैसा मर्यादित आचरण अपनाकर ही भीतर के रावण—अहंकार—का वध संभव है। शुद्ध संकल्प और सात्विक वृत्तियाँ हों, तो कोई नकारात्मक शक्ति पराजित नहीं कर सकती।”
पूर्णाहुति एवं राज्याभिषेक
आयोजकों ने अवगत कराया कि कल इस ज्ञान-यज्ञ का अंतिम एवं सर्वाधिक प्रतीक्षित दिवस है, जिसमें प्रभु श्रीराम के भव्य राज्याभिषेक का अलौकिक प्रसंग प्रस्तुत किया जाएगा। व्यापक सहभागिता को देखते हुए कथा अपने निर्धारित समय से एक घंटा पूर्व, अपराह्न 3:00 बजे से आरंभ होगी। आज की कथा का विश्राम महाआरती और सामूहिक संकल्प के साथ हुआ, जिसमें नगर के गणमान्य नागरिकों सहित सहस्रों राम-भक्तों ने सहभागिता की।




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