गुरुवार, 8 जनवरी 2026

मोरारी बापू की नौ दिवसीय राम कथा दिल्ली में 17 जनवरी से,पूर्व राष्ट्रपति की अध्यक्षता में होगा "मानस सनातन धर्म" का आयोजन


यूएनओ मुख्यालय, अमेरिका में भी राम कथा कर चुके हैं मोरारी बापू

                              राज कौशिक

गाजियाबाद। मानस वक्ता मोरारी बापू की 971वीं राम कथा "मानस सनातन धर्म" का आयोजन पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में देश की राजधानी दिल्ली में 17 से 25 जनवरी तक होने जा रहा है। अहिंसा विश्व भारत की तरफ से कथा का विशाल आयोजन प्रगति मैदान स्थित भारत मंडपम में होगा। 

 मोरारी बापू की ये राम कथा होने से पहले ही चर्चाओं में है। उसका कारण है बापू द्वारा कथा से पूर्व ही इसके विषय की घोषणा कर देना। आमतौर पर मोरारी बापू राम कथा के पहले दिन व्यास पीठ से विषय (शीर्षक) की घोषणा करते हैं लेकिन राजधानी दिल्ली कि इस कथा के शीर्षक की घोषणा बापू ने महीनों पहले कर दी थी। चूंकि ये कथा सनातन धर्म पर केंद्रित होगी, इसलिए आज के वातावरण में इस कथा की चर्चा पूरे देश में कुछ ज्यादा ही हो रही है। 

 दरअसल, मोरारी बापू ने जुलाई 2023 में 12 ज्योतिर्लिंग की विशेष राम कथा के थे चौथे पड़ाव पर आंध्र प्रदेश के मल्लिकार्जुन में ये अपील की थी कि जो लोग सनातन धर्म छोड़कर गए हैं, वो वापस लौट आएं। बापू ने कहा था कि अपना सनातन हिंदू धर्म छोड़कर कहीं दूसरी जगह जो लोग चले गए हैं वो लौट आएं, व्यास पीठ उन्हें वापस घर बुला रही है। बापू का ये कथन खूब चर्चित हुआ था। 

 दिल्ली के भारत मंडपम में पहले दिन यानी 17 जनवरी को कथा की शुरुआत शाम चार बजे से होगी। उसके बाद प्रत्येक दिन कथा सुबह दस बजे शुरू होकर दोपहर लगभग डेढ़ बजे तक चलेगी। राम कथा श्रवण करने वाले सभी श्रद्धालुओं के लिए भोजन प्रसाद की व्यवस्था भी की गई है।

अब तक 970 राम कथा कर चुके मोरारी बापू अमेरिका में स्थित यूएनओ मुख्यालय में राम कथा करने वाले विश्व के पहले राम कथा वक्ता हैं। ये अति महत्वपूर्ण राम कथा जुलाई 2024 में हुई थी। अक्टूबर-नवंबर 2025 में रामवन गमन पथ पर की गई मोरारी बापू की राम यात्रा कथा भी चर्चाओं में रही है। वनवास जी दौरान चित्रकूट से रामेश्वरम तक भगवान राम जिस पथ पर चले थे, उसके अलग-अलग पड़ावों पर 9 दिन ये कथा हुई। रामेश्वरम से श्रीलंका और श्रीलंका से अयोध्या जाकर राम कथा ने विराम लिया था। 

 सत्य, प्रेम और करुणा को ईश्वर का स्वरूप मानने वाले मोरारी बापू व्यास पीठ से अकसर कहते हैं कि दूसरों को सुधारने के बजाय हमें दूसरों को स्वीकार करने की आदत डालनी चाहिए। बापू ये भी कहते हैं कि हम राम का नाम तो लेते हैं मगर राम का काम नहीं करते। भगवान राम ने किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं किया और मानव, पशु व राक्षस सभी को स्वीकार किया। भगवान राम ने सेतु की स्थापना कर जोड़ने का संदेश दिया मगर हम जोड़ने के बजाय तोड़ने के काम ज्यादा करते हैं। बापू ये भी कहते हैं कि संघर्ष से पहले समनव्य के सभी प्रयास किए जाने चाहिए। 

 मोरारी बापू की मोक्ष को लेकर भी अलग ही धारणा है। वो कहते हैं कि ईर्ष्या, द्वेष और निंदा से मुक्त हो जाना ही मोक्ष है। उल्लेखनीय है कि गाजियाबाद में लगभग साढ़े तीन दशक पूर्व मई 1990 में घंटाघर रामलीला मैदान में मोरारी बापू की राम कथा हुई थी। उसके बाद फरवरी 2016 में हिंदी भवन में हुए कवि सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में मोरारी बापू पधारे थे। उनकी तरफ से गाजियाबाद के शायर मासूम गाजियाबादी और जमील हापुड़ी का नागरिक अभिनंदन करते हुए उन्हें एक-एक लाख रुपए की सम्मान राशि भी दी गई थी।

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