मंगलवार, 6 जनवरी 2026

लोक शिक्षण अभियान ट्रस्ट ने महिला सशक्तिकरण दिवस” के रुप में मनाया सावित्री बाई फूले का जन्मदिन




रिपोर्ट-मुकेश गुप्ता

  गाजियाबाद । लोक शिक्षण अभियान ट्रस्ट द्वारा ज्ञानपीठ केन्द्र 1, स्वरुप पार्क जी0 टी0 रोड साहिबाबाद के प्रांगण में शनिवार को सामाजिक क्रान्ति की अग्रदूत विलक्षण प्रतिभावान, अज्ञान, अन्याय, शोषण को जडमूल से ख़त्म करने के लिए प्रतिवद्ध, शिक्षा की मशाल जलाने वाली, मूर्धन्य कवित्री, प्रथम शिक्षिका सावित्री बाई फूले का जन्म दिन “महिला सशक्तिकरण दिवस” के रूप में आयोजित किया गया, कार्यक्रम की अध्यक्षता शिक्षिका डा0 सरोज यादव ने, संचालन श्रमिक नेता अनिल मिश्र ने किया, लोक शिक्षण अभियान ट्रस्ट के संस्थापक / अध्यक्ष, समाजवादी चिन्तक राम दुलार यादव मुख्य वक्ता के रूप में कार्यक्रम में शामिल रहे, यह कार्यक्रम समाजवादी पार्टी के महानगर अध्यक्ष वीरेन्द्र यादव एडवोकेट के नेतृत्व में आयोजित किया गया, सभी कार्यक्रम में शामिल भाइयों और बहनों ने सावित्री बाई फूले जी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन करते हुए उनके प्रेरणादायक विचार पर चलने तथा प्रचारित, प्रसारित करने का संकल्प लिया, शिक्षा के क्षेत्र में उनके अमूल्य योगदान की सराहना की, कार्यक्रम को राम प्यारे यादव, जगन्नाथ प्रसाद, कैलाश चन्द्र ने भी संबोधित किया, राजेन्द्र सिंह, हुकुम सिंह  ने देश-प्रेम और पाखंड विरोधी गीत सुना सभी को आत्मविभोर कर दिया, समाज सेविका फूलमती यादव ने दो दर्जन से अधिक महिलाओं को इस अवसर पर गर्म शाल, कम्बल भेंटकर सम्मानित किया, इंजी0 धीरेन्द्र यादव ने समारोह में शामिल सभी लोगों का आभार व्यक्त कर नव वर्ष की बधाई दे सभी को अल्पाहार प्रदान किया, सभी ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए देश, समाज में सद्भाव, भाईचारा, प्रेम और सहयोग के वातावरण को पुष्पित, पल्वित करने का संकल्प लिया।

           कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शिक्षाविद डा0 सरोज यादव ने कहा कि कठिन परिस्थितियों, कम संसधानों और आभाव में महात्मा ज्योति राव फूले के अथक प्रयास से शिक्षा ग्रहण कर, सावित्री बाई फूले ने महिलाओं में शिक्षा की अलख जगाने, रुढ़िवाद, पाखंड, शोषण, अन्याय, असमानता, बाल विवाह के विरुद्ध जन-जागरण पैदा किया, 1848 में विद्यालय की स्थापना करना, महिलाओं के लिए क्रन्तिकारी कदम था, उससे पहले महिला शिक्षा के लिए पूरे देश में कोई भी स्कूल नहीं था, उन्होंने सामाजिक कुरीतियों को जडमूल से नष्ट करने के लिए विधवा विवाह का समर्थन किया, तथा परित्यक्त महिलाओं और बच्चों को संरक्षण प्रदान किया, उसी का परिणाम रहा कि दत्तक पुत्र यशवंत को डाक्टर बना समाज में चिकित्सा के प्रसार के लिए भी अनुकरणीय कार्य किया।

           शिक्षाविद समाजवादी विचारक राम दुलार यादव ने श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए कहा कि आज 21वीं शदी में भी हम इन महान क्रांतिकारियों के विचार का भारत नहीं बना पाये, यहाँ राजनैतिक, सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक और सांस्कृतिक विषमता की खांई और गहरी होती जा रही है, धनबल, बाहुबल राजनीति को, धार्मिक पाखंड जातिवाद, सामाजिक, शिक्षा और चिकित्सा आम आदमी की पकड़ से बाहर हो गयी है, झूठ, लूट, शोषण और पाखंड को सफलता का पैमाना मान लिया गया है | भ्रष्टाचार चरम सीमा पर है, कमजोर वर्गों का अहंकारी, सामंतवादी सोच के लोग उत्पीडन कर उनके जीवन से भी खिलवाड़ कर रहे है, 65 लाख बच्चे स्कूल छोड़ चुके है, 81 लाख से अधिक स्कूल गुजरात, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश में बंद हो गये है, वैश्विक रिपोर्ट 2026 देश की कुल संपत्ति का 40% केवल 1% लोगों के पास, 65% पूंजी 10% लोगों के पास, 70 करोड़ भारतीय केवल 3% पूंजी पर गुजर-बसर करने को मजबूर है, यह लोकतंत्र में भयावह, शर्मनाक स्थिति हमें इन महापुरुषों के कृतित्व और व्यक्तित्व से प्रेरणा लेकर ऐसे भारत के निर्माण के लिए काम करना चाहिए जिसमें वंचित, पीड़ित, प्रताडित और हरवर्ग का कमजोर व्यक्ति लाभान्वित हो सके।

             कार्यक्रम में राम दुलार यादव, समाज सेविका फूलमती यादव, सविता, वीरेन्द्र यादव एडवोकेट, ज्योति रजक, अनीता सिंह, डा0 सरोज यादव, वीर सिंह सैन, बैजनाथ रजक, राम प्यारे यादव , इंजी0 धीरेन्द्र यादव, जगन्नाथ प्रसाद, अवधेश मिश्र एडवोकेट, ब्रह्म प्रकाश, कैलाश चन्द, एस0 एन0 जायसवाल, अमृतलाल चौरसिया, रामेश्वर यादव आदि सैकड़ों भाई-बहन शामिल रहे।


                                                                                                                                  


                                                                                                                              

                                                                                                                         

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