रविवार, 25 जनवरी 2026

गुरु ही वह सेतु हैं, जिनके माध्यम से साधक ईश्वर तक पहुंचता है: पूज्य विजय कौशल जी महाराज

 






                              मुकेश गुप्ता

कविनगर रामलीला मैदान में श्री राम कथा का प्रथम दिवस: भक्ति, समर्पण और आत्मचिंतन का दिव्य संगम

राम कथा में पूज्य संत का संदेश

-सच्चा भक्त वही है जो परिस्थितियों से विचलित हुए बिना हर स्थिति में प्रभु की इच्छा को स्वीकार करता है 

-आधुनिक जीवनशैली, मोबाइल फोन और भौतिक आकर्षणों ने बच्चों को संस्कृति और मूल्यों से दूर किया

-चापलूसों की झूठी प्रशंसा सुनकर हम आत्ममुग्ध होकर अपने वास्तविक कर्तव्यों को बिसरा देते हैं

गाजियाबाद। रविवार शाम कविनगर रामलीला मैदान में मंगलयम परिवार को ओर से आयोजित भव्य श्री राम कथा के प्रथम दिवस पर पूज्य विजय कौशल जी महाराज के दिव्य श्रीमुख से कथा का शुभारंभ अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण में हुआ। प्रथम दिन की कथा ने न केवल प्रभु श्री राम के आदर्शों की झलक प्रस्तुत की, बल्कि जीवन के गूढ़ सत्यों, मानवीय मूल्यों और आत्मिक उन्नयन का गहन संदेश भी दिया।

कार्यक्रम का आरंभ श्री गणेश वंदना, मंगलाचरण और गुरु महिमा के भावपूर्ण वर्णन के साथ हुआ। भजनों की मधुर स्वर-लहरियों के बीच महाराज जी ने गुरु के चरणों में समर्पण का भाव जागृत करते हुए कहा कि गुरु ही वह सेतु हैं, जिनके माध्यम से साधक ईश्वर तक पहुंचता है। उन्होंने भाव प्रकट किया कि सभी तीर्थ गुरु के चरणों में समाए हैं और गुरु कृपा के बिना जीवन की नैया पार नहीं लग सकती।

विजय कौशल जी महाराज ने रामकथा के वाचन करते हुए भक्तों को जीवन के परम लक्ष्य के रूप में ईश्वर-प्रेम का भाव और समर्पण को बताया। उन्होने कहा कि जब मनुष्य अपना सर्वस्व प्रभु के चरणों में अर्पित कर देता है, तब उसके जीवन के सभी कष्ट स्वयं समाप्त हो जाते हैं। सच्चा भक्त वही है, जो परिस्थितियों से विचलित हुए बिना हर स्थिति में प्रभु की इच्छा को स्वीकार करता है और उसी में अपनी खुशी खोजता है।

राम नाम की महिमा का का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि राम का नाम ही जीवन का एकमात्र सहारा है, जो मनुष्य की सभी उलझनों को सुलझाने की शक्ति रखता है। संसार में कोई भी समस्या ऐसी नहीं है, जिसका समाधान राम नाम में न हो। उन्होंने भगवान राम के प्रति भक्ति को सांसारिक मोह से कहीं ऊपर बताते हुए संंदेश दिया कि आज का मनुष्य धन, पद और प्रतिष्ठा के पीछे भागते हुए अपने ईश्वर को भूलता जा रहा है।

राम जी और कामदेव जी के प्रसंग का वर्णन

राम कथा में पूज्य विजय कौशल जी महाराज ने भगवान राम और कामदेव जी के प्रसंग का अत्यंत रोचक और शिक्षाप्रद वर्णन किया।

उन्होंने बताया कि अच्छे और महान लोग कभी अभिमान नहीं करते। अहंकार ही वह दोष है, जो मनुष्य को उसके पतन की ओर ले जाता है। वर्तमान सामाजिक प्रवृत्तियों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज कई लोग बड़े पदों पर पहुंचकर चापलूसों की झूठी प्रशंसा सुनकर आत्ममुग्ध हो जाते हैं और अपने वास्तविक कर्तव्यों को भूल जाते हैं। उन्होंने सीख देते हुए कहा कि मनुष्य को सदैव विनम्र रहना चाहिए, क्योंकि विनम्रता ही सच्ची महानता है।

विजय कौशल महाराज ने कहा आज संस्कार, शिक्षा और पारिवारिक मूल्यों को जीवन में अपनाने की आवश्यकता हैं । उन्होंने कहा कि कथा आज के बच्चों में संस्कारों की कमी पर गहरी चिंता जताई।उन्होंने कहा कि आधुनिक जीवनशैली, मोबाइल फोन और भौतिक आकर्षणों ने बच्चों को संस्कृति और मूल्यों से दूर कर दिया है।

महाराज ने माता-पिता से आह्वान किया कि वे बच्चों को केवल भौतिक शिक्षा तक सीमित न रखें, बल्कि उन्हें धर्म, संस्कृति और मयार्दा से भी जोड़ें।

उन्होंने कहा कि रामकथा जैसे पावन आयोजनों के माध्यम से ही परिवार और समाज में नैतिक मूल्यों को पुन: स्थापित किया जा सकता है।

रामकथा और भागवत कथा का आध्यात्मिक महत्व पर विजय कौशल जी महाराज ने कहा कि रामकथा और भागवत कथा सुनना कोई साधारण कार्य नहीं, बल्कि यह जन्म-जन्मांतर के पुण्य से प्राप्त होने वाला पवित्र अवसर है। रामकथा आत्मा का शुद्धिकरण करती है, मन को स्थिर करती है और जीवन को सही दिशा प्रदान करती है। जो व्यक्ति नियमित रूप से रामकथा सुनता है, उसके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन निश्चित रूप से आता है। नरसी भगवान की कथा प्रसंग के माध्यम से उन्होंने बताया कि सच्ची भक्ति में भगवान स्वयं अपने भक्त की रक्षा के लिए आगे आते हैं और भक्त का मान बढ़ाते हैं।

राम कथा के प्रथम दिवस में पूरा पंडाल जय श्री राम के उद्घोष और भावपूर्ण भजनों से गुंजायमान रहा।हजारों की संख्या में उपस्थित श्रद्धालु मंत्रमुग्ध होकर महाराज जी की वाणी से रामकथा का रसपान किया। इस दौरान श्रद्धालु भाव-विभोर होकर प्रभु के चरणों में नतमस्तक होते देखे गए।

बता दें 25 जनवरी से कविनगर रामलीला मैदान में शुरु हुई यह राम कथा में एक फरवरी तक प्रतिदिन सांय 4:00 बजे से 7:00 बजे तक पूज्य विजय कौशल जी महाराज के श्रीमुख से प्रभु श्री राम के जीवन आदर्शों का अमृतपान कराया जाएगा। 


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