रिपोर्ट--मुकेश गुप्ता
गाजियाबाद । गाजियाबाद की पूर्व प्रथम महिला महापौर, जनसेवा, सुशासन एवं महिला सशक्तिकरण की सशक्त प्रतीक स्वर्गीय श्रीमती दमयंती गोयल जी की जन्म जयंती के अवसर पर आज उनके निज निवास बी-17, अशोक नगर, गाजियाबाद में भावपूर्ण श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम प्रातः 10:00 बजे से 2:00 बजे तक श्रद्धा, सम्मान एवं स्मरण के वातावरण में सम्पन्न हुआ।
इस अवसर पर स्व. दमयंती गोयल जी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उपस्थित जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, पत्रकारों एवं गणमान्य नागरिकों ने उन्हें नमन किया।
कार्यक्रम में स्व. दमयंती गोयल जी के पति एवं भाजपा महानगर अध्यक्ष मयंक गोयल के पिता श्री महेश गोयल ने भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि,
“दमयंती जी का संपूर्ण जीवन सेवा, त्याग और जनकल्याण को समर्पित रहा। उन्होंने न केवल एक महापौर के रूप में बल्कि एक आदर्श गृहिणी और समाजसेविका के रूप में हर भूमिका को पूरी निष्ठा से निभाया। गाजियाबाद की जनता के प्रति उनका प्रेम और कर्तव्यनिष्ठा ही उनकी सबसे बड़ी पहचान रही। आज भी उनके विचार और संस्कार हमें जनसेवा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं।”
प्रदेश के कैबिनेट मंत्री श्री सुनील शर्मा ने कहा कि “स्व. दमयंती गोयल जी नगर राजनीति में सेवा, संवेदना और सुशासन की जीवंत मिसाल थीं। उन्होंने महिला सशक्तिकरण को केवल नारे तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे धरातल पर उतारने का कार्य किया। उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणापुंज है और गाजियाबाद उनके योगदान को सदैव स्मरण रखेगा।”
भाजपा महानगर अध्यक्ष मयंक गोयल ने कहा कि स्व. दमयंती गोयल जी ने गाजियाबाद को एक नई दिशा और पहचान देने का कार्य किया। उनका जीवन महिलाओं के लिए प्रेरणा और जनप्रतिनिधियों के लिए आदर्श है।
गाजियाबाद सांसद अतुल गर्ग ने कहा कि स्व. दमयंती गोयल जी ने नगर की राजनीति में सेवा, संवेदनशीलता और सुशासन की मजबूत नींव रखी। उनका योगदान गाजियाबाद के विकास इतिहास में सदैव स्मरणीय रहेगा।
विधायक दिनेश गोयल ने कहा कि स्व. दमयंती गोयल जी का सार्वजनिक जीवन ईमानदारी, पारदर्शिता और जनहित को समर्पित रहा। उन्होंने महिलाओं को सामाजिक एवं राजनीतिक रूप से सशक्त करने की दिशा में उल्लेखनीय कार्य किया।
वरिष्ठ भाजपा नेता अशोक गोयल ने कहा कि स्व. दमयंती गोयल जी का व्यक्तित्व सौम्यता और दृढ़ नेतृत्व का अद्भुत संगम था, जिससे उन्होंने जनता के हृदय में स्थायी स्थान बनाया।
समाजसेवी ललित जायसवाल ने कहा कि स्व. दमयंती गोयल जी का जीवन समाज के कमजोर एवं वंचित वर्ग के उत्थान के लिए समर्पित रहा, जिसे गाजियाबाद कभी नहीं भूल सकता।
वरिष्ठ नेता बलदेव राज शर्मा ने कहा कि स्व. दमयंती गोयल जी का कार्यकाल पारदर्शिता, संवेदनशीलता और विकासपरक सोच का उदाहरण रहा, जिसे नगरवासी आज भी सम्मान के साथ याद करते हैं।
जगदीश साधना ने कहा कि स्व. दमयंती गोयल जी का व्यक्तित्व सादगी, दृढ़ इच्छाशक्ति और सेवा भाव से ओत-प्रोत था, जिसने नगर के हर वर्ग को प्रभावित किया।
विजय मोहन ने कहा कि नगर विकास में उनके द्वारा किए गए कार्य आज भी गाजियाबाद की प्रगति में दिखाई देते हैं और आने वाली पीढ़ियों को दिशा देते रहेंगे।
पूर्व महापौर आशु वर्मा ने कहा कि स्व. दमयंती गोयल जी ने जनप्रतिनिधि की भूमिका को सेवा और संवेदनशीलता से जोड़ा, जो आज भी प्रेरणास्रोत है।
सरदार एस.पी. सिंह ने कहा कि स्व. दमयंती गोयल जी का जीवन मूल्य, मर्यादा और जनकल्याण का प्रतीक रहा, जिसे गाजियाबाद कभी भुला नहीं सकता।
कवयित्री अंजू जैन ने पूर्व महापौर दमयंती गोयल को श्रद्धांजलि अर्पित की--
अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कवयित्री एवं समाज सेविका अंजू जैन ने गाजियाबाद की प्रथम महिला महापौर, गाजियाबाद शहर में अनेकों विकास के कार्य कराने वाली, पार्टी कार्यकर्ताओं का सम्मान करने वाली, और गाजियाबाद महानगर के भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष मयंक गोयल की पूज्य माता स्वर्गीय श्रीमती दमयंती गोयल की जन्म जयंती के अवसर पर उनके निवास पर जाकर चित्र पर पुष्प अर्पित करके श्रद्धांजलि अर्पित की और आशा व्यक्त की कि महानगर अध्यक्ष मयंक गोयल पार्टी और समाज के लिए उत्तम कार्य करते रहेंगे।
श्रद्धांजलि अर्पित करने वालों में प्रमुख रूप से विजय मोहन, पत्रकार अशोक ओझा, पत्रकार सलामत मियां, पत्रकार अजय शर्मा, मुनीन्द्र सिसौदिया, संजयकांत शर्मा, प्रदीप चौधरी, रुचि गर्ग, अवधेश गर्ग, रनीता सिंह, इंदु जौहरी, रिचा भदोरिया, अनीता शर्मा, अमृता सिंह, सचिन डेढ़ा, साहब सिंह सिरोही, बी.के. हनुमान, वी.के. अग्रवाल, प्रदीप चौहान, संदीप पाल, नीरज गोयल, नीरज त्यागी, दिनेश शर्मा, गौरव चोपड़ा, वेद प्रकाश जाटव, संदीप वर्मा, विपिन चौधरी, विमला रावत, विनीत शर्मा सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का समापन स्व. दमयंती गोयल जी के आदर्शों को आत्मसात करने एवं उनके दिखाए जनसेवा के मार्ग पर चलने के संकल्प के साथ किया गया।












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